दक्षिण कोरिया से दोस्ती और बढ़ी
न्यूक्लियर एनर्जी से लेकर एयर डिफेंस सिस्टम तक, ट्रेड से लेकर टेक्नोलॉजी तक, भारत और साउथ कोरिया ने अपने बायलैट्रल रिलेशन्स को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाने का फैसला किया है। एक तरफ दुनिया जंग और तनाव में फंसी है तो दूसरी तरफ भारत अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नई मजबूती देने और अपने आर्थिक विकास पर ज़ोर दे रहा है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति का 8 साल के अंतराल पर हुआ भारत दौरा इसी बात की गवाही दे रहा है। रिपब्लिक ऑफ कोरिया जिसे आम तौर पर हम दक्षिण कोरिया कहते हैं उसके राष्ट्रपति मून जाए इन 8 साल पहले भारत आए थे। उसके बाद अब प्रेसिडेंट ली जाये माययुन्ग भारत आए हैं। प्रेसिडेंट ली जाये के इंडिया विजिट के दौरान दोनों देशों के बीच कारोबार से लेकर विज्ञान और सांस्कृतिक भागीदारी के समझौते हुए हैं।दोनों देशों ने इंडस्ट्री से लेकर डिफेंस सेक्टर तक में हाथ मिलाया है।
भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों का इतिहास
भारत और कोरिया के बीच के हज़ारों साल पुराने संबंधों के बारे में थोड़ी जानकारी देता हूं।भारत और कोरिया का संबंध रामायण काल से बताया जाता है। मान्यता है कि अयोध्या की राजकुमारी सुरिरत्ना की शादी कोरिया के राजा किम सुरो के साथ हुई थी।साउथ कोरिया के प्रेसिडेंट के साथ ज्वाइंट प्रेस स्टेटमेंट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दोनों देशों के बीच के इस संबंध का ज़िक्र किया। भारत और साउथ कोरिया, दोनों ने अपने इस 2000 साल पुरानी विरासत को सहेज कर रखा है। भारत ने राजकुमारी के नाम पर डाक टिकट जारी किया है। अयोध्या में राजकुमारी सुरी रत्ना के नाम का एक पार्क भी बनवाया गया है- वहां उनकी एक मूर्ति भी लगाई गई है। राजकुमारी सुरी रत्ना शादी के बाद महारानी हो के नाम से जानी गई थीं। हर साल अयोध्या में मनाई जाने वाली दीवाली में साउथ कोरिया के कलाकार भी हिस्सा लेने आते हैं। साल 2018 में जब साउथ कोरिया के प्रेसिडेंट भारत आए थे तब उनकी पत्नी किम जुंग सुक भी उनके साथ थीं। तब किम ने भी अयोध्या का दौरा किया था। और अब प्रेसिडेंट ली जाये की इस विजिट से भारत और दक्षिण कोरिया के बीच के 2000 साल पुरानी साझा सांस्कृतिक विरासत और संबंधों को एक नई ऊर्जा और नया आयाम मिला है।
दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते
दोनों देशों के बीच ट्रेड, इंडस्ट्रीज़, स्ट्रैटेजिक रिसोर्सेज और क्लीन एनर्जी जैसे सेक्टर में साथ आने और काम करने की सहमति बनी है।इसमें सबसे पहला पॉइन्ट है ट्रेड का। 2015 में भारत और रिपब्लिक ऑफ कोरिया यानी साउथ कोरिया के बीच बायलैट्रल ट्रेड 16.27 बिलियन डॉलर का था जो 2024-25 में 29.39 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है।भारत ने इसी साल फरवरी में दक्षिण कोरिया को सबसे ज़्यादा 103 मिलियन डॉलर के एल्युमीनियम और एल्युमीनियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किये थे। 72.7 मिलियन डॉलर के इलेक्ट्रिक मशीनरी और इक्विपमेंट्स, 41.7 मिलियन डॉलर के आयरन और स्टील शामिल था। वहीं इसी दौरान भारत ने साउथ कोरिया से 414 मिलियन डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेन्ट्स, 211 मिलियन डॉलर के आयरन एंड स्टील और 144 मिलियन डॉलर के प्लास्टिक रॉ मैटेरियल्स इम्पोर्ट किये थे।लेकिन अब दोनों देशों ने अपने बायलैट्रल ट्रेड को 2030 तक बढ़ा कर 50 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य रखा है।
किस-किस सेक्टर में होगा काम ?
दोनों देशों के बीच दूसरी बड़ी सहमति AI टेक्नोलॉजी और चिप सेक्टर में भागीदारी की बनी है।दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया कोरिया बिजनेस लीडर्स डायलॉग में हिस्सा लिया। इस दौरान साउथ कोरिया के टॉप बिजनेस लीडर्स ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। इसमें सैमसंग, LG और Hyundai ने भारत में और निवेश करने की बात कही है। Hyundai EV के सेक्टर में और इनवेस्टमेंट करने के लिए तैयार है तो SK Hynix भारत में चिप फेसेलिटी शुरू करने पर विचार कर रहा है।भारत और दक्षिण कोरिया की कंपनियों को एक दूसरे के देश में निवेश को आसान बनाने के लिए भी कई फैसले लिये गये हैं। फाइनेंशियल फ्लोज को सुगम बनाने के लिए भारत कोरिया फाइनेंशियल फोरम बनाया गया है। इसके अलावा बिजनेस को-ऑपरेशन कमिटी और इकॉनमिक सिक्योरिटी डायलॉग की शुरुआत का भी एलान किया गया है। और सबसे बड़ी बात ये कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एलान किया है कि भारत में कोरियन इंडस्ट्रीयल टाउनशिप बनाई जाएगी।
शिप बिल्डिंग और डिफेंस सेक्टर में साझेदारी
भारत और साउथ कोरिया केवल चिप पर ही नहीं बल्कि शिप पर भी साथ काम करने के लिए तैयार हैं।असल में कहा जा रहा है कि भारत अगले कुछ सालों में 400 वेसेल्स खरीदने की योजना बना रहा है। और साउथ कोरिया का शिप बिल्डिंग सेक्टर अच्छा-खासा मजबूत है। इसलिए दोनों देशों ने भारत में ज्वाइंट शिप-बिल्डिंग प्रोजेक्ट पर सहमति जताई है। ये प्रोजेक्ट 25 बिलियन डॉलर के करीब का हो सकता है। ट्रेड के बाद दोनों देशों के बीच डिफेंस सेक्टर में भी भागीदारी बढ़ाने पर सहमति बनी है।भारत और साउथ कोरिया सालों से डिफेंस सेक्टर में साथ काम कर रहे हैं। कोरिया की कंपनी Hanwha Aerospace भारत में लार्सन एंड टुब्रो के साथ मिलकर K-9 होवित्जर आर्टिलरी गन्स बना रही हैं. फरवरी 2021 से इसे भारतीय सेना में शामिल भी किया जा चुका है। लेकिन अब भारत, साउथ कोरिया से कुछ और डिफेंस टेक्नोलॉजीज़ हासिल करने की योजना बना रहा है। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम के अलावा और भी कई डिफेंस सिस्टमस शामिल होंगे। हालांकि अभी ये क्लियर नहीं किया गया है कि भारत साउथ कोरिया से कौन सा एयर डिफेंस खरीद सकता है। भारत में साउथ कोरिया के 3 एयर डिफेंस सिस्टम के नामों की चर्चा हो रही है।
M-SAM

