दुश्मन के ड्रोन को बहुत तेजी से हवा में ही ढेर करने की दौड़ में जर्मनी ने बड़ी छलांग लगाई है। जर्मन डिफेंस कंपनी Quantum Systems के प्रयोगात्मक ड्रोन ‘Apex Recordhunter’ ने परीक्षण में 777 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की है। खास बात यह है कि यह ड्रोन जेट इंजन से नहीं, बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर से उड़ता है।
संभावना है कि यह दुनिया का सबसे तेज इंटरसेप्टर ड्रोन हो सकता है। इस प्रोजेक्ट का सैन्य उद्देश्य तेज रफ्तार हमलावर ड्रोन के खिलाफ अगली पीढ़ी के इंटरसेप्टर डेवलप करना है। खासतौर पर रूस के जेट संचालित ड्रोन ऐसी चुनौती बन रहे हैं, जिनके खिलाफ धीमे इंटरसेप्टर की उपयोगिता सीमित हो सकती है।
यानी इस तेज रफ्तार के पीछे रूस के हमलावर ड्रोन की चुनौती है। जेट इंजन वाले रूसी ड्रोन को रोकने के लिए ज्यादा तेज इंटरसेप्टर की जरूरत बढ़ रही है। ऐसे में जर्मन कंपनी इस परीक्षण से मिली तकनीक का इस्तेमाल ऐसे ड्रोन बनाने में करना चाहती है, जो दुश्मन के अनमैन्ड विमानों को तेजी से रोक सकें।
हालांकि, Apex अभी प्रयोगात्मक मॉडल है और इसकी रफ्तार को आधिकारिक विश्व रिकॉर्ड का दर्जा मिलना बाकी है। परीक्षण ने केवल इसकी तेज उड़ान की क्षमता दिखाई है। कंपनी के मुताबिक, स्वतंत्र विशेषज्ञों की मौजूदगी में हुई उड़ान के GPS आंकड़ों का मिलान ऑनबोर्ड फ्लाइट रिकॉर्डर से किया गया।
मारक क्षमता और तकनीकी स्पेसिफिकेशन: कितना सक्षम है Apex?
Apex Recordhunter को कंपनी की N3XT अनुसंधान एवं विकास टीम ने तैयार किया है। परीक्षण के दौरान इसने लगभग 27 सेकंड में शून्य से 777 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पकड़ी। अधिकतम गति बहुत थोड़े समय के लिए हासिल हुई, जिसके बाद पायलट ने ड्रोन धीमा करके उतारा। इसकी बनावट में कम वायु प्रतिरोध (Air Resistance / Aerodynamic Drag), शक्तिशाली इलेक्ट्रिक Propulsion (प्रणोदन) और कूलिंग पर ध्यान दिया गया है।
| तकनीकी पहलू | सार्वजनिक जानकारी |
| मॉडल | Apex Recordhunter |
| निर्माता | Quantum Systems, जर्मनी |
| विकास टीम | N3XT |
| प्रोपल्सन | बैटरी आधारित इलेक्ट्रिक |
| परीक्षण में अधिकतम गति | 777 किमी/घंटा |
| इस गति तक पहुंचने का समय | लगभग 27 सेकंड |
| मौजूदा भूमिका | तकनीक का परीक्षण करने वाला प्रोटोटाइप |
| हथियार, वारहेड और युद्धक रेंज | सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं |
इसकी मारक क्षमता का कोई निश्चित आंकड़ा अभी नहीं दिया जा सकता। उपलब्ध परीक्षण में तेज उड़ान दिखाई गई है। किसी लक्ष्य को नष्ट करने का प्रदर्शन इसमें शामिल नहीं बताया गया।
जर्मनी का यह ड्रोन किसको जवाब है?
