- क़तर की वायुसेना का दो ईरानी SU-24 विमानों को इंटरसेप्ट करने का दावा
- अबू धाबी में ड्रोन हमले से ईंधन टर्मिनल प्रभावित हुआ, स्थिति नियंत्रित
- तेल की कीमतें उछलीं, सोना-चाँदी में तेजी आई और शेयर बाज़ारों में गिरावट
- परमाणु खतरा भी बढ़ा
मौजूदा हालात क्या हैं ?
पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है और घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। इज़रायली सेना ने तेहरान और बेरूत में लक्षित हवाई हमले किए हैं। इनमें ईरान के सरकारी रेडियो-टीवी मुख्यालय को निशाना बनाया गया। ईरान ने अमेरिकी और इज़रायली ठिकानों पर खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ को बंद करने का दावा भी किया गया है। अमेरिका ने रियाद स्थित अपना दूतावास बंद कर दिया है और बहरीन, जॉर्डन व इराक से गैर-जरूरी कर्मचारियों को निकालने का आदेश दिया है। पाकिस्तान के नागरिक बड़ी संख्या में ईरान से सीमा पार कर रहे हैं, मिसाइल हमलों और यात्रा अव्यवस्था के कारण।

अमेरिका इस संघर्ष को 4–5 सप्ताह में समाप्त करना चाहता है, लेकिन “जरूरत पड़ी तो उससे भी लंबा चलेगा, बड़ा हमला अभी बाकी है” और अमेरिका के पास असीमित हथियार भंडार है
-डोनाल्ड ट्रम्प, राष्ट्रपति, अमेरिका

यह युद्ध वर्षों तक नहीं चलेगा, बल्कि यह “शांति का द्वार” है
-बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री, इज़रायल
संघर्ष के प्रमुख मोर्चे
| मोर्चा | हालात | असर |
|---|---|---|
| सऊदी अरब | अमेरिकी दूतावास बंद, ड्रोन हमले | नागरिक हताहत, संचार बाधित |
| तेहरान | इज़रायली हवाई हमले, सरकारी प्रसारण केंद्र ध्वस्त | लेबनान में अस्थिरता |
| बेरूत | इज़रायली हमले, ईरानी समर्थक गुट सक्रिय | तेल आपूर्ति पर खतरा |
| खाड़ी क्षेत्र | ईरानी मिसाइल/ड्रोन हमले, स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ बंद | कूटनीतिक संकट |
| सऊदी अरब | तेल, सोना, चाँदी की कीमतें बढ़ीं | वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव |
संघर्ष की शुरुआत और घटनाक्रम
इस संघर्ष की शुरुआत 1 मार्च को हुई जब अमेरिका और इज़रायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई । यह घटना ईरान के लिए एक बड़ा झटका थी और इसके तुरंत बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की। ईरान की तरफ से इस हमले का जवाब आया, ईरान ने अमेरिकी और इज़रायली ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, विशेष रूप से खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया। वहीं इज़रायल ने ईरान समर्थित हिज़बुल्लाह के ठिकानों पर बेरूत में हमले किए और तेहरान में सरकारी प्रसारण केंद्र को ध्वस्त कर दिया। चूंकि इस लड़ाई में अमेरिका इजरायल के साथ है इसलिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दी कि “सबसे कठोर हमले अभी बाकी हैं” । अमेरिका ने रियाद स्थित अपना दूतावास बंद कर दिया और 12 अन्य देशों से नागरिकों को निकालने की सलाह दी।
रणनीतिक मोर्चे और सैन्य स्थिति
| क्षेत्र | गतिविधि | रणनीतिक महत्व |
|---|---|---|
| तेहरान | इज़रायली एयरस्ट्राइक | शासन के प्रतीकात्मक ढांचे पर हमला |
| बेरूत | हिज़बुल्लाह ठिकानों पर हमला | ईरान समर्थित गुटों को कमजोर करना |
| स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ | ईरान ने जहाजों को रोकने की धमकी दी | वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर |
| रियाद | अमेरिकी दूतावास बंद | कूटनीतिक संकट और सुरक्षा खतरा |
| अबू धाबी | ड्रोन से ईंधन टर्मिनल पर हमला | ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा |
युद्ध से कौन-कौन से खतरे ?
ईरान–इज़रायल–अमेरिका संघर्ष अब केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले रहा है। इससे कई तरह के खतरे भी उत्पन्न हो रहे हैं जैसे, ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा, ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़: बंद करने का दावा वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। यह दुनिया की सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। तेल की कीमतें 20% तक बढ़ गई हैं। सोना और चाँदी की कीमतों में भी तेजी आई है । वहीं बड़ी संख्या में नागरिकों के विस्थापन का खतरा भी बढ़ता जा रहा है I पाकिस्तान की सीमा पर ईरान से हजारों नागरिक पलायन कर रहे हैं। वैश्विक एयर ट्रैफिक बाधित हुआ है, विशेषकर खाड़ी क्षेत्र में। अमेरिका ने दुबई, बहरीन और अन्य देशों से नागरिकों को निकालने की सलाह दी है। वैश्विक बाज़ारों में उथल-पुथल जिसका सीधा असर कई देशों की इकॉनमी पर पड़ेग I अमेरिका और एशिया के शेयर बाज़ारों में गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा एक बहुत बड़ा खतरा भी नज़र आ रहा है जो है परमाणु सुरक्षा पर सवाल I नतान्ज़ परमाणु संयंत्र पर हमले की खबरें सामने आई हैं, जिससे परमाणु प्रसार को लेकर चिंता बढ़ गई है। IAEA ने परमाणु स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है, लेकिन निरीक्षण फिलहाल रोक दिए गए हैं। मिडिल ईस्ट में फैल रहे इस संघर्ष से क्षेत्रीय अस्थिरता भी पैदा होनी शुरु हो चुकी है, लेबनान, सीरिया और इराक में ईरान समर्थित गुट सक्रिय हो रहे हैं, जिससे आने वाले समय में समस्या और ज्यादा बढ़ने वाली है I
निष्कर्ष
ईरान–इज़रायल–अमेरिका संघर्ष अब केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले रहा है। यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है और इसके असर केवल सैन्य नहीं बल्कि आर्थिक और राजनीतिक भी होंगे। यह संघर्ष केवल सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक और मानवीय स्तर पर भी गंभीर है। भारत जैसे देश, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, उन्हें रणनीतिक रूप से सतर्क रहना होगा।










