यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव बेहद गंभीर होता जा रहा है। इस बीच सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती शेख सालेह बिन फौजान अल-फौजान ने सीमा पर तैनात सैनिकों से कहा है कि वे देश की रक्षा के लिए अपना जीवन कुर्बान करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने हूतियों की पूरी तरह हार की कामना करते हुए सैनिकों से अपने शासकों और सैन्य कमांडरों के आदेशों का पालन करने तथा मोर्चे पर लगातार तैयार रहने को भी कहा है।
उनके बयान में कुरान की आयतों और पैगंबर मोहम्मद से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का हवाला देते हुए देश और पवित्र स्थलों की रक्षा को धार्मिक कर्तव्य से जोड़ा गया। उन्होंने यह भी कहा कि सैनिक उन लोगों के रास्ते पर चल रहे हैं जिन्होंने पैगंबर के साथ रहते हुए उनकी रक्षा की थी
ग्रैंड मुफ्ती का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब सऊदी अरब और हूतियों के बीच पिछले कई हफ्तों से मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला तेज हो गया है। हूतियों ने सऊदी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है, जबकि सऊदी अरब ने कई मिसाइलों को रोकने और यमन में जवाबी हवाई हमले करने की बात कही है।
ग्रैंड मुफ्ती का पूरा बयान क्या है ?
ग्रैंड मुफ्ती ने हूतियों के खिलाफ अपने संदेश में उन्हें “बुराई का समूह” और “दुश्मनों की साजिश” बताया। उन्होंने हूतियों पर धार्मिक और राजनीतिक विभाजन पैदा करने तथा मुस्लिमों के पवित्र स्थलों को खतरे में डालने के आरोप भी लगाए।

सऊदी अरब की रक्षा करना, उसकी सीमाओं की रक्षा करना और जो कोई उसकी जमीन के एक इंच तक पर हाथ डालने की कोशिश करे, उसका मुकाबला करना सबसे बड़े कर्तव्यों और श्रेष्ठ इबादतों में शामिल है। इसके लिए अल्लाह की प्रसन्नता की खातिर जान और आत्मा तक कुर्बान की जा सकती है। फ्रंटलाइन पर तैनात भाइयों के लिए जरूरी है कि वे अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए लगातार तैयार रहें, सत्ता में बैठे लोगों और अपने फील्ड कमांडरों की बात मानें और आदेशों को पूरी सटीकता के साथ लागू करें। आप पैगंबर के साथियों के पदचिह्नों पर चल रहे हैं और मुसलमानों के पवित्र स्थलों की रक्षा कर रहे हैं।
Sheikh Saleh bin Fawzan Al-Fawzan, Saudi Grand Mufti
यह भी कहा कि यमन में वैध नेतृत्व के तहत सुरक्षा और स्थिरता बहाल करना एक सर्वोच्च कर्तव्य है, ताकि हमारे यमनी भाई सुरक्षा, समृद्धि और स्थिरता में रह सकें। हम अल्लाह से प्रार्थना करते हैं कि वह आपको अपनी मदद प्रदान करे, हमारे देशों और प्यारे यमन को हर नुकसान से बचाए और हूती समूह तथा उसकी मदद और समर्थन करने वालों का पूरी तरह खात्मा करे।
यानी मुफ्ती के संदेश का आधार सिर्फ सैन्य अनुशासन नहीं है। इसमें सैनिकों के कर्तव्य को धार्मिक जिम्मेदारी से भी जोड़ा गया है।
यह बयान इतना बड़ा क्यों माना जा रहा है?
शेख सालेह बिन फौजान अल-फौजान सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती हैं। वह Council of Senior Scholars और General Presidency for Scholarly Research and Ifta के प्रमुख हैं। इसलिए यह किसी सामान्य धार्मिक विद्वान का बयान नहीं है।
Council of Senior Scholars – सऊदी के वरिष्ठ इस्लामी विद्वानों की परिषद है, जो महत्वपूर्ण शरिया मामलों पर विचार करके धार्मिक फैसले/राय देती है।
General Presidency for Scholarly Research and Ifta– एक बड़ा आधिकारिक संस्थागत ढांचा है, जिसके तहत धार्मिक शोध और फतवा व्यवस्था चलती है। इसकी संरचना में Council of Senior Scholars की General Secretariat और Permanent Fatwa Committee भी शामिल हैं।
उनके बयान को सैनिकों के मनोबल और संभावित लंबे संघर्ष की तैयारी से जोड़कर देखा जा सकता है।
आखिर मुफ्ती ने यह बयान अभी क्यों दिया?
