ईरान बोला थैंक्यू इंडिया जान बचाने के लिए, मुंबई से 3 हजार किमी दूर इंडियन नेवी के मार्कोस कमांडोज का अद्भुत रेस्क्यू ऑपरेशन

By Defence Detective

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Indian Navy personnel with rescued crew members of the Iranian fishing vessel Azini after an anti-piracy operation in the Arabian Sea.

भारतीय नौसेना ने एक बार फिर समुद्री सुरक्षा में अपनी बेजोड़ ताकत और तत्परता का लोहा मनवाया है। मुंबई से 3,000 किलोमीटर से अधिक दूर अरब सागर के सुदूर इलाके में पूरी तरह सफल बचाव ऑपरेशन चलाया है। भारतीय जांबाजों ने एक साहसी और सटीक अभियान में अरब सागर में हाइजैक (अपहृत) हुई ईरानी फिशिंग वेसल ‘अजिनी’ (Azini) को सोमालिया के तट के पास से छुड़ा लिया है।

इसके साथ 48 घंटे के इस लंबे ऑपरेशन में वेसल पर मौजूद चालक दल (Crew) के सभी 20 सदस्यों को सुरक्षित बचाया है। इस अद्भुत पराक्रम को ईरान ने मुक्तकंठ से सलाम किया है।

हथियारबंद सोमालियाई समुद्री लुटेरों के विरुद्ध इस शानदार ऑपरेशन के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सैल्यूट किया है। इसके साथ बताया कि ऑपरेशन में वायुसेना ने भी ऑपरेशन में समय से बड़ा सहयोग दिया। अभियान 2 नवंबर 2026 को सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

सोमालिया के पास कैसे शुरू हुआ संकट?

ईरानी ध्वज वाले मछली पकड़ने के जहाज ‘अज़िनी’ को 29 अक्टूबर, 2026 को सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट पर बंदर बेयला और हाफुन के बीच अगवा कर लिया गया। हथियारबंद लुटेरों के कब्जे में आने के बाद जहाज और उस पर मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।

  • यह मामला केवल मछली पकड़ने वाले एक जहाज के अपहरण तक सीमित नहीं था।
  • समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि सोमालियाई लुटेरे इस जहाज को ‘मदरशिप’ यानी समुद्र में अपने तैरते अड्डे में तब्दील कर सकते हैं।
  • इस खतरे को देखते हुए भारतीय नौसेना ने पहले से समुद्री सुरक्षा मिशन पर तैनात अपने युद्धपोत को कार्रवाई का जिम्मा सौंपा।
  • यह युद्धपोत गाइडेड मिसाइल विध्वंसक INS कोलकाता था।

‘मदरशिप’ बनाकर क्या कर सकते थे लुटेरे ?

आशंका थी कि लुटेरे अगवा जहाज को क्षेत्र में गुजरने वाले मालवाहक जहाजों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तरह अज़ीनी पर कब्जा आसपास के समुद्री व्यापार के लिए भी खतरा बन सकता था

  • इसके जरिए वे छोटी नौकाओं से आसपास गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हमले कर सकते थे।
  • इससे चालक दल की सुरक्षा के साथ क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए भी खतरा पैदा हो गया था।
  • यहां मदरशिप का अर्थ ऐसे बड़े जहाज से है, जिसे छोटे हमलावर नौकाओं और उन पर सवार लुटेरों के सहयोगी अड्डे के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
  • ऐसे जहाज पर कब्जा लुटेरों को समुद्र में लंबे समय तक टिके रहने और तट से दूर गतिविधियां चलाने की सुविधा दे सकता है।
  • इसलिए बचाव कार्रवाई के दो अहम उद्देश्य थे—बंधक बने नाविकों की सुरक्षा और जहाज का इस्तेमाल आगे की समुद्री लूट के लिए होने से रोकना।

भारतीय नौसेना को अगवा जहाज का कैसे मिला सुराग ?

लगातार निगरानी के बाद अगवा जहाज अजिनी की स्थिति का पता चला और उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया गया। इसके लिए समुद्री निगरानी विमान और ड्रोन की मदद ली गई। इसके बाद नौसेना ने नियंत्रित दबाव बनाकर जहाज की आवाजाही सीमित की, ताकि लुटेरे उसे लेकर भाग न सकें।

  • बंधकों वाले जहाज के खिलाफ कार्रवाई में उसकी सही स्थिति, आवाजाही और आसपास की परिस्थितियों की जानकारी विशेष महत्व रखती है।
  • यहां चुनौती जहाज तक पहुंचने के साथ ऐसा अवसर बनाने की थी, जिसमें चालक दल की जान को सुरक्षित रखते हुए लुटेरों का नियंत्रण समाप्त किया जा सके।

ऑपरेशन में कौन-कौन से सैन्य प्लेटफॉर्म शामिल थे?

