भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में उसकी आर्थिक लाइफलाइन कहे जाने वाले गारमेंट उद्योग में वेतन बढ़ाने की मांग पर शुरू हुआ आंदोलन 1 नवंबर, 2026 को हिंसक हो गया है। ढाका से लेकर मीरपुर तक सड़कें प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प में रणक्षेत्र बन गईं हैं। उग्र प्रदर्शनकारियों ने जहां अपनी मांगों के बीच कई फैक्ट्रियों में तोड़फोड़, हिंसा और आगजनी की। पुलिस के साथ भी जमकर टकराव हुआ।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस तथा साउंड ग्रेनेड इस्तेमाल किए। दो नवंबर को स्थिति सामान्य होने की बात कही गई। लेकिन पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें जारी रहीं। इसमें बड़ी संख्या में मजदूर और पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
ढाका के मीरपुर में पुलिस वाहन, गाजीपुर के कोनाबाड़ी में पुलिस बॉक्स और सावर में फैक्ट्री का सुरक्षा बूथ जलाया गया। ढाका के अलावा अन्य शहरों में भी हिंसक प्रदर्शन हुए हैं। उत्पादन बाधित होने से करीब 9.87 लाख मजदूर प्रभावित हुए हैं। दो नवंबर को भी हिंसा, प्रदर्शन और टकावर का दौरा जारी रहा।
अगस्त 2024 में शेख हसीना की सत्ता जाने (रिजीम चेंज) के करीब सवा दो साल बाद बांग्लादेश में यह नया विस्फोट हुआ है। हसीना के बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम प्रशासन संभाला और फिर फरवरी 2026 में तारिक रहमान प्रधानमंत्री बने।
सत्ता परिवर्तन के बाद देश ने भीड़ की हिंसा, अल्पसंख्यकों पर हमले और राजनीतिक टकराव देखे। आर्थिक मोर्चे पर भी दबाव बना हुआ है। औद्योगिक इलाकों में भड़की अशांति ने रोजगार और देश की सबसे बड़ी निर्यात इंडस्ट्री की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मजदूरों की मांग क्या है ?
हसीना के दौर में गरीबी घटाने और बुनियादी सेवाएं बढ़ाने में प्रगति करने वाला बांग्लादेश आज महंगाई, औद्योगिक असंतोष और सुरक्षा की चुनौतियों से एक साथ जूझ रहा है। सत्ता परिवर्तन के बाद सुधार की उम्मीद आम लोगों की जिंदगी में कितनी उतरी—ताजा हिंसा ने यही सवाल फिर सामने ला दिया है।
बांग्लादेश के गारमेंट मजदूर न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका करने की मांग कर रहे हैं। यह मौजूदा न्यूनतम वेतन में 17,500 टका यानी 140 प्रतिशत वृद्धि की मांग है। मजदूरों का कहना है कि भोजन, मकान का किराया, परिवहन, बच्चों की पढ़ाई और इलाज के खर्च के सामने उनकी कमाई कम पड़ रही है।
- भारतीय मुद्रा में मौजूदा वेतन लगभग ₹9,560, जबकि प्रस्तावित वेतन करीब ₹22,950 मासिक बैठता है।
- वेतन बढ़ाने के अलावा वे कर्मचारियों की ब्लैकलिस्टिंग रोकने और बर्खास्त मजदूरों को वापस लेने की मांग भी कर रहे हैं।
- ब्लैकलिस्टिंग से आशय ऐसी व्यवस्था से है, जिसमें किसी कर्मचारी को नौकरी से निकालने के बाद दूसरे कारखानों में भी उसके रोजगार पाने में बाधा पैदा होती है।
- गारमेंट क्षेत्र में पिछली न्यूनतम वेतन वृद्धि 1 दिसंबर 2023 से लागू हुई थी। तब न्यूनतम वेतन 8,000 टका से बढ़ाकर 12,500 टका किया गया था।
प्रदर्शन कब शुरू हुआ और कैसे फैला ?
