मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में मरम्मत के दौरान INS ब्रह्मपुत्र के पलटने के मामले में दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई शुरू हो गई है। इस मुकदमे के केंद्र में वॉरशिप की सुरक्षा और हादसे के वक्त ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की जवाबदेही है। नवंबर में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, सैन्य अदालत ने 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई में सुनवाई शुरू की।
हादसे में एक नौसैनिक (सीमैन) की जान चली गई थी और युद्धपोत को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद नौसेना ने जांच का आदेश दिया था। अब इस मामले में कोर्ट मार्शल का सामना कर रहे नौसेना के दो अधिकारियों में एक युद्धपोत के कमांडिंग ऑफिसर हैं और दूसरे हादसे के दिन के ड्यूटी ऑफिसर (ऑफिसर ऑफ द डे- लेफ्टिनेंट कमांडर रैंक) शामिल हैं।
दोनों पर अपने कर्तव्य के निर्वहन में लापरवाही का आरोप है। कैप्टन रैंक के कमांडिंग ऑफिसर पर युद्धपोत को खतरे में डालने का अतिरिक्त आरोप भी है। नौसेना की शब्दावली में इसे hazarding a naval vessel कहा जाता है। आरोपों पर फैसला सैन्य अदालत करेगी।
क्या था INS ब्रह्मपुत्र हादसा?
21 जुलाई 2024 की शाम मुंबई नेवल डॉकयार्ड में INS ब्रह्मपुत्र पर आग लग गई थी। उस वक्त 3,850 टन का यह स्वदेशी गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट रिफिट यानी तयशुदा मरम्मत और रखरखाव से गुजर रहा था।। हादसे में लीडिंग सीमैन सितेंद्र सिंह की जान चली गई थी।
जहाज के ड्यूटी स्टाफ ने नियमित रखरखाव के दौरान आग देखी। जहाज की अग्निशमन टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। डॉकयार्ड के दमकलकर्मी और पोर्ट में मौजूद दूसरे नौसैनिक जहाजों की टीमें भी मदद के लिए पहुंचीं।
- 22 जुलाई की सुबह तक आग पर काबू पा लिया गया। आग लगने की वजह नौसेना के सार्वजनिक बयान में नहीं बताई गई।
- आग बुझने के बाद जहाज पर दोबारा आग भड़कने के जोखिम की जांच की गई। उसी दिन दोपहर में फ्रिगेट बाईं ओर यानी पोर्ट साइड की तरफ काफी झुक गया।
- तमाम कोशिशों के बावजूद उसे सीधा नहीं किया जा सका। झुकाव बढ़ता गया और युद्धपोत डॉकयार्ड में अपनी बर्थ के पास एक करवट टिक गया।
आग बुझाने के बाद भी युद्धपोत क्यों पलटा था ?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आग बुझाने के लिए जहाज के भीतर बड़ी मात्रा में पानी डाला गया था। जहाज के किसी हिस्से में जमा पानी झुकाव की दिशा में बहकर उसका संतुलन और बिगाड़ सकता है। मसलन, जहाज थोड़ा झुके और किसी खुले हिस्से में जमा पानी उसी तरफ बहने लगे, तो उस ओर वजन बढ़ जाता है। इससे झुकाव और बढ़ सकता है और जहाज के लिए वापस सीधा होना मुश्किल हो जाता है।
इस मामले में नौसेना के सार्वजनिक बयान से आग बुझने और जहाज के झुकने का क्रम साफ है। आग किस वजह से लगी और जहाज का संतुलन बिगड़ने में दमकल के पानी की कितनी भूमिका थी, इस पर जांच के पूरे निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
नौसैनिक जहाज पर सवार और जवान कैसे बचे थे ?
