भारत और बेल्जियम ने रक्षा सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में 10 समझौतों और सहयोग पहलों पर सहमति बनी है। इनका फोकस केवल हथियार खरीदने पर नहीं, बल्कि भारत में संयुक्त उत्पादन, तकनीकी सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और रक्षा उद्योगों को जोड़ने पर है।
प्रधानमंत्री डी वेवर 2 से 4 सितंबर 2026 तक भारत के दौरे पर हैं। उनके साथ बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन और बेल्जियम की रक्षा कंपनियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी आया है। करीब 15 बेल्जियम की रक्षा कंपनियां इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं।
इस पूरी कवायद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत और बेल्जियम अब अपने संबंधों को पारंपरिक सरकारी सहयोग से आगे ले जाकर Defence Industrial Partnership में बदलना चाहते हैं। भारत-बेल्जियम रक्षा सहयोग का नया मॉडल केवल हथियार खरीदने वाला मॉडल नहीं है। इसका लक्ष्य साझा उत्पादन, तकनीक, प्रशिक्षण, R&D और वैश्विक बाजार के लिए निर्माण है।
यानी बेल्जियम के लिए भारत सिर्फ एक बड़ा रक्षा बाजार नहीं, बल्कि एक संभावित manufacturing और technology partner बन रहा है। वहीं भारत के लिए बेल्जियम यूरोपीय रक्षा तकनीक और औद्योगिक नेटवर्क तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण द्वार बन सकता है।
बेल्जियम ने गुरुवार को भारत को यह भी भरोसा दिलाया कि वह रक्षा उपकरणों या टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पाकिस्तान के साथ सहयोग नहीं बढ़ाएगा।
बेल्जियम के 70 मिमी रॉकेट का उत्पादन भारत में
इस साझेदारी की सबसे दिलचस्प परियोजनाओं में से एक बेल्जियम के 70 मिमी रॉकेट का भारत में उत्पादन है। बेल्जियम की Thales Belgium इन रॉकेट प्रणालियों से जुड़ी है और भारत में इन्हें Kalyani Strategic Systems के साथ मिलकर असेंबल किया जाएगा। भारतीय सप्लायर भी उत्पादन में शामिल होंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक पूरी तरह भारत में निर्मित यह पहला रॉकेट 2027 की शुरुआत में तैयार होने की उम्मीद है।
इसका फायदा केवल भारतीय सेना या अन्य भारतीय सुरक्षा बलों को ही नहीं होगा। भारत में उत्पादन क्षमता विकसित होने से भविष्य में इन प्रणालियों को दूसरे देशों के लिए भी बनाया जा सकता है।
Thales Belgium का 70mm रॉकेट का एक पूरा परिवार है। विश्वसनीय आधिकारिक स्रोतों और मीडिया ब्रीफिंग के अनुसार, यह समझौता किसी नए ‘मॉडल’ के लिए नहीं, बल्कि इस पूरे 70mm रॉकेट प्लेटफॉर्म के ‘पूर्ण स्थानीयकरण’ (Full Localization & Indigenous Production) के लिए है
| सिस्टम | प्रकार | मुख्य बात |
|---|---|---|
| FZ275 LGR | Laser-guided rocket | Semi-Active Laser guidance; precision strike |
| FZ90 | Unguided 70mm rocket | पारंपरिक air-to-ground rocket system |
| FZ71 | HE warhead | High-Explosive वारहेड |
| FZ319 | HE/anti-materiel warhead | अलग प्रभाव/लक्ष्य के लिए |
