- बिना शोरगुल के पाकिस्तानी एयरफोर्स पहुंची सऊदी अरब
- सऊदी में कुल 13 हजार पाकिस्तानी जवानों की डिप्लॉयमेंट
- पाक एयरफोर्स ने 1 स्क्वॉड्रन (18-20) फाइटर जेट्स सऊदी भेजे
- पाकिस्तानी मीडिया को रिपोर्ट करने से मना किया गया
सऊदी के लिए ईरान को पाकिस्तान ने दिया धोखा
एक तरफ पाकिस्तान इस्लामाबाद में ईरान के साथ अमेरिका के बीच पीस टॉक का मीडियेटर बना हुआ है। तो दूसरी तरफ पाकिस्तान ने ईरान पर हमले के लिए अपनी फौज सउदी अरब भेज दी है। बिल्कुल सही सुन रहे हैं आप। सउदी अरब ने एलान कर दिया है कि पाकिस्तान की फोर्स किंग अब्दुल अजीज एयर बेस पर पहुंच चुकी है। इस पाकिस्तानी फोर्स में कई फाइटर जेट्स, सपोर्ट एयरक्राफ्ट, इक्विपमेंट्स और मिलिट्री पर्सनल्स हैं। इसकी डिटेल खुद साउदी अरब की डिफेंस मिनिस्ट्री ने ट्वीट करके दी है।
सऊदी डिफेंस मिनिस्ट्री का ऐलान
रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि दोनों मित्र देशों के बीच हस्ताक्षरित संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत, पूर्वी क्षेत्र में स्थित किंग अब्दुलअज़ीज़ एयर बेस पर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ पाकिस्तान से एक सैन्य टुकड़ी का आगमन हुआ है।इस पाकिस्तानी टुकड़ी में पाकिस्तानी वायु सेना के लड़ाकू और सहायक विमान शामिल हैं। इसका उद्देश्य संयुक्त सैन्य समन्वय को बढ़ाना, दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच परिचालन तत्परता के स्तर को ऊपर उठाना, और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय, दोनों स्तरों पर सुरक्षा एवं स्थिरता को समर्थन प्रदान करना है।
साउदी अरब की डिफेंस मिनिस्ट्री के इस ट्वीट ने इस्लामाबाद में हो रही पीस टॉक का मेमेंटम ही चेंज कर दिया है। दुनिया भर की मीडिया का ध्यान इस्लामाबाद से हट कर साउदी अरब की तरफ चला गया है।चाइनीज़ मीडिया Xinuha ने लिखा- Saudi Arabia announces arrival of Pakistani military force…ब्लूमबर्ग ने भी हेडलाइन बनाई कि पाकिस्तान ने समझौते के तहत अपनी सेना साउदी अरब भेज दी है।
ईरान के साथ पाकिस्तान ने किया डबल गेम
अब सवाल उठता है कि एक तरफ लड़ाई ख़त्म कराने के लिए बातचीत की मध्यस्थता और दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट में अपनी एयरफोर्स भेजना- ये दो विरोधाभाषी बातें नहीं हैं?बिल्कुल हैं। वजह साफ है। इस जंग में भले ही साउदी अरब ने अब तक अपनी फौज का इस्तेमाल नहीं किया हो लेकिन वो ईरान के अगेंस्ट ही खड़ा है। साउदी अरब में अमेरिकी मिलिट्री बेसेज़ मौजूद हैं। जिन्हें ईरान ने इस लड़ाई के दौरान कई बार निशाना बनाया है। और तो और ईरान ने साउदी अरब के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी हमले किये हैं। यानी साउदी अरब को ख़तरा ईरान से ही है। जब से ईरान ने साउदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल अटैक शुरू किये थे तब से लगातार पाकिस्तान इन हमलों की निंदा करने के साथ-साथ ये बता रहा है कि वो साउदी अरब के साथ खड़ा है।
पाकिस्तान का सऊदी अरब को समर्थन
देखिये पाकिस्तानी प्राइम मिनिस्टर शाहबाज़ शरीफ ने 8 अप्रैल को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को फोन किया था और ईरान के हमलों की निंदा की थी। कहा था कि पाकिस्तान साउदी अरब के साथ है।तीन दिन बाद ही शाहबाज़ साउदी अरब पहुंच गये। जेद्दा में उन्होंने MBS से मुलाकात की। ईरान के हमलों की निंदा की…25 मार्च को उन्होंने फिर एक बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान साउदी अरब के साथ खड़ा है…इस बीच पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने भी साउदी अरब का दौरा किया था। 7 मार्च को रियाद में मुनीर की साउदी डिफेंस मिनिस्टर प्रिंस खालिद बिन सलमान से मुलाकात हुई थी।इन सारी मुलाकातों और बयानों की वजह थी पाकिस्तान और साउदी अरब के बीच हुआ डिफेंस पैक्ट।
क्या है सऊदी अरब-पाकिस्तान डिफेंस डील ?
