चीन रेगिस्तान में क्यों बना रहा ‘सीक्रेट’ एयरबेस ?

By Defence Detective

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Top-down view of a highly classified Chinese military airbase in a desert landscape, featuring hangars, runways, and advanced 6th-generation stealth fighter jets parked on the tarmac.

चीन एक रेगिस्तान में ऐसी एयर टेस्ट फैसिलिटी को तेजी से बड़ा कर रहा है, जो आने वाले सालों में उसकी सबसे जरूरी सैन्य विमान टेस्टिंग फैसिलिटी में शामिल हो सकती है। यह फैसिलटी शिनजियांग के Lop Nur इलाके में स्थित है। इसकी लोकेशन इतनी दूर इलाके में है कि यहां अत्याधुनिक और संवेदनशील सैन्य विमानों की फ्लाइट टेस्ट गतिविधियां आसानी से कम सार्वजनिक निगरानी के साथ की जा सकती हैं।

हाल की सैटेलाइट तस्वीरों में यहां चार बड़े नए हैंगर, नए टैक्सीवे, एक बड़ा गोलाकार पैड और संभावित फ्यूल-स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर दिखाई दिया है। यानी मामला सिर्फ नए शेड बनाने तक सीमित नहीं है। पूरा एयरफील्ड इस तरह डेवलप किया जा रहा है कि यहां एक साथ ज्यादा विमान रखे, तैयार किए और उड़ाए जा सकें।

Lop Nur का विस्तार चीन के एयरोस्पेस-इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े विस्तार का हिस्सा है। इसके अलावा, चीन देश के उत्तर-पूर्व में शेनयांग में मौजूद एक फैसिलटी सेंटर से लगभग 16 किलोमीटर उत्तर में एक नया प्रोडक्शन कॉम्प्लेक्स बना रहा है, जिसके बारे में अनुमान है कि इसमें लगभग 40 लाख वर्ग फुट मैन्युफैक्चरिंग स्पेस होगा।

Lop Nur में क्या बना रहा चीन?

उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरों और विशेषज्ञ विश्लेषण से संकेत मिलता है कि यह मुख्य रूप से flight-test और evaluation facility के रूप में विकसित हो रहा है। इसका मतलब है कि यहां किसी नए विमान को सेना में शामिल करने से पहले उसकी उड़ान, इंजन, एयरोडायनामिक्स, सेंसर, हथियार और दूसरे सिस्टम की जांच की जा सकती है।

  • इस साल फरवरी तक इस फैसिलिटी में लगभग 60,000 वर्ग फीट (5,570 वर्ग मीटर) हैंगर स्पेस और 3,00,000 वर्ग फीट से ज़्यादा अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर जोड़ा गया, जिससे बेस का कुल आकार लगभग दोगुना हो गया।
  • बनाए जा रहे तीन बड़े हैंगर लगभग 80×40 मीटर के बताए गए हैं।
  • इनके अलावा एक और बड़ा हैंगर भी विकसित हो रहा है।
  • ये आकार सामान्य फाइटर जेट के छोटे शेल्टर से काफी बड़े हैं और बड़े आकार के विमान भी इनमें रखे जा सकते हैं।

Lop Nur फैसिलटी में पहले से लगभग 5 किलोमीटर यानी 3.1 मील लंबा रनवे मौजूद था। पिछले कुछ वर्षों में इसके आसपास लगातार निर्माण हुआ है। 2023 में मुख्य एप्रन का विस्तार हुआ और नया बड़ा हैंगर बनाया गया। 2025 में अतिरिक्त हैंगर और दूसरी सुविधाएं जुड़ीं। इसके बाद निर्माण की गति और तेज हो गई।

चीन को इतने बड़े, ‘सीक्रेट’ टेस्ट सेंटर की जरूरत क्यों?

इसकी सबसे बड़ी वजह है—एक साथ कई अत्याधुनिक विमान कार्यक्रमों पर काम। चीन अब सिर्फ J-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान तक सीमित नहीं है।

वह अगली पीढ़ी के ऐसे विमान विकसित कर रहा है जिनमें stealth, लंबी दूरी, advanced sensors, networked warfare और unmanned systems के साथ मिलकर काम करने की क्षमता जैसी तकनीकों पर जोर है। ऐसे विमानों की टेस्टिंग सामान्य सैन्य एयरबेस पर करना जोखिम भरा हो सकता है।

वहां बड़ी संख्या में सैन्यकर्मी, दूसरे विमान और बाहरी गतिविधियां होती हैं। इसके उलट Lop Nur जैसा सुनसान इलाका संवेदनशील परीक्षणों के लिए ज्यादा कंट्रोल्ड माहौल देता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक इस फैसिलिटी का विस्तार चीन को एक ही समय में कई अलग-अलग विमान कार्यक्रमों की टेस्टिंग करने की क्षमता दे सकता है।

रेगिस्तान ही क्यों चुना?

