- ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज भारत के लिए खोल
- कई भारतीय जहाज होर्मूज पार कर भारत आए
- कच्चा तेल और LPG गैस लेकर जहाज भारत पहुंचे
- दर्जनों जहाज अभी भी पर्शियन गल्फ में फंसे हैं
ईरान से काम आयी भारत की दोस्ती
ईरान ने हाल ही में भारत के कई जहाज़ों को स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ से सुरक्षित पार करने की इजाज़त दी है। यह फैसला भारत और ईरान के बीच हुई कूटनीतिक बातचीत का नतीजा है, जिसमें भारत ने अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए ईरान से सहयोग मांगा था। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है, क्योंकि भारत की तेल और गैस की ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पार कर भारत आने वाले जहाज
- Shenlong – 135,335 मिट्रिक टन क्रूड ऑयल
- Pushpak –6100 मिट्रिक टन क्रूड ऑयल
- Parimal –12, 887 मिट्रिक टन क्रूड ऑयल
- Shivalik – 85,000 मिट्रिक टन LPG
- Nanda Devi – 92,700 मिट्रिक टन LPG
भारतीय नौसेना की भूमिका
भारतीय नौसेना ने भी इस दौरान सुरक्षा बढ़ाई है। INS Chennai, INS Kolkata और INS Teg जैसे युद्धपोत पर्शियन गल्फ के आसपास मौजूद हैं। ये जहाज़ भारतीय टैंकरों को एस्कॉर्ट कर रहे हैं ताकि किसी भी हमले से बचाया जा सके। ये सभी युद्धपोत एक्टिव एयर डिफेंस सिस्टम से लैस है, जो किसी भी ड्रोन, मिसाइल हमले से बचाव कर सकते हैं।
कितने जहाज़ अभी भी फंसे हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, करीब 28 भारतीय-फ्लैग्ड जहाज़ पर्शियन गल्फ में मौजूद हैं। इनमें से कुछ अभी भी स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ पार करने का इंतज़ार कर रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ का महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग है। यह पर्शियन गल्फ को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। अगर यह मार्ग बंद हो जाए तो वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।
भारत की ऊर्जा निर्भरता
- क्रूड ऑयल: भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 88% क्रूड ऑयल आयात करता है, जिसमें से 50–60% आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ से होकर आता है।
- LPG: भारत हर साल लगभग 33 मिलियन टन LPG खपत करता है, जिसमें से 80–85% आयात खाड़ी देशों से होता है। इनका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ से होकर गुजरता है।
समस्या क्यों शुरू हुई?
पिछले कुछ महीनों से वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ा है। ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच संघर्ष के कारण कई जहाज़ों पर हमले हुए। ईरान की IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने चेतावनी दी थी कि बिना अनुमति जहाज़ों को निशाना बनाया जा सकता है। दो जहाज़ों पर हाल ही में हमला भी हुआ, जिससे माहौल और बिगड़ गया।
भारत की कूटनीति
भारत ने अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए ईरान से बातचीत की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बात की। इसके बाद ईरान ने भारतीय जहाज़ों को सुरक्षित पार करने की अनुमति दी। ईरान के राजदूत ने कहा कि “भारत और ईरान दोस्त हैं, इसलिए भारतीय जहाज़ों को सुरक्षित रास्ता दिया गया है।” भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ पर निर्भरता घटाकर 60–70% आयात वैकल्पिक मार्गों से शिफ्ट कर दिया है। सरकार ने कहा है कि ऊर्जा सप्लाई “कई स्रोतों और मार्गों से जारी है” ताकि घरेलू बाज़ार में कोई बड़ी कमी न हो।
अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ लंबे समय तक बंद रहा तो?
- भारत ने पहले से ही वैकल्पिक रास्तों और सप्लायर्स की तैयारी कर रखी है:
- रूस से आयात बढ़ाना: हाल के महीनों में भारत ने रूस से तेल खरीद में तेज़ी की है।
- वैकल्पिक समुद्री मार्ग: भारत ने सुएज़ नहर और भूमध्यसागर मार्ग का इस्तेमाल शुरू किया है।
- नए सप्लायर्स: भारत अब 40 देशों से तेल आयात कर रहा है, जबकि पहले यह संख्या 27 थी। इसमें अमेरिका, ब्राज़ील और अफ्रीका के देशों से भी आयात शामिल है।
- CNG और PNG सप्लाई: भारत ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 100% सप्लाई सुनिश्चित करने की योजना बनाई है, ताकि संकट का असर आम जनता पर कम पड़े।
ईरान का यह कदम भारत के लिए बड़ी राहत है। स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ की अहमियत को देखते हुए भारत ने कूटनीति और नौसैनिक ताकत दोनों का इस्तेमाल किया है। भारतीय जहाज़ अब सुरक्षित रूप से ऊर्जा का माल लेकर देश लौट रहे हैं। हालांकि, तनाव अभी भी जारी है और बाकी जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत और ईरान दोनों के लिए चुनौती बना हुआ है।








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