| FZ181 | Flash-signature warhead | विशेष प्रभाव वाला warhead |
| FZ120 | Inert practice | प्रशिक्षण के लिए, explosive नहीं |
- FZ275 LGR (70mm Laser Guided Rocket), Thales का 70 मिमी Semi-Active Laser Guided Rocket है। Thales और भारत के बीच इसके लिए पहले से Make-in-India सहयोग मौजूद है। 2023 में Thales और BDL ने FZ275 LGR के भारतीय उत्पादन/ग्लोबल सप्लाई चेन में भागीदारी का समझौता किया था।
- इसके अलावा 2024 में Thales और Adani Defence ने भारत में FZ275 LGR और FZ90 unguided 70mm rocket के उत्पादन के लिए समझौता किया था।
ये दोनों समझौते मुख्य रूप से ‘सिस्टम इंटीग्रेशन’ (System Integration) और आंशिक पुर्जों की सप्लाई चेन का हिस्सा बनने से जुड़े थे। इसमें मुख्य रॉकेट तकनीक और कोर कंपोनेंट्स बेल्जियम से ही आने थे।
नई डील में भारतीय सप्लायर्स अब वास्तविक उत्पादन प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे, जिससे साल 2027 की शुरुआत तक भारत में पूरी तरह से निर्मित (Entirely Produced) पहला रॉकेट तैयार किया जा सके। यह केवल असेंबली नहीं, बल्कि रॉकेट के कच्चे माल और पार्ट्स की लोकल सोर्सिंग के लिए एक पूरा मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने का सौदा है।
FZ275 LGR — 70mm Laser-Guided Rocket
| स्पेसिफिकेशन | विवरण | स्पेसिफिकेशन | विवरण |
|---|---|---|---|
| निर्माता | Thales Belgium | देश | 🇧🇪 बेल्जियम |
| प्रकार | 70mm Laser-Guided Rocket | कैलिबर | 70 mm (2.75 inch) |
| लंबाई | लगभग 1.8 मीटर | वजन | 12.7 किग्रा |
| गाइडेंस | Semi-Active Laser (SAL) | मारक दूरी | 1.5–7 किमी |
| सटीकता | CEP <1 मीटर @ 6 किमी | वारहेड | High-Explosive (HE) |
| वारहेड वजन | लगभग 4.1 किग्रा | कंट्रोल सिस्टम | 4 Folding Canards |
| फ्यूज | Impact Fuze | रॉकेट मोटर | FZ276 |
| मुख्य लक्ष्य | सॉफ्ट/हल्के लक्ष्य, हल्के बख्तरबंद वाहन, रडार व एयर-डिफेंस साइट | लॉन्च प्लेटफॉर्म | हेलीकॉप्टर और 70mm रॉकेट लॉन्चर |
लेज़र-गाइडेड रॉकेट (LGR) थेल्स (Thales) के 70mm/2.75 इंच रॉकेट सिस्टम का हिस्सा है, जिसका इस्तेमाल जर्मनी, भारत और स्पेन समेत 50 से ज़्यादा देशों की सेनाएँ करती हैं।
हर साल 100 मिलियन राउंड गोला-बारूद
डील का दूसरा बड़ा हिस्सा ammunition manufacturing है। बेल्जियम की New Lachaussee और Tembo Classic Engineering भारत में एक ऐसी उत्पादन लाइन स्थापित करने में सहयोग करेंगी, जिसकी क्षमता लगभग 100 मिलियन राउंड प्रति वर्ष बताई गई है। इसमें दो कैलिबर के गोला-बारूद के लिए पूरी उत्पादन लाइन और दो अन्य कैलिबर के लिए टूलिंग शामिल होगी।
- इस परियोजना की अनुमानित कीमत 50 मिलियन यूरो है और डिलीवरी 2028 तथा 2029 के लिए निर्धारित बताई गई है।
- भारत के लिए इसका महत्व इसलिए बड़ा है क्योंकि आधुनिक युद्ध में मिसाइलों और अत्याधुनिक हथियारों के साथ-साथ बड़ी मात्रा में पारंपरिक गोला-बारूद की उपलब्धता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
नौसेना को कैसे मिलेगा बड़ा फायदा ?
