बढ़ती महंगाई से पाकिस्तानियों की ज़िंदगी मुहाल
पाकिस्तान के बाज़ारों में आग लगी है आग। डीज़ल-पेट्रोल और बिजली के साथ-साथ साग-सब्जी, फल और अनाज तक के दाम अब आसमान छूने लगे हैं। पाकिस्तान में महंगाई 75 हफ्तों के सबसे हाई-पॉइन्ट पर पहुंच गई है। 75 हफ्ते यानी करीब 1 साल 5 महीने- SPI यानी सेंसेटिव प्राइस इंडिकेटर ने बताया है कि 16 अप्रैल को समाप्त हुए हफ्ते के लिए साल-दर-साल के हिसाब से 12.16% की बढ़ोतरी हुई है। ये डेटा पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स और Topline Research के अनुमानों के आधार पर तैयार किया गया है। लेकिन इससे ठीक पहले 13 अप्रैल को अरब न्यूज़ ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि पाकिस्तान में महंगाई 21 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। मार्च में पाकिस्तान का इन्फ्लेशन रेट यानी महंगाई दर 7.30% रहा। अब कायदे से देखा जाए तो पाकिस्तान की पब्लिक को इस डेटा से क्या मतलब है? उसे मतलब तो डीज़ल-पेट्रोल का बढ़े हुए दाम से है। उसे मतलब तो रोज़ाना बढ़ती जा रही सब्जियों की कीमतों से है।तो पाकिस्तान से आ रही रिपोर्ट्स ही बता रही है कि वहां महंगाई का क्या हाल है।आसमान छूती सब्जियों के दाम ने पाकिस्तानियों की जेब पर डाका डाल दिया है। पाकिस्तानी पंजाब में सरकार ने सब्जियों और सामान के रेट फिक्स कर दिये हैं लेकिन हकीकत ये है कि ये रेट केवल सरकारी पोस्टरों तक में ही सीमित रह गये हैं, मार्केट में हर चीज़ के दाम उस फिक्स रेट से ज़्यादा ही हैं। सब्जियों, अंडे और चिकन जैसे सामान के महंगे होने की बड़ी वजह डीज़ल-पेट्रोल के दाम का बढ़ना भी है।
- पेट्रोल PKR 399.86/लीटर
- डीज़ल PKR 399.58/लीटर
पाकिस्तान में भुखमरी वाले हालात
2026 की Global Report on Food Crises (GRFC) ने पाकिस्तान को उन टॉप 10 देशों में रखा है जहां खाने का बेहद गंभीर संकट है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान को अफगानिस्तान, बांग्लादेश, कांगो, म्यांमार, नाइजीरिया, दक्षिण सूडान, सूडान, सीरिया और यमन के साथ उन देशों में रखा गया है जहाँ भूख की स्थिति सबसे गंभीर है। GRFC की रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान में साल 2025 में 1.1 करोड़ लोग (11 million) से ज्यादा लोगों के पास खाने का बड़ा संकट था।
| डेयरी और पोल्ट्री (Dairy & Poultry) | अनाज और रसोई का सामान (Grains & Kitchen Essentials) | सब्जियां और फल (Vegetables & Fruits) |
|---|---|---|
| दूध (Milk): ₹200 से ₹240 प्रति लीटर (बाजार दर), जबकि सरकारी रेट ₹170 है। | आटा (Wheat Flour): 5 किलो का पैकेट लगभग ₹360 से ₹600 के बीच मिल रहा है। | टमाटर (Tomatoes): ₹120 से ₹160 प्रति किलो (खुदरा बाजार में)। |
| दही (Yogurt): ₹220 से ₹250 प्रति किलो। | चावल (Basmati Rice): ₹325 से ₹340 प्रति किलो। | प्याज (Onions): ₹80 से ₹150 प्रति किलो। |
| अंडे (Eggs): ₹335 – ₹341 प्रति दर्जन (लगभग ₹30-40 का एक अंडा)। | चीनी (Sugar): ₹150 से ₹200 प्रति किलो। | आलू (Potatoes): ₹30 से ₹120 प्रति किलो (गुणवत्ता और क्षेत्र के आधार पर)। |
| चिकन (Chicken Meat): ₹650 से ₹700 प्रति किलो। | दालें (Pulses): चना दाल ₹575, मसूर दाल ₹390 और मूंग दाल ₹400 प्रति किलो के करीब है। | सेब (Apples): ₹400 से ₹600 प्रति किलो। |
| मटन (Mutton): लगभग ₹2000 प्रति किलो। | तेल (Cooking Oil): ₹600 प्रति किलो। |
पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमत ने बढ़ायी महंगाई
