दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्यांग बोले,‘उत्तर कोरिया पर हमले का कोई इरादा नहीं’ अमेरिका से ‘युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल’ लेने की चाह

By Defence Detective

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South Korean president delivering a statement

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग ने मंगलवार को देश की स्वतंत्र और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने का आह्वान किया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सालाना Ulchi Freedom Shield (UFS) सैन्य अभ्यास शुरू हो चुका है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को संयुक्त सैन्य अभ्यासों का स्तर काफी कम करने का निर्देश दिया।

ली ने दक्षिण कोरिया में चल रहे नागरिक सुरक्षा अभ्यासों का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि इनका उद्देश्य उत्तर कोरिया को धमकाना या उस पर हमला करने की तैयारी करना नहीं, बल्कि दक्षिण कोरियाई नागरिकों की सुरक्षा और संकट की स्थिति में देश की तैयारियों को मजबूत करना है।

कैबिनेट की बैठक में ली ने कहा कि अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान हमें अमेरिका से युद्ध के समय का ऑपरेशनल कंट्रोल (संचालन नियंत्रण) अपने हाथ में लेने की मौजूदा योजना पर काम जारी रखना चाहिए।

ट्रंप के फैसले ने क्यों बढ़ाई चिंता?

दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच सैन्य गठबंधन को कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। दोनों देशों की सेनाएं नियमित रूप से संयुक्त अभ्यास करती हैं ताकि उत्तर कोरिया के संभावित मिसाइल, परमाणु, साइबर और पारंपरिक सैन्य हमले की स्थिति में संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता बनी रहे।

लेकिन 17 अगस्त को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को “substantially” कम करने का निर्देश दिया। ट्रंप ने इसके पीछे उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ अपने संबंधों और संभावित कूटनीतिक संवाद की संभावना को भी जोड़ा। दक्षिण कोरिया और अमेरिका का 17 अगस्त से शुरू सालाना अभ्यास 27 अगस्त तक चलेगा।

दक्षिण कोरिया के लिए ट्रंप का यह फैसला इसलिए संवेदनशील है क्योंकि संयुक्त अभ्यास केवल युद्धाभ्यास नहीं होते, बल्कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच कमांड, संचार, लॉजिस्टिक्स और वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में समन्वय की क्षमता को परखने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

इसी बैकग्राउंड में ली जे-म्यांग का आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता पर जोर विशेष महत्व रखता है।

ली जे-म्यांग की दोहरी रणनीति

राष्ट्रपति ली का संदेश मूल रूप से दो हिस्सों में दिखाई देता है। पहला, अमेरिका के साथ मजबूत सैन्य गठबंधन बनाएरखना, और दूसरा, दक्षिण कोरिया की अपनी सैन्य क्षमता को इतना मजबूत करना कि वह अपनी सुरक्षा के लिए अधिक जिम्मेदारी स्वयं उठा सके।

ली ने कहा कि मजबूत अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन और दक्षिण कोरिया की स्वतंत्र रक्षा क्षमता एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों एक-दूसरे को मजबूत कर सकते हैं। मजबूत गठबंधन के साथ दक्षिण कोरिया की अपनी क्षमताओं को बढ़ाने से देश की सुरक्षा मजबूत होगी और सहयोगी के रूप में उसकी रणनीतिक अहमियत भी बढ़ेगी।

यह बयान दक्षिण कोरिया की रक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा को दिखाता है। वह लंबे समय से अमेरिकी सैन्य छतरी पर निर्भर रहा है, लेकिन बदलते सुरक्षा वातावरण में वह अपनी सैन्य स्वायत्तता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

Wartime OPCON: सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा

ली जे-म्यांग ने मंगलवार को एक और महत्वपूर्ण मुद्दे को दोहरायायुद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल यानी Wartime Operational Control (OPCON) को अमेरिका से दक्षिण कोरिया को हस्तांतरित करना।

मौजूदा व्यवस्था में दक्षिण कोरिया के पास शांतिकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल है, लेकिन युद्ध की स्थिति में संयुक्त कमांड संरचना के तहत महत्वपूर्ण सैन्य नियंत्रण अमेरिकी नेतृत्व वाली व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।

ली ने दोहराया कि वह अपने कार्यकाल के समाप्त होने से पहले, यानी 2030 तक, Wartime OPCON को दक्षिण कोरिया के नियंत्रण में लाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

इसका अर्थ केवल कमांड बदलना नहीं है। दक्षिण कोरिया को इसके लिए स्वतंत्र खुफिया क्षमता, कमांड एवं कंट्रोल, निगरानी, मिसाइल रक्षा, वायु शक्ति, समुद्री शक्ति, साइबर युद्ध और संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता को और मजबूत करना होगा।

परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों पर भी जोर

ली सरकार आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों के विकास की दिशा में भी तेजी लाना चाहती है। राष्ट्रपति ली ने अधिकारियों को इस परियोजना के क्रियान्वयन को तेज करने का निर्देश दिया। दक्षिण कोरिया के लिए यह क्षमता इसलिए महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि उत्तर कोरिया लगातार अपनी समुद्री और मिसाइल क्षमताओं को विकसित कर रहा है।

परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां लंबे समय तक समुद्र में रह सकती हैं और पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में अधिक दूरी और धैर्य के साथ संचालन कर सकती हैं।

क्या अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन कमजोर हो रहा है?

ट्रंप और दक्षिण कोरिया के बयानों के बाद यह सबसे बड़ा रणनीतिक सवाल है। ट्रंप द्वारा संयुक्त सैन्य अभ्यासों को कम करने का निर्णय दक्षिण कोरिया में इस आशंका को बढ़ा सकता है कि अमेरिकी सुरक्षा प्रतिबद्धता पहले जैसी नहीं रह गई है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन समाप्त हो रहा है। दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और दोनों देशों के बीच व्यापक रक्षा सहयोग अभी भी गठबंधन की रीढ़ हैं।

लेकिन यदि संयुक्त अभ्यास लगातार छोटे होते हैं, तो दीर्घकाल में operational readiness और interoperability पर सवाल उठ सकते हैं। खासकर उस स्थिति में जब उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है।

उत्तर कोरिया के लिए क्या संदेश ?

ली जे-म्यांग का बयान उत्तर कोरिया के लिए भी एक संतुलित संदेश है। एक ओर दक्षिण कोरिया संवाद और तनाव कम करने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहा है। दूसरी ओर यह भी स्पष्ट कर रहा है कि कूटनीति के साथ उसकी सैन्य तैयारी कमजोर नहीं होगी। लेकिन इस परिस्थिति में दक्षिण कोरिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह शांति वार्ता और सैन्य प्रतिरोध—दोनों को एक साथ कैसे बनाए रखे।

अमेरिका के लिए भी रणनीतिक चुनौती

वाशिंगटन के दृष्टिकोण से संयुक्त अभ्यासों में कमी का एक फायदा यह हो सकता है कि इससे उत्तर कोरिया के साथ बातचीत के लिए वातावरण तैयार हो। लेकिन दूसरी ओर, अमेरिकी सैन्य तैयारी और क्षेत्रीय deterrence पर इसका असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के बीच यह चिंता भी उठी है कि यदि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ नियमित सैन्य अभ्यास कम करता है, तो चीन, उत्तर कोरिया और अन्य क्षेत्रीय शक्तियां इसे अमेरिकी प्रतिबद्धता में कमी के संकेत के रूप में देख सकती हैं।

दक्षिण कोरिया इसलिए अब अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ाने पर ज्यादा जोर दे रहा है।

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