भारत-बेल्जियम सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा naval mine-countermeasure क्षमता है। बेल्जियम की Exail Belgium भारत में Larsen & Toubro द्वारा बनाए जा रहे mine-countermeasure vessels के लिए autonomous toolboxes उपलब्ध कराएगी। शुरुआती चरण में 12 जहाजों के लिए सहयोग है, जबकि भविष्य में यह कार्यक्रम 59 जहाजों तक बढ़ सकता है।
इसके अलावा दोनों देश autonomous maritime systems, underwater robotics और advanced sensors जैसी तकनीकों पर भी सहयोग तलाश रहे हैं। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंद महासागर में समुद्री यातायात, बंदरगाहों, समुद्र के नीचे बिछी पाइपलाइनों और डेटा केबलों की सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
FN Herstal के हथियार और एंटी-ड्रोन तकनीक
बेल्जियम की प्रसिद्ध हथियार कंपनी FN Herstal और Kalyani Strategic Systems के बीच एक संभावित संयुक्त उत्पादन केंद्र की योजना भी सामने आई है। यह केंद्र FN के हथियारों और counter-drone systems के उत्पादन से जुड़ा होगा। यानी भारत को छोटे हथियारों के साथ-साथ तेजी से बढ़ते ड्रोन खतरे से निपटने वाली तकनीकों में भी बेल्जियम की विशेषज्ञता मिल सकती है।
इसके अलावा बेल्जियम की Pitagone और भारतीय Krishna Allied के बीच मोबाइल सुरक्षा अवरोधों के निर्माण के लिए संयुक्त उपक्रम की योजना है। ये सिस्टम वाहन आधारित हमलों से महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में उपयोगी हो सकते हैं।
Zorawar और Arjun टैंक पर सहयोग
भारत-बेल्जियम रक्षा साझेदारी केवल नए हथियारों तक सीमित नहीं है। बेल्जियम की OIP Sensor Systems और India Optel के बीच भारतीय Arjun Main Battle Tank के लिए electro-optical systems पर सहयोग जारी है।
Electro-Optical (EO) System को आसान भाषा में टैंक की “आंखें और निशाना लगाने वाला सिस्टम” समझ सकते हैं। इसमें कैमरा, थर्मल इमेजर, लेजर रेंजफाइंडर और दूसरे सेंसर मिलकर दिन-रात लक्ष्य को पहचानने, उसकी दूरी मापने और तोप को सटीक निशाना लगाने में मदद करते हैं।
वहीं John Cockerill Defense भारत के स्वदेशी Zorawar Light Tank के लिए turret उपलब्ध कराने की दौड़ में एक प्रमुख उम्मीदवार है। Zorawar को विशेष रूप से ऊंचाई वाले इलाकों में संचालन को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है।
Turret टैंक के ऊपर लगा हुआ वह घूमने वाला बख्तरबंद हिस्सा होता है, जिसमें मुख्य तोप और उससे जुड़े हथियार/फायर-कंट्रोल सिस्टम लगे होते हैं। आसान भाषा में कहें तो टैंक का वह ऊपरी हिस्सा, जो लक्ष्य की दिशा में घूमकर गोली चलाता है, turret कहलाता है।
इसके अलावा बेल्जियम की तकनीकी कंपनियां Bharat Electronics Limited (BEL) के साथ एयर डिफेंस कार्यक्रमों में भी सहयोग कर रही हैं। Anglo Belgian Corporation और Kirloskar Oil Engines के बीच भविष्य के नौसैनिक इस्तेमाल के लिए 6 मेगावाट marine diesel engine पर भी बातचीत चल रही है।
कैसे रहे हैं भारत-बेल्जियम रक्षा संबंध ?
भारत और बेल्जियम के रिश्ते नए नहीं हैं। बेल्जियम स्वतंत्र भारत के साथ 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले शुरुआती यूरोपीय देशों में शामिल था। दोनों देशों के संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक सहयोग और लोगों के बीच संपर्क पर आधारित रहे हैं।
दोनों देशों के बीच प्रथम विश्व युद्ध की ऐतिहासिक विरासत भी जुड़ी है। बेल्जियम के Flanders Fields में लड़ते हुए 9,000 से अधिक भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डी वेवर ने अपनी मुलाकात में इस इतिहास को भी याद किया।
हालांकि लंबे समय तक दोनों देशों के संबंधों में व्यापार, हीरा उद्योग, फार्मास्यूटिकल्स और तकनीक का स्थान रक्षा क्षेत्र से अधिक महत्वपूर्ण रहा। अब परिस्थितियां बदल रही हैं।
मार्च 2025 में बेल्जियम की Princess Astrid के नेतृत्व में भारत आए आर्थिक मिशन के दौरान भी रक्षा उद्योग सहयोग पर चर्चा हुई थी।
इसके बाद जुलाई 2026 में दोनों देशों ने अपना पहला India-Belgium Strategic Dialogue शुरू किया। इसमें रक्षा, सुरक्षा, तकनीक, व्यापार और कनेक्टिविटी को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के हिस्से के रूप में आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
बेल्जियम को भारत के साथ डिफेंस डील की जरूरत क्यों?
