भारत में नहीं आएगा एनर्जी संकट, रूस का तेल, LNG और उर्वरक आपूर्ति बढ़ाने का वादा

By Shilpi Sharma

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भारत के लिए रूस का बड़ा ऐलान

मौजूदा वैश्विक संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य उत्पादन के लिए रूस ने भारत से वादा करते हुए आश्वासन दिया कि है कि उसकी कंपनियाँ तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति को लगातार बढ़ाने की क्षमता रखती हैं और वैश्निक तेल संकट के दौरान भारत के साथ खड़ा रहेगा। इस मुद्दे पर विशेष ध्यान देते हुए रूस के उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव ने अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान 2 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक में रूस से भारत को उर्वरकों (फर्टीलाइज़र) की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई, जो भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत उर्वरकों और ऊर्जा के लिए आयात पर काफी निर्भर है, और रूस इन दोनों क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। इसलिए ये मुलाकात भारत की खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा स्थिरता के लिए बेहद अहम रही। प्रधानमंत्र मोदी के अलावा मंतुरोव विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल से भी मिले। इन सभी बैठकों में भारत को रूस से ऊर्जा आपूर्ति जारी रखने पर विशेष ध्यान दिया गया। यह भारत और रूस के बीच मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।

फर्टिलाइज़र और एनर्जी सहयोग होगा मजबूत

रूसी उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव ने बताया कि भारत को खनिज उर्वरकों की आपूर्ति में 40% की वृद्धि की गई है और भविष्य में इसे और बढ़ाने की योजना है। भारत-रूस के बीच कार्बामाइड (यूरिया) उत्पादन के लिए संयुक्त परियोजना भी विकसित की जा रही है। रूस का यह सहयोग भारत की कृषि उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगा। इसके अलावा उच्चस्तरीय चर्चाओं में ऊर्जा, व्यापार, औद्योगिक सहयोग, अंतरिक्ष और शिक्षा परियोजनाओं पर भी विचार हुआ। ऐसा माना जा रहा है कि मंतुरोव का यह दौरा BRICS शिखर सम्मेलन और भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन की तैयारियों का हिस्सा है।

तेल आपूर्ति जारी रखने का भरोसा

रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के सितंबर में भारत में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना है। रूस के उप-विदेश मंत्री एंड्रे रुदेंको ने कोलंबो में कहा कि मॉस्को, सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने के लिए नई दिल्ली के प्रयासों का समर्थन करेगा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस, पेट्रोल निर्यात पर 1 अप्रैल 2026 से लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद, तेल आपूर्ति से जुड़े सभी पुराने अनुबंधों का सम्मान करेगा। दिलचस्प बात यह है कि रूस का यह फैसला उस समय आया जब अमेरिका-इज़राइल और ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। इसी बीच अमेरिका ने भारत को मार्च 2026 में 30 दिन की अस्थायी छूट दी, जिससे भारतीय रिफाइनरियाँ फिर से रूसी कच्चा तेल खरीद सकीं। लेकिन आपको यह भी याद दिला दें कि अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत पर सीधे आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, जिनमें 19 भारतीय कंपनियों और दो व्यक्तियों को रूस के रक्षा क्षेत्र से जुड़ाव के कारण निशाना बनाया गया। इसके अलावा अगस्त 2025 में भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए गए, ताकि रूस से ऊर्जा आयात कम किया जा सके।अमेरिकी अधिकारियों का आरोप था कि रूस की युद्ध मशीनरी को भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों से तेल बिक्री से वित्तीय मदद मिल रही है। भले ही अमेरिका और पश्चिमी देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए थे लेकिन इसके बावजूद भारत तब भी रूस से तेल खरीदता रहा है। अगर देखा जाए तो हाल के समय में ऊर्जा आयात में काफी बढ़ोतरी भी देखी गई है और रूस, भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक बना हुआ है। मुश्किल समय में एक दूसरे के हित में उठाए गए यह कदम भारत-रूस ऊर्जा साझेदारी को दर्शाता हैं।

भारत-रूस सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

रूस से आने वाला उर्वरक क्यों ज़रूरी है भारत के लिए

रूस से भारत आने वाले उर्वरक मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में काम आते हैं — खासकर गेहूँ, धान, गन्ना, कपास और सब्ज़ियों जैसी फसलों में। रूस भारत को नाइट्रोजन (यूरिया), पोटाश और फॉस्फेट आधारित उर्वरक सप्लाई करता है, जिनका उपयोग खाद्य सुरक्षा और उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जाता है। रूस से आयातित यूरिया और अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग धान और गेहूँ की पैदावार के लिए उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा) में बड़े पैमाने पर होता है। तो वहीं गन्ना और कपास जैसी नकदी फसलों के उत्पादन में भी पोटाश और फॉस्फेट उर्वरक का इस्तेमाल होता है। खासतौर से गन्ने की खेती में पोटाश आधारित उर्वरक ज़रूरी हैं, जो रूस से आयात होते हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में रूस से आए फॉस्फेट और पोटाश उर्वरक का प्रयोग अधिक होता है। रूस भारत के लिए सबसे बड़ा उर्वरक सप्लायर बन चुका है, 2025 में भारत के कुल आयात का 33% हिस्सा रूस से आया जिससे भारत की खाद्य सुरक्षा और किसानों की लागत नियंत्रण में मदद मिली।

फर्टिलाइज़र्स के टॉप 5 सप्लायर्स

कुल वार्षिक खपत (2024–25): ~51.9 मिलियन टन
घरेलू उत्पादन: ~41 मिलियन टन
आयात: ~10–11 मिलियन टन (कुल खपत का ~20%)

भारत-रूस ऊर्जा व्यापार

तेल – मार्च 2026: भारत के रूसी तेल आयात में 90% की वृद्धि हुई, जब पश्चिम एशिया संकट से अन्य सप्लाई बाधित हुई।
अमेरिका ने मार्च 2026 में भारत को 30 दिन की अस्थायी छूट दी, जिससे भारतीय रिफाइनरियाँ फिर से रूसी कच्चा तेल खरीद सकीं।
गैस (एलएनजी) – रूस ने भारत को एलएनजी सप्लाई बढ़ाने का वादा किया है, ताकि पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित गैस सप्लाई का विकल्प मिल सके।
उर्वरक – रूस ने भारत को 40% अधिक उर्वरक सप्लाई करने का आश्वासन दिया है और संयुक्त यूरिया उत्पादन परियोजना पर काम जारी है। रूस भारत को तेल, एलएनजी और उर्वरक में लगातार सप्लाई बढ़ा रहा है।

भारत-रूस के बीच कितना कारोबार ?

रूस भारत को तेल, एलएनजी और उर्वरक में लगातार सप्लाई बढ़ा रहा है। भारत-रूस व्यापार 2024–25 में 68.7 बिलियन डॉलर रहा और दोनों देश इसे 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखते हैं। इसमें भारत का आयात लगभग US$ 63.8 बिलियन था, जो मुख्य रूप से तेल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और उर्वरकों पर आधारित रहा। वहीं भारत का निर्यात केवल US$ 4.9 बिलियन के आसपास रहा, जहाँ विविधीकरण की कोशिशें जारी हैं। प्रमुख क्षेत्रों में तेल, एलएनजी, उर्वरक और रक्षा शामिल हैं।भविष्य के लिए भारत ने वर्ष 2030 तक कुल व्यापार को US$ 100 बिलियन तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।

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