इंटरनेशनल ड्रग तस्कर सलीम डोला अब गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वाड यानी ATS के शिकंजे में आ गया है। वडोदरा की एक अवैध फैक्ट्री से ₹438.64 करोड़ की मेफेड्रोन ड्रग्स बरामदगी के मामले में ATS ने 31 अक्टूबर 2026 को उसे गिरफ्तार कर लिया है। ATS ने मुंबई की जेल से कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी कस्टडी ली और इसकी जानकारी 3 नवंबर को दी गई।
आरोप है कि डोला इस फैक्ट्री के लिए केमिकल उपलब्ध कराने से लेकर तैयार ड्रग्स की खरीद-बिक्री तक में शामिल था। ताजी कार्रवाई 1 दिसंबर 2022 को वडोदरा के सिंधरोट गांव में पकड़ी गई अवैध ड्रग फैक्ट्री से जुड़ी है, जहां से 87.728 किलो मेफेड्रोन बरामद हुई थी।
भारतीय एजेंसियों के मुताबिक, उसने विदेश में बैठकर ऐसा नेटवर्क खड़ा किया, जिसके तार भारत से पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप तक फैले थे। उसकी तलाश में जुटी भारतीय एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग से उसे तुर्की में ट्रेस किया। NCB (नॉरकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) उसे ‘ऑपरेशन ग्लोबल-हंट’ के तहत 28 अप्रैल 2026 को भारत लेकर आई थी।
डोला की कहानी में मुंबई का अंडरवर्ल्ड, गुजरात की ड्रग फैक्ट्री, दुबई में सक्रिय सहयोगी और इस्तांबुल का ठिकाना—सभी जुड़े हैं। अब गुजरात ATS का फोकस सिंधरोत फैक्ट्री के केमिकल सप्लायरों, तैयार ड्रग्स की सप्लाई और पैसों के लेनदेन की कड़ियां खंगालने पर है। जिनके सहारे यह तस्कर नेटवर्क चल रहा था।
कौन है सलीम डोला ?
59 साल का सलीम डोला मुंबई के दक्षिणी हिस्से में स्थित डोंगरी का रहने वाला है। गुजरात ATS की रिपोर्टों में उसका नाम सलीम इस्माइल डोला, जबकि गृह मंत्रालय की रिलीज में मोहम्मद सलीम डोला दर्ज है।
- दिसंबर 2022 में सिंधरोट की ड्रग फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद मामले में सलीम डोला का नाम सामने आया। वह इस मामले में अहम वांटेड था और विदेश से ही ड्रग नेटवर्क चला रहा था।
- सिंधरोट में तैयार किया गया मेफेड्रोन मुंबई में डोला के करीबी सहयोगी ऐमन मूसा शेख उर्फ अयान खान को पहुंचाया जाता था।
- मामले में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत अब तक कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
- भारतीय एजेंसियों के मुताबिक, उसने विदेश में बैठकर ऐसा नेटवर्क खड़ा किया, जिसके तार भारत से पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप तक फैले थे।
तुर्की से कैसे लाया गया भारत ?
भारत के अनुरोध पर मार्च 2024 में इंटरपोल ने सलीम डोला के खिलाफ रेड नोटिस जारी किया था। वह भारत में कई ड्रग तस्करी मामलों में वांछित था। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के तालमेल से उसकी तलाश आगे बढ़ी और आखिरकार उसे तुर्की में दबोचा गया।
- 25 अप्रैल 2026—इस्तांबुल में गिरफ्तारी: तुर्किये के अधिकारियों ने डोला को इस्तांबुल में गिरफ्तार किया।
- 28 अप्रैल—दिल्ली लाया गया: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी NCB ने तुर्की के अधिकारियों और अन्य एजेंसियों के सहयोग से उसकी भारत वापसी सुनिश्चित की।
- 29 अप्रैल—दिल्ली से मुंबई: दिल्ली की अदालत से दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद NCB उसे मुंबई ले गई। वहां उसके खिलाफ दर्ज ड्रग मामलों में आगे की कार्रवाई हुई।
- अब 31 अक्टूबर को गुजरात ATS ने ली कस्टडी ली है।
इस ऑपरेशन की अहम बात यह रही कि विदेश में गिरफ्तारी और भारत वापसी के बाद अलग-अलग एजेंसियों ने अपने मामलों में उसकी कस्टडी ली।
इसका अंडरवर्ल्ड कनेक्शन कितना गहरा ?
