भारत को मिलने जा रही नई Very high importance मिसाइल टेस्ट रेंज, प्रोजेक्ट आगे बढ़ा

By Defence Detective

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DRDO Junput Test Range: West Bengal Clears Defense Project Near Digha

भारत के मिसाइल और हथियार परीक्षण ढांचे को मजबूत करने की दिशा में पश्चिम बंगाल के Junput से बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व मेदिनीपुर जिले में Defence Research and Development Organisation (DRDO) की प्रस्तावित टेस्ट फैसिलिटी को लेकर राज्य सरकार ने अब परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया है।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 11 सितंबर 2026 को बताया कि DRDO ने पहले इस परियोजना को लेकर राज्य सरकार से संपर्क किया था, लेकिन पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया था। इस पर अब सरकार की ओर से जवाब दिया गया है।

सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार इस प्रोजेक्ट को आसान बनाने के लिए काम कर रही है। इस परियोजना की अहमियत इसलिए ज्यादा है क्योंकि Junput की सुविधा को ओडिशा के Chandipur स्थित Integrated Test Range (ITR) के अतिरिक्त ऑपरेशनल एरिया के तौर पर विकसित करने की योजना पहले से है।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत को मिसाइलों और अन्य हथियार प्रणालियों के परीक्षण के लिए एक और समुद्री तटीय परीक्षण क्षेत्र मिलेगा।

Junput में कहां बन रही यह टेस्ट फैसिलिटी?

Junput पश्चिम बंगाल के Purba Medinipur जिले में Digha के पास स्थित तटीय इलाका है। प्रस्तावित टेस्ट सेंटर को Bay of Bengal के किनारे विकसित करने की योजना है।

  • यह जगह Kolkata से लगभग 177 किलोमीटर और Chandipur के Integrated Test Range से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर है।
  • इस परियोजना के लिए करीब 8.73 एकड़ जमीन से जुड़ा प्रस्ताव सामने आया था।
  • 2024 तक परियोजना में जमीन अधिग्रहण और जरूरी शुरुआती निर्माण कार्य भी आगे बढ़ चुके थे।
  • यानी यह कोई बिल्कुल नई योजना नहीं है। इसकी नींव पहले ही रखी जा चुकी थी, लेकिन बाद में काम रुक गया था।

Junput की जरूरत क्यों पड़ी ?

भारत का Chandipur ITR देश के सबसे महत्वपूर्ण मिसाइल परीक्षण केंद्रों में से एक है। यहां अलग-अलग तरह की मिसाइलों और एयर-बोर्न हथियार प्रणालियों के परीक्षण किए जाते हैं। DRDO ने हाल के वर्षों में Chandipur से Akash-NG, VSHORADS, Agni-1 और Pinaka Long Range Guided Rocket जैसी प्रणालियों के परीक्षण किए हैं।

समस्या यह है कि भारत में मिसाइल विकास कार्यक्रम तेजी से बढ़ रहे हैं और हर नई प्रणाली के लिए बार-बार परीक्षण की जरूरत होती है।

एक मिसाइल का परीक्षण केवल उसे लॉन्च करने तक सीमित नहीं होता। इसमें उसकी उड़ान, दिशा, गति, ऊंचाई, मार्ग, लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता और अलग-अलग परिस्थितियों में प्रदर्शन जैसे कई पहलुओं की जांच की जाती है।

ऐसे में एक ही प्रमुख रेंज पर लगातार परीक्षण होने से टेस्टिंग स्लॉट और ऑपरेशनल क्षमता पर दबाव बढ़ सकता है।

Junput इसी दबाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है। 2024 में DRDO से जुड़ी जानकारी में इसे Chandipur के लिए additional operational area बताया गया था।

यहां क्या-क्या परीक्षण हो सकते हैं?

Junput परियोजना को लेकर सबसे ज्यादा अटकलें इसी सवाल पर हैं कि आखिर यहां किस हथियार का परीक्षण किया जाएगा। लेकिन अभी तक उपलब्ध सरकारी जानकारी में किसी खास मिसाइल का नाम नहीं दिया गया है।

फिलहाल 2024 में राज्यसभा में बताया गया था कि प्रस्तावित टेस्ट सेंटर का इस्तेमाल “very high importance” वाली मिसाइलों के परीक्षण के लिए उपयोगी होगा।

यानी सरकार ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया है कि Junput में कौन-सी खास मिसाइल का परीक्षण किया जाएगा।

इसलिए इसे किसी एक मिसाइल, जैसे लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल या किसी खास नए हथियार की टेस्ट रेंज बताना अभी सही नहीं होगा।

अभी इतना कहा जा सकता है कि इसका उद्देश्य भारत की मिसाइल और हथियार परीक्षण क्षमता को बढ़ाना तथा Chandipur की मौजूदा टेस्टिंग व्यवस्था को अतिरिक्त क्षमता देना है।

Junput में पहले कितना काम हो चुका था?

