क्या सेना कैंप पर बहुत बड़े हमले का था प्लान? 160 डेटोनेटर मिलने का राज क्या है ?

By Defence Detective

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An electric detonator with red and yellow insulated leg wires on a wooden workbench in an industrial setting.

तेलंगाना के सिकंदराबाद कैंटोनमेंट स्थित बोल्लारम इलाके में भारतीय सेना के 20 मद्रास रेजिमेंट के परिसर के पास 160 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर मिलने से सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मच गई। ये डेटोनेटर उस समय मिले जब सेना की टीम हाल में आर्मी आर्मरी से चोरी हुए हथियारों और गोला-बारूद की तलाश में सैन्य क्षेत्र के आसपास तलाशी अभियान चला रही थी।

डेटोनेटर एक छोड़ी हुई प्लास्टिक बाल्टी में रखे मिले। सेना के जवानों ने इसकी जानकारी बोलारम पुलिस को दी, जिसके बाद बम डिस्पोजल टीम ने मौके पर पहुंचकर सामग्री की जांच की और उसे सुरक्षित हटाया। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ विस्फोटक पदार्थों से संबंधित कानून के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

फिलहाल पुलिस ने डेटोनेटरों को मद्रास रेजिमेंट की आर्मरी से हुई हथियार चोरी से जोड़ने से इनकार किया है। शुरुआती जांच के मुताबिक ये डेटोनेटर पास में चल रही निर्माण गतिविधि से जुड़े हो सकते हैं और संभव है कि किसी ने इन्हें वहां छोड़ दिया हो। आर्मी कैंप के पास 160 डेटोनेटर मिलना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर घटना है   

कब हुई इलेक्ट्रिक डेटोनेटर की बरामदगी ?

160 डेटोनेटर मिलने की घटना 2 सितंबर को सामने आई। सेना के जवान मद्रास रेजिमेंट के फायरिंग रेंज के आसपास चोरी हुए हथियारों और गोला-बारूद की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें फायरिंग रेंज की पिछली दीवार के पास एक संदिग्ध प्लास्टिक बाल्टी दिखाई दी।

बाल्टी की सूचना मिलने के बाद बोलारम पुलिस को बुलाया गया। जांच में उसके भीतर करीब 160 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर मिले, जिन्हें आठ बंडलों में रखा गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सामान्य पुलिस जांच के बजाय बम डिस्पोजल विशेषज्ञों को मौके पर बुलाया गया था।

डेटोनेटर और हथियार चोरी का कोई कनेक्शन ?

डेटोनेटरों की बरामदगी इसलिए बेहद संवेदनशील लग रही थी क्योंकि यह घटना सेना की आर्मरी से हथियार चोरी के महज कुछ दिन बाद हुई। दोनों घटनाएं भी बोलारम के उसी व्यापक सैन्य क्षेत्र के आसपास सामने आईं।

लेकिन उपलब्ध पुलिस जानकारी के मुताबिक अभी तक दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध सामने नहीं आया है। पुलिस का कहना है कि डेटोनेटर किसी निजी निर्माण गतिविधि से जुड़े हो सकते हैं और अज्ञात लोगों द्वारा उन्हें वहां छोड़ दिया गया।

बोलारम पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये डेटोनेटर कहां से आए, इन्हें किसने वहां छोड़ा और सैन्य क्षेत्र की पिछली दीवार के पास इन्हें छोड़ने की वजह क्या थी। इस मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ विस्फोटक पदार्थों से संबंधित कानून के तहत केस दर्ज किया गया है।

कब का है हथियार चोरी मामला ?

