नए नेपाली पीएम के खिलाफ लोगों में गुस्सा
कोई गुस्से में अपना सामान फेंक रहा है, कोई सुरक्षाकर्मियों से छीन-झपट कर रहा है, कोई बहसबाज़ी में उलझा हुआ है। ये तस्वीरें भारत-नेपाल बॉर्डर की हैं। नेपाल में भारत के बॉर्डर पर बवाल मचा हुआ है। नेपाल की पब्लिक अपनी सरकार पर भड़की हुई। कह रही है कि सरकार का दिमाग ख़राब हो गया है….सवाल उठता है कि आख़िर नेपाल की पब्लिक अपनी इस नई नवेली सरकार से इतनी नाराज़ क्यों है? अभी-अभी तो इलेक्शन में भारी-भरकम वोटों से जिता कर बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनवाया है- और एक महीने भी नहीं हुए कि भारत से लगने वाले बॉर्डर वाले इलाकों में बालेन के खिलाफ धरने-प्रदर्शन शुरू हो गये।
बॉर्डर पर बवाल की वजह क्या है ?
तो इस बवाल की वजह है भन्सार यानी कस्टम ड्यूटी। नेपाल सरकार ने भारत से 100 रुपये से ज़्यादा की खरीद पर भन्सार वसूलने का एलान किया है। ये कस्टम ड्यूटी 100 रुपये के सामान पर सामान के हिसाब से 13 रुपये से 73 रुपये तक हो सकती है। हफ्ते-दस दिनों से भारत से लगने वाली नेपाल सीमा पर एनाउंसमेंट की जा रही है। असल में भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा है। सीमा के पास बसने वाले नेपाल के लोग बड़ी मात्रा में भारत आकर रोज़मर्रा के सामान खरीदते हैं। राशन और सब्जियों से लेकर कपड़े-लत्ते तक भारत से ही खरीद कर ले जाते हैं और नेपाल सरकार इसी पर रोक लगाने की कोशिश कर रही है।कहा ये भी जा रहा है कि 100 रुपये से अधिक कीमत के सामान पर भन्सार वसूलने का नियम नया नहीं है, हां इसे बालेन सरकार ने अभी सख्ती से लागू करने का आदेश ज़रूर दिया है।इस नियम के लागू होने के बाद से चाहे उत्तराखंड का बनबासा महेंद्रनगर बॉर्डर क्रॉसिंग हो, यूपी का रुपनदेही-नेपालगंज क्रासिंग हो, सोनौली-बेलहिया हो, या बिहार का रक्सौल, बीरगंज या जोगबनी-बिराटनगर हो या फिर पश्चिम बंगाल का पानीटंकी-काकरभिट्टा क्रासिंग हो, सभी जगह बवाल मचा हुआ है।और बवाल भारत की तरफ नहीं है। बवाल नेपाल की ही तरफ है क्योंकि कस्टम ड्यूटी तो उधर ही वसूली जा रही है ना।
गुस्से में नेपाली परिवार
देखिये बाइक सवार ये परिवार भारत से नेपाल आ रहा है। ये नेपाल का ही रहने वाला परिवार है लेकिन भारत से खरीदारी कर अपने घर लौट रहा था। बॉर्डर पर नेपाली कस्टम ने उसे रोक लिया और फिर शुरू हो गया बवाल। जब कस्टम वाले नहीं माने तो पति-पत्नी ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कहा बड़ी गाड़ियां आराम से जा रही हैं और आम लोगों को रोका जा रहा है, लेकिन भन्सार वाले नहीं माने। आखिरकार वो आदमी अपने बच्चे के कपड़े को लेकर वापस चला गया।
भारत से केला क्यों खरीदा ?
नेपाल बॉर्डर पर केले की खरीद को लेकर भी जबरदस्त बवाल मचा हुआ है। देखिये, ये नेपाली बंधु भारत से 1 दर्जन केले खरीदकर बाइक से लौट रहे थे, बॉर्डर पर रोक लिये गये।पहले तो इन्होंने रिक्वेस्ट की लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो खरीदे हुए केले को ज़मीन पर पटक कर कुचल डाला।असल में नेपाल में इन दिनों केले के दाम में आग लगी हुई है। नेपाल में 1 दर्जन केला 300 से 400 रुपये के बीच बिक रहा है। प्राइम मिनिस्टर तक के पास केले की बढ़ी हुई कीमत का मुद्दा पहुंच चुका है। ऐसे में तराई में रहने वाले लोग, जो भारत की सीमा के पास बसते हैं वो भारत से केले खरीद कर ले जा रहे हैं, और अब उन्हें भारत के केले खरीदने पर कस्टम ड्यूटी चुकाने के लिए कहा जा रहा है।
रिक्शे पर सवार ये दोनों महिलाएं भारत से केले खरीदकर लौट रही थीं लेकिन कस्टम वालों ने उसे जब्त कर लिया।कई जगह लोग कस्टम वालों के आगे गिड़गिड़ा रहे हैं, उनके सामान को जब्त ना करने की भीख मांग रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कई जगह तो छीना-झपटी के हालात भी दिखाई दे रहे हैं। हर बॉर्डर पर लोगों के सामान की चेकिंग के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई हैं। ये आम लोगों के साथ-साथ चेकिंग करने वालों के लिए भी भारी मुसीबत का सबब बन चुकी है। इसी परेशानी की वजह से लोग अपना आपा खोते जा रहे हैं।
