पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हालिया लड़ाई बढ़ती जा रही है। 24 सितंबर 2026 को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर फिर एयर स्ट्राइक की है। हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की कोई जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है।
पाकिस्तान ने इसे अफगानिस्तान से आए ड्रोन हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई बताया है। हालांकि अफ़गानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने बुधवार को इस बात से इनकार किया कि अफ़गान तालिबान बलों ने कोई हमला किया था।
फिलहाल पाकिस्तान की ताजा एयरस्ट्राइक पर अफगानिस्तान ने अभी तक कोई रिएक्शन नहीं दिया है। वहीं दोनों देशों के बीच लड़ाई में अब ड्रोन भी एक बड़ा सैन्य हथियार बनकर सामने आ गया है।
तीन दिन के भीतर अफगानिस्तान में पाकिस्तान की यह दूसरी एयर स्ट्राइक है। इससे ठीक पहले वाली पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक 21 सितंबर 2026 को हुई थी, जिसमें अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमले किए गए थे। भारत ने इसकी कड़ी निंदा की थी।
10 ठिकानों पर हमला क्यों किया गया?
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बताया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 10 स्थानों पर सटीक हवाई हमले किए हैं। दावा किया कि इन स्थानों का इस्तेमाल ड्रोन को लॉन्च करने और स्टोर करने के लिए किया जा रहा था।
पाकिस्तान के मुताबिक इस कार्रवाई की सीधी वजह 23 सितंबर को अफगानिस्तान की तरफ से आए ड्रोन थे, जिसे उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया था।
इसके बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर उन ठिकानों को निशाना बनाया जहां से उसके अनुसार ये ड्रोन संचालित किए जा रहे थे।
लेकिन यहां एक अहम बात है कि 10 ठिकानों की पूरी लोकेशन पाकिस्तान ने सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए हर जगह के बारे में पक्के तौर पर यह कहना अभी संभव नहीं है कि वहां क्या नष्ट हुआ या कितना नुकसान हुआ है।
कंधार तक पहुंचा हमला, इसके क्या मायने ?
इस पूरे घटनाक्रम में कंधार सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बनकर सामने आया है। AFP के अनुसार, कंधार के एक निवासी ने बताया कि रात में पहले जेट की आवाज सुनाई दी और उसके बाद बड़ा धमाका हुआ। बाद में इलाके में आग दिखाई दी। अफगान अधिकारियों ने भी कंधार में पाकिस्तानी हमले की जानकारी दी है।
कंधार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिर्फ अफगानिस्तान का एक शहर नहीं है। यह तालिबान नेतृत्व का प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक केंद्र है और तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा का गृह क्षेत्र माना जाता है।
यानी पाकिस्तान की कार्रवाई अगर कंधार तक पहुंची है, तो यह दिखाती है कि मौजूदा टकराव केवल अफगान-पाक सीमा से लगे इलाकों तक सीमित नहीं रह रहा।
हालांकि अभी यह कहना सही नहीं होगा कि पाकिस्तान ने सीधे तालिबान सुप्रीम लीडर को निशाना बनाया। ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
और कहां हुआ हमला ?
अफगान अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान की कार्रवाई का असर पूर्वी अफगानिस्तान के पक्तिया और खोस्त प्रांतों में भी दिखाई दिया।
पक्तिया के एक अधिकारी ने AFP को बताया कि पाकिस्तानी विमानों ने अफगान सेना के 203वें मंसूरी कोर को निशाना बनाया। खोस्त के एक अधिकारी ने भी हमले की जानकारी दी, लेकिन वहां किसी के हताहत होने की सूचना नहीं दी गई।
इससे पाकिस्तान की कार्रवाई का एक और पहलू सामने आता है। हमला केवल सीमा के पास संदिग्ध आतंकी ठिकानों तक सीमित होने के बजाय अफगानिस्तान के कई अलग-अलग इलाकों में फैला हुआ बताया जा रहा है।
ड्रोन अटैक का मतलब ?
इस पूरे घटनाक्रम का अब सबसे महत्वपूर्ण सैन्य पहलू ड्रोन युद्ध है। पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान की तरफ से ड्रोन उसके क्षेत्र में भेजे गए। पाकिस्तानी अधिकारियों ने बुधवार को दावा किया था कि आठ ड्रोन को उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम किया।
इसके बाद पाकिस्तान ने उन स्थानों को निशाना बनाने की बात कही जहां से ड्रोन लॉन्च या स्टोर किए जा रहे थे। इसका मतलब यह है कि संघर्ष में अब एक नया चक्र बन रहा है:-
ड्रोन लॉन्च → एयर डिफेंस से इंटरसेप्शन → जवाबी एयरस्ट्राइक → फिर नए हमले का खतरा।
यही वजह है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव को अब सिर्फ पारंपरिक सीमा संघर्ष के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा।
पाकिस्तान और तालिबान के बीच विवाद क्यों ?
पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP और दूसरे पाकिस्तान-विरोधी आतंकी संगठनों द्वारा किया जा रहा है।
इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगान तालिबान इन समूहों को रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा। दूसरी तरफ तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती है और कहती है कि पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा समस्याओं के लिए अफगानिस्तान को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
18 सितंबर को पाकिस्तान के कोहाट में पुलिस परिसर में शिया मस्जिद में हुए हमले में कम से कम 24 लोग मारे गए थे। इस हमले ने लगभग तीन महीने की शांति के बाद दोनों देशों के बीच फिर से लड़ाई शुरू कर दी है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण यह घटनाक्रम?
भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान का सुरक्षा फोकस एक साथ पूर्वी सीमा और पश्चिमी सीमा दोनों पर दबाव में है। अफगानिस्तान के साथ उसका विवाद अगर लंबा खिंचता है तो पाकिस्तानी सेना को पश्चिमी मोर्चे पर लगातार सैन्य संसाधन, एयर डिफेंस और निगरानी क्षमता लगानी पड़ सकती है।
दूसरा पहलू ड्रोन खतरा है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जिस तरह ड्रोन को लेकर आरोप-प्रत्यारोप और जवाबी कार्रवाई सामने आ रही है, वह दक्षिण एशिया में ड्रोन आधारित संघर्ष की बढ़ती भूमिका का संकेत है।
भारत के लिए यह इसलिए भी अहम है क्योंकि सीमा पार आतंकवाद और ड्रोन का इस्तेमाल पहले से ही उसकी सुरक्षा चिंताओं का हिस्सा है।









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