M-SAM को KM-SAM भी कहा जाता है।ये एक मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम है। इसमें Solid Fuel Rocket का इस्तेमाल होता है जिसकी रेंज 50 किलोमीटर है। इस मिसाइल की स्पीड 5 Mach की है। ये एयर डिफेंस सिस्टम फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर्स, UAV’s और क्रूज मिसाइल को इंटरसेप्ट कर सकता है। ये एयर डिफेंस सिस्टम भारत के आकाश और Barak-8 के गैप को भरने का काम कर सकता है।
L-SAM

L-SAM को साउथ कोरिया ने अमेरिकी लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम को रिप्लेस करने के लिए तैयार किया है। L-SAM एक लॉन्ग रेंज हाई एल्टिट्यूड इंटरसेप्टर है। इसकी रेंज 150 से 180 किलोमीटर के करीब बताई जाती है। L-SAM इंटरसेप्टर मिसाइल की स्पीड 9 Mach तक है। ये बैलेस्टिक मिसाइल को करीब 60 किलोमीटर की ऊंचाई पर इंटरसेप्ट कर सकता है। ये भारत के लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस और बैलेस्टिक मिसाइल एयर डिफेंस के नेटवर्क में एक और लेयर का काम कर सकती है।
K30 Biho

ये एक शॉर्ट रेंज मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है। ये सेल्फ प्रोपेल्ड एंटी एयरक्राफ्ट वेपन है जिसमें दो 30mm की कैनन लगे हैं। ये दोनों गन electro-Optical Guided हैं जो एयर डिफेंस सिस्टम में लगे एक Surveillance Radar से जुड़ी होती हैं…ये पूरा सिस्टम एक मोबाइल व्हिकल पर माउंट किया जाता है जिसकी रेंज 500 किलोमीटर के करीब है।ये गन सिस्टम 10 किलोमीटर की रेंज में आने वाले थ्रेट्स को इंटरसेप्ट कर सकता है जिसमें लो फ्लाइंग हेलीकॉप्टर्स और UAV’s शामिल हैं। कहा जा रहा है कि भारत साउथ कोरिया से मिसाइल बेस्ड एयर डिफेंस नहीं बल्कि इसी Self-Propelled Anti-Aircraft Weapon को खरीदने की बात कर सकता है।
साऊथ कोरिया में UPI चलेगा
इसके अलावा जो शिप बिल्डिंग में साझेदारी की बात है उसमें भी भारत के नेवल वेसेल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में साउथ कोरिया की कंपनियों को शामिल किया जा सकता है। भारत न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में भी साउथ कोरिया के साथ मिलकर काम करने की योजना बना रहा है। बैटरी टेक्नोलॉजी और बैटरी स्टोरेज़ टेक में भी भागीदारी पर बात हो रही है। इन सबके अलावा एक बड़ा समझौता डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर भी हुआ है। अब साउथ कोरिया जाने वाले भारतीय, वहां के पेमेंट स्कैनर को अपने UPI एप से स्कैन कर पैसे का भुगतान कर सकेंगे।इसलिए कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच हुए ये समझौते, केवल आपसी रिश्तों की नई शुरुआत नहीं हैं, बल्कि ग्लोबल लेवल पर भी स्ट्रैटेजिक इम्पैक्ट डालने वाले हैं।








