तेजस MK-2 सरप्राइज देने को तैयार, जल्द होने वाली है फर्स्ट फ्लाइट

By Alok Ranjan

Published On:

Date:

Tejas MK2

तेजस MK-2 पर गुड न्यूज़

भारत का स्वदेशी तेजस Mk2 (Medium Weight Fighter – MWF) कार्यक्रम अब उस निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है जहाँ से यह भारतीय वायुसेना के भविष्य पर असर करेगा। लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना ने हाल ही में ग्राउंड टेस्टिंग और प्रमाणन गतिविधियों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। लो-स्पीड और हाई-स्पीड टैक्सी ट्रायल्स की तैयारी चल रही है, जो किसी भी नए लड़ाकू विमान के लिए उड़ान से पहले सबसे अहम कदम होता है। इन ट्रायल्स से विमान की हैंडलिंग, ब्रेकिंग परफॉर्मेंस और डायरेक्शनल स्टेबिलिटी की पुष्टि होगी।

तेजस Mk2 का प्रोटोटाइप लगभग पूरा हो चुका है, केवल कुछ छोटे सब-सिस्टम इंटीग्रेशन बाकी हैं। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि कार्यक्रम अब Initial Flight Clearance (IFC) की ओर बढ़ रहा है, जिसे सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC) द्वारा दिया जाएगा। IFC किसी भी विमान के लिए वह आधिकारिक मुहर होती है जो उसे फर्स्ट फ्लाइट के लिए मंजूरी देती है। इसके साथ-साथ कई ग्राउंड-बेस्ड वैलिडेशन कैंपेन भी चल रहे हैं, जिनमें स्ट्रक्चरल और सिस्टम-लेवल टेस्ट शामिल हैं।

आउटडेटेड हो चुके फाइटर्स की जगह लेगा

तेजस Mk2 को भारतीय वायुसेना के पुराने प्लेटफॉर्म्स – Jaguar, Mirage 2000 और MiG-29 – के विकल्प के रूप में डिजाइन किया गया है। इन विमानों ने दशकों तक वायुसेना की रीढ़ का काम किया है, लेकिन अब वे तकनीकी रूप से पुराने हो चुके हैं। अनुमान है कि भारतीय वायुसेना को लगभग 110–120 तेजस Mk2 की आवश्यकता होगी। इसका मतलब है कि यह विमान आने वाले वर्षों में तेजस MK-2 वायुसेना का मुख्य आधार बनने जा रहा है।

तेजस Mk2 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह Mk1A की तुलना में कहीं अधिक उन्नत है। Mk2 का एयरफ्रेम बड़ा है, ईंधन क्षमता अधिक है, पेलोड क्षमता बढ़ाई गई है और एवियोनिक्स को अपग्रेड किया गया है। इन सुधारों से यह विमान Medium Weight Catogery में आ जाता है, जहाँ Rafale जैसे विमान मौजूद हैं। Mk2 की डिजाइनिंग में न केवल लड़ाकू क्षमता बल्कि maintainability और mission flexibility पर भी ध्यान दिया गया है।

प्रोटोटाइप तैयार, फर्स्ट फ्लाइट की तैयारी

प्रोटोटाइप फिलहाल पीले प्राइमर कोटिंग में है, जो यह दर्शाता है कि अभी इसका फोकस परीक्षण पर है। परीक्षण के दौरान इसमें क्रमिक सुधार किए जाएंगे और आगे आने वाले प्रोटोटाइप्स में और refinements जोड़े जाएंगे। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने Limited Series Production (LSP) का लक्ष्य 2029 के अंत तक रखा है। इसका मतलब है कि शुरुआती बैच भारतीय वायुसेना को सौंपे जा सकते हैं, जबकि प्रमाणन प्रक्रिया जारी रहेगी। लगभग 8–12 प्री-प्रोडक्शन विमान ASTE (Aircraft and Systems Testing Establishment) को दिए जाएँ। इससे हथियार इंटीग्रेशन, ऑपरेशनल वैलिडेशन और प्रमाणन की समयसीमा को कम किया जा सकेगा। इस रणनीति का फायदा यह होगा कि वायुसेना शुरुआती चरण में ही Mk2 को ऑपरेशनल रूप से परख सकेगी।

तेजस Mk2 का एक बड़ा लाभ यह है कि इसके कई ऑनबोर्ड सिस्टम पहले ही Mk1 और Mk1A पर वैलिडेट किए जा चुके हैं। उदाहरण के लिए, Digital Flight Control Computer (DFCC) को और बेहतर बनाया गया है। इसमें अधिक कंप्यूटेशनल क्षमता है, जिससे फ्लाइट कंट्रोल लॉज और हैंडलिंग कैरेक्टरिस्टिक्स बेहतर होंगे। इसके अलावा, यह आधुनिक एवियोनिक्स और मिशन सिस्टम्स के साथ सहज इंटीग्रेशन की सुविधा देता है। इस विमान को शक्ति देने वाला इंजन है GE F414-INS6 टर्बोफैन, जो 17.5 टन क्लास एयरफ्रेम के लिए आवश्यक thrust प्रदान करेगा। इंजन इंटीग्रेशन टेस्ट IFC से पहले होंगे, जिनमें intake परफॉर्मेंस, थर्मल कैरेक्टरिस्टिक्स और propulsion सिस्टम की विश्वसनीयता की जाँच होगी।

2028 तक GE इंजन का उत्पादन

भारत की लॉन्ग टर्म एयरोस्पेस महत्वाकांक्षाओं के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि अप्रैल 2026 में हुई, जब GE F414 इंजन के लिए 80% Transfer of Technology (ToT) समझौता हुआ। इसका मतलब ये है कि 2028 तक भारत में इस इंजन का उत्पादन शुरू हो सकता है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि घरेलू एयरोस्पेस इकोसिस्टम भी मजबूत होगा। तेजस Mk2 का महत्व केवल तकनीकी नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। यह विमान भारत को स्वदेशी लड़ाकू क्षमता प्रदान करेगा, जिससे विदेशी विमानों पर निर्भरता घटेगी। Rafale जैसे विमानों की तुलना में Mk2 अधिक किफायती होगा और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप होगा। इसके अलावा, इंजन उत्पादन का स्वदेशीकरण भारत को भविष्य में और भी स्वतंत्र बनाएगा।

तेजस प्रोग्राम की चुनौतियां

इस कार्यक्रम की चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी चुनौती है समयसीमा। 2026 में पहली उड़ान और 2029 तक LSP का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है। इंजन उत्पादन के बावजूद शुरुआती वर्षों में GE पर निर्भरता बनी रहेगी। साथ ही, Mk2 को Rafale और Su-30MKI जैसे विमानों के साथ संतुलन बनाना होगा। फिर भी, तेजस Mk2 भारत के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह विमान न केवल तकनीकी दृष्टि से बल्कि आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। आने वाले वर्षों में यह भारतीय वायुसेना की रीढ़ बनेगा और भारत को वैश्विक एयरोस्पेस मैप पर एक मजबूत स्थान दिलाएगा। सरल शब्दों में कहा जाए तो तेजस Mk2 भारत को एक स्वदेशी, आधुनिक और मध्यम श्रेणी का लड़ाकू विमान देगा, जो आने वाले दशकों में वायुसेना की रीढ़ बनेगा।

Leave a Comment