ईरान बोला भारत है भरोसेमंद दोस्त, होर्मूज़ के रास्ते उसके लिए हमेशा खुले हैं

By Shilpi Sharma

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भारत पर ईरान का बहुत बड़ा बयान

ईरान ने एक बार फिर खुले तौर पर कहा है कि भारतीय टैंकर्स या भारतीय जहाजों को होर्मूज पर कोई दिक्कत नहीं आएगी। भारत ईरान के बहुत पुराना और बेहद भरोसेमंद दोस्त है। भारत में ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत और ईरान का भाग्य और हित समान हैं तथा जहाज़ों की आवाजाही पर दोनों देशों के बीच “अच्छा संपर्क” बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत से कभी टोल शुल्क नहीं लिया गया, जबकि भारत ने भी पुष्टि की कि उसके 9 LPG टैंकर बिना किसी शुल्क के स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ से गुज़रे हैं।

इसी बीच, 13 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी खाड़ी बंदरगाहों की नाकाबंदी का ऐलान किया और चेतावनी दी कि नाकाबंदी क्षेत्र में आने वाले ईरानी जहाज़ों को “तुरंत नष्ट” कर दिया जाएगा। इस घोषणा का सीधा असर भारत पर पड़ा है, जहाँ 15 भारतीय जहाज़ अभी भी खाड़ी में फंसे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि भारत ने हाल ही में 7 साल बाद पहली बार ईरानी तेल की खेप प्राप्त की है—यह कदम वैश्विक तेल बाज़ार में संकट और ऊर्जा आपूर्ति की चुनौती के बीच भारत की कूटनीतिक संतुलन की स्थिति को भी दर्शाता है।

ट्रंप का स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ पर नेवल ब्लॉकेड का ऐलान, तेल $100 प्रति बैरल

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी-ईरान शांति वार्ता विफल हो गयी। 11 अप्रैल 2026, इस्लामाबाद में बातचीत 21 घंटे तक चली लेकिन किसी समझौते पर नहीं पहुँच सकी। समझौते पर न पहुंच पानेे के कई कारण रहे, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर गहरी असहमति, अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत की मांग, और क्षेत्रीय नियंत्रण को लेकर मतभेद। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर भरोसा न कर पाने और शर्तें थोपने का आरोप लगाते रहे।

यूएस-ईरान की बातचीत फेल होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (13 अप्रैल 2026) को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर नेवल ब्लॉकेड लगाएगा और वहां से गुज़रने वाले जहाजों की आवाजाही को कंट्रोल करेगा। इस खबर के सामने आते ही तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल तक पहुंच गईं और पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट का डर बढ़ गया। ट्रंप के बयान के जवाब में ईरान ने नेवल ब्लॉकेड करने पर जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी। आपको एक बार फिर बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से दुनिया का ~20% तेल गुज़रता है।

अमेरिका-ईरान पीस डील में किन-किन मुद्दों पर नहीं बनी बात

हाल की स्थिति पर ईरान-अमेरिका का रुख, कैसी है भारत की स्थिति

ईरान ने अमेरिकी नाकाबंदी को “ग़ैरक़ानूनी और उकसाने वाला कदम” बताया है, जबकि अमेरिका ने चेतावनी दी है कि कोई भी ईरानी जहाज़ नाकाबंदी क्षेत्र में आया तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। भारत की स्थिति बेहद संवेदनशील है क्योंकि 15 भारतीय जहाज़ खाड़ी में फंसे हुए हैं और हाल ही में 7 साल बाद पहली बार ईरानी तेल की खेप भारत पहुँची है।

ईरान ने अरब पड़ोसियों से युद्ध मुआवजे की मांग की, भारत को दिया भरोसा

अमेरिका के साथ बातचीत फेल होने के फौरन बाद ईरान ने पड़ोसी मुस्लिम देशों से पैसे की डिमांड कर दी है। तेहरान ने पड़ोसी देशों से युद्ध का आर्थिक बोझ उठाने को कहा है। ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, जॉर्डन और कतर से युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई के लिए औपचारिक तौर पर मुआवजा मांगा है। हालांकि, भारत को लेकर ईरान का दोस्ताना रवैया बरकरार है। ईरान ने भारत को आश्वस्त किया है कि उसके जहाज बेरोकटोक होर्मुज रूट से होकर आते जाते रहेंगे। उसने भारतीयों को भरोसेमंद दोस्त बताया है।