Quantum Systems ने प्रोजेक्ट को रूस के Geran-5 जैसे जेट संचालित हमलावर ड्रोन की चुनौती से जोड़ा है। कंपनी के मुताबिक, ऐसे ड्रोन लगभग 600 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। इन्हें रोकने के लिए इंटरसेप्टर की गति और प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाना जरूरी हो रहा है।
- इंटरसेप्टर ड्रोन का काम दुश्मन के अनमैन्ड विमान को हवा में रोकना है।
- Quantum Systems अपने मौजूदा STRILA को Shahed श्रेणी के खतरों के खिलाफ कम लागत वाला विकल्प बताती है।
- विचार यह है कि छोटे हमलावर ड्रोन के खिलाफ हर बार Patriot जैसी महंगी रक्षा प्रणाली इस्तेमाल करने की जरूरत घटे।
हालांकि, गति अकेले सफलता तय नहीं करती। लक्ष्य का समय पर पता लगना, उसकी दिशा समझना और इंटरसेप्टर को सही स्थान तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।
रूस का Geran-5: –
| पहलू | क्षमता |
| भूमिका | एकतरफा हमला करने वाला ड्रोन—लक्ष्य से टकराकर विस्फोट |
| मारक दूरी | लगभग 950 किलोमीटर तक |
| वारहेड का वजन | 90 किलोग्राम |
| क्रूज गति | 450–600 किमी/घंटा |
| उड़ान अवधि | 2 घंटे तक |
| अधिकतम उड़ान ऊंचाई | 6,000 मीटर तक |
| इंजन | TELEFLY TF-TJ2000A टर्बोजेट |
| नेविगेशन | इनर्शियल और Kometa-M12 एंटी-जैमिंग सैटेलाइट नेविगेशन |
| अधिकतम टेकऑफ वजन | 850 किलोग्राम |
विश्व रिकॉर्ड की मुहर क्यों नहीं लगी?
कंपनी ने साफ किया है कि 777 किमी/घंटा वाली उड़ान रिकॉर्ड प्रयास का पहला चरण था। आधिकारिक रिकॉर्ड के लिए विपरीत दिशा में दूसरी उड़ान भी जरूरी है। इससे हवा के अनुकूल या प्रतिकूल बहाव के असर को संतुलित किया जाता है।
Quantum Systems के अनुसार, जून 2026 के आंतरिक परीक्षण में Apex ने 699 किमी/घंटा हासिल किए थे। ताजा परीक्षण में उसने अपना आंकड़ा 78 किमी/घंटा बढ़ाया है। लेकिन एक दिशा में दर्ज अधिकतम गति और प्रमाणित रिकॉर्ड को समान नहीं माना जा सकता।
इंटरसेप्टर ड्रोन में भारत, चीन और पाकिस्तान कहां ?
दुश्मन के ड्रोन को हवा में रोकने के लिए भारत, चीन और पाकिस्तान अपने इंटरसेप्टर डेवलप कर रहे हैं। भारत की Apollyon Dynamics का आहुति Mk-II परीक्षण में 498 किमी/घंटा की गति दर्ज कर चुका है। चीन का H-07 कम दूरी पर तेज प्रतिक्रिया और स्वचालित निशानेबाजी के लिए विकसित किया गया है। पाकिस्तान ने I-402 इंटरसेप्टर को रडार से जोड़ने वाला P-905 सिस्टम पेश किया है।
| तुलना का पहलू | भारत: आहुति Mk-II | चीन: H-07 | पाकिस्तान: I-402 / P-905 |
| निर्माता | Apollyon Dynamics | Hubei Shengying Technology | Heavy Industries Taxila |
| मुख्य भूमिका | दुश्मन ड्रोन को रोकने वाला तेज क्वाडरोटर इंटरसेप्टर | कम दूरी पर दुश्मन ड्रोन को नष्ट करना | रडार से जुड़े इंटरसेप्टर के जरिए ड्रोन रोकना |
| गति | 498 किमी/घंटा, परीक्षण में दर्ज | निर्माता की वेबसाइट पर 300 किमी/घंटा तक | तुलनीय सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं |
| गाइडेंस | अंतिम चरण में स्वचालित लक्ष्य साधना | AI आधारित लक्ष्य पहचान और स्वचालित ट्रैकिंग | P-905 में OR-503 रडार और I-402 इंटरसेप्टर का संयोजन |
| नेविगेशन/सेंसर | GNSS; सिग्नल न मिलने पर INS का सहारा | कैमरा और AI आधारित गाइडेंस | रडार आधारित लक्ष्य खोज |
| वारहेड/पेलोड | सार्वजनिक उत्पाद पेज पर वजन स्पष्ट नहीं | निर्माता के अनुसार 300 ग्राम विस्फोटक पेलोड | सार्वजनिक विवरण में स्पष्ट नहीं |
| प्रमुख विशेषता | कार्बन फाइबर ढांचा; जमीन, जहाज या हवा से लॉन्च का विकल्प | सीधे टकराव या हवा में विस्फोट से लक्ष्य रोकने का विकल्प | लक्ष्य खोजने वाले सेंसर और इंटरसेप्टर को एक सिस्टम में जोड़ना |
| सार्वजनिक स्थिति | निर्माता के अनुसार गति को India Book of Records की मान्यता | निर्माता |
क्या Apex दुनिया का सबसे तेज ड्रोन है?
