यूरोपीय देश बोस्निया-हर्जेगोविना में European Union Force (EUFOR- यूरोपीय संघ बल) के एक नियमित प्रशिक्षण मिशन के दौरान एक बड़ा हेलिकॉप्टर हादसा हो गया। 29 अक्टूबर 2026 को ब्रच्को जिले में इटली का सैन्य हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 अन्य घायल हो गए। दुर्घटना का शिकार हुआ यह चिनूक हेलिकॉप्टर यूरोपीय संघ की सैन्य यूनिट EUFOR के इतालवी दल का हिस्सा था।
मृतकों में इतालवी सशस्त्र बलों के दो सदस्य और इटैलियन रेड क्रॉस के Volunteer Military Corps से जुड़े दो सदस्य शामिल हैं। जिनकी पहचान इतालवी सेना की एविएशन शाखा के सार्जेंट सिमोने रुज्जिया, क्लाउडियो मार्केज़ी और इतालवी रेड क्रॉस के स्वयंसेवी सैन्य कोर के लेफ्टिनेंट फ्रांको एड्रियानो ज़ेक्किल्लो और महिला सार्जेंट लौरा प्रोकाच्ची के रूप में हुई है।
EUFOR के मुताबिक, सभी 11 घायलों की हालत स्थिर है और उनका इलाज चल रहा है। हादसे की वजह का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।
इस दुखद हादसे ने ग्लोबल लेवल पर सैन्य विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान (Indian Defense Establishment) भी इस क्रैश को बेहद गंभीरता से देख रहा है, क्योंकि भारतीय वायुसेना (IAF) भी चिनूक के एक बड़े बेड़े का संचालन करती है।
कैसे हुई यह दुर्घटना ?
हेलिकॉप्टर, ब्रच्को के पास गोरिचे इलाके में जिस समय दुर्घटनाग्रस्त हुआ, प्रशिक्षण उड़ान पर था। इसी दौरान चिनूक हेलिकॉप्टर नियंत्रण खोता हुआ दिखाई दिया। वह हवा में चक्कर काटते हुए आसमान से नीचे आया और जमीन से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मीडिया के मुताबिक हेलीकॉप्टर पूरी तरह से नष्ट होकर एक खुले मैदान में पलट गया। तीन लोगों ने घटनास्थल पर दम तोड़ दिया, जबकि चौथे व्यक्ति की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई।
दुर्घटना के बाद सामने आई तस्वीरों में हेलिकॉप्टर का मलबा जमीन पर पड़ा दिखाई दिया। EUFOR ने बताया कि दुर्घटना से किसी नागरिक ढांचे, संपत्ति या गाड़ी को नुकसान नहीं पहुंचा और जमीन पर कोई नागरिक घायल नहीं हुआ है।
हेलिकॉप्टर किन परिस्थितियों में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, इसका आधिकारिक कारण अभी सामने नहीं आया है।
कौन सा चिनूक हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ ?
क्रैश हुआ हेलिकॉप्टर इतालवी सेना की 1st Regiment “Antares” द्वारा संचालित ICH-47F चिनूक था। यह विमान इटली की एयर पावर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। इटली ने पुराने CH-47C चिनूक बेड़े को बदलने के लिए मई 2009 में 16 ICH-47F हेलिकॉप्टरों का समझौता किया था।
- Boeing और AgustaWestland (जो अब Leonardo का हिस्सा) के सहयोग से तैयार पहले दो हेलिकॉप्टर 2 अक्टूबर 2014 को इतालवी सेना को सौंपे गए थे।
- दो Honeywell T55-GA-714A इंजन वाले इस हेलिकॉप्टर का अधिकतम कुल उड़ान भार लगभग 23 टन है।
- इसे सैनिकों, भारी सैन्य उपकरणों और राहत सामग्री के परिवहन के साथ आपदा राहत तथा अग्निशमन अभियानों के लिए तैयार किया गया है।
- चिनूक के कई मॉडल और अपग्रेडेड संस्करण हैं। जैसे—CH-47A, CH-47B, CH-47C, CH-47D और CH-47F।
- विशेष सैन्य अभियानों के लिए MH-47 संस्करण भी विकसित किए गए हैं।
बोस्निया में क्यों तैनात है EUFOR?
