अमेरिका पर भारी पलटवार, ईरान ने की बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार   

By Defence Detective

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A damaged military airbase shelter with smoke, emergency vehicles, and anti-missile defense systems

ईरान-अमेरिका तनाव अब एक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने अल-अज्रक एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा हमला करने का दावा किया है। ईरान का कहना है कि इस हमले में अमेरिकी F-35, F-16 और F-15 लड़ाकू विमानों से जुड़े हैंगर और शेल्टर को भारी नुकसान पहुंचा है।

इसके साथ ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास कई जहाजों को भी निशाना बनाने का दावा किया है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ने ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने के साथ ही क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक और कॉमर्सियल जहाजों के खिलाफ भी कार्रवाई की धमकी तेज कर दी है।

जॉर्डन ने कितनी ईरानी मिसाइलें रोकीं?

ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकाने अल-अज्रक एयरबेस को भले ही भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया हो, लेकिन जॉर्डन की सेना के मुताबिक उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने 20 ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों में से 18 को इंटरसेप्ट कर दिया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर खुले इलाकों में गिरीं।

जॉर्डन के अनुसार हमले में किसी के मारे जाने या घायल होने की सूचना नहीं है। मिसाइलों के मलबे और Shrapnel (मिसाइल या बम के विस्फोट से निकले धातु के टुकड़े) वाले इलाकों को सुरक्षित करने के लिए सुरक्षा दल भेजे गए।

यानी ईरान ने बड़ी संख्या में मिसाइलें जरूर दागीं, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार ज्यादातर मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही रोक दी गईं।

F-35 शेल्टर तबाह हुआ ?

ईरानी IRGC ने भले ही कहा कि उसने अल-अज्रक एयरबेस पर अमेरिकी लड़ाकू विमानों से जुड़े हैंगर और शेल्टर को भारी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में “F-35 shelters hit” और “Patriot failed” जैसे दावे तेजी से सामने आए हैं, लेकिन इन्हें अभी पुष्ट सैन्य नुकसान के रूप में नहीं देखा जा सकता।

ईरान ने क्यों किया यह हमला?

ईरान का हमला अचानक नहीं हुआ। इससे पहले अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को नष्ट किया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक यह कार्रवाई ईरान की ओर से अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के जवाब में की गई थी। अमेरिकी सेना का कहना है कि टैंकरों के चालक दल को पहले जहाज छोड़ने का निर्देश दिया गया और उसके बाद जहाजों को निशाना बनाया गया।

अमेरिकी कार्रवाई में प्रभावित जहाजों में Kivik, Charminar, Horizon 1, Riesco और Derya शामिल बताए गए हैं। अमेरिका के मुताबिक उसके नौसैनिक जहाजों पर हुए हमलों में कोई अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ।

यही कार्रवाई ईरान के लिए सीधे जवाब देने की वजह बनी।

ईरान ने होर्मुज में भी खोला मोर्चा

जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने पर मिसाइल हमले के साथ ईरान ने समुद्री मोर्चे पर भी दबाव बढ़ाया है।

सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में “ईरान ने 20 जहाज नष्ट कर दिए” जैसी बातें चल रही हैं। लेकिन Reuters के अनुसार IRGC ने कहा कि उसने 10 जहाजों पर हमला किया, जिनमें दो अमेरिकी जहाज शामिल थे। यह हमला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास हुआ, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है।

इसका महत्व इसलिए बहुत ज्यादा है क्योंकि होर्मुज से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस समुद्री रास्ते से गुजरता है। यदि यहां जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित होती है तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा।

घटनाक्रम को ऐसे समझें-

फिलहाल मौजूदा घटनाक्रम को समझने के लिए इसे एक सीधी चेन रिएक्शन के रूप में देखा जा सकता है

पहले ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों को मिसाइलों से निशाना बनाया फिर अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को नष्ट किया

अब फिर ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं ईरान ने होर्मुज के आसपास जहाजों पर भी हमला किया।

दुनिया पर क्या असर?

इस लड़ाई का सबसे बड़ा वैश्विक प्रभाव तेल और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। मिडिल-ईस्ट में लगातार हमलों के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। क्षेत्र में बढ़ते हमलों और होर्मुज से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण बाजार में जोखिम बढ़ गया है।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए होर्मुज की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। यदि इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है तो तेल की कीमत, शिपिंग लागत और आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है।

दूसरी तरफ, ईरान ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अमेरिकी कार्रवाई का जवाब केवल ईरानी क्षेत्र के भीतर नहीं रहेगा। वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों और होर्मुज में समुद्री यातायात को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।

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