मेड इन इंडिया लॉन्ग रेंज स्ट्राइक ड्रोन
आसमान में उड़ता ये ड्रोन क्या ईरान का शाहेद है? या फिर उसकी अमेरिकी नकल LUCAS? बिल्कुल नहीं दोस्तों। ये ना शाहेद है और ना ही LUCAS। ये है पूरी तरह से भारत में बनाया हुआ, भारत का अपना दिव्यास्त्र है- दिव्यास्त्र Mk1, इस ड्रोन को बनाया है लखनऊ बेस्ड कंपनी होवर इट ने। ख़बर आई है कि होवर इट ने अपने इस दिव्यास्त्र Mk1 का कामयाब परीक्षण पूरा कर लिया है। और इसी कामयाब परीक्षण के बाद दिव्यास्त्र Mk1 के चर्चे डिफेंस इंडस्ट्रीज़ के गलियारों में किये जा रहे हैं।
दिव्यास्त्र Mk1 में कितना दम है ?
दिव्यास्त्र MK-1 AI Powered Long Range Loitering Munition है यानी ये एक स्ट्राइक ड्रोन है। सिस्टम ऑटोनमी की बात करें तो इसका ऑपरेशन पूरी तरह से ऑटोनोमस है। ये AI और Swarm Capability वाला ड्रोन है। इसमें गाइडेंस के लिए GPS और Inertial Navigation System हैं लेकिन ये भी AI से ही जुड़े हुए हैं- यानी गाइडेंस सिस्टम के बाद AI ही इसके लिए सटीक लक्ष्य तय करता है। इसे ISR यानी Intelligence, Surveillance और Recon के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इसका प्राइमरी मिशन अटैक ही है। ये ड्रोन लगातार 5 घंटे तक उड़ान भर सकता है। इसकी ऑपरेशन रेंज 500 किलोमीटर तक है जबकि इसकी अटैक स्पीड 300 से 400 किलोमीटर प्रति घंटे की है।
दिव्यास्त्र MK-1 की खूबियां
Divyastra-Mk1 15 किलोग्राम तक का पेलोड कैरी कर सकता है। Swarm कैपेब्लिटी इसे और अधिक घातक बनाती है। ये झुंड में वार कर सकता है और इसका AI एल्गोरिदम इसके Swarm को आपस में कम्यूनिकेट करने लायक भी बना देता है। तो 500 किलोमीटर की रेंज, 5 घंटे तक की उड़ान और 400 किलोमीटर तक की स्पीड के साथ ये अटैक ड्रोन भारत से उड़ान भर कर पूरे पाकिस्तान में तबाही मचा सकता है। अमृतसर से देखें तो पेशावर 400 किलोमीटर के करीब है, इस्लामाबाद 285, सरगोधा 210 किलोमीटर ही हैं। यानी ये सब इस स्ट्राइक ड्रोन की रेंज में हैं। वहीं अगर ये ड्रोन अगर राजस्थान या गुजरात के एयरबेसेज़ से दागे जाएं तो ये कराची को भी तबाह कर सकते हैं।
इजरायली Harop ड्रोन से कितना अलग है ?
भारत के पास पहले से Harop Strike Drones हैं जिसका इस्तेमाल उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी किया था।इज़रायल एयरोस्पेस इंडस्ट्री का बनाया हुआ ये ड्रोन अब भारत में भी तैयार हो रहा है। तो चलिये इन दोनों ड्रोन्स के बीच क्या अंतर है वो भी देख लेते हैं। Harop भी Divyastra Mk1 की तरह Loitering Munition है। जैसा कि मैंने पहले भी बताया Divyastra Mk1 की रेंज 500 किलोमीटर है जबकि हारोप की रेंज 200 किलोमीटर यानी रेंज के मामले में Divyastra Mk1 हारोप से 20 है। दिव्यास्त्र Mk1 की स्पीड 300 से 400 किलोमीटर प्रति घंटे की है वहीं हारोप की स्पीड 417 किलोमीटर पर आवर की है। एन्ड्यूरेंस के मामले में हारोप दिव्यास्त्र Mk1 पर भारी पड़ रहा है। दिव्यास्त्र Mk1 की फ्लाइट एन्ड्यूरेंस 5 घंटे की है जबकि हारोप की करीब 9 घंटे की। हारोप 23 किलोग्राम पेलोड कैरी कर सकता है जबकि दिव्यास्त्र Mk1 – 15 किलोग्राम का।
AI का भरपूर इस्तेमाल
हारोप को रडार सप्रेशन और प्रिसिजन स्ट्राइक के लिए बनाया गया है वहीं दिव्यास्त्र Mk1 स्वार्म अटैक, ISR और प्रिसिजन स्ट्राइक के मिशन को अंजाम दे सकता है। दिव्यास्त्र Mk1 पूरी तरह से AI ऑटोनोमस मोड पर काम करता है जबकि हारोप में ह्यूमन इंटरफेयरेंस भी है। तो ये कहा जा सकता है कि भले ही हारोप अभी बैटल प्रूवन ड्रोन है लेकिन भारत का दिव्यास्त्र Mk1 नई तकनीक और नई कैपेब्लिटी वाला ड्रोन है जो आने वाले समय में भारत का महत्वपूर्ण अस्त्र बन सकता है।
दिव्यास्त्र MK-2 की टेस्टिंग जारी
रिपोर्ट के मुताबिक दिव्यास्त्र MK-2 पर भी काम शुरु किया जा चुका है। इसकी रेंज 2,000 किलोमीटर करने की तैयारी है। अगर दिव्यास्त्र MK-2 तैयार हो जाता है तो फिर इसके ज़रिए युद्ध की स्थिति में चीन के भीतर भी डीप स्ट्राइक की जा सकती है।








