- अभी तक एक भी भारतीय पनडुब्बी में AIP नहीं
- चीन-पाकिस्तान के पास AIP सबमरींस मौजूद
- DRDO ने डेवलप कर ली है AIP तकनीक
- नयी डील AIP से लैस सबमरीन वाली होगी
INS खंडेरी होगी स्वदेशी AIP तकनीक से लैस
भारत की नौसेना एक नई ताक़त से लैस होने वाली है। जो ताक़त अब तक चीन की नेवी के पास थी। जो ताक़त अब तक पाकिस्तान की नेवी के पास थी। अब वही ताक़त भारत की नेवल फोर्स को भी मिलने वाली है। इंडियन नेवी की सबमरीन बहुत जल्द एक नई टेक्नोलॉजी से लैस होने जा रही है। ऐसी टेक्नोलॉजी जो एक डीज़ल पनडुब्बी को न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन जैसी क्षमता दे सकती है। तो ख़बर आ चुकी है दोस्तों कि बहुत जल्द हमारी स्वदेशी पनडुब्बी INS खंडेरी को DRDO के बनाये हुए AIP सिस्टम से लैस कर दिया जाएगा। DRDO और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड यानी MDL इसी साल के अंत तक INS खंडेरी में इस AIP सिस्टम को लगाने वाले हैं और कहा जा रहा है कि अगले साल यानी 2027 में इसका ट्रायल भी शुरू कर दिया जाएगा
AIP होता क्या है ?
अब सवाल उठता है कि ये AIP सिस्टम क्या है जो INS खंडेरी में लगाया जा रहा है तो जान लीजिए दोस्तों कि AIP का मतलब है Air Independent Propulsion। ये प्रॉपल्शन सिस्टम कनवेन्शनल डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन को कई तरह से एडवांस बना देता है। ये सबमरीन के अंडरवाटर एन्ड्यूरेंस को बढ़ाने के साथ-साथ उसे स्टील्थ की ताक़त भी देता है। आसान शब्दों में इसका मतलब है कि ये एक ऐसी तकनीक है जो पनडुब्बियों को बिना सतह पर आए लंबे समय तक पानी के भीतर रहने की क्षमता देती है। इसलिए इस टेक्नोलॉजी को सबमरीन के लिए फोर्स मल्टीप्लायर भी माना जाता है। दोस्तों, कनवेन्शनल डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन को हर 4 से 5 दिनों में पानी की सतह पर Snorkel के लिए आना पड़ता है।
सबमरीन्स में क्या होता है स्नोर्कल प्रोसेस ?
Snorkel एक ऐसी प्रोसेस है जिससे सबमरीन एयर ब्रिदिंग करती है। सबमरीन के टावर में लगी कई पाइप की तरह दिखने वाली चीज़ों को भी देखा होगा। इसी में से एक होता है Snorkel Head Valve। इसमें इनपुट और एक्जॉस्ट सिस्टम होता है। इनपुट से फ्रेश एयर सबमरीन के अंदर जाती है जबकि एक्जॉस्ट से सबमरीन के अंदर बनी गैस बाहर निकलती है। चूंकि डीजल इंजन को काम करने के लिए ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है और इसके लिए सबमरीन snorkel के ज़रिये ही ऑक्सीजन हासिल करती है।सबमरीन में लगी बैटरी भी डीजल इंजन से ही चार्ज होती है। इसके लिए सबमरीन अपनी दो स्नोर्कल ट्यूब को पानी के बाहर निकाल देती है और इस प्रोसेस को पूरा करती है। जब ये टेक्नोलॉजी नहीं थी तो पूरी सबमरीन को सतह पर आना पड़ता था और इससे दुश्मन को उसका पता चल जाता था। स्नोर्कल की टेक्नोलॉजी की वजह से केवल मास्ट का ऊपरी हिस्सा पानी के बाहर आता है।
स्नोर्कल के वक्त बढ़ जाता है खतरा
स्नोर्कल का ये प्रोसेस भी सबमरीन के लिए ख़तरा बन चुकी है। स्नोर्कल के लिए सतह के बिल्कुल पास तक आना और स्नोर्कल ट्यूब को बाहर निकालना भी दुश्मन को सबमरीन की मौजूदगी की जानकारी दे देता है।…सतह के पास आने की वजह से सबमरीन की आवाज़ और उससे निकलने वाला धुआं भी दुश्मन की नज़र में आ जाता है। इसके साथ ही दुश्मन का रडार भी उसे आसानी से ट्रैस कर सकती है…लेकिन इसके बिना सबमरीन पानी के अंदर सरवाइव नहीं कर सकती। सबमरीन की इसी समस्या को दूर करने के लिए AIP प्रॉपल्शन सिस्टम बनाया गया है। AIP में भी कई तरह की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की जा रही है।
