R&AW और NTRO का जबरदस्त ऑपरेशन, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के बहुत बड़े नेटवर्क का गाज़ियाबाद में पर्दाफाश

By Alok Ranjan

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  • ISI का प्लान था लाइव कैमरे सेटअप करना
  • पाकिस्तान से बैठकर भारत का सर्विलांस
  • R&AW, NTRO और गाज़ियाबाद पुलिस का ऑपरेशन
  • सेना से जुड़े ठिकानों की लाइव सर्विलांस की योजना

ISI की थी बहुत खतरनाक प्लानिंग

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद खतरनाक पाकिस्तानी साजिश का पर्दाफाश किया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने भारत में एक स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार किया था, जिसका मकसद था कि गुप्त रूप से सोलर-पावर्ड सीसीटीवी कैमरे लगाकर भारतीय सैन्य ठिकानों की गतिविधियों की निगरानी की जाए। ये कैमरे लंबे समय तक बिना बिजली के चलते रहते और रियल-टाइम वीडियो पाकिस्तान भेजते। इस नेटवर्क को R&AW की S-Wing, NTRO और गाजियाबाद पुलिस ने मिलकर नाकाम किया। पुलिस ने सबसे पहले सुहैल मलिक, प्रवीन, राज, शिवा और ऋतिक को पकड़ा। उनकी निशानदेही पर इरम उर्फ महक को भी गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

सुरक्षा एजेंसियों को कैसे लगी भनक?

जांच में पता चला कि सुहैल और राज वल्मीकि पुराने दोस्त हैं। दोनों दिल्ली में होटलों और ढाबों पर काम करते थे। बाद में नौकरी छोड़ने के बाद सुहैल मेरठ चला गया। पैसों की ज़रूरत पड़ने पर उसने राज को जासूसी में शामिल कर लिया। इसके बाद प्रवीन, शिवा वल्मीकि, ऋतिक गंगवार और इरम भी इस नेटवर्क से जुड़ गए। इस नेटवर्क की गतिविधियों पर पहली बार शक तब हुआ जब गाजियाबाद पुलिस को सूचना मिली कि कुछ लोग बार-बार सैन्य ठिकानों और संवेदनशील इलाकों के पास घूम रहे हैं और मोबाइल से वीडियो बना रहे हैं। R&AW और NTRO ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए इनकी डिजिटल गतिविधियों को ट्रैक किया। जांच में पता चला कि ये लोग एन्क्रिप्टेड ऐप्स और VPN नेटवर्क का इस्तेमाल करके वीडियो सीधे पाकिस्तान भेज रहे हैं।

नेटवर्क को ट्रेस और ट्रैक करने की रणनीति

करीब छह महीने पहले सुहैल ने दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर सोलर कैमरा लगाया था, जो सीधे पाकिस्तान में एक नंबर पर लाइव फीड भेजता था। आरोपियों को जानकारी भेजने के बदले 5,000 से 20,000 रुपये तक की रकम मिलती थी। पुलिस ने उनके पास से आठ मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें कई पाकिस्तानी नंबर मिले हैं। एजेंसियों ने पहले इनकी लोकेशन हिस्ट्री और मोबाइल डेटा की जांच की। इसके बाद इनकी गतिविधियों को ड्रोन सर्विलांस और CCTV फुटेज से मिलाया गया। धीरे-धीरे इनके पूरे नेटवर्क की पहचान हुई। जब पर्याप्त सबूत मिल गए तो गाजियाबाद पुलिस ने R&AW और NTRO के साथ मिलकर ऑपरेशन चलाया और इस नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया।

जाल बिछाकर हुई गिरफ्तारी

गाजियाबाद के साहिबाबाद क्षेत्र में छापेमारी कर पुलिस ने सुहैल मलिक समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया। इनके पास से सोलर-पावर्ड CCTV कैमरे, लैपटॉप, मोबाइल फोन और हार्ड ड्राइव्स बरामद किए गए। बरामद डिवाइसों में भारतीय सैन्य ठिकानों के वीडियो और तस्वीरें मिलीं। मुख्य आरोपी सुहैल मलिक है, जो इस नेटवर्क का संचालक था। उसके साथ 5 अन्य सहयोगी भी गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें स्थानीय मददगार और तकनीकी सपोर्ट देने वाले लोग शामिल हैं। पुलिस ने इनके नाम और पहचान दर्ज की है और आगे की जांच जारी है।

ISI को जानकारी कैसे भेजते थे?

