हिंद महासागर स्थित दवीपीय देश मालदीव में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। पूर्व विदेश मंत्री और विपक्ष के प्रमुख नेता अब्दुल्ला शाहिद को गिरफ्तार कर लिया गया है। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी ‘मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी’ (MDP) के नेता और संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद को माले स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक, यह गिरफ्तारी 18 साल से कम उम्र के एक बच्चे के साथ यौन उत्पीड़न/शोषण के गंभीर आरोपों के मामले में की गई है।हालांकि, कथित यौन अपराध कब और कहां हुआ, शिकायत कब दर्ज कराई गई और जांच में किस तरह के सबूत मिले—इनका विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
शाहिद ने आरोपों को खारिज करते हुए अपने खिलाफ फैलाई जा रही बातों को राजनीतिक मकसद से छवि खराब करने की कोशिश बताया है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब शाहिद, राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकियों और डिफेंस समझौतों पर सवाल उठा रहे थे।
भारत के करीबी माने जाने वाले शाहिद 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) का टिकट हासिल करने की मुहिम भी चला रहे थे और राष्ट्रपति मुइज्जू पर लगातार हमलावर थे।
कब और कैसे हुई अब्दुल्ला शाहिद की गिरफ्तारी?
मालदीव पुलिस के अनुसार, शाहिद को 2 नवंबर 2026 की रात लगभग 10 बजे कोर्ट के वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया। पुलिस उन्हें माले में हुलहुमाले स्थित रेनबो ओशन फ्रंट आवास से ले गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें पहले हुलहुमाले पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया। इसके बाद उन्हें धूनीधू स्थित पुलिस कस्टडी सेंटर भेज दिया गया। पुलिस ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है।
गिरफ्तारी से पहले अब्दुल्ला शाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपने खिलाफ फैलाए जा रहे आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने लिखा-

“मुझे बदनाम करने के लिए राजनीतिक मंशा से फैलाई जा रही कहानियां पूरी तरह झूठी हैं। मैं अनुरोध करता हूं कि ऐसी कहानियां न फैलाई जाएं।”
Abdulla Shahid , Former Maldivian foreign minister and United Nations General Assembly president
गिरफ्तारी पर क्यों उठ रहे सवाल ?
इस गिरफ्तारी को बच्चे के यौन शोषण मामले से अधिक राजनीतिक प्रतिशोध के तौर पर देखा जा रहा है। अब्दुल्ला शाहिद राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकियों पर सीधे सवाल उठा रहे थे।
26 अक्टूबर को सामने आए इंटरव्यू में उन्होंने पाकिस्तान के साथ हुए 20 समझौतों, खासकर डिफेंस और समुद्री सुरक्षा से जुड़े करारों पर सवाल उठाए थे। यह इंटरव्यू उन्होंने भारत दौरे में अंग्रेजी अखबार The Pioneer को दिया था।
उनका कहना था कि सरकार इन्हें सार्वजनिक नहीं करना चाहती, तो संसदीय समितियों और राजनीतिक दलों के सामने जानकारी रख सकती है। उन्होंने यह आशंका भी जताई थी कि मुइज्जू 2028 के चुनाव से पहले फिर भारत विरोधी अभियान शुरू कर सकते हैं।
इसके करीब एक सप्ताह बाद, 2 नवंबर की रात शाहिद को गिरफ्तार कर लिया गया। मुइज्जू की विदेश नीति पर सवाल उठा रहे एक संभावित चुनावी प्रतिद्वंद्वी की इस समय गिरफ्तारी ही राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका की पृष्ठभूमि है।
पाकिस्तान से डिफेंस समझौतों पर क्या सवाल उठा रहे थे शाहिद?
राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू 20 से 22 अक्टूबर 2026 तक पाकिस्तान के दौरे पर थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच डिफेंस और समुद्री सुरक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में MoUs हुए। अब्दुल्ला शाहिद ने इन करारों की शर्तों और सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे।
- समझौतों में क्या है? शाहिद ने मांग की कि सरकार खासकर डिफेंस और समुद्री सुरक्षा समझौतों का ब्योरा संबंधित संसदीय समितियों के सामने रखे।
- सार्वजनिक नहीं तो संसद को बताएं: उनका कहना था कि सरकार पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करना चाहती, तो स्थापित प्रक्रिया के तहत संसदीय समितियों और राजनीतिक दलों को जानकारी दे सकती है।
‘India Out’ पर क्या हमला किया था ?
शाहिद ने मुइज्जू की भारत नीति पर भी तीखी टिप्पणी की थी। 26 अक्टूबर को प्रकाशित StratNews Global के इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मुइज्जू भारत विरोधी ‘India Out’ अभियान के सहारे सत्ता में आए, लेकिन सरकार चलाने की वास्तविक जरूरतों ने उस नीति की सीमाएं सामने ला दीं।
उन्होंने तंज किया कि इमरजेंसी में मुइज्जू के फोन की स्पीड डायल पर भारत ही सबसे पहले रहता है। उनका तर्क था कि मालदीव की आर्थिक और सुरक्षा जरूरतों के बीच भारत से सहयोग की अहमियत बनी रहती है।
भारत के करीबी क्यों माने जाते हैं अब्दुल्ला शाहिद?
शाहिद भारत के साथ मजबूत संबंधों और विकास सहयोग के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने ‘India Out’ अभियान की आलोचना की थी। शाहिद ने विदेश मंत्री रहते भारत के साथ सहयोग बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
- ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति का समर्थन: 2018–2023 में विदेश मंत्री रहते उन्होंने सोलिह सरकार की इस नीति को आगे बढ़ाया। मालदीव के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान में भी शाहिद और जयशंकर की बातचीत के दौरान इस नीति की पुष्टि दर्ज है।
- भारत के साथ विकास समझौते किए: भारतीय मदद से अड्डू में पर्यटन क्षेत्र और होराफुशी में पानी का प्लांट विकसित करने के लिए शाहिद ने भारतीय उच्चायुक्त के साथ छह MoUs पर हस्ताक्षर किए थे।
- बड़े आर्थिक सहयोग में भूमिका: अगस्त 2020 में जयशंकर के साथ उनकी बातचीत के दौरान भारत ने 50 करोड़ डॉलर के ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का पैकेज घोषित किया। इसी दौर में कोविड संकट से निपटने के लिए 25 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता भी आगे बढ़ी।
- द्विपक्षीय सहयोग का नेतृत्व: दिसंबर 2019 में उन्होंने जयशंकर के साथ भारत–मालदीव संयुक्त आयोग की बैठक की सह-अध्यक्षता की, जो दोनों देशों के सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रमुख सरकारी मंच है।
अगस्त 2024 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के बाद उन्होंने भरोसा जताया था कि किसी आपात स्थिति में भारत मालदीव की मदद के लिए सबसे पहले आगे आएगा। उन्होंने भारत विरोधी बयानों और अभियान से मालदीव को हुए आर्थिक तथा कूटनीतिक नुकसान का मुद्दा भी उठाया था। इन्हीं सार्वजनिक रुखों के आधार पर उन्हें भारत का करीबी नेता कहा जाता है।
विदेश मंत्री से UNGA अध्यक्ष तक बढ़ा अंतरराष्ट्रीय कद
अब्दुल्ला शाहिद मालदीव की राजनीति और कूटनीति के अनुभवी चेहरों में शामिल हैं। वह मालदीव के सबसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त राजनेताओं में से भी एक हैं।
- वह 2007–2008 और 2018–2023 में मालदीव के विदेश मंत्री तथा 2009–2014 तक संसद के स्पीकर रहे।
- इसके अलावा, उन्होंने सितंबर 2021 से सितंबर 2022 तक संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
- इन पदों पर रहते हुए शाहिद ने घरेलू राजनीति के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई।








