चीन अब युद्ध के मैदान में सिर्फ मिसाइल, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ही काम नहीं कर रहा है। उसकी नजर ऐसे ह्यूमनॉइड रोबोट तैयार करने पर भी है, जो भविष्य में सैनिकों के साथ युद्ध के मैदान में काम कर सकें। इन रोबोटों से शहरी लड़ाई, दुश्मन के इलाके में घुसपैठ, निगरानी, गश्त और खतरनाक मिशन जैसे काम कराने की संभावनाओं पर चीन की सैन्य संस्थाएं गंभीरता से शोध कर रही हैं।
रॉयटर्स की 7 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 100 से ज्यादा चीनी सैन्य खरीद दस्तावेजों, शोध पत्रों, पेटेंट, सरकारी रिकॉर्ड और रक्षा कंपनियों की सामग्री से पता चलता है कि चीन ह्यूमनॉइड रोबोट की सैन्य उपयोगिता पर तेजी से काम कर रहा है। हालांकि, अभी चीन की PLA की किसी ऑपरेशनल यूनिट में हथियारबंद ह्यूमनॉइड रोबोट तैनात होने का कोई प्रमाण नहीं है।
कैसे आई रोबोट आर्मी की बात ?
अगस्त 2026 में बीजिंग में आयोजित World Humanoid Robot Games में ह्यूमनॉइड रोबोट दौड़ते, मुक्केबाजी करते, वुशू करते और डांस करते नजर आए। कुछ रोबोटों ने 100 मीटर दौड़ में बेहद तेज प्रदर्शन किया, हालांकि प्रतियोगिता में कई मशीनें गिरती और खराब होती भी दिखाई दीं।
लेकिन चीन की सेना ने इस प्रदर्शन को केवल मनोरंजन या तकनीकी शो के तौर पर नहीं देखा। प्रतियोगिता खत्म होने के दो दिन बाद PLA के आधिकारिक अखबार ने शोधकर्ताओं से प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक को सैन्य प्रशिक्षण और रोबोटिक ‘combatants’ के इस्तेमाल की दिशा में तेजी से ले जाने का आह्वान किया। यानी वह ह्यूमनॉइड रोबोट को केवल उद्योग या मनोरंजन की तकनीक नहीं, बल्कि भविष्य के सैन्य प्लेटफॉर्म के रूप में देख रहा है।
चीन के पास सबसे बड़ा फायदा क्या है?
चीन को इस क्षेत्र में एक बड़ा फायदा उसकी विशाल घरेलू रोबोट इंडस्ट्री से मिल रहा है। Bank of America Global Research के अनुसार 2025 में दुनिया में भेजे गए ह्यूमनॉइड रोबोटों में करीब 95 फीसदी हिस्सेदारी चीनी निर्माताओं की थी।
इसका मतलब है कि चीन के पास बड़ी संख्या में रोबोट बनाने वाली कंपनियां, सप्लाई चेन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोटर, सेंसर और AI development का मजबूत औद्योगिक आधार मौजूद है। Unitree जैसी कंपनियों के रोबोट दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। यही commercial technology भविष्य में सैन्य प्रयोगों के लिए भी आधार बन सकती है।
PLA ने क्या उठाया कदम ?
चीन की सैन्य रिसर्च में सिर्फ रोबोट का शरीर बनाने पर जोर नहीं है। उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि रोबोट देख सके, रास्ता समझ सके, चीजों को पकड़ और इस्तेमाल कर सके और अलग-अलग परिस्थितियों में निर्णय लेने में सक्षम हो।
इसीलिए चीन perception यानी आसपास की जानकारी समझने, manipulation यानी वस्तुओं को नियंत्रित करने और training data तैयार करने पर भी काम कर रहा है। जून 2026 में PLA ने करीब 3 लाख डॉलर का बजट ऐसे सिस्टम के लिए रखा था, जो ह्यूमनॉइड रोबोटों के लिए कैमरा, रडार और motion data को इकट्ठा और लेबल कर सके। इसमें उन इलाकों से जुड़ा डेटा भी शामिल था, जहां रोबोट चल सकता है।
भविष्य के शहरी युद्ध का क्या है मॉडल ?
चीन की सैन्य रिसर्च में भविष्य के शहरी युद्ध का एक दिलचस्प मॉडल भी सामने आया है। 2025 में National University of Defense Technology (NUDT) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे assault force का मॉडल तैयार किया जिसमें छह combat robots शामिल थे। इनमें ह्यूमनॉइड रोबोट, रोबोट डॉग और unmanned ground vehicles शामिल हो सकते हैं।
इन रोबोटों को दो assault teams के साथ मिलकर दुश्मन के कब्जे वाली इमारत को फ्लोर-बाय-फ्लोर और कमरे-दर-कमरे साफ करने की भूमिका में देखा गया।
इस अध्ययन में जिस तकनीक की कल्पना की गई थी, वह अगले 5 से 10 साल में उपलब्ध हो सकती है। हालांकि अध्ययन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन रोबोटों के पास कौन से हथियार होंगे, कब उन्हें गोली चलाने की अनुमति होगी या नागरिकों और लड़ाकों के बीच अंतर कैसे किया जाएगा।
यानी चीन की सोच अभी एक अकेले ‘रोबोट सैनिक’ की नहीं, बल्कि इंसानों और अलग-अलग तरह के unmanned systems की मिली-जुली टीम की है।
चीन की सैन्य रिसर्च में रोबोटों को दुश्मन के इलाके में घुसाने की संभावना भी दिखाई देती है। 2025 में NUDT की एक प्रतियोगिता में ‘enemy lines के पीछे infiltration’ जैसा मिशन रखा गया था। इसमें रोबोट को किसी इलाके में जाकर उसका नक्शा तैयार करना और लक्ष्यों की पहचान करनी थी।
NORINCO का Fuxi क्या है ?
