भारत का बहुत बड़ा मिशन
भारत सरकार ने वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध के बीच अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए एक बड़े पैमाने पर मानवीय और कूटनीतिक अभियान चलाया। इस अभियान के तहत अब तक लगभग 1,200 भारतीयों को ईरान से सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें से 345 मछुआरे शनिवार रात चेन्नई पहुंचे। यह घटना केवल एक मानवीय राहत नहीं बल्कि भारत की विदेश नीति, कूटनीतिक सक्रियता और संकट प्रबंधन क्षमता का भी उदाहरण है। भारत सरकार ने 28 फरवरी से अभियान शुरू किया। भारतीयों को ईरान से आर्मेनिया और अज़रबैजान की सीमा पार कराकर सुरक्षित निकाला गया। इसके लिए चार्टर फ्लाइट्स और निजी ऑपरेटरों की मदद ली गई। अभियान में भारतीय दूतावासों ने लगातार काम किया और स्थानीय सरकारों से सहयोग लिया।

धन्यवाद FM अरारात मिर्ज़ोयान और आर्मेनिया सरकार को, जिन्होंने भारतीय मछुआरों की ईरान से आर्मेनिया होते हुए भारत वापसी में सहयोग दिया।- एस. जयशंकर, विदेश मंत्री
वेस्ट एशिया में युद्ध और भारतीयों की स्थिति
वेस्ट एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद ईरान में काम कर रहे भारतीय मछुआरे और अन्य कामगार अचानक संकट में फंस गए। ईरान की मछली पकड़ने वाली नौकाओं का संचालन बंद हो गया। भारतीय कामगारों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए। उन्हें वेतन नहीं मिला और भोजन की भारी कमी का सामना करना पड़ा। कई लोग महीनों तक नौकाओं पर फंसे रहे, जहां न्यूनतम भोजन और असुरक्षा का माहौल था। कई लोग महीनों तक समुद्र में फंसे रहे। उन्हें केवल न्यूनतम राशन दिया गया। परिवारों से संपर्क टूट गया, जिससे मानसिक तनाव बढ़ा।


हम आर्मेनिया और अज़रबैजान की सरकारों का आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने भारतीय नागरिकों के सुरक्षित ट्रांजिट में सहयोग दिया।- रणधीर जयसवाल, MEA प्रवक्ता

यह परिवारों के लिए खुशी का दिन है। यह एक कठिन यात्रा थी। उन्हें 20 घंटे आर्मेनिया और अन्य देशों तक जाना पड़ा। अधिकारियों ने दिन-रात मेहनत कर उन्हें सुरक्षित वापस लाने का काम किया।- पीयूष गोयल, वाणिज्य मंत्री
भारतीय मौतें और घायल
- अब तक 8 भारतीयों की मौत की पुष्टि हुई है।
- 3 भारतीय घायल हुए हैं, जिनका इलाज यूएई में चल रहा है।
- मौतें मुख्यतः युद्धग्रस्त क्षेत्रों में बमबारी और हमलों के कारण हुईं।
भारत की कूटनीतिक क्षमता
यह अभियान भारत की विदेश नीति और संकट प्रबंधन का उदाहरण है। कूटनीतिक सक्रियता: भारत ने आर्मेनिया और अज़रबैजान जैसे पड़ोसी देशों से सहयोग लिया। नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। चार्टर फ्लाइट्स, निजी ऑपरेटर और दूतावासों के सहयोग से अभियान सफल रहा। भारत ने दिखाया कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाता है। पिछले दशक में भारत ने 10 से अधिक बड़े निकासी अभियान चलाए हैं, जिनसे 70 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित घर लाया गया।









