तेलंगाना में हैदराबाद के बोलारम में मद्रास रेजिमेंट की आर्मरी से हथियार चोरी होने के मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल चोरी का खुलासा करते हुए एक रिटायर्ड आर्मी हवलदार को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी पहले इसी यूनिट में तैनात रह चुका था और उसे आर्मरी की व्यवस्था, इलाके की भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था की अच्छी जानकारी थी।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने AK-203 असॉल्ट राइफलों, INSAS राइफल और पिस्तौल समेत कुल 12 हथियार चुराए थे। चोरी के साथ मैगजीन और गोला-बारूद भी ले जाया गया था। पुलिस ने अब चोरी का पूरा हथियार बरामद कर लिया है। इस मामले में तीन अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
कौन है आरोपी और कब हुई थी चोरी की घटना ?
पुलिस जांच के अनुसार 20 मद्रास रेजिमेंट के मुख्यालय में यह चोरी 30 और 31 अगस्त की दरम्यानी रात हुई। हथियार चोरी का पता 31 अगस्त की सुबह नियमित इन्वेंट्री जांच के दौरान चला। इसके बाद सेना की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और जांच शुरू हुई।
पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान मल्लेश उर्फ़ राजू के तौर पर हुई है, जो 20 मद्रास रेजिमेंट में ही पहले हवलदार के रूप में काम कर चुका था। इसे अनुशासनहीनता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण 30 जून, 2026 को सेवा से हटा दिया गया था।
मल्लेश ने वारदात से पहले 28 और 29 अगस्त को इलाके की रेकी की थी। इस दौरान उसने सुरक्षा व्यवस्था और आर्मरी तक पहुंचने के रास्तों को समझा था।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने रात में आर्मरी तक पहुंचने के लिए खुद को रेजिमेंट से जुड़ा व्यक्ति बताया। उसने आर्मरी का लॉक तोड़ा और हथियार बाहर निकालकर पहले झाड़ियों में छिपाए। बाद में इन्हें स्कूटर के जरिए बाहर ले जाने में सफल रहा।
कितनी राइफल और पिस्तौल हुई थीं चोरी ?
यह मामला इसलिए भी गंभीर था क्योंकि चोरी किए गए हथियार सामान्य छोटे हथियार नहीं थे। AK-203 और INSAS जैसी राइफलें चोरी होने के कारण जांच एजेंसियों को शुरुआत से ही शक था कि यह सामान्य बाहरी चोरी नहीं हो सकती। तेलंगाना के डीजीपी सी.वी. आनंद ने भी बताया कि AK और INSAS जैसे हथियारों की चोरी ने मामले में अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका का संदेह मजबूत किया। पुलिस के मुताबिक चोरी हथियार:-
- 4 AK-203 असॉल्ट राइफल
- 1 INSAS राइफल
- 7 पिस्तौल
- 21 मैगजीन
- हथियारों का गोला-बारूद
- एक पैसिव नाइट-विजन बाइनोक्युलर
क्यों चोरी में कामयाब रहा आरोपी ?
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने करीब 16 साल सेना में सेवा की थी। इसी वजह से उसे कैंटोनमेंट और यूनिट की कार्यप्रणाली की जानकारी थी। जांच में यह सामने आया कि उसने चोरी को अचानक अंजाम नहीं दिया, बल्कि पहले से तैयारी की थी।
वारदात के बाद हथियारों को सीधे अपने घर रखने के बजाय उसने उन्हें अलग-अलग जगहों पर छिपाने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक आरोपी स्कूटर से हथियार लेकर घर पहुंचा और बाद में उन्हें कार में रखकर अचमपेट की तरफ चला गया। उसने मुख्य रास्तों से बचने की कोशिश की, ताकि पुलिस की नजर से दूर रह सके।
बाद में चोरी किए गए हथियारों का बड़ा हिस्सा नागारकर्नूल जिले में घास के ढेर के नीचे से बरामद किया गया। यह जगह बोलारम से करीब 185 किलोमीटर दूर बताई गई है।
आरोपी तक कैसे पहुंची पुलिस ?
चोरी के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इतनी सुरक्षित सैन्य फैसिलिटी से हथियार बाहर कैसे निकले? शुरुआती जांच में कई लोगों से पूछताछ की गई, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला।
डीजीपी के मुताबिक पुलिस ने 70 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की। इसके बाद जांच का फोकस हाल में रिटायर हुए सैन्यकर्मियों पर गया। तकनीकी सबूतों, मोबाइल फोन की लोकेशन और CCTV फुटेज की मदद से जांचकर्ताओं ने आरोपी तक पहुंच बनाई। पूछताछ के दौरान आरोपी ने आखिरकार चोरी की बात कबूल कर ली।
इस जांच में मिलिट्री इंटेलिजेंस और अन्य एजेंसियों ने भी पुलिस की मदद की। हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि मामले की जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
बदला लेने के लिए की गई थी चोरी?
पुलिस जांच में आरोपी के कथित मकसद को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी की अपने पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों, खासकर कमांडिंग ऑफिसर के प्रति नाराजगी थी।
रिपोर्टों के अनुसार उसे 30 जून को अनुशासन से जुड़े मामले में सेना की पोस्ट-रिटायरमेंट नौकरी से हटाया गया था। पुलिस को संदेह है कि इसी नाराजगी के कारण उसने बदले की भावना से हथियार चोरी किए।
हालांकि बदला लेना ही अंतिम और आधिकारिक तौर पर स्थापित मकसद नहीं माना गया है। डीजीपी ने कहा है कि चोरी के वास्तविक उद्देश्य की अभी आगे जांच की जानी है।
चोरी के समय कहां थी बटालियन ?
इस घटना ने सिर्फ चोरी की जांच को ही नहीं, बल्कि सैन्य प्रतिष्ठानों की आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। जिस जगह से हथियार चोरी हुए, वह सामान्य गोदाम नहीं बल्कि सेना की हथियार रखने वाली सुविधा थी।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरोपी पहले उसी रेजिमेंट में काम कर चुका था। उसे परिसर की भौगोलिक स्थिति और कामकाज की जानकारी थी। पुलिस के अनुसार उसने सुरक्षा व्यवस्था का फायदा उठाकर आर्मरी तक पहुंच बनाई।
चोरी के समय बटालियन, जिसमें कमांडिंग ऑफिसर भी शामिल थे, राजस्थान के पोखरण में फील्ड एक्सरसाइज में थी। इससे यह सवाल भी उठा कि उस दौरान कैंटोनमेंट में हथियारों की सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
जांच अभी जारी…
पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने के साथ तीन अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया है। हालांकि उनका क्या रोल था, यह जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो सकेगा। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी में किसी और व्यक्ति ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष मदद की थी या नहीं। जांच का अगला महत्वपूर्ण सवाल यही है कि आर्मरी की सुरक्षा में इतनी बड़ी सेंध कैसे लगी और क्या आरोपी ने अकेले ही पूरी वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस की आगे की जांच से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।