यह इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। Lop Nur शिनजियांग के बेहद कम आबादी वाले और विशाल रेगिस्तानी क्षेत्र में है। यहां बड़े पैमाने पर विमान उड़ाने के लिए खुला एयरस्पेस उपलब्ध है और आसपास घनी आबादी नहीं है। इससे चीन को तीन बड़े फायदे मिलते हैं

पहला—गोपनीयता। नए विमान की शुरुआती उड़ानों को सामान्य एयर ट्रैफिक और आबादी से दूर रखा जा सकता है।

दूसरा—सुरक्षा। किसी प्रायोगिक विमान में दुर्घटना होने पर नागरिक आबादी पर जोखिम अपेक्षाकृत कम रहता है।

तीसरा—टेस्टिंग की आजादी। लंबे और नियंत्रित एयरस्पेस में अलग-अलग ऊंचाई, गति और उड़ान प्रोफाइल पर परीक्षण किए जा सकते हैं।

हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि चीन की गतिविधियां पूरी तरह छिपी हुई हैं। आज commercial satellites लगातार ऐसे क्षेत्रों की तस्वीरें लेते हैं। Lop Nur का विस्तार भी इसी तरह सैटेलाइट इमेजरी से सामने आया है।

Lop Nur में दिखे कौन से अत्याधुनिक विमान?

Lop Nur की अहमियत तब और बढ़ गई जब यहां चीन के दो अत्याधुनिक विमान देखे गए। पहला विमान आम तौर पर J-36 के नाम से जाना जा रहा है। दूसरा विमान अलग-अलग खुले स्रोतों में J-XDS या J-50 जैसे नामों से संदर्भित किया गया है। ध्यान रहे कि ये आधिकारिक चीनी सैन्य नाम होने की पुष्टि नहीं हुई है। इन विमानों को व्यापक रूप से चीन के अगली पीढ़ी के combat-aircraft programmes से जोड़ा जाता है।

खासियतJ-36J-XDS / J-50
पीढ़ीछठी पीढ़ी के विमान के रूप में आकलनछठी पीढ़ी के विमान के रूप में आकलन
विमान का प्रकारNext-Generation Combat AircraftNext-Generation Combat Aircraft
मुख्य भूमिकाAir Superiority + Long-Range Strike की संभावनाAir Superiority / Air Combat की संभावना
क्या यह Combat Aircraft है?हाँ, संभावित रूप से अत्याधुनिक combat aircraftहाँ, संभावित रूप से अत्याधुनिक combat aircraft
निर्माताChengdu Aircraft Corporation (CAC) से जोड़ा जाता हैShenyang Aircraft Corporation (SAC) से जोड़ा जाता है
इंजन3 इंजन दिखाई देते हैं2 इंजन
डिजाइनबड़ा, tailless, diamond/delta-wing configurationछोटा, tailless, lambda-wing configuration
आकारबहुत बड़ा/heavy platformJ-36 से छोटा
Stealthअत्यधिक low-observable design पर जोरअत्यधिक low-observable design पर जोर
संभावित उपयोगलंबी दूरी तक जाकर air dominance, deep strike और high-value targets पर हमलाहवा में दुश्मन के लड़ाकू विमानों से मुकाबला और air superiority
लंबी दूरीबहुत महत्वपूर्ण डिजाइन लक्ष्य माना जाता हैमहत्वपूर्ण, लेकिन J-36 जितनी लंबी-range भूमिका स्पष्ट नहीं
Payloadबड़ा weapons/sensor payload ले जाने की संभावनाअपेक्षाकृत छोटा payload होने की संभावना
Internal Weapons Bayहोने के संकेतहोने के संकेत
Drone/CCA teamingभविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका की संभावनाभविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका की संभावना
वर्तमान स्थितिPrototype / Flight TestingPrototype / Flight Testing
आधिकारिक designation?नहींनहीं

अमेरिकी रक्षा विभाग के आकलन के अनुसार ये कार्यक्रम अभी शुरुआती विकास चरण में हैं और इनके 2035 के आसपास operational होने की संभावना जताई गई है। इसलिए इनसे जुड़ी हर जानकारी को अंतिम स्पेसिफिकेशन समझना ठीक नहीं होगा।

लेकिन इन विमानों का Lop Nur जैसे संवेदनशील टेस्ट सेंटर पर दिखाई देना यह जरूर बताता है कि यह स्थान चीन के भविष्य के एयर-कॉम्बैट कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण हो चुका है।

साइट पर निर्माण कार्य अगस्त 2025 के आसपास शुरू हुआ। इसी समय वहां बिना पूंछ वाला एक विमान देखा गया, जिसके बारे में माना जाता है कि वह चीन का J-36 छठी पीढ़ी का फाइटर जेट है। इसके 17 दिन बाद, उसी साइट पर अगली पीढ़ी का एक और विमान देखा गया, जिसे आमतौर पर J-XDS या J-50 कहा जाता है।
J Michael Dahm, A retired US Navy intelligence officer and senior fellow for aerospace and China studies at the Mitchell Institute

नए टैक्सीवे और गोलाकार पैड का मतलब?