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण पिछले कुछ हफ्तों में सऊदी अरब और हूतियों के बीच सैन्य टकराव तेजी से बढ़ा है और गंभीर होता जा रहा है। इसके अलावा हूतियों ने यमन के पश्चिमी हिस्से में रणनीतिक बढ़त हासिल की है और सऊदी समर्थित यमनी सरकार की स्थिति कमजोर हुई है। इसलिए बयान का तत्काल संदर्भ सैन्य तनाव का यह नया दौर है।
| तारीख | हूतियों की कार्रवाई | सऊदी अरब पर असर |
| 14 सितंबर | खमिस मुशैत, अबहा और ताइफ में बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले | 13 नागरिक घायल, 7 घर और 2 वाहन क्षतिग्रस्त होने की सऊदी आधिकारिक जानकारी |
| 15 सितंबर | मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र की ओर ड्रोन | सऊदी एयर डिफेंस ने मक्का के दक्षिण में ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया; सऊदी अधिकारियों ने इसे पवित्र शहर के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा बताया |
| 19 सितंबर | रियाद की ओर बैलिस्टिक मिसाइल; बाइश, ताइफ, फरासन और यानबू को भी निशाना बनाने की कोशिश | रियाद की ओर आया मिसाइल इंटरसेप्ट किया गया। इसी दौरान राजधानी के पास धमाके, आग और धुएं के दृश्य सामने आए। हूतियों ने रियाद में ‘संवेदनशील ठिकानों’ और यानबू में Aramco सुविधा को निशाना बनाने का दावा किया; यानबू हमले के नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई। |
| 24 सितंबर | ताइफ और यानबू की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें | सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की जानकारी दी। GCC ने भी ताइफ और यानबू पर हमलों की निंदा की। |
इसके अलावा सितंबर 2026 में हूतियों ने यमन के पश्चिमी तट पर तेजी से बढ़त बनाकर कई रणनीतिक ठिकाने अपने कब्जे में लिए हैं। सबसे महत्वपूर्ण सफलता 10 सितंबर को मोखा (Mocha) शहर और उसके बंदरगाह पर कब्जा है। इसके बाद हूती लड़ाके बाब-अल-मंदेब की तरफ आगे बढ़े और पेरिम/मय्यून द्वीप तथा हनीश द्वीपसमूह पर भी नियंत्रण या पहुंच बनाने की रिपोर्ट सामने आई।
| हालिया सफलता | कब | हूतियों को क्या मिला? | रणनीतिक महत्व |
| मोखा पर कब्जा | 10 सितंबर | लाल सागर का महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर | सऊदी समर्थित यमनी सरकार को बड़ा झटका; पश्चिमी तट पर हूती स्थिति मजबूत |
| दक्षिण की ओर बढ़त | 10–11 सितंबर | दुबाब (Dhubab) की दिशा में आगे बढ़े | बाब-अल-मंदेब के और करीब पहुंच गए |
| पेरिम/मय्यून द्वीप तक पहुंच | 11 सितंबर | बाब-अल-मंदेब के बीच स्थित रणनीतिक द्वीप पर हूती पहुंच की रिपोर्ट | समुद्री मार्ग की निगरानी और दबाव बढ़ाने की क्षमता |
| हनीश द्वीपसमूह में बढ़त | 10–14 सितंबर | सरकारी बलों के पीछे हटने के बाद कई द्वीपों पर हूती कब्जे की रिपोर्ट | लाल सागर में हूती सैन्य स्थिति और मजबूत |
| लगभग 5,400 वर्ग किमी क्षेत्र पर दावा | सितंबर का अभियान | हूती सैन्य प्रवक्ता ने छह जिलों से सरकारी समर्थित बलों को हटाने का दावा किया | पश्चिमी तट पर तेज क्षेत्रीय विस्तार; इस दावे के सभी हिस्सों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई |
बयान के मायने क्या हैं ?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ बड़े जमीनी अभियान का अंतिम फैसला कर लिया है। लेकिन संकेत जरूर गंभीर हैं। संदेश का मुख्य उद्देश्य सैनिकों को लंबे और कठिन सैन्य टकराव के लिए मानसिक रूप से तैयार करना और देश की रक्षा को धार्मिक कर्तव्य के रूप में पेश करना दिखाई देता है।
- सैनिकों का मनोबल बढ़ाना: जान तक कुर्बान करने के लिए तैयार रहने की अपील सीधे तौर पर सैनिकों को युद्ध के लिए मानसिक रूप से तैयार करने का संदेश है।
- धार्मिक आधार देना: सऊदी क्षेत्र की रक्षा को धार्मिक कर्तव्य बताकर लड़ाई को सिर्फ सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा गया।
- हूतियों के खिलाफ सख्त रुख: हूती समूह और उसके समर्थकों की पूरी हार की बात की गई है।
- कमांड का पालन: सैनिकों को शासकों और सैन्य कमांडरों के आदेशों का पूरी सटीकता से पालन करने को कहा गया।
- यमन में लक्ष्य स्पष्ट: सऊदी समर्थित यमनी सरकार का पूरे यमन पर अधिकार बहाल करना महत्वपूर्ण दायित्व बताया गया है।
मुफ्ती के बयान में धार्मिक पहलू इतना मजबूत क्यों है?
