नीदरलैंड्स की चापलूसी काम नहीं आयी
बेचारा पाकिस्तान दुनिया भर में अपने चावल बेचने के चक्कर में मारा-मारा फिरता है, लेकिन हर बार वो भारत से मात खा जाता है। अब देखिये ना, पाकिस्तान ने नीदरलैंड्स की अपनी एंबेसी में राइस फेस्टिवल का आयोजन किया था। तरह-तरह के पकवान बनाये गये थे और नीदरलैंड्स के डिप्लोमैट्स, नेताओं और कारोबारियों को दावत दी गई थी और फिर उनसे पाकिस्तान के चावल की ख़ूब तारीफ करवाई गई। लेकिन अफसोस ये कि नीदरलैंड्स ने पिछले ही महीने पाकिस्तान के चावल की खेप को रिजेक्ट किया है। 19 जून को यूरोपियन यूनियन के Rapid Alert System for Food and Feed Portal पर एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है जिसमें पाकिस्तानी बासमती चावल के कंसाइनमेंट को रिजेक्ट करने की बात लिखी हुई है। इस नोटिफिकेशन में बताया गया है कि पाकिस्तानी चावल में पेस्टिसाइड की मात्रा बहुत ज़्यादा थी और वो खाने लायक नहीं था।
पाकिस्तानी चावल में खतरनाक पेस्टीसाइड्स
अब कहा जा रहा है कि वो चावल पाकिस्तान बांग्लादेश को भेजने की तैयारी में है। 30 जून को ही ख़बर आई है कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश को चावल, दाल और खाद भेजने का ऑफर दिया है।अब बांग्लादेश पाकिस्तान का ये ज़हर ख़रीदता है या नहीं ये तो नहीं पता लेकिन नीदरलैंड्स का रीजेक्शन पाकिस्तानी चावल पर बहुत बड़ा दाग है। और दाग केवल इस बार के रिजेक्शन से नहीं है बल्कि इससे पहले भी कई बार यूरोपीय देश पाकिस्तानी चावल पर सवाल उठा चुके हैं, उन्हें वापस कर चुके हैं। देखिये, ये पिछले साल की ख़बर है। तब भी EU ने पाकिस्तानी चावल को लेकर चेतावनी जारी की थी। इसी ख़बर में ये भी लिखा हुआ है कि EU अब तक पाकिस्तान से इम्पोर्ट किये जाने वाले चावल को लेकर 100 चेतावनियां जारी कर चुका है। यहां तक कि पिछले साल सितंबर में नीदरलैंड्स ने ही पाकिस्तान के बासमती चावल में Aflatoxine B1 होने पर चावल को रिजेक्ट कर दिया था। Aflatoxine B1 फंगल इन्फेक्शन से होता है और ये कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है।और अब इस बार फिर नीदरलैंड्स ने ही पाकिस्तान के चावल, बासमती चावल में पेस्टिसाइड्स की ख़तरनाक मात्रा को पकड़ा है। तो पाकिस्तान के टॉप राइस एक्सपोर्टर बनने के सपने पर ये तगड़ी चोट है।
भारत ने किया रेट वाला गेम
पाकिस्तान के लिए वो झटका ही क्या जिसमें भारत शामिल ना हो। अब देखिये- असल ख़बर- ख़बर ये कि पाकिस्तान का एक्सपोर्ट धड़ाम हो गया है। ट्रेड डेफिसिट 39.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है- यानी रिकॉर्ड तोड़। ट्रेड डेफेसिट का ये आंकड़ा इसलिए अलार्मिंग है क्योंकि व्यापार घाटा 22% तक बढ़ गया है। पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले पाकिस्तान का इम्पोर्ट 6% बढ़ गया है और एक्सपोर्ट 6% कम हो गया है। वाह क्या बैलेंस बनाया है पाकिस्तान ने।अब एक्सपोर्ट कम हुआ है तो हर सेक्टर में कम हुआ लेकिन एग्री और फूड एक्सपोर्ट पर इसकी तगड़ी चोट पड़ी है। केवल 2 बिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट की कमी सिर्फ इसी सेक्टर में आई है। इसमें चावल भी शामिल है। अब पाकिस्तान ने इसमें भारत का एंगल निकाल लिया है। पाकिस्तान कह रहा है कि भारत के चावल के दाम की वजह से पाकिस्तानी चावल मार्केट में पिट गया है। नेशनल असेंबली के पैनल को बताया गया है कि भारत का चावल 1100 डॉलर प्रति टन के हिसाब से बिक रहा है जबकि पाकिस्तानी चावल 1300 डॉलर। यानी 200 डॉलर प्रति टन का अंतर- और इसी अंतर की वजह से दुनिया पाकिस्तानी चावल नहीं खरीद रही है।बात तो सही है भई। अगर एक ही क्वालिटी के चावल के दाम में 200 डॉलर टन का अंतर रहेगा तो कोई महंगा चावल क्यों खरीदेगा।
