पाकिस्तानी पीएम की इंटरनेशनल इंसल्ट, पत्रकारों का दावा ट्रंप की टीम ने तैयार किया शहबाज़ का ट्वीट

By Alok Ranjan

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shehbaz sharif insulted

  • ट्रंप की टीम ने ईरान पर ट्वीट का ड्राफ्ट तैयार किया
  • ईरानी विदेश मंत्री को भी अमेरिकी निर्देश पर टैग किया
  • वरिष्ठ पत्रकार मोईद पीरज़ादा का सनसनीखेज दावा
  • पाक से भागे पत्रकार इमरान रियाज़ खान ने पुष्टि की

पाक पीएम ने अमेरिका का लिखा ट्वीट किया

ब्रिटिश-पाकिस्तानी जियो स्ट्रेटेजिक एनालिस्ट डॉ. मोईद पीरज़ादा और पाकिस्तान से भागे हुए पत्रकार इमरान रियाज़ खान ने सनसनीखेज दावा किया है। दावे के मुताबिक ईरान पर मध्यस्थता का जो ट्वीट पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने किया था वो ट्वीट अमेरिका ने तैयार किया था। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन दोनों पत्रकारों के दावे के मुताबिक ना सिर्फ शरीफ़ का ट्वीट अमेरिका द्वारा शब्द-दर-शब्द ड्राफ्ट किया गया था बल्कि ईरान के विदेश मंत्री को टैग करने का निर्देश भी अमेरिका ने ही दिया था।

ईरान ने पाकिस्तान को बतायी औकात

ईरान ने पाकिस्तान को ऐसा ठेंगा दिखलाया है कि उसकी सारी हेकड़ी हवा हो गई है। तो हुआ ये कि पिछले दो-तीन दिनों से अचानक ख़बर आने लगी कि अमेरिका-इज़रायल की ईरान के साथ चल रही जंग को रोकने के लिए पाकिस्तान मध्यस्थता करेगा। दुनिया भर के अख़बारों में पाकिस्तान के नाम के चर्चे हो रहे थे। पाकिस्तान की तारीफों के पुल बांधे जा रहे थे। सउदी अरब के क्राउन प्रिंस ने फोन कर शाहबाज शरीफ की ख़ूब तारीफ की। कहा पाकिस्तान रीजन में शांति लाने की कोशिश कर रहा है। यहां तक कि मलेशिया के प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहिम ने तो वीडियो संदेश जारी कर दिया। पाकिस्तान की ख़ूब तारीफ की और मुस्लिम देशों के बीच पाकिस्तान को एक मजबूत देश बता दिया।

पाकिस्तानी  पीएम का ईरान पर ट्वीट

असल में ये सब तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान ने इस लड़ाई में मध्यस्थ बनने की पेशकश करनी शुरू की।पाकिस्तान के प्राइम मिनिस्टर शाहबाज़ शरीफ ने भी दो दिन पहले ट्वीट किया कि पाकिस्तान मध्स्थता के लिए उत्सुक है। देखिये- ये है वो ट्वीट

इसमें लिखा है-पाकिस्तान मध्य-पूर्व में युद्ध को समाप्त करने के लिए संवाद की दिशा में जारी प्रयासों का स्वागत करता है और उनका पूर्ण समर्थन करता है। यह इस क्षेत्र और उससे बाहर भी शांति और स्थिरता के हित में है। अमेरिका और ईरान की सहमति के अधीन, पाकिस्तान इस जारी संघर्ष के व्यापक समाधान हेतु सार्थक और निर्णायक वार्ता को सुगम बनाने के लिए मेज़बानी करने को तत्पर और गौरवान्वित महसूस करता है।

शहबाज-आसिम मुनीर की तारीफें

इतना ही नहीं, ख़बर तो यहां तक आ गई कि पाकिस्तानी आर्मी चीफ ने फोन पर सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बात भी कर ली है। पाकिस्तानी प्राइम मिनिस्टर से लेकर फील्ड मार्शल तक की तारीफों के पुल बांधने लग गये। गजब की बात देखिये कि पाकिस्तान ने ईरान को अमेरिका का प्रपोजल भी थमा दिया।लेकिन ये सारी बातें हवा हवाई साबित हो गईं। ईरान ने साफ कर दिया कि ट्रम्प का निगोशिएशन का क्लेम फर्जी है। ईरान के मिलिट्री स्पोक्सपर्सन ने साफ कहा कि अमेरिका और इज़रायल के साथ अब कोई बातचीत नहीं होगी।

ईरान को पाकिस्तान की हकीकत पता

तो सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तान ने बातचीत की ये पेशकश बिना ईरान की सहमति से ही की थी? क्या मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान का उतावलापन सोच समझ कर उठाया गया क़दम था या फिर खुद को एक डिप्लोमैटिक ताक़त साबित करने की हड़बड़ी। क्योंकि ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान की इस कोशिश के बाद ईरान भड़क गया है।

पाकिस्तान शिप को ईरानी नेवी ने रोका

ईरान ने अब कई देशों के झंडे वाले जहाज़ों को स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पार करने की इजाजत दे दी है। इनमें भारत, चीन, थाईलैंड समेत और भी कई देश हैं। लेकिन ईरान की नेवी ने पाकिस्तान के शिप को वहां से गुजरने नहीं दिया। ईरान की नेवी ने SELEN नाम के जहाज़ को स्ट्रैट ऑफ होर्मूज से लौटा दिया। ये कार्गो शिप कराची जा रहा था। तो इसे क्या माना जाए। भई ये शिप तो ना अमेरिका का था, ना इज़रायल का और ना ही किसी वेस्टर्न कंट्री का। ये शिप तो पाकिस्तान का था फिर ईरान ने क्यों उसके जहाज़ को रास्ता नहीं दिया। इसका मतलब तो यही है कि ईरान इस जंग में पाकिस्तान की दखलअंदाज़ी से खुश नहीं है।

ईरान जानता है कि पाकिस्तान अमेरिका के साथ है, यानी पाकिस्तान इज़रायल के साथ है और पाकिस्तान मध्यस्थता नहीं केवल अमेरिका और इज़रायल के कंडीशन्स ईरान पर थोपने की कोशिश करेगा। इसी वजह से उसने ना केवल बातचीत से इनकार कर दिया है बल्कि पाकिस्तान के शिप को रोक कर उसे भी एक मैसेज भेज दिया है।

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