सऊदी अरब सुन्नी इस्लाम के प्रमुख केंद्रों में से एक है और मक्का तथा मदीना जैसे इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल उसके क्षेत्र में हैं। ग्रैंड मुफ्ती ने सैनिकों की भूमिका को इन्हीं पवित्र स्थलों की सुरक्षा से जोड़ा है। उन्होंने देश की सीमा की रक्षा और आक्रमण का जवाब देने को धार्मिक कर्तव्य के रूप में पेश किया।
सऊदी अधिकारियों ने हाल के दिनों में हूतियों पर मक्का और दूसरे नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों के बीच सऊदी धार्मिक नेतृत्व की ओर से आया यह बयान संघर्ष को राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ धार्मिक सुरक्षा के मुद्दे से भी जोड़ता है। हालांकि हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज किया है।
पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा मतलब ?
ग्रैंड मुफ्ती का बयान बताता है कि सऊदी अरब मौजूदा हूती खतरे को सामान्य सीमा संघर्ष की तरह नहीं देख रहा। इसमें तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं—सऊदी क्षेत्र की रक्षा, यमन में सऊदी समर्थित सरकार की सत्ता बहाल करना और हूतियों की सैन्य क्षमता को रोकना।
हाउती हैं कौन, सऊदी से दुश्मनी क्यों?
हाउती यमन का एक सशस्त्र राजनीतिक-धार्मिक आंदोलन है, जिसका आधिकारिक नाम अंसार अल्लाह है। इसका आधार मुख्य रूप से उत्तरी यमन के जायदी शिया समुदाय में है। यह यमन के सबसे ज़्यादा आबादी वाले हिस्सों और उत्तर के ज़्यादातर हिस्से को कंट्रोल करता है।
2014 में हाउतियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और इसके बाद देश गृहयुद्ध में चला गया। सऊदी अरब ने 2015 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया, जिसका राजनीतिक आधार मुख्य रूप से सुन्नी है। यही वह बिंदु है जहां से हाउती-सऊदी संघर्ष सीधे क्षेत्रीय शक्ति संघर्ष में बदल गया।
हूतियों के लिए सऊदी अरब सिर्फ पड़ोसी देश नहीं, बल्कि यमन में उनके सबसे बड़े सैन्य विरोधियों में से एक है। दूसरी तरफ सऊदी अरब के लिए हूती मिसाइल और ड्रोन क्षमता उसकी सीमा, शहरों, तेल प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों के लिए सीधा खतरा है।
ईरान से हाउतियों का क्या रिश्ता?
हाउतियों को शिया बहुल ईरान द्वारा समर्थित संगठन बताया जाता है। लेकिन उन्हें ईरान की पूरी तरह नियंत्रित कठपुतली कहना भी सही नहीं होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक हाउती नेतृत्व के अपने स्थानीय और राजनीतिक हित हैं, जबकि ईरान उन्हें हथियार, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और खुफिया सहयोग देकर उनकी सैन्य क्षमता बढ़ाता रहा है।
- ईरानी सहायता से हाउतियों के पास बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ लंबी दूरी के ड्रोन और एंटी-शिप हथियारों की क्षमता विकसित हुई है।
- यही वजह है कि एक स्थानीय यमनी विद्रोही समूह अब सऊदी अरब के भीतर सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है।









Ye. Sub. Manavtawadi. Hai