- पाकिस्तान में फ्यूल इमरजेंसी जैसे हालात
- तेल कंपनियों को सप्लाई रेगुलेट करने के निर्देश
- पेट्रोल पंपों का कोटा तय कर दिया गया
- फोर्स्ड वर्क फ्रॉम होम लागू करने की योजना
- सड़कों पर गाड़ियों का चलना हो सकता है बंद
पाकिस्तान में जबरदस्त फ्यूल क्राइसिस
दुनिया में अगर फ्यूल इमरजेंसी आएगी तो इसकी वजह हम सबको पता है, अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध। अमेरिका और इज़रायल की ईरान के खिलाफ जंग जारी है और इस जंग ने दुनिया के कई देशों के साथ-साथ भारत-पाकिस्तान के लिए ख़तरे की घंटी बजा दी है। ये ख़तरे की घंटी है स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ का शट डाउन। अमेरिका और इज़रायल के हमलों के जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ को बंद कर दिया है और इसने पहले से ही कंगाल पाकिस्तान की धड़कनें बढ़ा दी है। रविवार को उसने इस स्ट्रेट को बंद करने की बात कही थी और तब से अब तक वो यहां से गुजरने की कोशिश करने वाले 6 जहाज़ों को तबाह कर चुका है।…IRGC ने कहा है कि वो स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से एक बूंद तेल बाहर नहीं जाने देगी। हालांकि भारत और चीन जाने वाले ऑयल टैंकर्स को ईरान ने यहां से जाने की इजाजत दे दी है। पर ईरान के इस फैसले ने ही पाकिस्तान में ऑयल क्राइसिस का सायरन बजा दिया है। तो अब जबकि ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया है तो पाकिस्तान तक तेल और गैस आना भी बंद हो गया है और इसी वजह से पाकिस्तान में फ्यूल क्राइसिस के हालात बन गये हैं। बिजनेस कम्यूनिटी के हाथ-पांव फूलने लगे हैं।
पाकिस्तान के पास केवल 25 दिनों का तेल
देश में पेट्रोल और डीज़ल केवल 5 लाख टन बचा हुआ है। ये अधिकतम 26 दिनों तक चल सकता है। पाकिस्तान में फ्यूल क्राइसिस पर इमरजेंसी मीटिंग चल रही हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान के फिनांस मिनिस्टर मुहम्मद औरंगजेब दावा कर रहे हैं कि देश में तेल की कोई कमी नहीं है। अच्छा, ऐसा है तो फिर पूरे पाकिस्तान में इतनी अफरा-तफरी क्यों मची है?क्यों इमरजेंसी प्रोटोकॉल इस्तेमाल करने की बात हो रही है?क्यों पेट्रोल पंपों का कोटा फिक्स किया गया है?यहां तक कि पाकिस्तान में फोर्स्ड वर्क फ्रॉम होम लागू करने की भी बात की जा रही है ताकि फ्यूल कंजम्पशन को कम किया जा सके।इसके अलावा पाकिस्तान गर्वमेंट ने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज के अलावा दूसरे रास्तें से गैस और तेल इम्पोर्ट करने के भी टेंडर निकाले हैं।साथ-साथ उसने साउदी अरब से रेड सी में उसके यानबू पोर्ट से तेल सप्लाई करने की मांग की है। यानी ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज की चाबी घुमाई और पाकिस्तान की सांस अटक गई है।इतना ही नहीं, इस स्ट्रेट के बंद होने से तेल के ग्लोबल प्राइस में भी बढ़ोतरी का ख़तरा मंडरा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि अभी करीब 80 डॉलर पर बैरल की कीमत वाला तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।पाकिस्तान ने 1 मार्च को ही देश में पेट्रोल की कीमत में 8 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में 1 लीटर पेट्रोल 266 रुपये 17 पैसे में मिल रहा है। वहीं हाई स्पीड डीज़न के दाम 5 रुपये 16 पैसे बढ़ाए गये थे। 1 लीटर डीजल का दाम पाकिस्तान में 280 रुपये 86 पैसे तक पहुंच गया है। अगर क्रूड ऑयल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गये तो पाकिस्तान में 30 से 50 रुपये प्रति लीटर तक दाम बढ़ सकते हैं। तभी तो कहा जा रहा है कि पाकिस्तान जबरदस्त फ्यूल क्राइसिस में फंस चुका है।

क्यों इतना अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ ?
ईरान और साउदी अरब के बीच में फारस की खाड़ी है। यहां पर और भी कई देश हैं जो फारस की खाड़ी से जुड़े हुए हैं- जैसे UAE, बहरीन, क़तर, कुवैत और इराक। जबकि इस खाड़ी के दूसरी तरफ ईरान और ओमान के बीच गल्फ ऑफ ओमान है।गल्फ ऑफ ओमान आगे अरेबियन सी में मिल जाता है। लेकिन पर्सियन गल्फ और गल्फ ऑफ ओमान को जोड़ती है एक संकरी सी जलधारा। इसे होर्मूज जलडमरूमध्य या स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ कहा जाता है। दो गल्फ को जोड़ने वाले इस स्ट्रेट की लंबाई करीब 167 किलोमीटर और न्यूनतम चौड़ाई 33 केवल किलोमीटर है।उसमें भी सी लाइन पूरे 33 किलोमीटर में नहीं है क्योंकि वहां समुद्र उतना गहरा नहीं है कि कार्गो शिप्स और ऑयल टैंकर वहां से निकल सकें। तो यहां शिपिंग लेन तय की हुई है। कार्गो जहाज़ और तेल और गैस के टैंकर इसी तय किये गये लेन से होकर होर्मूज जलडमरूमध्य से गुजरते हैं। इस शिपिंग लेन की चौड़ाई और कम है।अब ये समझिये कि साउदी अरब को छोड़ दें जिसका बॉर्डर रेड सी से भी मिलता है तो इराक, कुवैत, बहरीन और क़तर जैसे देशों का सारा मैरिटाइम ट्रेड इसी रास्ते से होता है। उनके लिए और कोई दूसरा समुद्री रूट नहीं है। दुनिया में जितना ऑयल एंड गैस की सप्लाई होती है, उसका 20 परसेंट केवल इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मूज़ से होता है।