गुस्से से आग-बबूला नेपाली महिला
इस चेकिंग और रोक-टोक से परेशान एक नेपाली महिला ने तो जमकर बवाल काट डाला। गुस्से में अपना सामान बिखेर दिया…ये चेकिंग केवल मेन बॉर्डर क्रासिंग पर ही नहीं हो रही है बल्कि उन कच्चे रास्तों पर भी हो रही है जहां से लोग सीमापार आवाजाही करते हैं….अब कहा जा रहा है कि ये फैसला नेपाल के बिजनेस कम्यूनिटी को राहत देने के मक़सद से किया गया है। यानी जब नेपाल के लोग भारत से सामान ना खरीद कर नेपाल के मार्केट से ही खरीदेंगे तो फायदा नेपाल को होगा। वहीं अगर कस्टम चुकाकर भारतीय सामान लाते हैं तब भी सरकार का रेवेन्यू बढ़ेगा। बात तो सही है। नेपाल सरकार के इस क़दम का असर नेपाल सीमा से लगने वाले बाज़ारों पर अच्छा खासा दिखाई दे रहा है।
बॉर्डर से सटे बाज़ारों में वीरानी
ये यूपी के लखीमपुर खीरी के गौरीपंथ का वनगांव बाजार है। पहले यहां काफी रमन-चमन रहा करती थी लेकिन अभी ये बाज़ार खाली हैं। असल में बिल्कुल नेपाल सीमा पर पड़ने वाले इस बाज़ार से नेपाल के लोग खरीदारी किया करते थे लेकिन जब से 100 रुपये के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य हो गई है तब से इस बाज़ार में बिक्री भी घट गई है। इसी तरह बिहार में भी नेपाल सीमा से सटे बाज़ारों का हाल बुरा हो चुका है। नेपाल से लगने वाली बिहार की 378 किलोमीटर की सीमा के पास कई ग्रामीण बाज़ार हैं। ये बाज़ार बिहार के लोगों की आजीविका का आधार तो हैं ही, सीमा के पास बसे नेपाल के लोगों का भी सहारा हैं। रोज़मर्रा की ज़रूरत का सामान हो या फिर शादी-ब्याह की खरीदारी। नेपाल के लोग इन्हीं बाज़ारों से किया करते थे। लेकिन कस्टम ड्यूटी लागू होने की वजह से बिहार के इन बाज़ारों पर भी तगड़ी चोट पड़ी है।कहा जा रहा है कि नेपाल के इस कस्टम ड्यूटी ने भारत के बाज़ारों की बिक्री को 40% तक झटका दे दिया है।अब भारतीय बाज़ार के बारे में भला नेपाल की सरकार क्यों सोचे, उसे तो अपने बाज़ार के बारे में सोचना चाहिए। बिल्कुल सही बात है। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है दोस्तों। नेपाल सरकार के इस फैसले ने भारत और नेपाल के बीच स्मॉल स्केल स्मगलिंग को बढ़ा दिया है, लोग बाग अब सब्जी-कपड़े-राशन और फलों की तस्करी करने लगे हैं।
नेपाल में महंगाई से हाल-बेहाल
असल में नेपाल में तेज़ी से बढ़ती महंगाई ने लोगों का हाल बेहाल किया हुआ है।ईरान क्राइसिस की वजह से नेपाल में डीजल और केरोसिन के दाम में 30 रुपये का इज़ाफा किया गया है जबकि मार्च में पेट्रोल के दाम में 62 रुपये लीटर की बढ़ोतरी की गई थी…मार्च में नेपाल में सब्जियों के दाम 200% तक बढ़ गये थे।केले की कहानी तो मैं आपको बता ही चुका हूं। चावल-दाल और दूसरे सामान की कीमतें भी आम लोगों के बजट से बाहर हो गई हैं। रिपोर्ट्स बता रही हैं कि नेपाल में सरसो का तेल 375 से 450 रुपये लीटर तक हो चुका है और तभी नेपाल के लोग भारत से सरसो तेल खरीद-खरीद कर ले जा रहे हैं।यानी नेपाल सरकार को कस्टम ड्यूटी लागू करने से पहले अपने देश की महंगाई को कम करना चाहिए था। लेकिन अब ये फैसला आम लोगों पर थोप दिया गया है और तभी लोग भड़के हुए हैं। अब इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। नेपाल कांग्रेस ने सरकार को कस्टम ड्यूटी से हो रही परेशानी के बारे में ध्यान देने के लिए कहा है। वहीं सांसद और पूर्व मंत्री महावीर पुन ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध किया है।
नयी सरकार के खिलाफ भड़के आम लोग
लेकिन इन विरोधों से ज़्यादा महत्वपूर्ण है आम लोगों का विरोध। अब आम लोगों का गुस्सा सीधे सरकार पर निकल रहा है। वो कह रहे हैं कि कस्टम वाले तो केवल अपनी ड्यूटी कर रहे हैं, ऑर्डर तो ऊपर से आया है।नेपाल के सीमावर्ती इलाकों से उठ रही विरोध की इस चिंगारी पर बालेन सरकार को तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। कहीं ऐसा ना हो कि बिना सोचे-समझे लिया गया ये फैसला नेपाल को फायदा पहुंचाने के बदले बालेन सरकार के लिए मुसीबत ना बन जाए।