रिपोर्टों के मुताबिक, ज्यादातर नौसैनिक जहाज से किनारे तक बने रास्ते से बाहर निकले। कुछ ने पानी में छलांग लगाई और तैरकर सुरक्षित जगह पहुंचे। इस दौरान लीडिंग सीमैन सितेंद्र सिंह लापता हो गए।
तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने 23 जुलाई को मुंबई पहुंचकर हादसे और तलाशी अभियान की समीक्षा की। गहन तलाशी के बाद नौसेना के गोताखोरों ने 24 जुलाई को सिंह का शव बरामद किया था।
कोर्ट मार्शल में क्या तय होगा और कितनी सजा हो सकती है?
हादसे के बाद की जांच का काम घटनाक्रम और कारणों का पता लगाना था। अब सैन्य अदालत (कोर्ट मार्शल) सबूतों के आधार पर तय करेगी कि दोनों अधिकारियों पर लगाए गए आरोप सबूतों से साबित होते हैं या नहीं।
- नौसेना अधिनियम, 1957 की धारा 55(2) में लापरवाही या चूक से नौसैनिक जहाज को खतरे में डालने पर अधिकतम दो साल की कैद या अधिनियम में निर्धारित दूसरी सजा का प्रावधान है।
- अधिनियम में औपचारिक फटकार, वरिष्ठता में कटौती और नौसेना सेवा से बर्खास्तगी जैसे दंड भी सूचीबद्ध हैं।
- वरिष्ठता में कटौती होने पर अधिकारी को उस अवधि की सेवा का लाभ खोना पड़ सकता है, जहां पदोन्नति, वेतन या पेंशन की गणना उस सेवा अवधि पर निर्भर करती है।
फिलहाल मामले का पूरा आरोपपत्र सार्वजनिक नहीं है। किसी अधिकारी को क्या सजा होगी, यह उस पर लगे आरोपों पर अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा
INS ब्रह्मपुत्र अभी किस हालत में है ?
हादसे के बाद युद्धपोत को दोबारा सीधा करने में तीन महीने से ज्यादा लगे। पश्चिमी नौसेना कमान के तत्कालीन प्रमुख वाइस एडमिरल संजय जे. सिंह के मुताबिक, जहाज को 2 नवंबर 2024 को सीधा किया गया। इसके बाद नुकसान का आकलन और मरम्मत का काम आगे बढ़ा।
- INS ब्रह्मपुत्र 3,850 टन का स्वदेशी गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है।
- कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने इसे बनाया और अप्रैल 2000 में यह भारतीय नौसेना में शामिल हुआ।
- INS ब्रह्मपुत्र करीब 125 मीटर लंबा और अपने सबसे चौड़े हिस्से में 16 मीटर चौड़ा है।
- इस पर कुल करीब 370 कर्मियों की तैनाती रहती है, जिनमें 40 अधिकारी शामिल हैं।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, मरम्मत के बाद अब इसके परीक्षण चल रहे हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि यह 2027 में समुद्र में संचालन के योग्य हो सकता है। सक्रिय सेवा में वापसी की तारीख अभी तय होने की सार्वजनिक जानकारी नहीं है।
इस डॉकयार्ड में पहले भी हुआ था ऐसा कोई हादसा ?
दिसंबर 2016 में INS बेतवा फ्रिगेट इसी मुंबई नेवल डॉकयार्ड में मरम्मत के दौरान सपोर्ट ब्लॉक्स से खिसककर पलट गया था। उस हादसे में दो नौसैनिकों की मौत हुई थी।
इस INS बेतवा हादसे के बाद तीन अधिकारियों का कोर्ट मार्शल हुआ था। उनकी वरिष्ठता में चार से छह महीने की कटौती की गई थी।
क्या है कोर्ट मार्शल ?
कोर्ट मार्शल यानी सैन्य अदालत में मुकदमा। इसमें सैन्यकर्मी पर लगे आरोपों की सुनवाई होती है। अदालत सबूतों और गवाहों के आधार पर तय करती है कि आरोप साबित हुए या नहीं। दोष सिद्ध होने पर सैन्य कानून के तहत सजा तय की जाती है।
कोर्ट मार्शल शुरू होने का मतलब है कि संबंधित अधिकारियों पर लगे आरोपों की सुनवाई शुरू हो गई है।