2026 तक यह काम विश्वविद्यालयों और सैन्य शोध संस्थानों से निकलकर चीन की रक्षा कंपनियों तक पहुंच गया है। सरकारी रक्षा कंपनी NORINCO ने Fuxi नाम का एक full-size humanoid robot विकसित किया है। कंपनी की अगस्त 2026 की सामग्री के अनुसार इसे sentry duty, हर मौसम में reconnaissance, intelligent patrol और खतरनाक कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
Fuxi को teleoperation system से भी जोड़ा जा सकता है। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर कोई इंसान दूर बैठकर रोबोट को नियंत्रित कर सकता है।
यह व्यवस्था फिलहाल बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि पूरी तरह autonomous रोबोट के लिए युद्ध के बीच हर स्थिति का सही फैसला लेना अभी बड़ी तकनीकी समस्या है। इंसान को control में रखकर जोखिम वाले इलाके में रोबोट भेजना फिलहाल ज्यादा व्यावहारिक रास्ता हो सकता है।
असली बदलाव क्या होगा ?
चीन की मौजूदा दिशा को देखते हुए भविष्य का युद्ध शायद इंसानों की जगह पूरी तरह रोबोटों का युद्ध नहीं होगा। ज्यादा संभावित तस्वीर मानव सैनिकों के साथ AI, ड्रोन, रोबोट डॉग, unmanned vehicles और ह्यूमनॉइड रोबोटों की संयुक्त टीम की है।
चीन इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि वह केवल रोबोट का शरीर नहीं बना रहा, बल्कि उसके लिए sensor data, AI perception, remote control और battlefield training का पूरा ecosystem तैयार करने की कोशिश कर रहा है।
किन देशों में हो रही है ऐसी तैयारी?
अमेरिका भी इसमें पीछे नहीं है। अमेरिकी सेना ने militarized humanoid capabilities विकसित करने के लिए प्रतियोगिता शुरू की है। संभावित भूमिकाओं में reconnaissance, security, obstacle clearing, hazardous-material operations और urban terrain में offensive तथा defensive missions शामिल हैं।
अमेरिका की खासियत यह है कि उसके पास AI, सैन्य robotics और युद्धक्षेत्र के वास्तविक डेटा का विशाल अनुभव है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सेना ने यूक्रेन में दो robots भेजे हैं, जो frontline reconnaissance में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। लेकिन humanoid manufacturing scale में अमेरिका चीन से पीछे है।
दक्षिण कोरिया —
दक्षिण कोरिया ने जुलाई 2026 में एक महत्वपूर्ण प्रयोग किया। उसकी नौसेना ने KAIST की टीम द्वारा विकसित Pibot नामक humanoid robot को जहाज के bridge पर helmsman यानी चालक की भूमिका में टेस्ट किया। रोबोट ने संकरे पानी, खराब मौसम और रात के समय steering commands को सफलतापूर्वक execute किया।
ह्यूमनॉइड रोबोट की सबसे बड़ी खूबियां
| क्षमता | युद्ध में संभावित फायदा |
| दो पैर | इंसानों के लिए बने रास्तों पर चल सकता है |
| दो हाथ | दरवाजा, उपकरण और सामान संभाल सकता है |
| सेंसर | आसपास का वातावरण समझने में मदद |
| AI | लक्ष्य और रास्ते की पहचान में मदद |
| Teleoperation | इंसान दूर बैठकर नियंत्रण कर सकता है |
| मानव जैसी बनावट | मौजूदा सैन्य/शहरी infrastructure में काम करने की संभावना |
| जोखिम से बचाव | खतरनाक इलाके में इंसान की जगह भेजा जा सकता है |
लेकिन सबसे बड़ी खामियां क्या हैं?
| समस्या | क्यों गंभीर है |
| Battery life | लगातार लंबे मिशन में ऊर्जा की समस्या |
| Reliability | युद्धक्षेत्र में छोटी खराबी भी मिशन रोक सकती है |
| Balance | मलबे और असमान जमीन पर गिरने का खतरा |
| AI limitations | अप्रत्याशित परिस्थितियों में गलत निर्णय संभव |
| लागत | बड़े पैमाने पर तैनाती महंगी हो सकती है |
| Communication | जाम होने पर remote-controlled robot बेकार हो सकता है |
| Cyber attack | दुश्मन सिस्टम को hack या disrupt कर सकता है |
| पहचान की समस्या | नागरिक और सैनिक में सही फर्क करना कठिन |








