यूक्रेन, रूस के साथ भीषण युद्ध में उलझा हुआ है। इसके बीच पाकिस्तान और यूक्रेन के बीच सैन्य संबंध? फिलहाल यूक्रेन की अग्रणी ड्रोन और मिसाइल कंपनी Fire Point पाकिस्तान में पैर पसारने की तैयारी में है। विभिन्न समाचार रिपोर्टों के अनुसार Fire Point पाकिस्तान के एक निजी क्षेत्र की कंपनी के साथ तकनीकी और कारोबारी सहयोग की संभावनाएं तलाश रही है। इसके साथ अपने कुछ स्ट्राइक ड्रोन पाकिस्तानी सेना के सामने पेश करने की इच्छुक है।
Quwa की एक exclusive रिपोर्ट के मुताबिक Fire Point पाकिस्तान की कम से कम एक प्राइवेट सेक्टर कंपनी के साथ टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट्स के आदान-प्रदान पर बातचीत कर रही है और संभावित रूप से पाकिस्तानी सेना के बाजार में प्रवेश करना चाहती है। फिलहाल Quwa ने पाकिस्तानी कंपनी के नाम का खुलासा नहीं किया है। सबसे अहम बात यह है कि Fire Point पाकिस्तान को दो सिस्टम स्तावित कर रही है।
- FP-1 Deep Strike — लॉएटरिंग म्यूनिशन के साथ लगभग 2,600 किमी तक की रेंज
- FP-2 Front Strike — लॉएटरिंग म्यूनिशन के साथ लगभग 200 किमी तक की रेंज
क्या पाकिस्तान को ये ड्रोन मिल चुके हैं?
फिलहाल, अभी ऐसा बिल्कुल नहीं है, केवल इस दिशा में बात हो रही है। यह केवल एक संभावित डील है। रिपोर्ट के अनुसार Fire Point पाकिस्तानी प्राइवेट सेक्टर के साथ इंगेजमेंट और मार्केटिंग कर रही है। जब यह बातचीत कोई ठोस रूप लेगी, उसके बाद ही अन्य चीजें साफ हो सकेंगी।
क्या है Fire Point ?
कीव में 2022 में स्थापित Fire रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान तेजी से उभरते डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स में शामिल हो गई। कंपनी लंबी दूरी के unmanned strike systems के साथ क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइल टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रही है। Quwa के अनुसार Fire Point का उत्पाद परिवार FP-1 और FP-2 loitering/strike drones से लेकर FP-5 Flamingo cruise missile तथा FP-7 और प्रस्तावित FP-9 जैसे missile systems तक फैला हुआ है।
इस कंपनी का महत्व सिर्फ उसके हथियारों की रेंज में नहीं है। असली ताकत है Russia-Ukraine war से मिला वास्तविक combat experience।
यूक्रेन ने पिछले कुछ सालों में ड्रोन्स को केवल battlefield reconnaissance के लिए इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर स्थित रूसी आयल रिफाइनरीज, लाजिस्टिक हब्स, मिलिट्री इंस्टालेशन और इंडस्ट्रिलयल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के लिए भी किया है। Fire Point के FP-1 को ऐसे deep-strike अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका मिली है। हालिया रिपोर्टों में upgraded FP-1 द्वारा रूसी क्षेत्र में लगभग 2,500 किलोमीटर की दूरी तक पहुंचने का उल्लेख है।
The Guardian के अनुसार Fire Point FP-1 और FP-2 के साथ बड़े पैमाने पर Flamingo cruise missiles का भी उत्पादन कर रही है और कंपनी ने युद्ध के दौरान अपनी production capacity को काफी बढ़ाया है।
डील भारत के लिए कितना खतरा ?
