पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में फिर भारी हिंसा भड़क उठी है। लगभग पिछले पांच महीनों से जारी-विरोध प्रदर्शनों के बीच 5 नंवबर, 2026 को रावलाकोट (Rawalakot) में पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शनकारियों पर कहर बरपा दिया है। दावा है कि पाकिस्तान रेंजर्स और फ्रंटियर कॉर्प्स ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर मुख्य बस टर्मिनल के पास चल रहे धरने को हटाने के लिए सुबह कार्रवाई की।
इस दौरान भारी गोलीबारी, ड्रोन से बमबारी और रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG-7) इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। इस भीषण हिंसा में कम से कम 5 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने और 23 लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है। वहीं सोशल मीडिया में 7 मौतों का दावा है।
प्रदर्शन के आयोजकों ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों ने धरने पर बैठे लोगों पर गोलियाँ चलाईं और ड्रोन का इस्तेमाल किया। इसी बीच कुछ धातु के टुकड़ों को RPG-7 से दागे गए गोले का हिस्सा बताकर उनकी तस्वीरें प्रसारित की गई हैं।
हथियार की पहचान और हताहतों की कुल संख्या की फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि बाकी है।
सुबह कब शुरू हुई कार्रवाई ?
रावलाकोट के मत्यालमेरा स्थित बस टर्मिनल के पास जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने धरना लगा रखा था। एबीपी न्यूज़ के मुताबिक, गुरुवार को सुबह करीब आठ बजे फज्र की नमाज के बाद पाकिस्तानी आर्मी ने इस इलाके में कार्रवाई शुरू की।
- रिपोर्ट में कहा गया कि ऑपरेशन करीब दो घंटे चला। स्थानीय मीडिया में आई तस्वीरों में टर्मिनल की इमारत के बाहर सुरक्षाकर्मी दिखाई दिए।
- पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, बलों ने रास्तों से बैरिकेड हटाए और धरना स्थल खाली करा लिया।
गोलीबारी और हिंसा कैसे भड़की ?
पुलिस ने दावा किया कि बस टर्मिनल के पास सार्वजनिक रास्ते खोलने के दौरान भीड़ में शामिल हथियारबंद लोगों ने पुलिस पर गोली चलाई। इसके बाद सुरक्षा बलों की ओर से जवाबी फायरिंग हुई।
पुलिस की मानें तो कुछ सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं। हालांकि इससे पहले एक प्रशासनिक अधिकारी के हवाले से खबर आई थी कि किसी सुरक्षाकर्मी को चोट नहीं लगी। पुलिस ने घायलों की संख्या भी नहीं बताई है।
वहीं JAAC के कोर सदस्य आबिद शाहीन का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने धरने पर कार्रवाई शुरू करते ही कार्यकर्ताओं पर सीधे गोलियाँ चलाईं।
कुल मौतें कितनी ?
इस पर अलग-अलग दावे हैं। स्थानीय अखबार द आज़ादी टाइम्स ने तीन लोगों की मौत की पुष्टि करने की बात कही है। उसने लिखा कि उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह स्पष्ट नहीं है।
भारतीय मीडिया में नवभारत टाइम्स ने भी तीन मौतों का दावा रिपोर्ट किया, जबकि एबीपी न्यूज़ और उर्दू अखबार डेली संगर की रिपोर्टों में पाँच मौतों की बात है। जबकि सोशल मीडिया पर सात मौतों का दावा तैर रहा है।
जून से चली आ रही हिंसा के साथ कुल मौतों की संख्या पर भी अलग-अलग दावे हैं। एबीपी ने 151 मौतों का दावा रिपोर्ट किया है। सोशल मीडिया पर यह संख्या 153 बताई जा रही है।
ड्रोन हमलों की बातों का आधार क्या है ?
एबीपी न्यूज़ के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने ड्रोन से बम गिराए जाने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट में वसीम शकील नाम के एक स्थानीय निवासी के मकान को नुकसान पहुँचने की बात है।
बस टर्मिनल के पास एक घर में आग लगने का वीडियो भी सामने आया। JAAC के कोर सदस्य सरदार उमर नज़ीर ने धरना स्थलों पर ड्रोन हमलों का आरोप लगाया। सोशल मीडिया पोस्टों में दावा है कि उन्होंने मौके से मिले कथित बम के टुकड़े भी दिखाए।
घर में आग कैसे लगी और कथित टुकड़े किस हथियार के हैं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
RPG-7 के इस्तेमाल की बात कैसे आई सामने?
स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से दागे गए गोलों के धातु के कुछ टुकड़े दिखाए हैं। दावा है कि घटनास्थल से मिले धातु के हिस्से RPG-7 से दागे गए गोले के टेल फिन हैं। ये गोले के पिछले हिस्से में लगे पंख होते हैं, जो उड़ान के दौरान उसे स्थिर रखने में मदद करते हैं।
सोशल मीडिया पर इस आशय के अनेक पोस्ट वायरल हो रहे हैं। हालांकि तस्वीरों में दिख रहे हिस्सों की स्वतंत्र तकनीकी पहचान और उनकी बरामदगी की जगह व समय की पुष्टि बाकी है।
उमर फारूक चौक पर डटे प्रदर्शनकारी
बस टर्मिनल के अलावा उमर फारूक चौक भी विरोध का केंद्र रहा। एबीपी न्यूज़ ने वहाँ रुक-रुककर गोलीबारी और स्थानीय मस्जिदों से लोगों को चौक पर पहुँचने की अपील की रिपोर्ट दी।
चौक पर मौजूद महिलाओं ने प्रदर्शन जारी रखने की बात कही। सेना और दूसरे सुरक्षा बलों के खिलाफ नारेबाजी के वीडियो भी साझा किए गए, जिनकी रिकॉर्डिंग का समय और स्थान स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, मोबाइल और इंटरनेट सेवाएँ फिर बाधित होने से मौके की जानकारी जुटाना मुश्किल हुआ।
किन मुद्दों को लेकर कब से चल रहा धरना ?
JAAC के आंदोलन में बिजली बिलों में राहत, रोजगार और नागरिक अधिकारों से जुड़ी 38 माँगों पर 2025 में हुए समझौते को लागू कराने की माँग आंदोलन के केंद्र में थी। पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए स्थानीय विधानसभा में आरक्षित 12 सीटें भी विवाद का मुद्दा थीं।
- मई के आखिर में बातचीत विफल हुई और 5 जून को स्थानीय सरकार ने आतंकवाद-रोधी कानून के तहत JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद व्यापक आंदोलन शुरू हो गया।
- स्थानीय रिपोर्टों में धरने की शुरुआत की तारीख 6 जून और 9 जून, दोनों बताई गई हैं। फिर अनेक घातक झड़पें हुईँ।
क्या इस पर कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया हुई थी ?
व्यापक आंदोलन पर संयुक्त राष्ट्र पहले ही प्रतिक्रिया दे चुका है। जुलाई में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों की मौतों की निष्पक्ष जाँच माँगी थी।
- सितंबर में छह UN विशेषज्ञों ने पाकिस्तान से JAAC पर प्रतिबंध, अत्यधिक बल प्रयोग, मौतों, गिरफ्तारियों और संचार पाबंदियों पर जवाब माँगा।
- फिलहाल 5 नवंबर की घटना पर किसी प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।