इस ताजा आंदोलन के तहत 29 अक्टूबर 2026 को ढाका के मीरपुर-10 चौराहे पर सड़क अवरोध की रिपोर्ट सामने आई थी। कई गारमेंट फैक्ट्रियों के सैकड़ों मजदूर 30,000 टका न्यूनतम वेतन की मांग लेकर वहां जुटे थे। इसके बाद एक नवंबर को आंदोलन ने बेहद हिंसक रूप ले लिया।
प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 20 फैक्ट्रियों पर हमले हुए, ऐसा मालिकों के हवाले से The Business Standard ने बताया। वहीं, Financial Express ने करीब एक दर्जन फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की रिपोर्ट दी। 529 फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित हुआ है।
| 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार | न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर मजदूरों ने ढाका के मीरपुर-10 चौराहे पर सड़क जाम की। |
| 31 अक्टूबर 2026, शनिवार | प्रदर्शन आशुलिया, सावर और गाजीपुर के औद्योगिक क्षेत्रों तक फैला। कई फैक्ट्रियों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी। |
| 1 नवंबर 2026, रविवार | मजदूरों के काम छोड़ने और सड़क अवरोधों के बीच पुलिस से झड़प, तोड़फोड़ तथा आगजनी हुई। कुल 529 फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित हुआ। |
| 2 नवंबर 2026, सोमवार | फैक्ट्रियां दोबारा खुलीं, लेकिन नए प्रदर्शन और उत्पादन बाधित होने की आशंका बनी रही। |
कहां-कहां क्या हिंसा हुई ?
| स्थान | रिपोर्टों में दर्ज घटनाएं |
| मीरपुर-10, 11 और 14, ढाका | सड़क अवरोध, पुलिस से झड़प और पथराव। मीरपुर-11 में पुलिस वाहन जलाया गया। पुलिस ने आंसू गैस और साउंड ग्रेनेड इस्तेमाल किए। तीन मेट्रो स्टेशन करीब दो घंटे बंद रहे। |
| भोगड़ा बाइपास, गाजीपुर | हाईवे अवरोध, पुलिस से झड़प, वाहनों और एक कार्यालय के शीशों में तोड़फोड़। |
| पल्ली बिद्युत, कालियाकैर | फैक्ट्री गोदाम सहित तीन जगह आग लगने की रिपोर्ट। |
| कोनाबाड़ी, गाजीपुर | पुलिस बॉक्स जलाया गया और ढाका–टांगाइल हाईवे पर यातायात बाधित हुआ। |
| नरसिंहपुर, आशुलिया | अब्दुल्लापुर–बाइपाइल सड़क पर प्रदर्शन और अनंता गारमेंट्स के पास पुलिस–प्रदर्शनकारियों में खदेड़ने-पलटकर खदेड़ने की घटनाएं। |
| हेमायतपुर, सावर | ढाका–आरिचा हाईवे जाम; AKH समूह की फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर सुरक्षा बूथ में आग। |
गारमेंट उद्योग बांग्लादेश की लाइफलाइन क्यों है?
बांग्लादेश के लिए रेडीमेड गारमेंट उद्योग केवल कपड़ों का कारोबार नहीं है। यह विदेशी मुद्रा, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार है।
| संकेतक | उद्योग का महत्व |
| वित्त वर्ष 2025–26 में गारमेंट निर्यात | 38.70 अरब डॉलर |
| कुल वस्तु निर्यात में हिस्सेदारी | 80.6% |
| प्रत्यक्ष रोजगार | लगभग 40 लाख लोग |
| GDP में योगदान | लगभग 10% |
| FY2025–26 में गारमेंट निर्यात का बदलाव | 1.64% गिरावट |
गारमेंट कारोबार से सीमा सुरक्षा तक, भारत पर क्या असर?
बांग्लादेश के गारमेंट उद्योग की अशांति का असर भारतीय कारोबार पर भी पड़ सकता है। उत्पादन में लंबी रुकावट विदेशी खरीदारों को दूसरे देशों की ओर मोड़ सकती है, जबकि भारतीय कच्चे माल की बिक्री प्रभावित हो सकती है। संकट व्यापक अस्थिरता में बदला तो सीमा प्रबंधन और पहले से तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों की चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।
- भारतीय गारमेंट उद्योग के लिए अवसर: समय पर माल मिलने की अनिश्चितता बढ़ी तो विदेशी खरीदार भारत में ऑर्डर दे सकते हैं। इसका लाभ भारतीय कंपनियों की कीमत, क्षमता और डिलीवरी पर निर्भर होगा।
- धागा और कपड़ा बेचने वालों को नुकसान: बांग्लादेशी फैक्ट्रियों में काम घटने से भारतीय सप्लायरों की मांग और भुगतान प्रभावित हो सकते हैं। सड़क अवरोध माल ढुलाई में देरी भी कर सकते हैं।
- सीमा सुरक्षा पर संभावित दबाव: लंबे रोजगार संकट और व्यापक हिंसा से अनियमित सीमा-पार आवाजाही का जोखिम बढ़ सकता है। मौजूदा आंदोलन से ऐसा प्रवाह बढ़ने की पुष्टि नहीं है।
- तनावपूर्ण संबंधों में अतिरिक्त चुनौती: राजनीतिक टकराव बढ़ा तो व्यापार, वीजा और संपर्क परियोजनाओं पर बातचीत कठिन हो सकती है।
हसीना से यूनुस और तारिक तक, जानिए देश की हालत ?
