पाकिस्तानी आतंकवाद
पहलगाम आतंकवादी हमले के एक साल बाद भी हर भारतीय के ज़ख्म ताज़ा हैं। इस हमले ने केवल भारत को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया । 22 अप्रैल 2025 को लश्कर-ए-तैयबा द्वारा किए गए इस हमले में 26 निर्दोषों की धर्म पूछ कर हत्या कर दी गई थी। वॉशिंगटन के कैपिटल हिल में भारतीय दूतावास ने इस हादसे के एक साल पूरे होने पर एक एग्ज़िबीशन का आयोजन किया, जिसका नाम ‘ह्यूमन कॉस्ट ऑफ टेररिज़्म’ था। इस प्रदर्शनी में अमेरिका की रिपब्लिक और डेमोक्रैटिक दोनों ही पार्टियों के मेंमबर्स ने भाग लिया। इस डिजिटल प्रदर्शनी में दुनिया भर में हुए बड़े आतंकवादी हमलों को भी दिखाया गया, जैसे 1993 के मुंबई ब्लास्ट, 2008 के मुंबई टेरर अटैक और 2025 का पहलगाम अटैक। इसके साथ ही, इन हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकवादी संगठनों की पहचान भी की गई है, जिनमें पाकिस्तान से जुड़े कई व्यक्ति और संगठन शामिल हैं, जैसे लश्कर -ए -तैयबा (LeT)।
अमेरिकी सांसद की पाकिस्तान को दो टूक
अमेरिकी सांसद ब्रैड शेरमन ने पाकिस्तान से लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे आतंकी संगठनों पर सख्त कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि यह समूह 2025 के पहलगाम आतंकी हमले से जुड़ा रहा है और इसके खिलाफ ठोस कदम उठाना ज़रूरी है। शेरमन ने कहा कि पहलगाम हमले के हमलावरों की पहचान द रेज़िस्टेंस फ्रंट के रूप में हुई थी, जिसने कथित तौर पर पीड़ितों को धर्म के आधार पर अलग कर के निशाना बनाया था। उन्होंने इस ग्रुप को लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा बताया, जो हमेशा से पाकिस्तान में शरण पाता रहा है। शेरमन ने ज़ोर देकर कहा, “हमें इस क्षण का उपयोग करना चाहिए ताकि पाकिस्तानी सरकार लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अन्य आतंकी समूहों पर शिकंजा कसने के लिए मजबूर हो।” वहीं भारत के अमेरिका में राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि यह कार्यक्रम हमें कुछ अहम बातें याद दिलाता है। उन्होंने कहा, “आतंकवाद मानवता पर एक ऐसा अभिशाप है जो हमारे समाज को नुकसान पहुँचाने के लिए हर संभव कोशिश करता है। दुनिया के सभी देशों को मिलकर और दृढ़ संकल्प के साथ आतंकवाद को हराना होगा।” क्वात्रा ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ़ कर दिया है कि भारत आतंकवाद से निपटने और उसे हराने के अपने अडिग संकल्प पर कायम है।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हुए अमेरिकी कांग्रेस के कई सदस्य
कैपिटल हिल पर आयोजित भारतीय दूतावास की इस प्रदर्शनी को अब तक के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना गया। इसमें अमेरिकी कांग्रेस के दोनों दलों के कुल 19 सांसदों ने भाग लिया। इसके अलावा 60 से अधिक संसदीय कार्यालयों के स्टाफ भी मौजूद रहे। इस आयोजन में हाउस फॉरेन अफेयर्स, इंटेलिजेंस, आर्म्ड सर्विसेज, जुडिशियरी और होमलैंड सिक्योरिटी जैसी अहम समितियों के प्रतिनिधि शामिल थे। इससे साफ दिखा कि आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिकी संसद में गंभीर रुचि है। सिर्फ सांसद ही नहीं, बल्कि अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, मीडिया के लोग और थिंक टैंक के सदस्य भी यहाँ आए। इस वजह से यह प्रदर्शनी एक ऐसा मंच बन गई जहाँ नीति बनाने वाले, विशेषज्ञ और जनप्रतिनिधि सबने मिलकर आतंकवाद के खिलाफ अपने संकल्प को मज़बूत किया।
राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को चेतावनी
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अपने जर्मनी दौरे के दौरान, पहलगाम हमले की बरसी पर, भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की। उन्होंने बताया कि भारत की ताकत कैसे बढ़ी है। राजनाथ सिंह ने कहा ‘ऑपरेशन सिंदूर में हमारी सेना ने क्या कमाल किया है, ये किसी को बताने की जरुरत नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि भारतीय सेना की शक्ति पहले से बहुत ज़्यादा मजबूत हो गई है। शक्तिशाली होने के बावजूद इतिहास से लेकर आजतक भारत ने दुनिया के किसी देश पर अपनी तरफ से आक्रमण नहीं किया, जो ताकतवर होता है वो किसी के ऊपर आक्रमण करता भी नहीं है। इसके अलावा उन्होंने इस बात पर भी जोर डाला कि भारत के सभी पड़ोसी देश ठीक हैं सिवाय एक के। साथ ही उन्होंने बातों-बातों में पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि ‘यदि अब किसी पड़ोसी ने छेड़छाड़ करने की कोशिश की तो …डॉट…डॉट…डॉट…
अमेरिका का दोहरा रवैया सवालों के घेरे में
पहलगाम हमले पर अमेरिका, भारत का सपोर्ट करता हुआ दिख तो रहा है लेकिन साथ ही साथ कई तरह के सवाल भी इस पर खड़े होते हैं। अगर अमेरिका आतंकवाद को लेकर इतना ज्यादा संजीदा है तो फिर वो पाकिस्तान का साथ क्यों दे रहा है ? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान को सपोर्ट क्यों कर रहे हैं ? क्योंकि अगर अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य ये जानते हैं कि पहलगाम हमले के पीछे पाकिस्तान है, उसकी खुफिया एजेंसी ISI है तो दूसरी तरफ वो पाकिस्तान को पार्टनर बनाकर क्योंं काम कर रहे हैं ? ऐसे में अमेरिका का दोगलापन साफ नज़र आता है।