Fire Point आज जिस कॉम्बैट एक्सपीरियंस को पाकिस्तान को मार्केट कर रही है, उसका बड़ा हिस्सा रूस के खिलाफ युद्ध में विकसित हुआ है। इसलिए यदि यूक्रेनी कंपनी पाकिस्तान को वही टेक्नोलॉजी, manufacturing lessons या operational know-how देती है, तो अप्रत्यक्ष रूप से रूस के खिलाफ विकसित सैन्य अनुभव साउथ एशिया तक पहुंच सकता है।
यदि यह हथियार डील आगे बढ़ती है, तो भारत के लिहाज से ठीक नहीं माना जा सकता है। क्योंकि इससे पाकिस्तान की हमले की क्षमता में निश्चित रूप से इजाफा होगा। इसमें भी सबसे बड़ा खतरा कुछ दर्जन या कुछ सौ imported drones नहीं, बल्कि पाकिस्तान में Ukrainian battlefield know-how का ट्रांसफर हो सकता है। दरअसल यह हथियार रूस से लड़ाई में टेस्टेड हैं यानी परखे हुए हैं। तो यह बात पूरी तरह साफ है कि पाकिस्तान की डीप-स्ट्राइक क्षमता बढ़ सकती है।
इसके अलावा भारत-पाकिस्तान के बीच ड्रोन रेस के अगला चरण की संभावना भी बढ़ जाएगी। 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद दोनों देशों के लिए ड्रोन्स की भूमिका और बढ़ी है। पाकिस्तान पहले ही unmanned systems के विस्तार को राष्ट्रीय प्राथमिकता की तरह देख रहा है। पाकिस्तान domestic UAV production और private-sector participation बढ़ाने पर काम कर रहा है। पाकिस्तान के पास चीनी हथियारों का इकोसिस्टम पहले से है, यदि Ukrainian wartime drone expertise भी जुड़ती है, तो उसके लिए बहुत लाभदायक होगा।
वहीं इस संभावना से भी इंकार नहीं कि यदि cooperation केवल ड्रोन खरीद तक सीमित रहता है, तो इसका प्रभाव सीमित रहेगा। लेकिन यदि यह आगे बढ़कर: training → technology transfer → local production → software → EW-resistant navigation → long-range strike doctrine तक पहुंचता है, तो स्थिति काफी बदल सकती है।
घटनाक्रम रूस के लिए कितना महत्वपूर्ण?
रूस और पाकिस्तान के संबंध पिछले वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। मई 2026 में दोनों देशों के बीच Russia-Pakistan Consultative Group on Strategic Stability की बैठक मॉस्को में हुई, जिसमें स्ट्रेटेजिक स्टेबिलिटी, आर्म्स कंट्रोल और इंटरनेशनल सिक्योरिटी पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने संवाद जारी रखने पर सहमति जताई। ऐसे में रूस को शायद ही यह पसंद आए कि पाकिस्तान उस यूक्रेन से ड्रोन डील कर रहा है, जिसके साथ उसकी लड़ाई चल रही है।
रूस को यह भी पसंद नहीं आएगा कि यूक्रेन धीरे-धीरे एक battlefield-derived defence technology exporter बने। ऐस में यूक्रेन-पाकिस्तान डिफेंस डील पर उसकी गहरी नजर रहेगी। जबकि यूक्रेन अब केवल हथियारों का आयातक नहीं रहना चाहता। युद्ध ने उसकी डिफेंस इंडस्ट्री को तेजी से बदल दिया है। यूक्रेनी सरकार के अनुसार 2026 में यूक्रेनियन आर्म्ड फोर्सेज के लिए खरीदे जा रहे UAVs में लगभग 95% Ukrainian-made हैं।
Ukraine अब अपने battlefield-developed drone technologies को दूसरे देशों के साथ साझा और एक्सपोर्ट करने की कोशिश कर रहा है। सऊदी अरब सहित कई मिडिल-ईस्ट देशों के साथ यूक्रेन का ड्रोन डील फ्रेमवर्क भी विकसित हो रहा है।
वहीं यदि यह डील परवान चढ़ती है तो भी भारत-रूस संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत और रूस के रक्षा संबंध हमेशा से बहुत व्यापक हैं। हालांकि भारत की arms procurement धीरे-धीरे Diversify हो रही है।
SIPRI के अनुसार 2021–25 में भारत के major arms imports में रूस की हिस्सेदारी 40%, France की 29% और Israel की 15% थी।
नई स्थिति में भारत के लिए रूस का महत्व केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं रहेगा। मॉस्को के साथ intelligence, air defence, missile technology और strategic stability dialogue भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
चीन के लिए कोई मायने ?