एयरबेस में सिर्फ हैंगर बढ़ाना ही महत्वपूर्ण नहीं है। टैक्सीवे भी बेहद अहम हैं।

नया टैक्सीवे विमान को रनवे से एप्रन और हैंगर क्षेत्र तक ले जाने की प्रक्रिया को आसान बनाता है। इससे हर विमान को रनवे पर अनावश्यक रूप से पीछे जाकर मुड़ने की जरूरत कम होती है और उड़ानों की गति बढ़ सकती है।

सैटेलाइट तस्वीरों में उत्तर की तरफ लगभग 400 फीट व्यास का गोलाकार पैड भी दिखाई दिया है। विशेषज्ञ इसे संभावित engine-run या aircraft turnaround area मानते हैं। हालांकि इसकी वास्तविक भूमिका की चीन ने पुष्टि नहीं की है।

अगर संभावित फ्यूल स्टोर स्ट्रक्चर भी पूरा होता है तो लंबे समय तक ज्यादा संख्या में परीक्षण उड़ानें संचालित करना आसान हो सकता है।

यानी चीन यहां सिर्फ विमान रखने की जगह नहीं बना रहा, बल्कि एक ऐसा पूरा इकोसिस्टम तैयार कर रहा है जिसमें विमान को हैंगर से निकालने, तैयार करने, ईंधन भरने, इंजन टेस्ट करने, उड़ाने और वापस लाने की प्रक्रिया ज्यादा तेज हो सके।

क्या यहां H-20 स्टील्थ बॉम्बर भी आ सकता है?

यह सवाल इस पूरे विस्तार को और दिलचस्प बनाता है। चीन के बहुचर्चित H-20 stealth strategic bomber को लेकर सालों से अटकलें चल रही हैं। लेकिन चीन ने अभी तक इस विमान को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं किया है और इसकी आधिकारिक तस्वीर या विस्तृत स्पेसिफिकेशन भी उपलब्ध नहीं हैं। नए बड़े हैंगरों के आकार को देखते हुए कुछ विश्लेषकों ने संभावना जताई है कि भविष्य में यहां H-20 जैसे बड़े विमान की टेस्टिंग हो सकती है।

खासियतH-20
देशचीन
प्रकारStealth Strategic Bomber
पीढ़ीNext-Generation / संभावित 6th-generation strategic bomber
मुख्य भूमिकाLong-Range Strategic Strike
डिजाइनFlying-Wing / Tailless
StealthRadar से बचने के लिए Low-Observable डिजाइन
इंजन4 इंजन होने का व्यापक अनुमान
रेंज7,500+ किमी होने का अनुमान, आधिकारिक आंकड़ा नहीं
Combat Radiusसार्वजनिक रूप से पुष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं
हथियारInternal Weapons Bay में मिसाइल/बम ले जाने की संभावना
परमाणु क्षमताNuclear-capable होने की संभावना
Conventional Strikeलंबी दूरी के conventional attacks के लिए भी संभावित
हथियारों की प्रकृतिLong-range cruise missiles और precision-guided weapons ले जाने की संभावना
Air-to-Air क्षमताप्राथमिक भूमिका नहीं; मुख्य फोकस strategic strike
मानवरहित teamingभविष्य में drones/CCA के साथ networked operations की संभावना
लक्षित भूमिकाचीन की long-range strategic bomber capability को मजबूत करना
स्थितिDevelopment/Testing; चीन ने विस्तृत आधिकारिक specifications सार्वजनिक नहीं की हैं

दूसरे देश भी ऐसा करते हैं?

बिल्कुल। यह सिर्फ चीन की रणनीति नहीं है। अमेरिका के पास Edwards Air Force Base इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कैलिफोर्निया के Mojave Desert में स्थित Edwards अमेरिकी सैन्य विमान परीक्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां अमेरिकी Air Force के 412th Test Wing द्वारा विमान, हथियार और दूसरे सिस्टमों की flight और ground testing की जाती है। यहां F-35, F-22, B-21 और अगली पीढ़ी के NGAD family से जुड़े कार्यक्रमों तक की टेस्टिंग होती है।

अमेरिका की Area 51/Groom Lake जैसी अत्यंत गोपनीय परीक्षण सुविधाओं का इतिहास भी इसी अवधारणा से जुड़ा रहा है—दूरदराज का इलाका, सीमित पहुंच और संवेदनशील विमान तकनीक की टेस्टिंग।

भारत में भी इसका एक अलग और कम गोपनीय रूप देखने को मिलता है। DRDO ने कर्नाटक के Chitradurga Aeronautical Test Range (ATR) को स्वदेशी मानवयुक्त और मानवरहित विमानों तथा दूसरे airborne systems की flight testing के लिए विकसित किया है। यह करीब 4,029 एकड़ में फैला है और इसमें रनवे, radar, telemetry और range-control जैसी सुविधाएं हैं।

यानी मूल विचार एक ही हैसंवेदनशील विमान और हथियारों की टेस्टिंग के लिए अलग, नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण तैयार करना।

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