डेटोनेटरों की बरामदगी की गंभीरता को समझने के लिए कुछ दिन पहले हुई हथियार चोरी की घटना को देखना जरूरी है।

20 मद्रास रेजिमेंट की बोलारम स्थित आर्मरी से 12 हथियार, बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और नाइट-विजन उपकरण गायब होने का मामला 31 अगस्त को सामने आया था। चोरी की जानकारी तब मिली जब आर्मरी और बैटलियन मैगजीन को खोला गया और वहां के ताले टूटे पाए गए।

रिपोर्टों के अनुसार चोरी हुए हथियारों में चार AK-203 असॉल्ट राइफल, एक INSAS 1B1 राइफल और सात पिस्तौल शामिल हैं। सात पिस्तौलों में छह 9mm Auto 1A पिस्तौल और एक 6.35-बोर की सिविलियन पिस्तौल बताई गई है। इसके अलावा हथियारों के साथ बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस और एक पैसिव नाइट-विजन बाइनोक्युलर भी गायब हुआ। कुछ रिपोर्टों में चोरी हुए कारतूसों की संख्या 1,000 से अधिक बताई गई है।

हथियार चोरी में अग्निवीरों से हुई पूछताछ

हथियारों की चोरी के मामले में जांच का एक बड़ा एंगल संभावित अंदरूनी भूमिका का है। पुलिस को संदेह है कि आर्मरी तक वैध पहुंच रखने वाले किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका हो सकती है। मामले में सैन्य और पुलिस एजेंसियां पहुंच रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और घटनास्थल से मिले अन्य सबूतों की जांच कर रही हैं।

इसी मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है। इकनॉमिक टाइम्स ने बताया कि पूछताछ के दायरे में नागरिक कर्मचारियों और अग्निवीरों समेत चार लोग आए हैं।

क्यों अहम है बोल्लारम की यह घटना?

सिकंदराबाद कैंटोनमेंट देश के महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्रों में से एक है। ऐसे संवेदनशील सैन्य परिसर से सर्विस हथियारों और गोला-बारूद का गायब होना अपने आप में गंभीर सुरक्षा चिंता है।

इसी वजह से चोरी की घटना के बाद सैन्य क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है और नागरिकों की आवाजाही से जुड़े कुछ रास्तों को भी प्रतिबंधित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस क्षेत्र में राष्ट्रपति का आधिकारिक शीतकालीन आवास (विश्राम स्थल) राष्ट्रपति निलयम भी स्थित है, जिससे पूरे इलाके की सुरक्षा संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।

दूसरी तरफ, सैन्य क्षेत्र के नजदीक 160 कमर्शियल इलेक्ट्रिक डेटोनेटरों का मिलना भी ऐसा मामला है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। यह जरूर जांचना होगा कि ये विस्फोटक सामग्री सैन्य क्षेत्र के इतने करीब कैसे पहुंची और किसने वहां छोड़ी।

बोल्लारम में इस समय दो अलग-अलग जांच चल रही हैं। पहली जांच 160 डेटोनेटरों के स्रोत और उन्हें वहां छोड़ने वाले लोगों को लेकर है। दूसरी और कहीं अधिक गंभीर जांच मद्रास रेजिमेंट की आर्मरी से चोरी हुए 12 हथियारों, गोला-बारूद और नाइट-विजन उपकरण की बरामदगी को लेकर है।

क्या होता है इलेक्ट्रिक डेटोनेटर ?

इलेक्ट्रिक डेटोनेटर एक ऐसा उपकरण होता है जिसका इस्तेमाल किसी विस्फोटक में नियंत्रित तरीके से विस्फोट शुरू कराने के लिए किया जाता है। इसे आम तौर पर इलेक्ट्रिक सिग्नल/करंट देकर सक्रिय किया जाता है। डेटोनेटर स्वयं मुख्य विस्फोटक नहीं होते, बल्कि वे विस्फोट शुरू कराने वाले उपकरण होते हैं।

इसके अंदर एक छोटा इलेक्ट्रिक इग्निशन/हीटिंग एलिमेंट होता है। जब निर्धारित विद्युत संकेत मिलता है, तो यह सक्रिय होकर डेटोनेटर के भीतर की शुरुआती सामग्री को प्रज्वलित करता है, जिससे आगे मुख्य विस्फोटक में विस्फोट शुरू हो जाता है।

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