- ईरान के खिलाफ जंग में उतरने के संकेत
- पाकिस्तानी पीएम के प्रवक्ता का बयान
- ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में किया ऐलान
- सऊदी अरब के लिए जंग लड़ेगा पाकिस्तान
ईरान से विश्वासघात का एलान
जैसा की उम्मीद जतायी जा रही थी, पाकिस्तान ने इन उम्मीदों पर खरा उतरते हुए अपने इस्लामिक बिरादर मुल्क ईरान से विश्वासघात करने का ऐलान कर दिया हैI पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के प्रवक्ता मोशर्रफ ज़ैदी ने हाल ही में ब्लूमबर्ग को एक इंटरव्यू दिया है और इसमें उन्होंने खुलेआम ऐलान कर दिया है कि उनका देश पाकिस्तान सऊदी अरब के लिए जंग लड़ने को तैयार है। मोशर्रफ ज़ैदी ने कहा है कि-

इसमें कोई शक नहीं कि हम सऊदी अरब की मदद करेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए और चाहे कभी भी हो जाए। रक्षा समझौते से पहले भी, दोनों देश हमेशा एक-दूसरे के लिए मौजूद रहने के सिद्धांत पर चलते आए हैं।
-Mosharraf Zaidi, Spokesperson of Pakistani PM
इसका सीधा और आसान मतलब ये है कि सऊदी अरब पर ईरान हमला करता है तो पाकिस्तान अपने डिफेंस पैक्ट के तहत सऊदी अरब का साथ देगा। यह बयान न केवल पाकिस्तान की विदेश नीति को स्पष्ट करता है बल्कि उसे सीधे तौर पर ईरान के खिलाफ खड़ा भी करता है। पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव इस घोषणा के बाद और गहरा सकता है।
सऊदी अरब-पाकिस्तान डिफेंस पैक्ट
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा समझौता 2025 में हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे की सुरक्षा में सहयोग करने का वादा किया था। इसमें कहा गया था कि एक देश पर हमला दूसरे देश पर भी हमला माना जाएगा। अभी कुछ दिनों पहले ही पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को सऊदी अरब बुलाया गया था जहां पर उन्होंने सऊदी अरब के डिपेंस मिनिस्टर से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद बताया गया कि इस मीटिंग में ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने के लिए संयुक्त योजनाओं पर चर्चा भी हुई। पाकिस्तानी पीएम ऑफिस के प्रवक्ता मोशर्रफ ज़ैदी का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान इस समझौते को गंभीरता से लागू करने के लिए तैयार है।
ईरान के खिलाफ संभावित परिदृश्य
अगर पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ युद्ध में जाता है, तो ईरान की प्रतिक्रिया पाकिस्तान के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती है। सबसे पहले सीमा पर तनाव बढ़ेगा। पाकिस्तान और ईरान की साझा सीमा बलूचिस्तान और तुर्बत जैसे इलाकों से गुजरती है। ईरान इस सीमा पर सैन्य दबाव बढ़ाकर पाकिस्तान को आंतरिक अस्थिरता में धकेल सकता है।
दूसरा बड़ा खतरा आर्थिक दबाव का है। ईरान पाकिस्तान को गैस और ऊर्जा सप्लाई करता है। युद्ध की स्थिति में ईरान इन सप्लाई को रोक सकता है, जिससे पाकिस्तान की ऊर्जा संकट और गहरा होगा। पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है और ऐसे में ऊर्जा की कमी उसके उद्योग और घरेलू जीवन को प्रभावित करेगी।
तीसरा पहलू प्रॉक्सी वार का है। ईरान का प्रभाव पाकिस्तान के भीतर शिया समुदायों पर है। अगर युद्ध होता है तो ईरान पाकिस्तान में प्रॉक्सी ग्रुप्स को सक्रिय कर सकता है। इससे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ेंगी और देश में सांप्रदायिक तनाव भी भड़क सकता है। चौथा पहलू क्षेत्रीय गठबंधन का है। ईरान रूस और चीन जैसे देशों से समर्थन लेने की कोशिश कर सकता है। इससे पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है। पाकिस्तान पहले ही अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ जटिल संबंधों में है। अगर ईरान को रूस और चीन का समर्थन मिलता है तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलगाव का सामना करना पड़ सकता है।
रणनीतिक असर
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान को तेल और डीज़ल सप्लाई में मदद दी है, जिससे पाकिस्तान की निर्भरता और बढ़ गई है। यही कारण है कि पाकिस्तान सऊदी अरब का साथ देने के लिए मजबूर है। लेकिन ईरान के खिलाफ युद्ध पाकिस्तान के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। पश्चिम एशिया में शत्रुता बढ़ने से पाकिस्तान को घरेलू अस्थिरता का सामना करना पड़ेगा। बलूचिस्तान और कराची जैसे इलाकों में पहले से ही अस्थिरता है। अगर ईरान प्रॉक्सी ग्रुप्स को सक्रिय करता है तो पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और बिगड़ जाएगी। कूटनीतिक स्तर पर भी पाकिस्तान को नुकसान होगा। ईरान के खिलाफ खड़े होने से पाकिस्तान को शिया बहुल देशों से दूरी बनानी पड़ेगी। इससे पाकिस्तान की विदेश नीति में संतुलन बिगड़ जाएगा।
आगे क्या होगा ?
मोशर्रफ ज़ैदी का बयान पाकिस्तान को सीधे ईरान के खिलाफ खड़ा करता है। सऊदी अरब के साथ डिफेंस पैक्ट पाकिस्तान को मजबूर करता है कि वह युद्ध की स्थिति में रियाद का साथ दे। लेकिन ईरान की प्रतिक्रिया पाकिस्तान के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है—सीमा तनाव, ऊर्जा संकट, प्रॉक्सी वार और कूटनीतिक अलगाव। पाकिस्तान की यह स्थिति उसे एक कठिन मोड़ पर खड़ा करती है। एक तरफ सऊदी अरब की आर्थिक मदद और डिफेंस पैक्ट है, दूसरी तरफ ईरान का संभावित प्रतिरोध। आने वाले समय में यह देखना होगा कि पाकिस्तान इस जटिल समीकरण को कैसे संभालता है। अगर बात लड़ाई तक पहुंच गयी तो इसमें कोई शक नहीं कि ईरान अपनी मिसाइलों का रूख पाकिस्तान की तरफ ज़रूर करेगा।










