धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से एक संवेदनशील मामला सामने आया है। वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र में पुलिस ने दो बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन बांग्लादेशियों को चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।
सारनाथ पुलिस ने इन्हें फरीदपुर अंडरपास के समीप से गिरफ्तार किया। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि वहाँ कुछ लोग चोरी का सामान बेचने के लिए मौजूद हैं। इसी सूचना पर टीम ने दबिश देकर दोनों को दबोच लिया।
पूछताछ में दोनों की पहचान सामने आने के बाद उनसे उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) समेत अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने भी पूछताछ की है। इस मामले में आरोपियों के भारत आने के उद्देश्य को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं।
कुछ रिपोर्टों में मेडिकल वीजा का उल्लेख है, जबकि दूसरी रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने घूमने और इलाज कराने के अलग-अलग बयान दिए हैं। पुलिस उनके बताए घटनाक्रम, पासपोर्ट, यात्रा रिकॉर्ड और भारत आने के उद्देश्य का सत्यापन किया जा रहा है।
कौन हैं दोनों बांग्लादेशी ?
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक गिरफ्तार बांग्लादेशी आरोपियों की पहचान मोहम्मद बैरूल इस्लाम (45 वर्ष, पुत्र मोहम्मद मुकुल अली) और मोहम्मद शफीकुल इस्लाम उर्फ मुन्ना (41 वर्ष, पुत्र विलायत हुसैन) के रूप में हुई है। दोनों मूल रूप से बांग्लादेश के चपाय नवाबगंज (Chapai Nawabganj) के रहने वाले हैं।
इन पर सारनाथ क्षेत्र में एक मकान का ताला तोड़कर घर के भीतर रखे सोने-चांदी के आभूषण और लाखों रुपये की नकदी पर हाथ साफ करने का आरोप है। दोनों को 26 अक्टूबर, 2026 की देर रात गिरफ्तार किया गया और अगले दिन अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
इनके पास से एक जोड़ी चांदी की पायल, एक चेन, ₹4,000 नकद, दो वैध बांग्लादेशी पासपोर्ट, दो मोबाइल फोन, दो लोहे की सब्बल और एक पेचकस बरामद हुए। इनके पास एक बैग भी मिला। ये कुछ गहने पहले भी बेच चुके थे।
इसके साथ इनकी यात्रा के पुराने रिकॉर्ड भी एजेंसियां खंगाल रही हैं। जाँच में यह पता लगाया जा रहा है कि दोनों पहले कब भारत आए थे और उनकी पिछली यात्राओं का विवरण क्या है।
किस वारदात में पकड़े गए दोनों ?
इस पूरे मामले का खुलासा सारनाथ थाना क्षेत्र के तड़िया चकवाही स्थित अमनपुरी कॉलोनी में हुई एक बड़ी चोरी की घटना के बाद हुआ। कॉलोनी के निवासी अबू लैश अहमद अपने परिवार के साथ कुछ दिनों के लिए दिल्ली-आगरा गए हुए थे। इस दौरान उनका घर पूरी तरह से बंद था। इसी का फायदा उठाकर शातिर बांग्लादेशियों ने घर ताला तोड़कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया।
जब 21 अक्टूबर को अबू लैश अहमद अपने परिवार के साथ वापस वाराणसी लौटे, तो घर के मुख्य दरवाजे का ताला टूटा था, घर के अंदर सारा सामान बिखरा हुआ था और अलमारी में रखे कीमती जेवरात गायब थे। जिसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई और मामले की जांच शुरू हुई।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने अमनपुरी कॉलोनी में 19 अक्टूबर को हुई चोरी में शामिल होने की बात स्वीकार की है।
पुलिस इन तक पहुँची कैसे ?
चोरी कांड की जाँच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन की मदद ली। थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी के हवाले से प्रकाशित जानकारी के अनुसार, तकनीकी जाँच से संदिग्धों तक पहुँचने में मदद मिली।
इसी बीच मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग फरीदपुर अंडरपास के पास चोरी का सामान बेचने के लिए मौजूद हैं। इसके बाद दोनों को पकड़कर पूछताछ हुई। जिसमें इनकी अमनपुरी कॉलोनी की चोरी में शामिल होने की बात सामने आई।
इनका चोरी करने का तरीका क्या था?
