ऑपरेशन सिंदूर से रिश्तों में आई तल्खी के बाद पहली बार भारत के विदेश मंत्री ने किया अजरबैजान का दौरा, दोनों देशों के संबंध कितने ‘रि-सेट’ ?

By Defence Detective

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Indian External Affairs Minister S Jaishankar meets Azerbaijan President Ilham Aliyev in Baku on October 23, 2026.

ऑपरेशन सिंदूर से रिश्तों में आई तल्खी के बाद पहली बार भारत के विदेश मंत्री ने किया अजरबैजान का दौरा, दोनों देशों के संबंध कितने ‘रि-सेट’ ?

पाकिस्तान का समर्थन करने पर भारत के साथ रिश्तों में आई तल्खी के बाद अजरबैजान अब नई दिल्ली के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 अक्टूबर को अजरबैजान की राजधानी बाकू में राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और उनके विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव से मुलाकात की।

बातचीत में व्यापार, निवेश, ऊर्जा और कनेक्टिविटी के साथ सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम प्रमुख मुद्दे रहे। दोनों पक्षों ने मतभेदों पर खुलकर चर्चा करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का रास्ता तलाशा।

इस दौरे की अहमियत इसलिए भी है क्योंकि अजरबैजान पाकिस्तान का करीबी रणनीतिक साझेदार है, जबकि भारत ने दक्षिण काकेशस में उसके प्रतिद्वंद्वी रहे आर्मेनिया के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया है।

इन अलग-अलग साझेदारियों के बीच बाकू में हुई बातचीत दोनों देशों के साझा आर्थिक और कूटनीतिक हितों को आगे ले जाने की कोशिश है।

भारत-अजरबैजान संबंधों में कैसे आई दूरी ?

भारत और अजरबैजान के रिश्तों में दूरी के पीछे पाकिस्तान से अजरबैजान की करीबी और इसके बीच भारत की अजरबैजान के प्रतिद्वंद्वी आर्मेनिया के साथ बढ़ती रक्षा साझेदारी जैसी वजहें रही हैं। लेकिन मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अजरबैजान के रुख ने इन मतभेदों को खुलकर सामने ला दिया। इसका असर कूटनीतिक संबंधों से आगे बढ़कर पर्यटन और भारतीय जनभावनाओं तक पहुंचा।

  • पाकिस्तान और अजरबैजान के मजबूत राजनीतिक और रक्षा संबंध हैं। अजरबैजान ने पाकिस्तान से JF-17 ब्लॉक-III लड़ाकू विमान भी खरीदे हैं। पाकिस्तान ने अजरबैजान की DEFTECH कंपनी से DT-001 निगरानी एवं हमलावर ड्रोन और F-1500 तथा F-5000 आत्मघाती ड्रोन खरीदे हैं।
  • भारत की अजरबैजान के दुश्मन आर्मेनिया से रक्षा साझेदारी मजबूत है। भारत ने आर्मेनिया को पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, ATAGS और MArG 155 मिमी तोपें, स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार तथा ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की आपूर्ति की है
  • आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच लंबे समय तक चले नागार्नो-काराबाख क्षेत्रीय संघर्ष के बैकग्राउंड में यह साझेदारी बाकू के लिए असहज करने वाला मुद्दा बना।
  • इस तरह दोनों देशों की रक्षा साझेदारियां उनके आपसी मतभेदों की एक प्रमुख वजह बन गईं।
  • मई 2025 में भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की। अजरबैजान ने भारतीय हमलों की निंदा करते हुए पाकिस्तान के साथ एकजुटता जताई। इस रुख ने संबंधों में तनाव और बढ़ा दिया।

अजरबैजान से कैसा रहा है भारत का संबंध?

भारत और अजरबैजान के संबंधों की जड़ें सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्कों में हैं। बाकू के पास स्थित प्रसिद्ध आतिशगाह मंदिर (Ateshgah Fire Temple) में देवनागरी और गुरमुखी के अभिलेख भारतीय व्यापारियों की मौजूदगी और दोनों क्षेत्रों के पुराने संपर्कों के प्रमाण हैं।

  1. सोवियत संघ के विघटन के बाद संबंध: भारत ने दिसंबर 1991 में अजरबैजान की स्वतंत्रता को मान्यता दी। इसके बाद 28 फरवरी 1992 को दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए।
  2. आर्थिक और ऊर्जा सहयोग: ऊर्जा क्षेत्र द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण आधार रहा है। भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड ने अजेरी–चिराग–गुनाशली यानी ACG तेल एवं गैस क्षेत्र और बाकू–त्बिलिसी–जेहान यानी BTC पाइपलाइन में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए 1.2 अरब डॉलर से अधिक निवेश किया है। भारत अजरबैजान से कच्चे तेल का आयात भी करता रहा है।
  3. कनेक्टिविटी में साझा हित: भारत और अजरबैजान अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के सदस्य हैं। यह परिवहन नेटवर्क भारत को ईरान के रास्ते रूस और यूरोप के बाजारों से जोड़ने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। अजरबैजान इसके पश्चिमी मार्ग की महत्वपूर्ण कड़ी है। जयशंकर के बाकू दौरे में दोनों देशों ने इस परियोजना पर समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई।
  4. तनाव के बिंदु: अजरबैजान की पाकिस्तान से करीबी और भारत की आर्मेनिया के साथ बढ़ती रक्षा साझेदारी ने राजनीतिक संबंधों में मतभेद पैदा किए। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अजरबैजान के पाकिस्तान समर्थक रुख ने तल्खी और बढ़ा दी।

अब रिश्ते सुधारने की पहल कैसे हुई ?

