Breaking : मिडिल ईस्ट में बवाल बढ़ा, UAE का OPEC और OPEC+ से निकलने का ऐलान

By Alok Ranjan

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59 साल बाद UAE एग्जिट

मिडिल ईस्ट की तेल वाली सियासत की धार एकाएक बहुत तेज़ हो गयी है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1 मई 2026 से ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज़ (OPEC और OPEC+) से बाहर निकलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यूएई ने 1967 में अबू धाबी के माध्यम से OPEC की सदस्यता ली थी और 1971 में UAE के गठन के बाद भी यह सदस्य बना रहा। पिछले पाँच दशकों में यूएई ने OPEC के साथ मिलकर वैश्विक तेल बाज़ार की स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उत्पादन कोटा तय करने, कीमतों को नियंत्रित करने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में यूएई की भूमिका अहम रही है। UAE के मुताबिक यह कदम केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं है बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में एक नई रणनीतिक दिशा का संकेत है। यूएई ने यह निर्णय अपने राष्ट्रीय हित, दीर्घकालिक ऊर्जा दृष्टि और बदलते वैश्विक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए लिया है।

UAE ने इतना बड़ा फैसला क्यों लिया ?

यूएई का यह कदम कई रणनीतिक और आर्थिक कारणों पर आधारित है, जिसमें पहला है राष्ट्रीय हित। यूएई की लीडरशिप का मानना है कि उत्पादन नीति और भविष्य की क्षमता की समीक्षा के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। दूसरा कारण है उर्जा निवेश, जिसमें घरेलू तेल, गैस, नवीकरणीय और लो-कार्बन समाधानों में निवेश को तेज़ी से बढ़ाना शामिल है। इसके अलावा बाज़ार की बदलती ज़रूरतों के अनुसार अधिक लचीला और प्रतिस्पर्धी बनना भी एक वजह है। साथ ही ऑयल मार्केट में स्थिरता लाने की भी कोशिश है, यूएई के मुताबिक वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता, सस्ती आपूर्ति और टिकाऊ विकास को प्राथमिकता देना उसका लक्ष्य है। UAE की तरफ से जारी आधिकारिक संदेश में कहा गया है कि

“हमने संगठन में रहते हुए महत्वपूर्ण योगदान और बलिदान दिए। लेकिन अब समय आ गया है कि हम अपने राष्ट्रीय हित और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की ज़रूरतों पर ध्यान केंद्रित करें।”

वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर असर

यूएई का OPEC से बाहर निकलना वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर गहरा असर डाल सकता है। यूएई अब स्वतंत्र रूप से उत्पादन बढ़ा या घटा सकेगा। अतिरिक्त उत्पादन बाज़ार में आने से तेल की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। यूएई जैसे बड़े उत्पादक देश के बाहर जाने से OPEC की सामूहिक शक्ति कमजोर होगी। OPEC+ में संतुलन गड़बड़ा सकता है क्योंकि रूस और अन्य गैर-OPEC देशों के साथ बने गठबंधन पर भी असर पड़ेगा। हालांकि यूएई ने स्पष्ट किया है कि उसकी उत्पादन नीति जिम्मेदारी और बाज़ार स्थिरता पर आधारित रहेगी। देश ऊर्जा वैल्यू चेन में निवेश जारी रखेगा – तेल, गैस, नवीकरणीय और लो-कार्बन तकनीक। यह कदम यूएई को बाज़ार की बदलती ज़रूरतों के अनुसार अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा और दीर्घकालिक ऊर्जा संक्रमण में योगदान देगा।

OPEC और OPEC+ की भूमिका

OPEC और OPEC+ वैश्विक तेल बाज़ार को नियंत्रित करने वाले सबसे प्रभावशाली समूह हैं। OPEC की स्थापना 1960 में हुई थी, जबकि OPEC+ 2016 में बना। OPEC देशों के पास दुनिया के लगभग 80% प्रमाणित तेल भंडार हैं। OPEC+ देशों का संयुक्त उत्पादन वैश्विक तेल बाज़ार का लगभग 40% से अधिक हिस्सा है। यूएई का बाहर निकलना इन संगठनों की शक्ति और संतुलन पर असर डालेगा।

OPEC (ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज़)

  • स्थापना: 14 सितंबर 1960, बगदाद (इराक) में।
  • मुख्यालय: वियना, ऑस्ट्रिया।
  • सदस्य देश (2026 तक): अल्जीरिया, इक्वेटोरियल गिनी, गैबॉन, ईरान, इराक, कुवैत, लीबिया, नाइजीरिया, रिपब्लिक ऑफ कांगो, सऊदी अरब, वेनेज़ुएला।
  • पूर्व सदस्य: अंगोला, इक्वाडोर, इंडोनेशिया, क़तर, और अब यूएई (1 मई 2026 से बाहर)।

भूमिका:

  • वैश्विक तेल उत्पादन और कीमतों पर असर डालना।
  • सदस्य देशों के बीच उत्पादन कोटा तय करना।
  • ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता पर सहयोग करना।
  • महत्व: OPEC देशों के पास दुनिया के लगभग 80% प्रमाणित तेल भंडार हैं, जिनमें से मध्य पूर्व अकेले 67% से अधिक का मालिक है।

OPEC+ (OPEC प्लस)

  • स्थापना: 2016 में, जब OPEC ने रूस और अन्य गैर-OPEC देशों के साथ मिलकर एक बड़ा गठबंधन बनाया।
  • सदस्य: OPEC के 12 सदस्य + 10 गैर-OPEC देश (जैसे रूस, कज़ाखस्तान, मेक्सिको, अज़रबैजान आदि)।

उद्देश्य:

  • तेल उत्पादन और कीमतों को स्थिर रखना।
  • वैश्विक बाज़ार में मांग-आपूर्ति संतुलन बनाए रखना।
  • बड़े पैमाने पर उत्पादन कटौती या वृद्धि के फैसले लेना।

महत्व:

  • OPEC+ देशों का संयुक्त उत्पादन वैश्विक तेल बाज़ार का लगभग 40% से अधिक हिस्सा है।
  • यह समूह 2016 से लगातार उत्पादन कटौती और बढ़ोतरी के फैसले लेकर कीमतों को नियंत्रित करता रहा है।

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