इस पैक्ट के मुताबिक साउदी अरब पर हुआ हमला पाकिस्तान अपने ऊपर हमले जैसा मानेगा और पाकिस्तान पर हुए हमले को साउदी अरब खुद पर हमला मानेगा। दोनों जंग की सूरत में एक दूसरे को मिलिट्री सपोर्ट करेंगे।लेकिन मिडिल ईस्ट की इस जंग के दौरान ईरान ने साउदी अरब पर जम कर ड्रोन और मिसाइल अटैक किये लेकिन पाकिस्तान ने एक बार भी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की डील को पूरा करने की कोशिश नहीं की और इस बात से साउदी अरब बेहद नाराज़ था। इसके बाद साउदी अरब ने पाकिस्तान पर प्रेशर बनाना शुरू कर दिया। हाल ही में जब UAE ने अपने 2 बिलियन का कर्ज पाकिस्तान से वापस मांग लिया तो ये प्रेशर और बढ़ गया। इसकी दो वजह थी। पहली ये कि UAE के अपना पैसा वापस मांगने पर पाकिस्तान ने ताव दिखाना शुरू कर दिया। कहा 2 नहीं बल्कि वो 3.5 बिलियन डॉलर वापस करेगा और UAE का सारा पुराना हिसाब-किताब क्लियर कर देगा….अब पाकिस्तान ने ये कह तो दिया लेकिन दिक्कत ये है कि 3.5 बिलियन डॉलर वो चुकाएगा कैसे? इसके लिए उसे साउदी अरब की ज़रूरत पड़ेगी।
एयरफोर्स भेजने के बदले सऊदी देगा पाकिस्तान को डॉलर
दूसरी बात ये कि पाकिस्तान खुद साउदी अरब के कर्ज में डूबा हुआ है और अब एक बार फिर वो साउदी अरब के आगे 5 बिलियन डॉलर के लिए कटोरा लिये खड़ा है। और ये ख़बर 11 अप्रैल की ही है। ठीक उसी दिन की जिस दिन इस्लामाबाद में पीस टॉक की पहली बातचीत शुरू हुई। साउदी अरब ने पाकिस्तान को फिनांशियल सपोर्ट देने का भरोसा दिलाया है।अब डॉट्स कनेक्ट कीजिए। साउदी अरब से मिलने जा रहे फंड को पाकिस्तानी एयरफोर्स के साउदी अरब पहुंचने की ख़बर से जोड़ कर देखिये। आपको समझ में आ जाएगा कि पूरा मामला साउदी अरब से हुई स्ट्रैटेजिक और डिफेंस डील से ज़्यादा पैसों का है। तो ये तो पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान पैसों के लिए कुछ भी कर सकता है।तो अब पाकिस्तान ने साउदी अरब में अपनी एयरफोर्स भेज दी है यानी अगर इस्लामाबाद में हो रही पीस डील किसी तरह से डिरेल होती है और अभी या आगे कभी भी जंग फिर से शुरू होती है तो ईरान पर केवल अमेरिका और इज़रायल की एयरफोर्स नहीं बल्कि पाकिस्तान की एयरफोर्स भी हमला करेगी, ये तय हो चुका है।
सऊदी अरब पर ईरानी हमले