जांच एजेंसियों के अनुसार, सलीम डोला का आपराधिक इतिहास तीन दशकों से अधिक पुराना है और इसके तार सीधे तौर पर कुख्यात गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के ‘डी-कंपनी’ सिंडिकेट से जुड़े रहे हैं
- डोला का ड्रग कारोबार से संबंध 1990 के दशक तक जाता है।
- उस दौर में वह इकबाल मिर्ची के लिए नशीले पदार्थों की ढुलाई करता था।
- मिर्ची अंतरराष्ट्रीय मैंड्रेक्स तस्करी में सक्रिय था और दाऊद इब्राहिम का सहयोगी माना जाता था।
ATS का कहना है कि बाद में डोला ने अपने सहयोगियों के साथ अलग अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क खड़ा किया। मीडिया रिपोर्टों में उसे दाऊद का करीबी बताया जाता है; जांच एजेंसी ने उसके पुराने मिर्ची कनेक्शन का खास तौर पर उल्लेख किया है।
1998 में एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी, बाद में और बड़े मामलों में नाम–
| साल | मामला |
| 1998 | मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लगभग 40 किलो मैंड्रेक्स के साथ गिरफ्तारी। |
| 2013 | मुंबई पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल ने लगभग 79 किलो चरस के मामले में गिरफ्तार किया। |
| 2017 | गुजरात से कुवैत भेजे जा रहे लगभग ₹5.5 करोड़ के गुटखे की तस्करी के DRI केस में नाम आया। |
| 2018 | लगभग ₹1,000 करोड़ के फेंटानिल मामले में कार्रवाई हुई। हालांकि नमूनों की फॉरेंसिक जांच में फेंटानिल की पुष्टि नहीं होने के बाद उसे जमानत मिल गई थी। |
| 2022 और उसके बाद | गुजरात और महाराष्ट्र में मेफेड्रोन समेत कई अन्य मामलों में नाम सामने आया। |
डोला का नेटवर्क कैसे विदेश भेजता था ड्रग्स ?
ATS का आरोप है कि डोला के नेटवर्क में वैध एक्सपोर्ट के सामान वाले कंटेनरों में नशीले पदार्थ छिपाकर विदेश भेजे जाते थे। जिन देशों में खेप पहुंचनी होती थी, वहां डमी कंपनियां बनाई जाती थीं।
भारतीय एजेंसियां तुर्की तक कैसे पहुंचीं?
मुंबई में पकड़ी गई ड्रग्स और उससे जुड़े पैसों के लेनदेन की जांच डोला तक पहुंचने में अहम रही। 2023 के 20 किलो मेफेड्रोन केस में फैसल जावेद शेख की गिरफ्तारी के बाद जांचकर्ताओं ने बैंक खातों को खंगाला। संदिग्ध खातों में भेजी गई रकम की कड़ी डोला तक पहुंची।
एक अन्य मुंबई क्राइम ब्रांच जांच में सांगली और सूरत से UAE तथा तुर्की तक सप्लाई चेन के संपर्क सामने आए। फिर मार्च 2024 में भारत के अनुरोध पर इंटरपोल रेड नोटिस जारी हुआ था।
- तुर्की में डोला की गिरफ्तारी को लेकर सामने आई रिपोर्टों में पहचान छिपाने की कोशिशों का भी जिक्र है।
- NDTV के मुताबिक वह ‘हमजा’ नाम और बुल्गारिया के पासपोर्ट का इस्तेमाल कर रहा था। तलाशी में दो भारतीय पासपोर्ट भी मिलने की बात कही गई।
- उसी रिपोर्ट के मुताबिक, उसके ठिकाने पर मंगाई गई एक कूरियर डिलीवरी से लोकेशन की पुष्टि करने में मदद मिली।
तुर्की की नागरिकता लेने की भी कोशिश?
इकोनॉमिक टाइम्स की 30 अप्रैल की रिपोर्ट के मुताबिक, डोला 2024 की शुरुआत में इस्तांबुल पहुंचा था और निवेश के बदले नागरिकता देने वाले कार्यक्रम के जरिए तुर्की का पासपोर्ट हासिल करने की कोशिश कर रहा था।
- रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की ओर से साझा जानकारी और रेड नोटिस के बाद उसकी यह कोशिश आगे नहीं बढ़ सकी।
- उसे पकड़ने में तुर्की की खुफिया एजेंसी MIT और स्थानीय पुलिस शामिल थीं।
- जांच में उसके दुबई में भारतीय पासपोर्ट पर रहने और UAE तथा केन्या में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर इस्तेमाल करने की जानकारी भी मिली।
डोला के परिवार में किन पर गिरी गाज ?
डोला के परिवार और सहयोगियों तक भी जांच पहुंची। गृह मंत्रालय के मुताबिक, 2025 में उसके बेटे ताहिल सलीम डोला और अन्य सहयोगियों को UAE से भारत लाए जाने के बाद मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
बेटे का नाम अलग-अलग रिपोर्टों में ताहिर या ताहेर भी लिखा गया है। इंडियन एक्सप्रेस ने उसके भतीजे मुस्तफा मोहम्मद कुब्बावाला को भी UAE से भारत लाए जाने की जानकारी दी थी। जांच अधिकारियों के मुताबिक, इन कार्रवाइयों से विदेश में सक्रिय उसके नेटवर्क को तगड़ा झटका लगा।
अब संपत्तियों और ड्रग कारोबार के पैसे की जांच
गुजरात ATS के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय यानी ED भी डोला के ड्रग नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है।
जांच का फोकस यह पता लगाना है कि ड्रग्स से हासिल रकम किन खातों और कारोबारों में पहुंची तथा नेटवर्क को चलाने और उसका पैसा संभालने में किन लोगों की भूमिका थी।
जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश है कि गुजरात की फैक्ट्री किस स्तर पर काम कर रही थी और इस बड़े नेटवर्क में पीछे कौन-कौन लोग थे।