यह परियोजना केवल कागज पर मौजूद योजना नहीं थी। रक्षा मंत्रालय की 2024 की जानकारी के अनुसार आवश्यक मंजूरियां हासिल करने के बाद जमीन अधिग्रहण पूरा किया जा चुका था

इसके अलावा साइट पर कुछ बुनियादी निर्माण कार्य भी किए गए थे। इनमें सड़क और hard-standing areas का निर्माण शामिल था।

Hard-standing का मतलब ऐसी मजबूत तैयार सतह से है, जिसका इस्तेमाल परीक्षण से जुड़े उपकरणों, वाहनों या अन्य भारी सिस्टम को रखने और संचालित करने के लिए किया जा सकता है।

यानी परियोजना के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने की दिशा में काफी काम हो चुका था।

फिर यह परियोजना क्यों रुक गई थी?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जमीन और शुरुआती निर्माण का काम हो चुका था तो परियोजना आगे क्यों नहीं बढ़ी?

रक्षा मंत्रालय ने 2024 में बताया था कि परियोजना का काम स्थानीय अशांति के कारण अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। इसके बाद Junput टेस्ट सेंटर का काम लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सका।

अब 2026 में राज्य सरकार और DRDO के बीच फिर से बातचीत आगे बढ़ने के संकेत मिले हैं।

सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि DRDO ने राज्य की पिछली तृणमूल सरकार को इस परियोजना को लेकर पत्र भेजा था और अब उनकी सरकार ने उस पत्र का जवाब दिया है।

इसका मतलब यह है कि परियोजना फिर से सक्रिय चर्चा में आ गई है।

टेस्ट के समय सुरक्षा कैसे होगी?

मिसाइल परीक्षण वाली किसी भी रेंज में सुरक्षा सबसे अहम हिस्सा होता है। Junput परियोजना में भी इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था का प्रावधान रखा गया था।

2024 में रक्षा मंत्रालय की जानकारी के अनुसार परीक्षण से पहले टेस्ट साइट के एक किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थान पर ले जाने की व्यवस्था की जानी थी। प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था का भी प्रावधान बताया गया था।

इससे साफ है कि Junput को सामान्य सैन्य परिसर की तरह नहीं, बल्कि नियंत्रित सुरक्षा क्षेत्र के रूप में संचालित करने की योजना है।

भारत में अभी कहां-कहां होते हैं बड़े हथियारों के परीक्षण ?

भारत में हथियारों की टेस्टिंग के लिए अलग-अलग प्रकार की रेंज और परीक्षण सुविधाएं हैं। इनमें मिसाइलों के लिए समुद्र के किनारे स्थित टेस्ट रेंज से लेकर तोप और दूसरे जमीनी हथियारों के लिए फील्ड फायरिंग रेंज तक शामिल हैं।

Chandipur, – Balasore Odisha — Integrated Test Range (ITR):
यह भारत की प्रमुख मिसाइल टेस्ट रेंज है। यहां मिसाइल, रॉकेट और एयर-बोर्न हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन का परीक्षण किया जाता है।

Wheeler Island, Odisha:
भारत की मिसाइल परीक्षण व्यवस्था में Wheeler Island (अब Dr APJ Abdul Kalam Island) भी महत्वपूर्ण है।

Pokhran, Rajasthan:- यह मिसाइल टेस्ट रेंज से अलग तरह की सैन्य परीक्षण सुविधा है। यहां मुख्य रूप से थलसेना के हथियारों, गोला-बारूद और तोप प्रणालियों के फील्ड ट्रायल किए जाते हैं।

Nagayalanka, Andhra Pradesh
भारत ने अपनी मिसाइल टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने के लिए Andhra Pradesh के Krishna जिले के Nagayalanka में नई missile testing range विकसित करने की योजना बनाई है। DRDO की 2024 की जानकारी के अनुसार यह सुविधा खास तौर पर Phase-2 Ballistic Missile Defence (BMD) कार्यक्रम की मिसाइलों के परीक्षण में महत्वपूर्ण होगी।  

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