किस सप्लाई रूट से कितना तेल-गैस ट्रांसपोर्ट होता है ?
दुनिया भर में होने वाली तेल की सप्लाई का 20 परसेंट स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से होता है। ये करीब 19 से 20 मिलियन बैरल डॉलर पर डे होता है। दूसरे नंबर पर है मलक्का स्ट्रेट। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के पास मौजूद ये स्ट्रेट इंडियन ओशन को साउथ चाइना सी से जोड़ता है। इस रूट से हर रोज़ 16 मिलियन बैरल तेल गुजरता है।अगला नंबर Cape of Good Hope का है। साउथ अफ्रिका का ये पॉइन्ट अटलांटिक ओशन में पड़ता है और ये दुनिया के ट्रेड रूट का एक इम्पॉर्टेंट पॉइन्ट है। यहां से 6 मिलियन बैरल तेल हर दिन गुजरता है। इसके बाद स्वेज नहर का नंबर आता है। यहां से 5.5 मिलियन बैरल पर डे। बॉब अल मन्देब से 5 मिलियन पर डे, डेनमार्क के स्कैजरैक स्ट्रेट से हर दिन 3 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई होती है।वहीं तुर्की के बोसपोरस स्ट्रेट से 2.5 मिलियन बैरल तेल हर दिन जाता है। यानी सबसे ज़्यादा तेल स्ट्रैट ऑफ होर्मूज से गुजरता है। इतना ही नहीं इसी स्ट्रेट से 300 मिलियन क्यूबिक मीटर LNG की सप्लाई होती है। यहां से ये एशिया और यूरोप के देशों में जाता है। इस रूट से सबसे ज़्यादा तेल और गैस चीन, भारत, जापान और साउथ कोरिया को जाता है।और इसी रास्ते पाकिस्तान का भी तेल और गैस आता है। पाकिस्तान क़तर से LNG लेता है, कुवैत से डीज़ल मंगवाता है और UAE से क्रूड ऑयल। और ये सब स्ट्रेट ऑफ होमरूज के रास्ते ही आते हैं।
क्या भारत में भी फ्यूल क्राइसिस होगी ?
भारत के पास 100 मिलियन बैरल क्रूड स्टॉक है जो 40 से 45 दिनों तक चल सकता है। कई राज्यों में पेट्रोल पंप्स पर भारी भीड़ दिखायी दे रही है, लोग पैनिक में हैं कि कहीं तेल कि किल्लत ना हो जाए, पर रिपोर्ट्स बता रही हैं कि भारत को फिलाहल तेल की दिक्कत नहीं होने वाली, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि मिडिल ईस्ट में जो क्राइसिस चल रही है उसके बावजूद भारत अपनी एनर्जी नीड्स को लेकर कंफर्टेबल पोजीशन में है, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने गैस सप्लाइज़ का ऑफर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों को कहना है कि कच्चे, एलएनएजी या एलपीजी की कोई ग्लोबल शॉर्टेज नहीं है, भारत लगातार अलग-अलग सप्लायर्स से अपनी ज़रूरत पूरी करता रहता है, भारत जितना भी कच्चा तेल खरीदता है उसका सिर्फ 40 परसेंट ही स्ट्रेट ऑफ होरमूज़ से आता है, बाकी का 60 परसेंट दूसरे रास्तों से भारत पहुंचता है। अगर गैस की बात करें तो भारत रोजाना 195 मिलियन मिट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर्स इंपोर्ट करता है, जिसमें से 60 मिलियन मिट्र्क स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर्स कतर से आता है, संघर्ष की वजह से कतर से गैस सप्लाई बहुत सीमित कर दी है पर इसके बावजूद भारत को दिक्कत नहीं आने वाली। दिक्कत इसलिए नहीं होगी क्योंकि भारत के पास विकल्पों की कमी नहीं है, और उसका सबसे भरोसेमंद रास्ता है रूस। भारत में रूस के राजदूत Denis Alipov ने कहा-

हम भारत को तेल आपूर्ति करने के लिए हमेशा तैयार हैं।
– Denis Alipov, भारत में रूस के राजदूत
रूस ने भेजा भारत को क्रूड ऑयल
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि ईस्ट एशिया की तरफ जा रहे दो रूसी ऑयल कार्गो शिप अब भारत की तरफ मुड़ गये हैं।यानी रूस ने किसी और देश को भेजे जा रहे तेल की सप्लाई को भारत पहुंचाने का फैसला किया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष से जुड़ी बाधाओं की भरपाई के लिए भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति को मोड़ने के लिए तैयार है, और लगभग 9.5 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल पहले से ही भारतीय जलक्षेत्र के पास जहाजों पर मौजूद है जो कुछ ही हफ्तों में पहुंच सकता है।
रूस से तेल खरीदने के लिए भारत को मिली अमेरिकी छूट
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की सप्लाई बनाए रखने के लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी है। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर अतिरिक्त 25 फ़ीसदी का टैरिफ़ लगा दिया था। इससे भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ़ 50 फ़ीसदी हो गया था। फरवरी 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत ने रूसी तेल ख़रीद बंद करने का वादा किया है इसलिए उसके साथ ट्रेड डील की जा रही है और उस पर लगा 50 फ़ीसदी टैरिफ़ घटा कर 18 फ़ीसदी कर दिया गया है।