अब ये समझिये कि जिस साउदी अरब में अमेरिका के 5 से अधिक मिलिट्री बेसेज़ हैं। पूरा एयर डिफेंस सिस्टम, एयरफोर्स और दूसरे मिलिट्री असेट्स हैं, उस साउदी अरब को पाकिस्तान की एयरफोर्स की क्या ज़रूरत है? असल में करीब 40 दिनों तक चली इस लड़ाई में शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरा हो जिस दिन ईरान के ड्रोन्स और मिसाइलों ने अरब देशों को निशाना ना बनाया हो…ईरान के हमलों के दौरान अमेरिकी एयर डिफेंस के अभेद्य होने का भ्रम भी पूरी तरह से टूट गया। ईरान ने इन खाड़ी देशों में अच्छा-खासा नुकसान पहुंचाया है।दूसरी बात ये कि अरब देशों को जंग के दौरान ये भी अहसास हुआ कि अमेरिका का ज़्यादा फोकस अरब देशों के बजाय इज़रायल को बचाने पर था। उन्हें ये लगा कि अमेरिका ने उन्हें अकेला छोड़ दिया। और ये बात कोई दबी-छिपी नहीं है। साउदी एनालिस्ट खुल कर अमेरिका पर ये आरोप लगा रहे हैं।
सऊदी अरब है अमेरिका से बेहद नाराज
साउदी अरब के डिफेंस एनालिस्ट मुबारक अल अती ने अमेरिका से खुल कर नाराज़गी ज़ाहिर की है । एक वीडियो जो रेज़ा जैनब नाम के एक एक्स अकाउंट से पोस्ट किया गया है…उसमें की जा रही बातचीत तो अरबी में है लेकिन दावा किया जा रहा है कि इसमें मुबारक अल अती अमेरिका पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। रेज़ा ने इस बातचीत का ट्रांसलेशन भी पोस्ट किया है- जिसके मुताबिक मुबारक अल अती कह रहे हैं-‘In-जब हमारी रिफाइनरी पर हमला हुआ, तो हमने अमेरिका से मदद मांगी, लेकिन वे चुप रहे।अब, जब हम ईरान के साथ शांति स्थापित करने और तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो अमेरिका जान-बूझकर इस प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है।वे युद्ध चाहते हैं। अमेरिका एक युद्ध-साम्राज्य है। वह संघर्ष के बिना जीवित नहीं रह सकता। प्रोफेसर डॉक्टर हसन उनाल तुर्की के जियो पॉलिटकल एक्सपर्ट हैं।उन्होंने भी रेज़ा के ट्वीट को रिट्वीट किया है और इसमें उन्होंने भी वही बातें लिखी हैं जो रेज़ा ने लिखी थी
सऊदी के साथ ईरान पर हमला करेगा पाकिस्तान
तो आप आसानी से समझ सकते हैं कि साउदी अरब का किंगडम, साउदी अरब की गर्वमेंट और वहां के लोग अब इस बात को समझ चुके हैं कि अमेरिका उनकी रक्षा नहीं कर सकता। वो केवल युद्ध और अपने फायदे के लिए उनका इस्तेमाल करने के लिए मिडिल ईस्ट में मौजूद है। इसी वजह से साउदी अरब ने पाकिस्तान और यूक्रेन के साथ जबकि UAE ने भारत के साथ डिफेंस पैक्ट किया है।ये तो हुई अमेरिका और खाड़ी देशों की बात लेकिन अभी तो मुद्दा ईरान बनाम पाकिस्तान का है। साउदी अरब में अपनी एयरफोर्स भेजने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि कहीं पाकिस्तान पीस टॉक के नाम पर ईरान की पीठ में छुरा तो नहीं भोंकने वाला है, क्योंकि अगर अब जंग छिड़ेगी और साउदी अरब पर ईरान हमला करेगा तो पाकिस्तान को चाहे-अनचाहे ईरान पर जवाबी हमला करना ही पड़ेगा।