बोस्निया-हर्जेगोविना पहले यूगोस्लाविया का हिस्सा था। यूगोस्लाविया के विघटन के दौरान 1992 में बोस्निया की आजादी को लेकर वहां के समुदायों में टकराव हुआ।
- अधिकांश बोस्नियाक मुस्लिम और क्रोएट स्वतंत्र देश के पक्ष में थे, जबकि बोस्नियाई सर्ब नेतृत्व इसका विरोध कर रहा था और सर्ब बहुल इलाकों को सर्बिया से जोड़ना चाहता था। इसी विवाद ने युद्ध का रूप ले लिया।
- लड़ाई में बोस्नियाई सरकारी सेना, बोस्नियाई सर्ब बल और बोस्नियाई क्रोएट बल शामिल थे।
- कुछ समय तक बोस्नियाक और क्रोएट भी आपस में लड़े, लेकिन 1994 में समझौते के बाद दोनों सर्ब बलों के खिलाफ साथ आ गए।
- 1995 में अंतरराष्ट्रीय दबाव, NATO के हवाई हमलों और शांति वार्ताओं के बाद युद्ध समाप्त हुआ।
नवंबर में अमेरिका के डेटन शहर में शांति समझौते पर सहमति बनी और दिसंबर में पेरिस में औपचारिक हस्ताक्षर हुए। इसके तहत बोस्निया-हर्जेगोविना एक देश बना रहा, लेकिन उसके भीतर दो प्रमुख प्रशासनिक इकाइयां बनाई गईं—बोस्नियाक-क्रोएट फेडरेशन और सर्ब बहुल रिपब्लिका सर्प्स्का।
समझौते के सैन्य प्रावधान लागू कराने के लिए पहले NATO के नेतृत्व वाला IFOR, फिर SFOR तैनात हुआ। 2 दिसंबर 2004 को यूरोपीय संघ ने ‘ऑपरेशन अल्थिया’ शुरू किया और उसके सैन्य बल EUFOR ने SFOR की जिम्मेदारी संभाली।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अधिकारादेश के तहत इसका काम सुरक्षित माहौल बनाए रखने और शांति समझौते के पालन में मदद करना है।
EUFOR (European Union Force)- यूरोपीय संघ के नेतृत्व में विभिन्न देशों के सैनिकों से गठित सैन्य बल को कहा जाता है, जिसे संकट प्रबंधन और शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के अभियानों में तैनात किया जाता है। बोस्निया-हर्जेगोविना में इस बल का मिशन ‘ऑपरेशन अल्थिया’ (Operation Althea) के तौर पर जाना जाता है।
इस दुर्घटना का भारत के संदर्भ में क्या महत्व ?
इस दुर्घटना का भारत के लिए भी महत्व है, क्योंकि भारतीय वायुसेना इसी चिनूक परिवार के CH-47F(I) हेलिकॉप्टरों का संचालन करती है। भारत ने ऐसे 15 हेलिकॉप्टर खरीदे थे, जिनका इस्तेमाल भारी सामान और सैन्य उपकरण दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां चिनूक के वैश्विक निर्माण कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण हिस्से भी बनाती हैं।
- भारत ने सितंबर 2015 में Boeing के साथ 15 चिनूक हेलिकॉप्टरों की खरीद का समझौता किया था।
- पहली खेप को 25 मार्च 2019 को वायुसेना स्टेशन चंडीगढ़ में शामिल किया गया, जबकि सभी 15 की डिलीवरी मार्च 2020 तक पूरी हुई।
- ये भारी सैन्य सामान और अन्य भार दुर्गम इलाकों तक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
भारतीय कंपनियां भी बनाती हैं महत्वपूर्ण हिस्से–
चिनूक से भारत का संबंध इसकी खरीद और संचालन तक ही सीमित नहीं है। Boeing की सप्लाई चेन में भारतीय कंपनियों की भी भूमिका है।
- Tata Advanced Systems चिनूक की crown और tailcone assemblies बनाती है। वहीं Dynamatic Technologies इसकी ramp और aft pylon बनाती हैं।
- इससे भारतीय उद्योग इस अंतरराष्ट्रीय हेलिकॉप्टर कार्यक्रम से जुड़ता है। हालांकि दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर के किसी विशेष पुर्जे का भारत से संबंध सामने नहीं आया है।
क्या है चिनूक हेलिकॉप्टर की खूबियां –
चिनूक, भारतीय वायुसेना की भारी परिवहन क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत के लिए इन हेलिकॉप्टरों को वायुसेना की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया। इनमें एकीकृत डिजिटल कॉकपिट प्रबंधन प्रणाली, उन्नत कार्गो हैंडलिंग क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक प्रणाली शामिल हैं।
- चिनूक के भारतीय संस्करण में आधुनिक एयरफ्रेम, कॉमन एवियोनिक्स आर्किटेक्चर सिस्टम वाला कॉकपिट और डिजिटल ऑटोमैटिक फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं।
- चिनूक का प्रमुख काम भारी सामानों को हवाई रास्ते से पहुंचाना है। दुर्गम इलाकों में सैन्य और गैर-सैन्य सामान की आवाजाही में इसकी उपयोगिता है।
- इससे ऐसे क्षेत्रों में हवाई परिवहन से जरूरी उपकरण और सामग्री पहुंचाने की क्षमता बढ़ती है।
CH-47F(I) Chinook — Indian Air Force
| Specification | Details |
| मैन्युफैक्चरर | Boeing, USA |
| रोल | Heavy-Lift Transport Helicopter |
| डिजाइन | Twin-Engine, Tandem-Rotor |
| इंजन | 2 × Honeywell T55-GA-714A |
| अधिकतम टेक-ऑफ वजन | 22,680 kg |
| लोड ले जाने की क्षमता | Approximately 11 tonnes |
| Overall Length — Rotors Turning (रोटर घूमते समय कुल लंबाई) | Approximately 30.1 m |
| Fuselage Length (हेलिकॉप्टर के मुख्य ढांचे की लंबाई) | 15.46 m |
| हाईट | 5.68 m |
| Rotor Diameter — Each (प्रत्येक रोटर का व्यास) | 18.29 m |
| Service Ceiling (अधिकतम परिचालन ऊंचाई) | 6,096 m / 20,000 ft |
| फ्लाइट कंट्रोल | Digital Automatic Flight Control System |
| Key Equipment (प्रमुख उपकरण) | Digital Cockpit, Advanced Cargo Handling, Electronic Warfare Suite |








