इज़रायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक घमासान खड़ा कर दिया है। दरअसल उन्होंने 25 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया एक्स पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनी एक तस्वीर साझा की, जिसमें तेल अवीव जैसे दिखने वाले शहर के ऊपर परमाणु विस्फोट का विशाल मशरूम क्लाउड दिखाई देता है। नीचे घनी आबादी वाले इलाके की इमारतें आग और विस्फोट की चपेट में नज़र आती हैं।
नेतन्याहू द्वारा साझा संदेश में ईरान से निपटने की क्षमता, ट्रंप से संबंध और नागरिकों की सुरक्षा को एक साथ चुनावी पसंद से जोड़ा गया है। विपक्ष इसे डर के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश बता रहा है। इसीलिए विवाद तस्वीर से आगे बढ़कर प्रधानमंत्री के नेतृत्व और सैन्य उपलब्धियों के दावों तक पहुँच गया है।
यह पोस्ट ऐसे समय आई है, जब इज़रायल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव होने हैं। तस्वीर के साथ साझा संदेश में ईरान को इज़रायल के अस्तित्व के लिए खतरा बताते हुए उससे निपटने को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की गई। विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को चुनावी डर में बदलने का आरोप लगाया है।
तस्वीर के साथ क्या संदेश साझा किया गया?
नेतन्याहू ने तस्वीर के साथ इज़रायली लेखक और राजनीतिक टिप्पणीकार युवाल ब्लूमबर्ग के विचार साझा किए। ब्लूमबर्ग अपनी पुस्तक द ओस्लो ट्रैप के लिए भी जाने जाते हैं, जिसमें उन्होंने ओस्लो समझौतों और इज़रायल की सुरक्षा पर उनके प्रभाव की आलोचनात्मक पड़ताल की है।
- साझा संदेश का केंद्रीय तर्क है कि ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने की स्थिति में इज़रायल की दूसरी राजनीतिक बहसें महत्वहीन हो जाएँगी।
- इसमें ईरान और उससे जुड़े क्षेत्रीय गुटों से पैदा होने वाले खतरे को प्रत्येक इज़रायली नागरिक की सुरक्षा और जीवन से जोड़ा गया।
यह तस्वीर किसी वास्तविक परमाणु विस्फोट का दृश्य नहीं है। इसे AI से तैयार किया गया है। लेकिन प्रधानमंत्री के अकाउंट से इसके प्रसारित होने और मतदान से ठीक पहले सामने आने के कारण यह विवाद का विषय बन गई।
ईरान को लेकर क्या चेतावनी दी गई?
पोस्ट में ईरान के संभावित परमाणु हथियार को ऐसी चुनौती बताया गया, जिसके सामने इज़रायल की दूसरी राजनीतिक बहसें छोटी पड़ जाएँगी। संदेश का तर्क था कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है, तो इज़रायली नागरिकों के जीवन और देश की सुरक्षा की परिस्थितियाँ बदल जाएँगी।
इसी आधार पर ईरान से जुड़ी चुनौती से निपटने को सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मिशन बताया गया। साझा संदेश में इस काम के लिए राज्य के सभी आवश्यक संसाधन लगाने की माँग की गई और राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर इस विषय पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया
ट्रंप के बचे दो वर्षों का ज़िक्र क्यों ?
इस सोशल मीडिया संदेश में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के बचे लगभग दो वर्षों को ईरान के खिलाफ काम पूरा करने के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में पेश किया गया। तर्क दिया गया कि इसके बाद अमेरिका में कैसा नेतृत्व होगा और उसका रुख क्या रहेगा, यह अनिश्चित है।
- पोस्ट में ऐसे प्रधानमंत्री की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया गया, जो ट्रंप से सीधे और लगातार बातचीत कर सके। साथ ही चेतावनी दी गई कि इस अवसर को गँवाने पर भविष्य की पीढ़ियाँ माफ नहीं करेंगी। इस तरह अमेरिकी समर्थन और नेतृत्व की व्यक्तिगत क्षमता को चुनावी फैसले से जोड़ा गया।
- इसी तर्क के साथ ईरान से जुड़ी चुनौती से निपटने के लिए राज्य के सभी आवश्यक संसाधन लगाने की बात कही गई। साझा संदेश में भविष्य की पीढ़ियों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि इस अवसर को गँवाने के लिए वे मौजूदा पीढ़ी को माफ नहीं करेंगी।
‘दूसरे होलोकॉस्ट’ की चेतावनी क्या है?
पोस्ट का सबसे विवादित हिस्सा ‘दूसरे होलोकॉस्ट’ के खतरे का उल्लेख है। साझा संदेश में मतदाताओं को चेतावनी दी गई कि ईरान का सामना करने में अक्षम नेता का चुनाव उनके और उनके परिवारों को महाविनाश के जोखिम में डाल सकता है।
- टाइम्स ऑफ इज़रायल के अनुसार, संदेश यह संकेत देता है कि इस चुनौती से निपटने में नेतन्याहू ही सक्षम हैं। इससे चुनावी अपील सीधे नागरिकों के अस्तित्व से जुड़ गई। विपक्ष ने इसी हिस्से पर आपत्ति जताते हुए प्रधानमंत्री पर राजनीतिक समर्थन के लिए विनाश का भय दिखाने का आरोप लगाया।
पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि नेतन्याहू ऐसा चित्र पेश कर रहे हैं, मानो उनके सत्ता से हटते ही इज़रायलियों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा। बेनेट ने ज़ोर दिया कि इज़रायल किसी एक राजनेता से कहीं अधिक मजबूत है।
घरेलू विवादों को लेकर क्या कहा गया ?
