ब्रह्मपुत्र नदी पर बनेंगे पावर प्रोजेक्ट्स
भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र नदी पर दो बड़े हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स के लिए 4 अरब डॉलर (₹401.76 अरब) से अधिक निवेश को मंजूरी दी है। इनसे नॉर्थ ईस्ट राज्यों में बिजली की पुरानी किल्लत काफी हद तक खत्म होगी और आने वाले वर्षों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए दो प्रोजेक्ट्स पर काम किया जाएगा। पहला है कमला प्रोजेक्ट और दूसरा है कलई-2 प्रोजेक्ट। दोनों प्रोजेक्ट्स मिलकर 2920 मेगावॉट अतिरिक्त बिजली देंगे। यह न केवल स्थानीय विकास को गति देगा बल्कि भारत की नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।
कमला प्रोजेक्ट (Kamala Project)
- क्षमता: 1720 मेगावॉट
- लागत: ₹260.7 अरब (लगभग $2.83 अरब)
- साझेदारी: NHPC Ltd और अरुणाचल प्रदेश सरकार
- समयसीमा: 6–8 साल में पूरा होने की उम्मीद
कलई-II प्रोजेक्ट (Kalai-II Project)
- क्षमता: 1200 मेगावॉट
- लागत: ₹141.06 अरब
- साझेदारी: THDC India Ltd और स्थानीय सरकार
- समयसीमा: 6–8 साल में पूरा होने की उम्मीद
नॉर्थ ईस्ट राज्यों में बिजली की स्थिति
नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र (अरुणाचल, असम, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम, सिक्किम) लंबे समय तक बिजली की कमी से जूझता रहा। 2010–2015 के बीच यहां 10–12% तक बिजली की कमी दर्ज की गई। कई राज्यों में लोड शेडिंग और ब्लैकआउट आम बात थी। अभी भी बिजली की किल्लत होती रहती है, फिलहाल नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र की स्थापित क्षमता लगभग 5,000–6,000 मेगावॉट है। बिजली की मांग बढ़ने के बावजूद अब घाटा 2–3% तक सीमित है। असम और मेघालय जैसे राज्यों में स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन अरुणाचल और मणिपुर में अभी भी आपूर्ति अस्थिर रहती है।
प्रोजेक्ट्स से होने वाला फायदा
- नॉर्थ ईस्ट राज्यों को लगभग 3000 मेगावॉट अतिरिक्त बिजली मिलेगी।
- इससे क्षेत्रीय उद्योग, कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं को स्थिर बिजली आपूर्ति होगी।
- ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी।
क्या है नॉर्थ ईस्ट भारत में बिजली क्षमता का प्लानिंग ?
2026 से 2034 तक नॉर्थ ईस्ट भारत की बिजली क्षमता को बढ़ाने का योजना है। अगर इस वक्त की क्षमता की बात करें तो अभी 6000 मेगावॉट क्षमता है, इसे धीरे-धीरे बढ़कर 2032–2034 तक 8920 मेगावॉट तक करने का लक्ष्य है। अगले 6 साल में प्रति वर्ष के हिसाब से करीब 420 मेगावॉट झमता जोड़ने की प्लानिंग है।

राष्ट्रीय रणनीतिक महत्व
ब्रह्मपुत्र बेसिन में चीन की संभावित बांध परियोजनाओं के कारण भारत को जल प्रबंधन पर चिंता है। ये प्रोजेक्ट्स भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन को मजबूत करेंगे। भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक 500 GW गैर-फॉसिल बिजली क्षमता हासिल की जाए और 2070 तक नेट-जीरो पर पहुंचा जाए।