हालांकि रिश्तों में तल्खी के बावजदू दोनों देशों ने संवाद के रास्ते खुले रखे। अप्रैल 2026 में विदेश मंत्रालय के सचिव पश्चिम सिबी जॉर्ज ने बाकू का दौरा किया और छठे दौर की विदेश कार्यालय वार्ता हुई। इसके बाद एक सितंबर को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति अलीयेव की मुलाकात हुई। जयशंकर की ताजा यात्रा इसी बढ़ते राजनीतिक संपर्क का अगला कदम है।

राष्ट्रपति से मुलाकात में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा

जयशंकर ने राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव के साथ भारत–अजरबैजान संबंधों की समीक्षा की। बातचीत में मौजूदा सहयोग को मजबूत करने और रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा तय करने पर जोर रहा। राष्ट्रपति अलीयेव के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर रणनीतिक नजरिये से भी विचार-विमर्श हुआ।

बायरामोव ने स्वीकार किया—मतभेदों का रिश्तों पर पड़ा असर

अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव ने संयुक्त प्रेस वार्ता में स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में कई मुद्दों पर दोनों देशों की राय अलग रही है। उन्होंने कहा कि इसका असर द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग, दोनों पर पड़ा।

बायरामोव के मुताबिक, इस बार इन विषयों पर विस्तार से और खुलकर बातचीत हुई। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संवाद आगे सहयोग बढ़ाने की बुनियाद बनेगा। जयशंकर ने भी वार्ता को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा तय करने में मदद मिली है। इस तरह दोनों पक्षों ने सार्वजनिक रूप से मतभेदों को स्वीकार करने के साथ बातचीत जारी रखने पर जोर दिया।

व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर सहमति

दोनों देशों ने आपसी व्यापार और निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की। जयशंकर ने अजरबैजान के तेल एवं ऊर्जा क्षेत्र में भारतीय कंपनियों के निवेश को द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। दोनों पक्ष ऊर्जा साझेदारी को और मजबूत करने के साथ दूसरे क्षेत्रों में भी निवेश और आर्थिक सहयोग के अवसर तलाशने पर सहमत हुए।

परिवहन गलियारे और हवाई संपर्क पर जोर

अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा यानी INSTC बातचीत का प्रमुख मुद्दा रहा। भारत और अजरबैजान ने इस परियोजना पर आपसी समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों देशों के बीच चल रही दैनिक उड़ानों का उल्लेख करते हुए हवाई संपर्क के और विस्तार की संभावनाओं पर भी बात हुई।

सीमा पार आतंकवाद और साझा सुरक्षा चुनौतियों पर बात

जयशंकर और बायरामोव की बातचीत में सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा और दोनों देशों के सामने मौजूद साझा खतरों के मुद्दे उठे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की कि इन विषयों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने अपने नागरिकों की शांति, समृद्धि और सुरक्षा के लिए सहयोग बढ़ाने तथा साझा चुनौतियों से निपटने की जरूरत पर सहमति जताई।

अजरबैजान–आर्मेनिया शांति समझौते का स्वागत

जयशंकर ने अगस्त 2025 में हुए अजरबैजान–आर्मेनिया शांति समझौते का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में टिकाऊ शांति स्थापित करने का रास्ता खुलेगा। साथ ही भारत का रुख दोहराया कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए।

वैश्विक संघर्षों और उनके आर्थिक असर पर विचार-विमर्श

दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया, यूरोप और यूरेशिया के घटनाक्रमों पर चर्चा की। जयशंकर ने कहा कि जारी संघर्षों ने विकासशील देशों के सामने खाद्य, ईंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़ी चुनौतियां पैदा की हैं। उन्होंने आतंकवाद, संघर्ष और अस्थिरता को साझा खतरा बताते हुए शांति तथा समृद्धि बढ़ाने में दोनों देशों के समान हितों को रेखांकित किया।

पर्यटन, प्रशिक्षण और प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान पर चर्चा

पर्यटन, सांस्कृतिक संबंधों और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी बातचीत हुई। जयशंकर ने अजरबैजान के पेशेवरों की भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम यानी ITEC में भागीदारी फिर शुरू करने और बढ़ाने का आग्रह किया। दोनों देशों ने व्यापारिक तथा अन्य क्षेत्रों के प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान पर सहमति जताई। जयशंकर ने विदेश मंत्री बायरामोव को भारत आने का निमंत्रण भी दिया।

क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर रणनीतिक नजरिये से चर्चा

जयशंकर के दौरे में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर रणनीतिक दृष्टिकोण से भी विचार-विमर्श हुआ। राष्ट्रपति अलीयेव के साथ बातचीत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश स्वतंत्र सोच रखते हैं और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने निर्णय स्वयं लेते हैं।

विदेश मंत्रियों की बातचीत में संघर्षों का विकासशील देशों पर प्रभाव, आतंकवाद और अस्थिरता जैसे मुद्दे उठे। जयशंकर ने विवादों को बातचीत और कूटनीति से सुलझाने की भारतीय नीति दोहराई। उन्होंने शांति, प्रगति और समृद्धि को साझा हित तथा आतंकवाद, संघर्ष और अस्थिरता को साझा चुनौतियां बताया।

दक्षिण काकेशस की परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच शांति प्रक्रिया का स्वागत किया और स्थायी शांति की उम्मीद जताई। बायरामोव ने क्षेत्रीय स्थिति तथा आर्मेनिया के साथ संबंध सामान्य बनाने की प्रक्रिया से भारतीय पक्ष को अवगत कराया।

बाकू में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री से भी मुलाकात

अजरबैजान यात्रा के दौरान जयशंकर ने उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और उच्चस्तरीय बातचीत में बनी सहमतियों को समय पर लागू करने पर चर्चा की। इस बैठक ने बाकू दौरे के दौरान मध्य एशिया के साथ भारत के संपर्क को भी आगे बढ़ाया।  

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