पड़ोसी देशों पर आरोप: ईरान का कहना है कि इन पांच देशों ने अपनी जमीन और सुविधाएं अमेरिका व इज़राइल को हमलों के लिए उपलब्ध कराईं।

औपचारिक पत्र: ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद अध्यक्ष को पत्र लिखकर मुआवजे की मांग की है।

कानूनी तर्क: ईरान का दावा है कि यह “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत कार्य” है और इन देशों को युद्ध क्षति का आर्थिक बोझ उठाना चाहिए।

होर्मुज़ पर हो रहे टकराव का भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा:
    • भारत की लगभग 50% कच्चे तेल और LPG आपूर्ति होरमुज़ से होकर आती है।
    • ईरान का आश्वासन आपूर्ति बाधित होने के खतरे को कम करता है।

  • भूराजनीतिक संतुलन:
    • भारत को अमेरिका (रणनीतिक साझेदार) और ईरान (ऊर्जा आपूर्तिकर्ता) के बीच संतुलन साधना होगा।
    • अमेरिकी छूट से भारत को सीमित आयात की अनुमति मिली है, लेकिन नाकाबंदी से अनिश्चितता बनी हुई है।

  • शिपिंग जोखिम:
    • भारतीय जहाज़ों को देरी और सुरक्षा खतरे का सामना करना पड़ सकता है।
    • बीमा प्रीमियम बढ़ने से आयात लागत भी बढ़ सकती है।

7 साल बाद भारत ने किया ईरान से तेल इंपोर्ट ?

ईरान से 7 साल बाद तेल लेने के पीछे का कारण कोई स्थायी नीति में बदलाव नहीं, बल्कि दुनिया भर में चल रहे अस्थायी हालात और ज़रूरत है।मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और संघर्ष की वजह से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में जोखिम बढ़ गया है, जहाँ से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुज़रता है। इससे भारत को तेल की कमी का खतरा पैदा हो गया है, साथ ही सप्लाई में दिक्कत के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं हैं। और भारत को, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक होने के कारण, पेट्रोल-डीजल की कमी, महंगाई और आर्थिक दबाव से बचने के लिए तुरंत नए स्रोत की जरूरत पड़ रही है।

पहले भी भारत ईरान से तेल खरीदता था लेकिन साल 2019 से भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था क्योंकि अमेरिका ने इस पर प्रतिबंध लगाए थे। भारत के लिए ईरान से खरीदे गए तेल की कीमत कम होती है, भुगतान की शर्तें आसान होती हैं और साथ ही दूरी कम होने से ट्रांसपोर्ट सस्ता पड़ता है। इसलिए जैसे ही अमेरिका ने ईरान से तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी तो मौका मिलते ही भारत ने इसे एक सस्ता और तेज विकल्प मानते हुए तुरंत तेल खरीद लिया। आपको बता दें कि मार्च 2026 में अमेरिका ने कुछ समय (लगभग 30 दिन) के लिए छूट दी और इसी वजह से भारत फिर से कानूनी तौर पर ईरान से तेल खरीद पा रहा है।

  • कब दी गई छूट:
    • मार्च 2026 में अमेरिका ने अस्थायी छूट दी।
    • छूट की अवधि: 19 अप्रैल 2026 तक

  • भारत का आयात:
    • भारत ने लगभग 2 मिलियन बैरल ईरानी तेल आयात किया।
    • दो बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) Felicity और Jaya गुजरात और ओडिशा के बंदरगाहों पर पहुँचे।
    • यह आयात 2019 के बाद पहली बार हुआ।

  • कंपनियाँ शामिल:
    • Indian Oil Corporation (IOC) और Reliance Industries ने तेल की खेप खरीदी।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि यह कोई स्थायी फैसला नहीं है । आगे क्या होगा फिलहाल यह बात किसी को नहीं पता और आगे की तेल नीतियां इस बात पर निर्भर करेंगी कि अमेरिका ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों पर क्या निर्णय लेता है और ईरान उस निर्णय का कैसे स्वागत करता है। फिलहाल इस कदम को भारत की कूटनीतिक सफलता माना जा सकता है।

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