कोरियाई तनाव: ड्रोन खतरे के बीच K2 युद्धक टैंकों को अपग्रेड करेगा दक्षिण कोरिया, 2.43 बिलियन डॉलर मंजूर  

By Defence Detective

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उत्तर कोरिया द्वारा आए दिन मिसाइल परीक्षणों और धमकियों के बीच दक्षिण कोरिया भी अपनी सैन्य मजबूती को बढ़ाने में जुटा हुआ है।  इसके तहत अपने K2 मुख्य युद्धक टैंकों और Haeseong-II लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलों को अपग्रेड करने का निर्णय लिया है। योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेशन (DAPA) ने अपग्रेडेशन से संबंधति इन प्रोजेक्टों को मंजूरी दे दी है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब उत्तर कोरिया ने K2 जैसे हथियारों को निशाना बनाने के लिए बड़े पैमाने पर ‘लॉइटरिंग म्यूनिशन’ (Loitering munition) बनाने को प्राथमिकता दी है। लॉइटरिंग म्यूनिशन एक प्रकार का आत्मघाती हथियार है। इसे आम भाषा में ‘सुसाइड ड्रोन’ या ‘कामिकेज़ ड्रोन’ भी कहा जाता है। यह दुश्मन के इलाके में जाकर कुछ समय तक लक्ष्य क्षेत्र में मंडराता है। फिर सटीक लक्ष्य मिलने पर उससे सीधे टकराकर विस्फोट के साथ उसे नष्ट कर देता है।

K2 टैंकों की अपग्रेडेशन से कैसे बढ़ेगी क्षमता ?

K2 टैंक को ‘एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम’ के साथ आधुनिक बनाने के लिए 2.43 बिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। इस सिस्टम को एंटी-टैंक मिसाइलों और ड्रोन को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

  • टैंकों में ड्रोन और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) को जाम करने वाले सिस्टम भी लगाए जाएंगे।
  • साथ ही रिमोट-कंट्रोल हथियार स्टेशन भी होंगे, जिससे क्रू बख्तरबंद वाहनों के अंदर से ही निशाना साधकर फायरिंग कर सकेंगे।
  • K2 आधुनिकीकरण कार्यक्रम 2028 से 2046 तक चलेगा।
  • पहले अपग्रेडेड टैंक के 2033 में सेवा में शामिल होने की उम्मीद है।

Haeseong-II के लिए 1.15 बिलियन डॉलर  

DAPA ने Haeseong-II एंटी-शिप मिसाइल को अपग्रेड करने के लिए 1.15 बिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी। इसका मकसद अधिक शक्तिशाली टर्बोफैन इंजन के साथ इसकी स्ट्राइक रेंज को दोगुना करना है।

  • इसके विकास कार्य के 2033 तक पूरा होने की उम्मीद है और बड़े पैमाने पर उत्पादन 2034 में शुरू होने की योजना है।
  • अपग्रेड की गई मिसाइलों को दक्षिण कोरिया के अगली पीढ़ी के KDDX डिस्ट्रॉयर पर तैनात किए जाने की उम्मीद है।
  • एंटी-शिप मिसाइलों की रेंज लगभग 150 से 180 किलोमीटर है, जबकि अपग्रेडेशन से 300 किलोमीटर से ज़्यादा की रेंज तक पहुँचने की उम्मीद है।

बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण ने बढ़ाया तनाव

दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच सुरक्षा गठबंधन है। 17 अगस्त से दक्षिण कोरिया और अमेरिका का सैन्य अभ्यास शुरू होने जा रहा है, जो 27 अगस्त तक चलेगा। इसका उद्देश्य उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु खतरे के विरुद्ध तैयारियों को मजबूत करना है। वहीं इस अभ्यास से पहले एक हफ्ते के भीतर दो बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण करके उत्तर कोरिया ने हालिया तनाव को बढ़ा दिया है।

सैन्य क्षमता में कौन है ताकतवर ?

केवल उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया की सैन्य क्षमताओं का आंकलन किया जाए तो उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों और मिसाइलों के जखीरे के साथ सैन्य रूप से बहुत ज्यादा ताकतवर है। यही वजह है कि वह दक्षिण कोरिया के साथ आए दिन उकसावे वाली कार्रवाई करता रहता है। उत्तर कोरिया के पास अनुमानित रूप से 50 से 60 परमाणु वॉरहेड हैं और वह लगातार बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम विकसित कर रहा है। इसके विपरीत, दक्षिण कोरिया के पास कोई परमाणु शस्त्रागार नहीं है, लेकिन उसे अमेरिका की ‘परमाणु छतरी’ (Nuclear Umbrella) और क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती का रणनीतिक समर्थन प्राप्त है।

क्षमता उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया
Active military personnel13 लाख4.5–5 लाख
Reserve6 लाख + 5.7 करोड़ नहीं, बल्कि 57 लाख Worker/Peasant Red Guard31 लाख के आसपास
कुल aircraft8371,540
Fighter aircraft341242
Attack aircraft11498
Helicopters205827
Attack helicopters20113
Tanks4,8951,831
Navy vessels470 surface vesselsसंख्या कम, लेकिन बहुत आधुनिक fleet
Submarines70लगभग 20+
Nuclear weapons50-60 परमाणु वारहेडनहीं
Ballistic missilesबड़ी/विविध inventoryHyunmoo सहित आधुनिक missile force
मुख्य सहयोगीचीन/रूस से संबंधअमेरिका

क्या है कोरियाई प्रायद्वीप विवाद ?

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया का विवाद द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कोरियाई प्रायद्वीप के विभाजन और 1950–1953 के कोरियाई युद्ध से जुड़ा है। दोनों देशों के बीच तकनीकी रूप से कोई शांति संधि नहीं हुई है, जिसके कारण सीमा पर सैन्य तनाव, उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल परीक्षण तथा राजनीतिक कटुता आज भी बनी हुई है। उत्तर कोरिया, चीन और रूस के साथ मजबूत संबंध रखता है। वहीं दक्षिण कोरिया अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों को मजबूत बनाए हुए है।

मौजूदा दौर का विवाद-तनाव

उत्तर कोरिया आए दिन प्रतिबंधित बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु परीक्षण करते रहते हैं। इसे दक्षिण कोरिया और अमेरिका अपने विरुद्ध खतरा मानते हैं। जबकि उत्तर कोरिया अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और दोनों देशों के संयुक्त सैन्य अभ्यास को अपने खिलाफ सैन्य तैयारी मानता है। वहीं दक्षिण कोरिया और अमेरिका इन्हें deterrence और defensive readiness के लिए जरूरी बताते हैं। सीमा पर लाउडस्पीकर से प्रचार, प्रोपेगेंडा पर्चे भेजने वाले ड्रोन उड़ाने के आरोप और हाल ही में दोनों देशों को जोड़ने वाली सड़कों व रेल संपर्कों को उत्तर कोरिया द्वारा तोड़े जाने से तनाव और बढ़ा है।

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