ये लोग वीडियो और तस्वीरों को पहले कंप्रेस करते थे ताकि आसानी से भेजा जा सके। फिर इन्हें एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और VPN नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान में बैठे ISI हैंडलर्स को भेजा जाता था। इस तरह ISI को भारतीय सेना की गतिविधियों की रियल-टाइम जानकारी मिलती थी। जांच में सामने आया कि पिछले एक साल में 50 से अधिक वीडियो और कई तस्वीरें ISI को भेजी गईं। पुलिस के अनुसार, आरोपी दिल्ली, मुंबई, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और कर्नाटक के संवेदनशील ठिकानों की तस्वीरें, वीडियो और लोकेशन पाकिस्तान भेज रहे थे। इनमें दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन, सेना छावनी क्षेत्र, सभी रेलवे स्टेशन, जीआरपी और आरपीएफ के ठिकाने शामिल हैं। मुंबई के रेलवे स्टेशन और रक्षा क्षेत्रों की जानकारी भी पाकिस्तान तक पहुंचाई गई। शुरुआत में आरोपी फोटो और वीडियो सुहैल को भेजते थे, जिसे वह पाकिस्तान में अपने संपर्क तक पहुंचाता था। बाद में सभी सीधे पाकिस्तानी हैंडलर्स से जुड़ गए और उन्हें एक व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल कर लिया गया। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपियों को पाकिस्तान से कुछ पार्सल भी मिले थे। फिलहाल यह जांच जारी है कि सुहैल का पाकिस्तान से संपर्क कैसे हुआ।

अब तक क्या क्या भेजा गया?

  • BSF मुख्यालय के वीडियो
  • रेलवे स्टेशन और भीड़भाड़ वाले इलाकों के फुटेज
  • सैन्य ठिकानों के मूवमेंट की जानकारी

NTRO क्या है और इसका काम क्या है ?

NTRO यानी National Technical Research Organisation भारत की एक विशेष तकनीकी खुफिया एजेंसी है, जिसका काम है हाई-टेक सर्विलांस और तकनीकी इंटेलिजेंस जुटाना ताकि देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

  • स्थापना: 2004 में हुई।
  • मुख्यालय: नई दिल्ली।
  • अधीनता: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और National Security Advisor के अंतर्गत काम करती है।
  • प्रकृति: यह एक तकनीकी खुफिया एजेंसी है, यानी इसका फोकस टेक्नोलॉजी आधारित इंटेलिजेंस पर होता है।

NTRO के मुख्य कार्य

  • हाई-टेक सर्विलांस: उपग्रह, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए निगरानी करना।
  • साइबर इंटेलिजेंस: इंटरनेट, डिजिटल नेटवर्क और साइबर हमलों से जुड़ी जानकारी जुटाना।
  • सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT): रेडियो, मोबाइल और अन्य कम्युनिकेशन चैनलों की निगरानी।
  • इमेजरी इंटेलिजेंस (IMINT): उपग्रह और हवाई तस्वीरों से जानकारी निकालना।
  • क्रिप्टोलॉजी रिसर्च: एन्क्रिप्शन और डिक्रिप्शन तकनीक पर काम करना।

NTRO की भूमिका

  • भारत की सुरक्षा एजेंसियों जैसे R&AW, IB और सेना को तकनीकी इंटेलिजेंस सपोर्ट देना।
  • सीमा पार से आने वाले खतरों, आतंकी गतिविधियों और साइबर हमलों की निगरानी करना।
  • आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके दुश्मन देशों की गतिविधियों पर नजर रखना।

एनालिसिस: क्यों है यह ऑपरेशन खास?

यह ऑपरेशन दिखाता है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां कितनी सतर्क और सक्षम हैं। ISI की कोशिश थी कि सोलर-पावर्ड कैमरों से लंबे समय तक निगरानी की जा सके, लेकिन R&AW और NTRO ने इसे समय रहते पकड़ लिया। ISI की योजना थी कि भारतीय सैन्य ठिकानों की निगरानी कर पाकिस्तान को रियल-टाइम जानकारी दी जाए। इस ऑपरेशन ने साबित कर दिया कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां हर स्तर पर सतर्क हैं और किसी भी जासूसी साजिश को सफल नहीं होने देंगी। इस तरह की साजिशें भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं, लेकिन एजेंसियों की कोऑर्डिनेशन और प्रोफेशनलिज्म ने इसे नाकाम कर दिया। गाजियाबाद में पकड़ा गया यह नेटवर्क भारत की सुरक्षा एजेंसियों की शानदार सफलता है।

5 thoughts on “R&AW और NTRO का जबरदस्त ऑपरेशन, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के बहुत बड़े नेटवर्क का गाज़ियाबाद में पर्दाफाश”

  1. आलोक भाई ! अधिकतर इस प्रकार के देशद्रोहियों का कुछ खास कर नहीं पाती हमारी धुरंधर एजेंसियां। गद्दारी के लिए केवल और केवल मृत्युदंड का प्रावधान होना चाहिए । लचर कानून व्यवस्था ढीली न्यायिक प्रक्रिया, कानून को कानून में उलझा देने के लिए देशद्रोहियों के हित में खड़े होते बड़े बड़े वकील । देश की न्यायिक प्रक्रिया उपहास की पात्र बन कर रह जाती है।

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    • हमारे कानून को और ज्यादा सख्त बनाना चाहिए, सहमत हूं आपकी बात से कि गद्दारी साबित होने पर मृत्युदंड का प्रावधान होना चाहिए, पर दिक्कत ये है कि हमारे देश के भीतर एक बड़ा वर्ग वो भी है जो मृत्युदंड को ही खत्म करने की मांग कर रहा है

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