इस अभियान में INS Kolkata के साथ P-8I समुद्री निगरानी विमान और Sea Guardian ड्रोन शामिल थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन प्लेटफॉर्म ने मिलकर जहाज का पता लगाने, निगरानी रखने और कार्रवाई में सहयोग किया।

  • इसमें वायुसेना के C-17 विमान की भी अहम भागीदारी दर्ज की गई है।
  • समुद्र में युद्धपोत की मौजूदगी और ऊपर से लगातार निगरानी अभियान चलाने वाली टीम को अलग-अलग दिशाओं से जानकारी उपलब्ध कराती है।
  • इससे संदिग्ध जहाज की गतिविधियों पर नजर बनाए रखने और परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई तय करने में मदद मिलती है।

48 घंटे में नौसेना ने क्या और कैसे दिया ऑपरेशन को अंजाम ?

नौसेना ने अज़ीनी की गतिविधियों को सीमित करने और उसे भागने से रोकने के लिए नियंत्रित तरीके से दबाव बनाया। इसमें जहाज की निगरानी और पीछा करने के साथ उसके मूवमेंट को सीमित करने पर जोर रहा, ताकि लुटेरे भाग न सकें।

  • आधिकारिक विवरण में इसके लिए ‘कैलिब्रेटेड नॉन-काइनेटिक मेजर्स’ शब्द इस्तेमाल हुआ है।
  • सरल भाषा में इसका अर्थ है सीधे विनाशकारी प्रहार के बिना ऐसी कार्रवाई करना, जिससे सामने वाले की गतिविधियां नियंत्रित हों।
  • अभियान में इस्तेमाल किए गए सटीक तरीकों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
  • करीब 48 घंटे की अवधि में जहाज की तलाश, निगरानी, उसे रोकना और अंततः सुरक्षित कराना शामिल रहा।

ऑपरेशन में वायुसेना ने क्या रोल निभाया ?

पूरे अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय वायुसेना की मदद से मरीन कमांडो की ताकत बढ़ाना था। C-17 विमान से सटीक एयरड्रॉप के जरिए अतिरिक्त कमांडो पहुंचाए गए। इसके बाद सामरिक कार्रवाई करके जहाज को सुरक्षित किया गया और चालक दल को मुक्त कराया गया।

  • इस कदम ने समुद्र में मौजूद नौसैनिक बल को अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई। दूर समुद्र में चल रहे अभियान के बीच वायुसेना की यह भूमिका दोनों सेनाओं के परिचालन तालमेल को दिखाती है।
  • सार्वजनिक बयान में एयरड्रॉप की सटीक जगह, शामिल कमांडो की संख्या या जहाज पर पहुंचने की पूरी प्रक्रिया नहीं बताई गई है।

क्या गोलीबारी हुई या लुटेरे मारे गए ?

आधिकारिक बयान में गोलीबारी, मारे गए लुटेरों या गिरफ्तार लुटेरों की संख्या जैसी बातें नहीं बताई गई है। अभियान का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम सभी  क्रू मेंबर्स की सुरक्षित रिहाई रहा। नौसेना ने जहाज पर नियंत्रण स्थापित कर समुद्री लुटेरों से उत्पन्न खतरा समाप्त कराया। आधिकारिक बयान के अनुसार, किसी के हताहत या घायल होने की सूचना नहीं है।

  • हालांकि, लुटेरों की गिरफ्तारी, उनकी कुल संख्या या उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक बयान में नहीं दिया गया है।
  • इसी तरह गोलीबारी होने की स्पष्ट जानकारी भी उपलब्ध नहीं है।
  • इसलिए अभियान को लेकर “लुटेरों को मार गिराया” जैसा कोई दावा फिलहालत गलत है।

ईरान ने भारत का आभार जताते हुए क्या कहा?