Apex को सभी श्रेणियों में दुनिया का सबसे तेज ड्रोन नहीं कहा जा सकता। जर्मनी के इस बैटरी संचालित प्रयोगात्मक ड्रोन ने परीक्षण में 777 किलोमीटर प्रति घंटे की चौंकाने वाली गति हासिल की है, लेकिन इसका आधिकारिक रिकॉर्ड बाकी है।
- Guinness की सूची में बैटरी संचालित RC क्वाडकॉप्टर का रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के Luke और Mike Bell के नाम है। इसने 11 दिसंबर 2025 को 657.59 किमी/घंटा की गति दर्ज की थी।
- चीन के Xu Yang ने 3 सितंबर 2026 को 500.01 किमी/घंटा का रिकॉर्ड बनाया, लेकिन वह अलग माइक्रो क्वाडकॉप्टर श्रेणी में है।
वहीं, अमेरिका का मानवरहित शोध विमान NASA X-43A वर्ष 2004 में Mach 9.6 तक पहुंच चुका है। वह स्क्रैमजेट संचालित हाइपरसोनिक विमान था, इसलिए उसकी तुलना छोटे इलेक्ट्रिक ड्रोन से सीधे नहीं की जा सकती। Apex की उपलब्धि बैटरी से चलने वाले तेज ड्रोन की तकनीक में है।
भारत में ‘साउंड बैरियर’ पार करने की तैयारी
भारत की Green Aero Propulsion अपने ‘अग्निपंख’ (AgniPankh) ट्रांसोनिक ड्रोन पर काम कर रही है। कंपनी इंजन, एयरफ्रेम और एवियोनिक्स खुद विकसित कर रही है और आगे सुपरसोनिक मानवरहित प्लेटफॉर्म बनाने का लक्ष्य रखती है।
हालांकि, अभी साउंड बैरियर पार करने वाली उड़ान का सार्वजनिक प्रमाण नहीं है। अक्टूबर में इसके निवेशक Antler ने बताया था कि ट्रांसोनिक एयरफ्रेम तैयार है और पहली उड़ान का इंतजार कर रहा है।
हाल में 800 किमी/घंटा से अधिक गति वाली जिस भारतीय परियोजना की चर्चा हुई थी, वह संभवतः JSR Dynamics का जेट संचालित स्ट्राइक ड्रोन था। उसके बारे में प्रसारित विवरणों में 900 किलोमीटर प्रति घंटे अधिकतम गति, 1,000 किलोमीटर रेंज और 27–50 किलोग्राम वारहेड के आंकड़े दिए गए थे। लेकिन इन आंकड़ों का आधिकारिक परीक्षण विवरण नहीं मिला है। इसके अलावा यह लक्ष्य पर हमला करने वाला स्ट्राइक ड्रोन बताया गया है। इसे Apex जैसे इंटरसेप्टर के समान नहीं रखना चाहिए।