तेल के बढ़ते दाम का सीधा असर मार्केट पर पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो गया है। सामान को एक जगह से दूसरी जगह लाना-ले जाना महंगा पड़ रहा है…नतीजा सब्जियों और दूसरे सामान के दाम भी बढ़ गये हैं- हालत ये है कि बाज़ार खाली पड़े हुए हैं- लोग सब्जी खरीदने आ ही नहीं रहे हैं…बढ़ती महंगाई ने लोगों के खर्च करने की क्षमता छीन ली है। इससे रोज़ कमाने-खाने वालों पर सबसे ज़्यादा असर पड़ा है। लोअर मीडिल क्लास और मजदूर तबके की हालत सबसे ख़राब है।महंगाई के मारे पाकिस्तानियों को आज कल बिजली भी नसीब नहीं हो रही है। मैंने आपको रिपोर्ट दिखाई थी कि इस्लामाबाद, लाहौर और कराची जैसे शहरों में 10 से 12 घंटे तक की लोड शेडिंग की जा रही है। इसके ऊपर बिजली के रेट भी लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। 8 अप्रैल को नेशनल इलेक्ट्रिक पावर रेगुलेटरी अथॉरिटी ने पावर टैरिफ 1 रुपये 42 पैसे पर यूनिट की दर से बढ़ाया था…और अब एक बार फिर से बिजली के दाम बढ़ाने की तैयारी हो चुकी है…इतना ही नहीं, पावर सेक्टर में काम करने वालों को अब तक फ्री बिजली मिलती थी लेकिन अब वो उस सुविधा को भी बंद करने का फैसला कर लिया गया है…यानी चोट पर चोट।
भारत में भी बढ़ी महंगाई
डीजल-पेट्रोल-गैस-बिजली, सब्जी-अनाज-ट्रांसपोर्टेशन- जिस चीज का नाम लीजिए, पाकिस्तान में उसके दाम आसमान छू रहे हैं…अब आपको लगेगा कि मैं केवल पाकिस्तान की बात कर रहा हूं। भारत की नहीं तो देखिये दोस्तों, 13 अप्रैल को रॉयटर्स ने भारत की महंगाई को लेकर रिपोर्ट छापी थी। उसमें ये बताया गया था कि मार्च में भारत में महंगाई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है….पाकिस्तान में मार्च में 7.30% इन्फ्लेशन रेट था जबकि भारत में 3.40%….वैसे भारत के लिहाज से इसे भी ज़्यादा माना जा रहा है।मार्च में भारत की थोक महंगाई बढ़कर 3.88% हो गई थी जो 3 साल का उच्चतम स्तर है।लेकिन पाकिस्तान और भारत की महंगाई और हालात में ज़मीन आसमान का अंतर है।पाकिस्तान में डीजल-पेट्रोल-किरोसिन-गैस और बिजली तक के दाम बढ़ा दिये गये। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ा।लेकिन भारत में मीडिल ईस्ट की जंग के बावजूद भी सामान्य डीजल-पेट्रोल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया। हां कमर्शियल LPG, हाई स्पीड फ्यूल, जेट फ्यूल और PNG के दाम ज़रूर बढ़ाये गये लेकिन इतने भी नहीं कि पाकिस्तान की तरह पूरा मार्केट हिल जाए।
बांग्लादेश में भी भारी संकट
पाकिस्तान को इन्फ्लेशन के मामले में अगर कोई टक्कर दे रहा है तो वो है बांग्लादेश। मार्च में बांग्लादेश का इन्फ्लेशन रेट 8.71% था। कहा गया कि ये ईरान से चल रही जंग का असर है…लेकिन अगर ऐसी बात है तो फिर पिछले साल मार्च में बांग्लादेश में महंगाई दर 9% से ऊपर क्यों थी। इस ग्राफ को देखिये बांग्लादेश में महंगाई का परसेंटेज़ पिछले 1 साल से लगातार 8 परसेंट से ऊपर बना हुआ है…और इस साल यानी 2026 के लिए तो IMF ने जो प्रिडिक्शन किया है उसके मुताबिक बांग्लादेश में महंगाई दर का प्रतिशत 9% से पार हो जाएगा।यानी पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों महंगाई के महाजाल में फंसे हुए हैं लेकिन भारत में इन दोनों देशों के मुकाबले लोगों को बहुत राहत है। और ये ऐसे ही नहीं होता है। मजबूत और दूरदर्शी आर्थिक नीति, इन्फ्रास्ट्रक्चरल बदलाव और सही बिजनेस पॉलिसी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती हैं। और जिस देश की अर्थव्यवस्था मजबूत रहेगी वहां मुश्किल हालातों में भी जनता को महंगाई की मार से बचाया जा सकता है।








