- 7 विदेशियों की गिरफ्तारी में रूस की अहम भूमिका
- रूस ने भारत को CIA के डर्टी गेम का इंटेल दिया
- भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में अस्थिरता फैलाने की योजना
रूस ने की भारत की मदद
भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा 1 अमेरिकी सहित 7 विदेशी नागरिकों की गिरफ्तार ने हलचल मचा दी है। यूक्रेन के जो 6 लोग पकड़े गए हैं उन पर तो यूक्रेनी सरकार का बयान आ चुका है लेकिन अमेरिका की तरफ से चुप्पी साधी गयी है। अमेरिका बैकफुट पर नज़र आ रहा है क्योंकि उसका अपना नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त में है। भारत के नॉर्थ ईस्ट रीजन को अस्थिर बनाने की ये जो विदेशी साजिश थी, इसे रूसी खुफिया एजेंसी द्वारा गुप्त सूचना के आधार पर नाकाम किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूसी खुफिया एजेंसियों ने भारत को जानकारी दी कि यह समूह म्यांमार में सक्रिय है और भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने निगरानी बढ़ाई और कार्रवाई की।
पूरा मामला क्या है ?
NIA ने हाल ही में एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जिसमें उसने एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया। छह यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ, दिल्ली और अन्य जगहों से पकड़ा गया। इन सभी पर आरोप है कि वे भारत-नॉर्थईस्ट कॉरिडोर का इस्तेमाल कर 2024 से म्यांमार जा रहे थे और वहां ड्रोन, जैमिंग उपकरण सप्लाई करने के साथ-साथ जातीय सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग दे रहे थे। चूंकि इसमें यूक्रेनी नागरिक भी इन्वॉल्व थे तो रूसी खुफिया एजेंसी की भी नज़रें इस पर थीं। जैसे ही उन्हें अहसास हुआ कि ये यूक्रेनी भारत को नुकसान पहुंचाने के मिशन पर काम कर रहे हैं तो रूस की तरफ से भारतीय एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया।
भारत-अमेरिका संबंधों पर इसका असर क्या होगा ?
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक की गिरफ्तारी पर अमेरिका को झटका लगा है। इसे लेकर भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत हुई। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोवल से मुलाकात की। इस मुलाकात में भारत के तरफ से साफ-साफ और सीधे शब्दों में अमेरिका को बता दिया गया कि उसकी सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों पर कोई समझौता नहीं होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी पक्ष ने कहा कि वे मामले की जांच में सहयोग करेंगे और अपने नागरिक की गतिविधियों की समीक्षा करेंगे।
गिरफ्तार अमेरिकी मैथ्यू वैनडाइक कौन हैं?
- वैनडाइक पहले भी लीबिया और सीरिया में विद्रोही समूहों के साथ जुड़ रहा है।
- उसे “विद्रोही पत्रकार” और “फ्रीडम फाइटर” के तौर पर जाना जाता है।
- भारत में उसकी गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया क्योंकि वो सीधे ड्रोन वॉरफेयर ट्रेनिंग से जुड़े पाए गए।
भारत की सुरक्षा चिंताएँ
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में पहले से ही विद्रोही गतिविधियाँ मौजूद हैं। यदि विदेशी नागरिक इन समूहों को तकनीकी मदद देंगे तो यह भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा होगा। NIA अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क को भारत में किसने मदद की। इनका नेटवर्क मिजोरम और अन्य सीमावर्ती इलाकों से म्यांमार में प्रवेश करता था। वहां जातीय समूहों को ड्रोन ऑपरेशन, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और युद्धक रणनीति की ट्रेनिंग दी जाती थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक ये उपकरण यूरोप से लाए जाते थे और भारत के रास्ते म्यांमार पहुँचाए जाते थे।
आगे क्या होने वाला है ?
यह मामला भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ा अलर्ट है। रूस की खुफिया जानकारी और भारत की त्वरित कार्रवाई ने इस नेटवर्क को उजागर किया। अब यह देखना होगा कि जांच आगे किन नए चेहरों और संगठनों को बेनकाब करती है। यह घटना भारत-अमेरिका संबंधों में भी एक नया आयाम जोड़ती है, जहाँ भारत ने अपनी सुरक्षा चिंताओं को सीधे अमेरिकी राजदूत और NSA स्तर पर उठाया है। आपको याद होगा कि किस तरह अमेरिका ने निखिल गुप्ता को पन्नू की तथाकथित हत्या की साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया और अमेरिकी कोर्ट ने उसे इस बात का दोषी भी पाया था। अमेरिका निखिल गुप्ता वाले मामले को भारत पर प्रेशर बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहा था। लेकिन अब अमेरिका खुद भारत विरोधी गतिविधियों में फंस गया है और मैथ्यू नैवडाइक इसका जीता जागता सबूत है।