ईरानी दूतावास ने 3 नवंबर को जारी अपने संदेश में 20 ईरानी क्रू मेंबर्स को बचाने के लिए भारत सरकार, नौसेना और वायुसेना के प्रति आभार व्यक्त किया। IANS के मुताबिक, दूतावास ने अभियान में शामिल भारतीय सैन्यकर्मियों के साहस, पेशेवर क्षमता और प्रभावी तालमेल की सराहना की।

उसने इस कार्रवाई को भारत और ईरान के बीच मित्रता, एकजुटता तथा सहयोग की भावना का उदाहरण बताया। सीमाओं से परे लोगों का जीवन बचाने में भारत की भूमिका को भी रेखांकित किया।

भारत ने हिंद महासागर में अपनी क्षमता का मनवाया लोहा

यह पूरी घटना भारत की बेजोड़ समुद्री क्षमता का एक और शानदार Example है। भारत ने अपने तट से बहुत दूर युद्धपोत, हवाई निगरानी, कमांडो और वायुसेना की मदद को एक साथ जोड़कर बंधक बचाव अभियान पूरा किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे क्षेत्र में समुद्री खतरों पर निर्णायक कार्रवाई करने की भारतीय नौसेना की क्षमता का उदाहरण बताया। इसमें जहाज की पहचान से लेकर निगरानी, सैन्य सहायता पहुंचाने और बंधकों को सुरक्षित मुक्त कराने तक कई चरण शामिल थे।

राजनाथ सिंह ने नौसेना की ऑपरेशनल तैयारियों और क्षेत्र में समुद्री खतरों का निर्णायक जवाब देने की क्षमता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारतीय सैन्यकर्मियों ने जीवन की रक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के भारत के संकल्प को प्रदर्शित किया है।

नौसेना ने हाल-फिलहाल में पहले कब चलाए ऐसे बड़े अभियान?

भारतीय नौसेना इससे पहले भी समुद्री लुटेरों के कब्जे से जहाजों और बंधक नाविकों को छुड़ा चुकी है। मार्च 2024 में MV Ruen को मुक्त कराने के लिए युद्धपोतों, निगरानी विमानों और एयरड्रॉप किए गए कमांडो की मदद ली गई थी।

वहीं, INS Sumitra ने 36 घंटे से कम समय में दो अपहृत जहाजों से 36 नाविकों को बचाया था। ये अभियान दूर समुद्र में बंधकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए कार्रवाई करने की नौसेना की क्षमता दिखाते हैं और बताते हैं कि भारतीय नौसेना हिंद ही हिंद महासागर की वास्तविक पहरेदार है।

तारीख और जहाजसंकटनौसेना की कार्रवाई और परिणाम
5 जनवरी 2024 — MV Lila Norfolkअरब सागर में जहाज पर हथियारबंद लोगों के चढ़ने और अपहरण की कोशिश की सूचना मिली।INS Chennai पहुंचा और मरीन कमांडो ने तलाशी ली। 15 भारतीयों सहित सभी 21 क्रू मेंबर्स सुरक्षित मिले। जहाज पर लुटेरे नहीं मिले; नौसेना के मुताबिक चेतावनियों और युद्धपोत के पहुंचने की आशंका से वे संभवतः भाग गए थे।
28–29 जनवरी 2024 — FV Imanसोमालिया के पास ईरानी फिशिंग वेसल और उसके चालक दल को लुटेरों ने बंधक बनाया।INS Sumitra ने जहाज को रोककर नियंत्रित दबाव बनाया और 17 ईरानी नाविकों को सुरक्षित छुड़ाया।
29 जनवरी 2024 — FV Al Naeemiईरानी जहाज पर 11 सोमाली लुटेरों ने 19 पाकिस्तानी नाविकों को बंधक बनाया।INS Sumitra ने हेलिकॉप्टर और नौकाओं की मदद से कार्रवाई कर सभी नाविकों को बचाया। ईमान और अल नईमी के दोनों अभियान 36 घंटे से कम समय में पूरे हुए।
15–16 मार्च 2024 — MV Ruenअपहृत मालवाहक जहाज लुटेरों के नियंत्रण में था। उन्होंने नौसेना का ड्रोन गिराया और युद्धपोत पर गोली चलाई।भारतीय मुख्यभूमि से करीब 2,600 किमी दूर 40 घंटे के अभियान में INS Kolkata और INS Subhadra ने कार्रवाई की। C-17 से कमांडो एयरड्रॉप हुए। 17 क्रू मेंबर्स सुरक्षित बचाए गए और 35 लुटेरे पकड़े गए।
29 मार्च 2024 — FV Al-Kambar 786ईरानी फिशिंग वेसल पर समुद्री लुटेरों का कब्जा था।INS Sumedha और INS Trishul ने 12 घंटे से अधिक की कार्रवाई में 23 पाकिस्तानी नाविकों को बचाया। नौ लुटेरों को पकड़कर कानूनी कार्रवाई के लिए भारत लाया गया।

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