यह सवाल महत्वपूर्ण है कि भारत तो लगातार अपने रक्षा उत्पादन को बढ़ा रहा है, लेकिन बेल्जियम के लिए भारत इतना महत्वपूर्ण क्यों हो गया है?
इसका पहला कारण यूरोप का बदलता सुरक्षा माहौल है। यूक्रेन युद्ध ने यूरोपीय देशों को यह दिखाया है कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में गोला-बारूद, हथियार और औद्योगिक उत्पादन क्षमता कितनी महत्वपूर्ण होती है।
ऐसे समय में भारत जैसा बड़ा औद्योगिक आधार बेल्जियम की कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है। भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार, कुशल इंजीनियरिंग श्रमबल और तेजी से बढ़ता रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम है।
दूसरा फायदा बेल्जियम को नया निर्यात आधार मिलने का है। भारत में उत्पादन करके बेल्जियम की कंपनियां केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए भी भारत को manufacturing hub के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं। 70 मिमी रॉकेट परियोजना में यही मॉडल दिखाई देता है।
तीसरा पहलू यूरोप और हिंद-प्रशांत की बढ़ती रणनीतिक कड़ी है। बेल्जियम अब भारत के साथ समुद्री सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक और महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सहयोग बढ़ाना चाहता है।
भारत को क्या मिलेगा?
भारत के लिए सबसे बड़ा फायदा technology + manufacturing scale का है। बेल्जियम छोटी लेकिन उच्च-तकनीकी रक्षा कंपनियों वाला देश है। भारत के पास विशाल औद्योगिक आधार और बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता है। यदि दोनों क्षमताएं साथ आती हैं तो भारत को ऐसी तकनीक मिल सकती है जिसे यहां बड़े पैमाने पर बनाया जा सके।
दूसरा फायदा विदेशी सप्लाई पर निर्भरता कम करना है। रॉकेट और गोला-बारूद का भारत में उत्पादन युद्ध के समय supply-chain resilience बढ़ाएगा।
तीसरा फायदा भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का है। बेल्जियम की कंपनियों के साथ संयुक्त उत्पादन भारतीय रक्षा उद्योग को यूरोपीय सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद कर सकता है।
पाकिस्तान के साथ क्या हैं बेल्ज्यिम के रक्षा संबंध ?
बेल्जियम और पाकिस्तान के बीच सैन्य संपर्क मुख्यतः defence industry, सैन्य प्रशिक्षण और सुरक्षा सहयोग के स्तर पर रहा है। पाकिस्तान की सैन्य जरूरतों में बेल्जियम से जुड़े छोटे हथियार और हथियार प्रणालियां दिखाई देती हैं।
| अवधि/समय | सहयोग का क्षेत्र | क्या जानकारी मिलती है? |
|---|---|---|
| दशकों से | Small Arms | बेल्जियम की FN Herstal के हथियार पाकिस्तान के सुरक्षा/सैन्य ढांचे में रहे हैं |
| 2000s–2010s | Assault rifles / small arms | FN के F2000 जैसे हथियार पाकिस्तान के Special Service Wing/सुरक्षा बलों से जुड़े रहे हैं |
| बाद के वर्षों में | Small arms & ammunition ecosystem | FN Herstal के हथियार/गोला-बारूद श्रेणी के उत्पादों से पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को सीमित स्तर पर लाभ |
| 2026 तक | Defence-industrial relationship | व्यापक संयुक्त उत्पादन या बड़े प्लेटफॉर्म का कोई प्रमुख बेल्जियम-पाकिस्तान कार्यक्रम सामने नहीं आया |