पूछताछ में आरोपियों ने अपनी जो कार्यप्रणाली बताई है, वह किसी पेशेवर अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय गिरोह जैसी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये दिन के समय सामान्य पर्यटकों या राहगीरों की तरह विभिन्न रिहायशी कॉलोनियों और पॉश इलाकों में घूमते थे और मकानों की रेकी करते थे।
दिन में रेकी पूरी करने के बाद, वे रात में बंद मकानों का ताला तोड़कर चोरी की वारदात को अंजाम देते थे।
भारत कब और कैसे आए ?
दोनों आरोपी बांग्लादेश से 25 सितंबर को पहले कोलकाता पहुँचे और फिर वहाँ से वाराणसी आए। हालांकि, भारत में प्रवेश के लिए उन्होंने किस सीमा चौकी या परिवहन माध्यम का इस्तेमाल किया, इसका स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।
उनके पास से बांग्लादेशी पासपोर्ट बरामद हुए हैं, जिनके साथ यात्रा रिकॉर्ड की भी जाँच की जा रही है। प्रवेश की सटीक तारीख और यात्रा का क्रम दस्तावेजों के सत्यापन से ही स्पष्ट होगा।
क्या था भारत आने का मकसद
भारत आने के उद्देश्य को लेकर भी अलग-अलग जानकारी है। दैनिक जागरण ने थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी के हवाले से बताया कि दोनों मेडिकल वीजा पर आए थे। वहीं, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ में उन्होंने पहले घूमने और बाद में इलाज कराने की बात कही।
पुलिस को संदेह है कि वे जाँचकर्ताओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे में इलाज या पर्यटन में से किसी एक को उनके आने का पुष्ट उद्देश्य बताना अभी सही नहीं होगा।
पूछताछ में आरोपियों ने यह भी बताया कि वाराणसी पहुँचने के बाद मोहम्मद शफीकुल इस्लाम का सामान चोरी हो गया था। इसके बाद पैसे नहीं बचे और चोरी शुरू करने की बात कही।
पुलिस उनके इस बयान की भी जाँच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि उनकी पिछली भारत यात्राओं का विवरण क्या है और उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।
वाराणसी में पहले भी पकड़े जा चुके हैं बांग्लादेशी नागरिक
मार्च 2026 में रामनगर पुलिस ने सूजाबाद आर्मी ग्राउंड के पास से बांग्लादेश के ढाका निवासी मोहम्मद बशर को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, वह बिना वैध वीजा-पासपोर्ट के भारत में रह रहा था और उसने फर्जी पहचान के दस्तावेज भी बनवाए थे। उस पर पुणे के एक स्टूडियो से चोरी का आरोप था। उसके पास से ड्रोन, कैमरे, आईपैड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए थे।
इससे पहले 14 अक्टूबर 2025 को वाराणसी कैंट स्टेशन पर सियालदह–जम्मूतवी हमसफर एक्सप्रेस से हकीम नाम का बांग्लादेशी युवक पकड़ा गया था। बिना टिकट यात्रा करते मिले युवक को टीटीई ने जीआरपी के हवाले किया था। पूछताछ में उसने दलाल की मदद से मालगाड़ी के जरिए भारत में प्रवेश करने और रोजगार के लिए दिल्ली जाने की बात बताई थी।
वहीं, 8 अप्रैल 2025 को ATS और स्थानीय पुलिस ने सारनाथ से बांग्लादेश के बंदरबन जिले के निवासी होल मोंग सिंग मार्मा को पकड़ा था। आरोप था कि वह मोंग फ्रू मोग नाम से अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था और उसने फर्जी भारतीय दस्तावेज बनवा लिए थे। रिपोर्ट के अनुसार, वह 2010 में अवैध रूप से भारत आया था और सारनाथ में बौद्ध मंदिर तथा बाद में हैंडीक्राफ्ट की दुकान पर काम कर चुका था।