स्टर्लिंग इंजन AIP
Stirling Engines क्लोज्ड-साइकिल एक्सटर्नल कंबशन इंजन हैं जो जेनरेटर चलाने के लिए स्टोर किए गए लिक्विड ऑक्सीजन के साथ डीज़ल जलाते हैं।यानी Stirling Engines में सबमरीन के अंदर ही लिक्विड ऑक्सीजन को स्टोर किया जाता है। ये गैस हीलियम या हाइड्रोजन भी हो सकती है। इंजन इस गैस को साइकल के हिसाब से गर्म और ठंडा करके काम करता है।इंटरनल कंबशन इंजन की तुलना में ये इंजन साइलेंट और एफिशिएंट होते हैं। जापान और स्वीडन इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्लोज़्ड साइकल डीज़ल AIP
क्लोज्ड-साइकिल डीज़ल AIP सिस्टम, सिंथेटिक एटमॉस्फियर बनाकर सबमरीन को पानी के अंदर पारंपरिक डीज़ल इंजन चलाने में मदद करते हैं। इसमें फ्यूल को एक क्लोज्ड लूप में जलाने के लिए लिक्विड ऑक्सीजन स्टोर किया जाता है और एग्जॉस्ट की जाने वाली गैसों को रीसायकल करके एटमॉस्फियरिक हवा की ज़रूरत को खत्म कर दिया जाता है। इससे पानी के अंदर रहने की क्षमता काफी बढ़ जाती है। इटली और स्पेन इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
DRDO का फ्यूल सेल बेस्ड AIP
DRDO की Naval Materials Research Laboratory ने स्वदेशी AIP सिस्टम को तैयार किया है। ये फ्यूल सेल बेस्ड एयर इंडिपेन्डेंट प्रॉपल्शन है। इसमें हाइड्रोजन ऑनबोर्ड जेनरेट होता है।फ्यूल सेल-बेस्ड AIP सिस्टम स्टोर किए गए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को इलेक्ट्रोकेमिकल तरीके से मिलाकर बिजली बनाते हैं, जिससे सबमरीन हफ्तों तक चुपचाप चलती है। बायप्रोडक्ट के तौर पर सिर्फ पानी निकलता है इसलिए एग्जॉस्ट की भी ज़रूरत नहीं रहती। इस तकनीक की बदौलत सबमरीन को स्नोर्कल करने की ज़रूरत नहीं रहती। ये AIP सबमरीन को 14 से 21 दिनों तक पानी के अंदर रहने की क्षमता देता है। और इसी वजह से इसकी स्टील्थ भी बढ़ जाती है।
भारत का AIP वाला प्लान क्या है ?
भारत ने अपने कन्वेन्शनल सबमरीन के बेड़े में AIP सिस्टम लगाने का फैसला किया था। शुरुआत में तय किया गया था कि इसे INS कलवरी में लगाया जाएगा, लेकिन प्रोजेक्ट के डिले होने की वजह से अब इसे INS खंडेरी में लगाया जा रहा है।ये भारतीय नौसेना की पहली पनडुब्बी होगी जो इस प्रॉप्लशन सिस्टम से चलेगी।भारत, जर्मनी से 6 एडवांस कन्वेन्शनल अटैक सबमरीन की डील भी करने जा रहा है। ये पनडुब्बियां भी फ्यूल बेस्ड AIP सिस्टम वाली होंगी।
चीन-पाकिस्तान के पास AIP वाली कितनी पनडुब्बियां ?
पाकिस्तान के पास चीन से ली हुई हंगोर क्लास की 4 सबमरीन AIP टेक्नोलॉजी वाली हैं।वहीं पाकिस्तान की तीन अगोस्ता 90B क्लास की सबमरीन भी AIP टेक्नोलॉजी वाली हैं।वहीं चीन के पास युआन क्लास की 21 पनडुब्बियां हैं जो AIP टेक्नोलॉजी वाली हैं। पाकिस्तान को दिया गया हंगोर क्लास इसी का एक्सपोर्ट वर्जन है।इसलिए मैंने कहा कि भारत इस टेक्नोलॉजी में काफी पीछे है लेकिन उम्मीद है कि इस साल हमारी नेवी को भी AIP की तकनीक से लैस पनडुब्बी मिल जाएगी और आने वाले कुछ सालों में और भी पनडुब्बियां इसी टेक्नोलॉजी से चलेंगी।