ईरान की चेतावनी के साथ पोस्ट में सरकार को घेरने वाले घरेलू विवादों पर भी निशाना साधा गया। इनमें कतर से जुड़े विवाद, नेतन्याहू के सहयोगी जोनातन उरिख और अति-रूढ़िवादी यहूदी पुरुषों की सैन्य भर्ती से छूट जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया।
संदेश में इन बहसों को ऐसा पर्दा बताया गया, जो ईरान के खतरे से ध्यान हटाता है। यह सवाल भी उठाया गया कि अगर मध्य इज़रायल पर परमाणु बम गिर जाएँ, तो इन विवादों की परवाह कौन करेगा।
यहीं से विवाद राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम राजनीतिक जवाबदेही की बहस तक पहुँच गया। प्रधानमंत्री द्वारा साझा संदेश में ईरान को सबसे ऊपर रखने की माँग है, जबकि विपक्ष इसे सरकार से पूछे जा रहे सवालों को पीछे धकेलने की कोशिश बता रहा है।
विपक्ष ने क्या कहा ?
डेमोक्रेट्स पार्टी के अध्यक्ष याइर गोलान ने पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने तेल अवीव पर परमाणु बम की तस्वीर प्रकाशित की है और चुनाव नज़दीक आने के साथ उन पर दबाव बढ़ रहा है। गोलान ने जनता में घबराहट फैलाने का आरोप लगाते हुए सरकार बदलने की अपील की।
वहीं, पूर्व इज़रायली सेना प्रमुख और याशार पार्टी के अध्यक्ष गादी आइज़ेनकोट ने इसे चुनाव में डर पैदा करने का परिचित तरीका बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान के खिलाफ युद्ध के उद्देश्य पूरे करने में विफल रहने के बाद नेतन्याहू अब नागरिकों को सामूहिक विनाश का भय दिखा रहे हैं।
दोनों नेताओं की प्रतिक्रिया का केंद्र तस्वीर से अधिक उसका चुनावी इस्तेमाल रहा। उनका आरोप है कि मतदान से ठीक पहले परमाणु हमले का दृश्य सामने रखकर जनता के फैसले को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
पुराने बयानों से विरोधाभास क्यों चर्चा में है?
इज़रायल हयोम ने नेतन्याहू के पुराने बयानों का क्रम सामने रखते हुए बताया कि जून 2025 के युद्ध के बाद उन्होंने परमाणु विनाश का खतरा दूर करने का दावा किया था। उन्होंने उस सैन्य अभियान को ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में पेश किया था।
- अखबार के अनुसार, 13 अक्टूबर 2026 को भी नेतन्याहू ने एक कार्यक्रम में ईरान का परमाणु कार्यक्रम समाप्त करने की बात कही थी। अब परमाणु विस्फोट की तस्वीर के साथ अस्तित्वगत खतरे की चेतावनी साझा करने से उनके पुराने और मौजूदा संदेशों के बीच अंतर पर सवाल उठ रहे हैं।
इज़रायल की 120 सदस्यीय संसद, नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटें चाहिए। देश में राष्ट्रीय स्तर पर मिले मतों के अनुपात में सीटें आवंटित होती हैं। मतदान से पहले सामने आई इस पोस्ट ने सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही की बहस को चुनाव प्रचार के केंद्र में ला दिया है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर तस्वीर को लेकर मुख्य चर्चा चुनावी डर
- अमेरिका में भी चिंता की रिपोर्ट: इज़रायल के चैनल 12 के हवाले से टाइम्स ऑफ इज़रायल ने बताया कि व्हाइट हाउस के अधिकारी इस पोस्ट से चिंतित हुए। रिपोर्ट के अनुसार, आशंका थी कि ईरान इसे आसन्न सैन्य कार्रवाई का संकेत समझकर गलत आकलन कर सकता है, जिससे हमला या तनाव बढ़ सकता है। यह मीडिया रिपोर्ट है, व्हाइट हाउस का सार्वजनिक बयान नहीं।
- यूरोपीय मीडिया में ‘डर की राजनीति’ का सवाल: इटली के ला रिपब्लिका ने इसे चुनाव के अंतिम दौर में नेतन्याहू के परमाणु खतरे वाले दाँव के रूप में प्रस्तुत किया। स्पेन के Cadena SER ने भी तस्वीर और ‘दूसरे होलोकॉस्ट’ की चेतावनी को चुनाव से पहले भय पैदा करने की रणनीति के संदर्भ में कवर किया।
- चुनाव में AI के इस्तेमाल पर बहस: दक्षिण कोरिया के Chosun ने इस घटना को इज़रायली चुनाव प्रचार में AI से तैयार सामग्री और राजनीतिक हमलों के बढ़ते इस्तेमाल से जोड़कर रिपोर्ट किया। चर्चा का सवाल यह है कि परमाणु तबाही जैसे भावनात्मक दृश्य मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए कैसे इस्तेमाल हो रहे हैं।








