भारी हथियारों के साथ आयी थी चीनी सेना
चार्ली कंपनी ने फ़ायरिंग बंद ही की कि चीन की तरफ़ से RCL GUNS और मोर्टार से फ़ायरिंग शुरू हो गई। चीनी फौज 120, 81 और 60mm के मोर्टार से गोले बरसा रही थी। इसके साथ ही 75mm और 57mm के RCL गन्स से भी बमबारी की जा रही थी। और तो और मजबूत चट्टानों को भी तोड़ने में सक्षम 132mm के रॉकेट भी चार्ली कंपनी पर बरस रहे थे। इस भारी गोलाबारी ने चार्ली कंपनी के जवानों के लिए बनाये शेल्टर को तबाह कर दिया। बंकरों को ध्वस्त कर दिया। वायरलेस सिस्टम पूरी तरह टूट गया। टेलीफोन लाइन भी कट गई। चीनी फौज इतनी बमबारी कर रही थी कि चार्ली कंपनी को संभलने का मौक़ा तक नहीं मिल रहा था। इस हमले में एक जवान वीरगति को प्राप्त हो गया जबकि दूसरे का पैर कट कर अलग हो गया। क़रीब 5-6 और सैनिक इस हमले में घायल हो गये। फौरन नर्सिंग स्टॉफ धर्मपाल सिंह दहिया ने सबकी मरहम-पट्टी करनी शुरू दी।
इसी बीच मेजर शैतान सिंह की बांह में भी रॉकेट का एक टुकड़ा आ कर लगा ।अब तक सुबह के क़रीब 7.30 बज चुके थे।उजाला होने लगा था। अचानक फौजियों की नज़र अपने पीछे की रिज पर पड़ी तो याक का झुंड आगे बढ़ता नज़र आया। पहले तो चार्ली कंपनी को लगा कि हेडक्वॉर्टर से उन्हें मदद भेजी गई है लेकिन जब दूरबीन से देखा तो पता चला कि याक के झुंड के साथ-साथ चीनी फौज बढ़ी चली आ रही है। मेजर शैतान सिंह ने मोर्टार से बमबारी का आदेश दिया। इस बमबारी में कई चीनी फौजी मारे गये लेकिन तब क वो 4 HMG और RCL सेट कर चुके थे। चीनी फौज अब दो तरफ़ से चार्ली कंपनी पर हमला कर रही थी।
जब लड़ते-लड़ते मेजर शैतान सिंह की जान चली गयी
इस फ़ायरिंग में मेजर शैतान सिंह को तीन गोलियां लग गई लेकिन वो अपने जवानों का हौसला बढ़ाते रहे। इधर घायल होने के बावजूद उन्होंने रायफल उठाई और रिज़ की तरफ़ से मीडियम मशीन गन से फायर करने वाले चीनी सैनिक को ढेर कर दिया। इसके बाद मेजर शैतान सिंह बंकर से बाहर निकल गये। जब तक वो आगे बढ़ पाते चीनी मशीन गन की कई गोलियां उनके पेट में आ धंसी।मेजर शैतान सिंह ने हवलदार राम चंद्र से कहा कि वो बटालियन हेडक्वॉर्टर जाकर ये बताए कि कंपनी कैसे लड़ी और कैसे वीरगति को प्राप्त हो गई। लेकिन राम चंद्र ने उन्हें छोड़ कर जाने से इनकार कर दिया। किताब THE BRAVE की राइटर रचना बिष्ट को हवलदार राम चंद्र ने बताया कि जैसे ही मेजर साब को गोली लगी, कंपनी हवलदार मेजर हरफूल ने LMG उठाई और जिस चीनी फौजी ने मेजर शैतान सिंह को गोली मारी थी उसे मार गिराया। इसी दौरान वो ख़ुद चीनी RCL के निशाने पर आ गये।
अपनी आख़िरी सांसे लेते हुए हरफूल ने राम चंद्र से कहा कि मेजर साब किसी भी क़ीमत पर चीनियों के हाथ नहीं लगने चाहिए।इस बीच दुश्मनों पर अपनी LMG से गोलियां बरसा रहे निहाल सिंह के दोनों हाथों में गोली लग गई। उन्होंने अपने पैर से ग्रेनेड फेंकने की कोशिश की लेकिन वो नाकाम रहे।दुश्मन बिल्कुल पास आ चुका था और अब चार्ली कंपनी की गोलियां और हैंड ग्रेनेड ख़त्म हो रहे थे। इसके बाद वीर अहीर जवान अपने बंकरों से बाहर निकल आये और रायफल की बैनेट से चीनी फौजियों पर हमला कर दिया। लेकिन उनके कोट इतने मोटे थे कि कई बार बैनेट अंदर घुसती ही नहीं थी। ये देख कर भारतीय फौजियों ने पत्थर उठा कर चीनियों पर मारना शुरू कर दिया। जो नज़दीक आया उसे उठा कर पत्थर पर पटक दिया। संग्राम सिंह ने तो कई चीनियों को पकड़ कर दूसरे चीनी के साथ उनके सिर टकरा दिये।
चीनी सेना ने भारतीय जवानों को बंधक बनाया
चीनी फौजी बढ़ते ही जा रहे थे। राम चंद्र किसी भी क़ीमत पर मेजर शैतान सिंह को चीनियों के हाथ नहीं लगने देना चाहते थे। मौक़ा मिलते ही वो मेजर को लेकर ढलान से 1 किलोमीटर नीचे ले आये। सुबह के 8.8 मिनट पर हिंदुस्तान के इस परमवीर ने अपने प्राण त्याग दिये। ठीक इसी वक़्त मेजर शैतान सिंह की घड़ी भी बंद हो गई। दूसरी तरफ़ पोस्ट पूरी तरह तबाह हो चुकी थी। 120 जवानों में से 114 की जान जा चुकी थी, निहाल सिंह समेत 5 जवानों को चीनी फौज ने बंधक बना लिया। जो 4 जवान नीचे राशन और किचन के काम में तैनात थे, कंपनी उन्हें पहले ही हेडक्वॉर्टर बुला चुकी थी।
फॉर्मर कोस्ट गार्ड ऑफ़िसर कुलप्रीत यादव ने रेज़ांगला के वीर अहीरों के बलिदान पर किताब लिखी है- The Battel of Rezang la. बहुत रिसर्च के साथ लिखी गई इस किताब में रेज़ांगला की लड़ाई के बारे में बहुत डिटेल में लिखा गया है। कुलप्रीत यादव इस लड़ाई के बारे में बताते हैं- चार्ली कंपनी के वीर अहीर अपने मेजर शैतान सिंह की अगुवाई में क्या ख़ूब लड़े और लड़ते-लड़ते अपने प्राणों की आहुति दे दी। अब यहां से रेज़ांगला की कहानी दो पार्ट में बंट जाती है। एक हवलदार राम चंद्र का कंपनी हेडक्वॉर्टर पहुंचना और दूसरा निहाल सिंह समेत 5 जवानों का चीन की आर्मी की क़ैद में होना। ज़रा सोचिए। 120 में से 114 जवान लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गए, इससे पहले उन्होंने ना केवल 3 हज़ार से ज़्यादा चीनी सैनिकों से टक्कर ली बल्कि 1 हज़ार से ज़्यादा को मार भी गिराया, और जब वो जवान अपने सीनियर्स के पास पहुंचा, अपनी कंपनी की बहादुरी की कहानी सुनाई तो उसे झूठा करार दे दिया गया।
आगे क्या हुआ जानने के लिए पार्ट-4 पढ़ें





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