भारत है चावल का टॉप एक्सपोर्टर
अब सवाल उठता है कि पाकिस्तान इस पर रो क्यों रहा है- भारत के चावल से टक्कर लेनी है तो दाम कम कर दो- लेकिन पाकिस्तान इसके लिए भी तैयार नहीं है। Arete Market Intelligence ने 6 जुलाई को EU के Rice Import का एक डेटा शेयर किया है। इसमें बताया गया है कि इस फिनांशियल ईयर में EU ने पाकिस्तान से 122.7 किलो टन चावल मंगवाया जबकि भारत से 172.4 किलो टन। पाकिस्तान से चावल का किया गया इंपोर्ट पिछले साल के मुकाबले 6 परसेंट कम था जबकि भारत से चावल का इंपोर्ट 26% तक बढ़ गया। पाकिस्तान भले कितना भी रो पीट ले लेकिन सच यही है कि लगभग हर साल भारत EU को बासमती राइस एक्सपोर्ट में पाकिस्तान से आगे रहा है। देखिये 2023-24 में जब भारत ने चावल के एक्सपोर्ट पर पाबंदी लगाई हुई थी तब उसने 30.296 किलो टन बासमती का एक्सपोर्ट किया था और उसी दौरान पाकिस्तान ने 177.577 किलो टन का।साल 24-25 में भारत का EU को टोटल बासमती एक्सपोर्ट 137.355 किलो टन था तो पाकिस्तान का 130.723 किलो टन। और इस बार यानी 25-26 में भारत 172.399 किलो टन पर पहुंच चुका है और पाकिस्तान 122.709 किलो टन पर।
भारतीय चावल पर दुनिया का भरोसा
अब इसमें एक बड़ी वजह कीमत तो है ही, साथ-साथ भारतीय चावल पर यूरोप का भरोसा भी है। पाकिस्तान के चावल में जहां लगभग हर साल कोई ना कोई शिकायत आती रहती है, उसे रिजेक्ट किया जाता रहता है, वहीं भारत के चावल में ऐसी शिकायतें बहुत कम आती है। अब बताइये कि यूरोप के राइस इम्पोर्टर्स कम की कीमत में अच्छा चावल खरीदें या फिर महंगे दाम पर घटिया सामान-फैसला मुश्किल तो नहीं है, और यही वजह है कि यूरोप भारतीय चावल को प्राथमिकता दे रहा है। वैसे पाकिस्तान अपने हर फिसड्डीपन में दूसरों को दोष देता फिरता है, जैसे चावल में उसने भारत को दोष दिया, ठीक वैसे ही एक्सपोर्ट गिरने पर अब वो अफगानिस्तान का बॉर्डर बंद होने और ईरान जंग पर ठीकरा फोड़ रहा है।
अब इसमें थोड़ी बहुत सच्चाई भी है दोस्तों। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 2024 में 2.461 बिलियन डॉलर का बायलैट्रल ट्रेड हुआ था। 2025 में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर हमले शुरू कर दिये और कारोबार बंद हो गया। बॉर्डर बंद हो गये। अब पाकिस्तान रो रहा है कि बॉर्डर बंद होने की वजह से उसे 1.4 बिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है।यानी तुम अफगानिस्तान पर हमले भी करते रहो, उनके आम शहरियों को मारते भी रहो, और अफगानिस्तान तुम्हारे साथ कारोबार भी करता रहे, तुम्हारा सामान भी खरीदता रहे। गजब का घटियापन है। तो एक तरफ तो भारत की वजह से उसे चावल एक्सपोर्ट में मात खानी पड़ी है तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान की वजह से उसे भारी ट्रेड डेफेसिट उठाना पड़ रहा है, यानी भारत और पाकिस्तान ने ट्रेड के मामले में भी पाकिस्तान का ढोलक बना दिया है।