पाकिस्तान की मिलिट्री सप्लाई चेन पहले से ही चीन पर बुरी तरह आश्रित है। SIPRI के अनुसार 2021–25 में पाकिस्तान के major arms imports का करीब 80% China से आया। ऐसे में पाकिस्तान, भले ही यूक्रेन से ड्रोन लाए, लेकिन वह चीन पर लगभग पहले की तरह ही निर्भर बना रहेगा। पाकिस्तान को यह लाभ जरूर हो सकता है यदि Pakistan Chinese platforms के साथ Ukrainian drone technologies जोड़ता है, तो वह एक तरह का hybrid defence ecosystem बना सकता है। हालांकि यह अभी केवल संभावित दृश्य है।
यूक्रेन का यूरोप और अमेरिका के साथ भी रक्षा सहयोग
यूक्रेन रूस के साथ युद्ध में है और उसे लगातार फंडिंग, हथियार और defence-industrial राजस्व की जरूरत है। उसका डिफेंस सेक्टर अब युद्ध के दौरान विकसित टेक्नोलाजीज को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ले जाने की कोशिश कर रहा है। यूक्रेन ने अमेरिका के साथ भी ज्वाइंट ड्रोन प्रोडक्शन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। Reuters के अनुसार यूक्रेन और अमेरिका Ukrainian drone technologies पर आधारित joint production partnership को आगे बढ़ा रहे हैं।
यूरोप के साथ भी Ukraine defence-industrial cooperation बढ़ा रहा है। UK और Ukraine ने battlefield-proven drone technologies तथा operational experience के आधार पर defence-industrial cooperation को मजबूत करने का framework बनाया है।
तो क्या इस व्यापक trend में पाकिस्तान के साथ संभावित Fire Point engagement को देखा जाना चाहिए? तो उत्तर है कि भारत के संदर्भ में बिल्कुल नहीं!
पाकिस्तान के साथ यूक्रेन के पहले भी रहे हैं रक्षा संबंध
यूक्रेन और पाकिस्तान के बीच रक्षा संबंध काफी पुराने हैं और मौजूदा Fire Point ड्रोन प्रकरण कोई बिल्कुल नया संपर्क नहीं है। दोनों देशों का रक्षा सहयोग खास तौर पर टैंक, टैंक इंजन, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान और सैन्य उपकरणों के MRO/अपग्रेड के क्षेत्र में रहा है।
- 1996 में पाकिस्तान ने यूक्रेन से 320 T-80UD मुख्य युद्धक टैंक खरीदने का लगभग $650 मिलियन का सौदा किया था। डिलीवरी 1997 के बाद शुरू हुई और 1999 तक चली।
- यूक्रेन ने पाकिस्तान के Al-Khalid tank programme में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। Ukraine की Malyshev plant ने 6TD-2 diesel power pack उपलब्ध कराया, जो Al-Khalid tank के लिए इस्तेमाल हुआ।
- पाकिस्तान ने 2008 में Ukraine से चार Il-78 aerial refuelling tanker aircraft खरीदने का समझौता किया था। सभी चार aircraft 2012 तक deliver हो गए
- 2016 में Ukrainian state defence exporter Ukrspetsexport और पाकिस्तान की Heavy Industries Taxila (HIT) ने armoured vehicles के repair, modernization और production cooperation के लिए MoU किया था।