शेख हसीना के दौर में बांग्लादेश ने गरीबी घटाने और गारमेंट निर्यात बढ़ाने में प्रगति की, लेकिन अंतिम वर्षों में आर्थिक सुस्ती और राजनीतिक दमन के आरोप गहराए। यूनुस के अंतरिम प्रशासन में राजनीतिक अस्थिरता, भीड़ की हिंसा और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा बड़ी चुनौतियां बनीं। अब तारिक रहमान की सरकार के सामने औद्योगिक अशांति रोकने, रोजगार बचाने और विदेश संबंधों में भरोसा बहाल करने का दबाव है।
| पहलू | शेख हसीना का दौर — अगस्त 2024 तक | मोहम्मद यूनुस — अगस्त 2024 से फरवरी 2026 | तारिक रहमान — फरवरी 2026 से |
|---|---|---|---|
| गारमेंट उद्योग | प्रमुख निर्यात उद्योग के रूप में विस्तार; अंतिम वर्षों में संकट भी। जुलाई 2023 से शुरू हुई फैक्ट्री बंदी की अवधि इसी शासन में आती है। | राजनीतिक अस्थिरता और उद्योगों पर दबाव जारी; उत्पादन तथा खरीदारों का भरोसा बनाए रखने की चुनौती। | 1 नवंबर को 529 फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित; 2 नवंबर को दोबारा खुलने की रिपोर्ट। FY2025–26 में निर्यात 1.64% घटा, लेकिन यह वित्त वर्ष दोनों प्रशासनों में बंटा है। |
| रोजगार और आर्थिक दशा | 2010–2022 में गरीबी 37.1% से 18.7% हुई। अंतिम वर्षों में वृद्धि धीमी पड़ी। | विश्व बैंक ने 2025 की गरीबी 21.2% होने का अनुमान लगाया; रोजगार और जीवनयापन पर दबाव। | मजदूरों की 140% न्यूनतम वेतन वृद्धि की मांग। FY2026–27 में 3.2% वृद्धि और 10.9% महंगाई का IMF अनुमान। |
| हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमले | एकता परिषद के अनुसार जुलाई 2023–जून 2024 में 1,045 घटनाएं, 45 मौतें। | परिषद के अनुसार 2025 में 522 सांप्रदायिक घटनाएं, 66 मौतें। रंगपुर में हिंदुओं के घरों पर हमला और दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या दर्ज। | जनवरी–जून 2026 में 257 घटनाएं, 44 हत्याएं—लेकिन इसमें यूनुस का अंतिम समय भी शामिल; केवल तारिक के कार्यकाल का अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं। |
| भारत से संबंध | ऊर्जा, संपर्क, व्यापार और सुरक्षा में निकट सहयोग; जून 2024 में डिजिटल व हरित साझेदारी आगे बढ़ी। | हसीना का भारत में रहना, प्रत्यर्पण की मांग और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर तनाव। भारत से संबंधों में तनाव बढ़ाया। चीन -पाकिस्तान से नजदीकी बनाया। | संबंध सुधारने का कोठई ठोस प्रयास नहीं, विदेश मंत्रियों की बैठक; हसीना का मुद्दा व अन्य मतभेद कायम। |
| व्यापक विदेश संबंध | भारत से करीबी साझेदारी के साथ अन्य देशों से आर्थिक संबंध। | राजनीतिक परिवर्तन के बाद अंतरराष्ट्रीय भरोसा और आर्थिक सहयोग बनाए रखने की चुनौती। | भारत से तनाव के बीच चीन-पाकिस्तान के साथ संबंध गहरा करने की कोशिश; व्यापार, ऊर्जा और जल के लिए भारत से परस्पर निर्भरता |








