भारत ने रूसी तेल इंपोर्ट में बनाया रिकॉर्ड, अमेरिका बोला 1 महीने के लिए बढ़ायी छूट

By Alok Ranjan

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अमेरिका की विवशता

अमेरिका लाख कोशिश कर रहा है कि रूस और भारत को प्रेशर में लेकर आए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाकर वो दोनों देशों खासकर भारत से अपनी बातें मनवाना चाहता था, पर अमेरिकी दादागिरी काम नहीं आयी। आखिरकार अमेरिका को रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों से छूट (waiver) को 16 मई 2026 तक बढ़ाना पड़ा है। यह waiver उन रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू है जो 17 अप्रैल तक जहाजों पर लोड हो चुके थे। पिछला waiver 11 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया था, लेकिन अचानक अमेरिका ने इसे बढ़ा दिया। भारतीय रिफाइनर अब रूसी तेल की डिलीवरी ले सकते हैं, भले ही वह sanctioned tankers से आ रहा हो। इससे भारत को सस्ती ऊर्जा आपूर्ति का लाभ मिलेगा और घरेलू कीमतों पर दबाव कम होगा।

मार्च में भारत ने रूस से 3 गुना तेल इंपोर्ट किया

मार्च 2026 में भारत ने रूस से तेल आयात में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की। यूरोपीय थिंक टैंक Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद फरवरी की तुलना में तीन गुना बढ़ाकर 5.3 बिलियन यूरो कर दी। फरवरी 2026 में भारत ने कुल 1.8 बिलियन यूरो का आयात किया था। इसमें कच्चा तेल 1.4 बिलियन यूरो (81%), कोयला 223 मिलियन यूरो और तेल उत्पाद 121 मिलियन यूरो शामिल थे। जबकि मार्च के जो आंकड़े आए हैं उसमें कच्चे तेल (Crude Oil) की खरीद 5.3 बिलियन यूरो का किया गया, जो कि टोटल इंपोर्ट का 91% हिस्सा है। वहीं 337 मिलियन यूरो का कोयला (Coal) इंपोर्ट हुआ, जबकि 178.5 मिलियन यूरो के
तेल उत्पाद (Oil Products)इंपोर्ट किए गए ।

अमेरिका की छूट का असर

मार्च में आयात बढ़ने का बड़ा कारण था अमेरिका द्वारा दिया गया एक महीने का प्रतिबंध-छूट (Sanctions Waiver)। यह छूट उन कार्गो पर लागू हुई जो पहले से समुद्र में थे या पहले से प्रतिबंधित जहाज़ों पर लदे थे। इसका उद्देश्य था ईरान के खिलाफ युद्ध के बाद बढ़ी कीमतों को नियंत्रित करना। इस छूट का सीधा असर भारत की सरकारी रिफाइनरियों पर पड़ा। सरकारी रिफाइनरियों का आयात 148% बढ़ा। यह मार्च 2025 की तुलना में 72% अधिक रहा। जबकि प्राइवेट रिफाइनरियों का आयात: 66% बढ़ा, लेकिन ये पिछले साल की तुलना में कम रहा। मार्च 2026 में मंगलुरु और विशाखापत्तनम की सरकारी रिफाइनरियों ने फिर से रूसी तेल खरीदना शुरू किया, जबकि उन्होंने नवंबर 2025 में इसे बंद कर दिया था।

मार्च 2026 में रूस के कच्चे तेल के प्रमुख खरीदार

  • चीन: 51%
  • भारत: 38%
  • तुर्किये: 6%
  • यूरोपीय संघ: 1.8%

यूरोपीय संघ में रूसी तेल का प्रवेश

EU ने जनवरी 2026 से रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया है। इसके बावजूद मार्च में 14 शिपमेंट्स यूरोपीय बंदरगाहों पर उतरे। ये शिपमेंट्स तुर्किये, भारत और जॉर्जिया की रिफाइनरियों से आए थे। अनुमान है कि मार्च में EU, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने मिलकर 830 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद आयात किए, जिनमें से लगभग 188 मिलियन यूरो रूसी कच्चे तेल से बने थे।

  • फ्रांस: 4 शिपमेंट्स
  • साइप्रस: 3 शिपमेंट्स
  • बेल्जियम, बुल्गारिया, इटली, नीदरलैंड्स: 2-2 शिपमेंट्स

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की भूमिका

अमेरिका ने भारत के जामनगर और तुर्किये के STAR रिफाइनरी से तेल उत्पाद आयात किए। मार्च में STAR रिफाइनरी का 39% और जामनगर रिफाइनरी का 25% फीडस्टॉक रूस से आया। ऑस्ट्रेलिया ने भी 332 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद आयात किए।

भारत के लिए इसका महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए विविध स्रोतों पर निर्भर है।
  • जियो पॉलिटिकल बैलेंस: अमेरिका की छूट और रूस की एशियाई बाज़ारों पर निर्भरता भारत को एक रणनीतिक स्थिति में लाती है।
  • वैश्विक बाज़ार पर असर: चीन और भारत मिलकर रूस के 90% तेल निर्यात का उपभोग कर रहे हैं।

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