देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गुरुग्राम और मुंबई में प्रतिष्ठित स्कूलों, महत्वपूर्ण संस्थानों, दिलजीत दोसांझ के शो को मिल रही बम से उड़ाने की धमकियों के मामले में एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा खुलासा हुआ है। उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (UP ATS) ने एक बड़ी डिजिटल स्ट्राइक करते हुए मामले में कानपुर के एक युवक को गिरफ्तार किया है।
आरोप है कि युवक फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर लाखों की तादाद में अवैध ईमेल अकाउंट तैयार कर उन्हें देश विरोधी ताकतों और विदेशी खरीदारों को बेच रहा था। इनमें से कुछ ऐसी ईमेल आईडी हैं, जिनसे देश के स्कूलों और प्रतिष्ठानों को धमकियां दी गईं।
सुरक्षा एजेंसियों को आरोपी के डिजिटल उपकरणों से लगभग पांच लाख ईमेल अकाउंट का डेटा मिला है। विदेशी संपर्कों और क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान के साक्ष्यों के आधार पर अब इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
यह कोई सामान्य साइबर अपराध नहीं है, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता को चुनौती देने वाला एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट है, जिसके तार पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों से जुड़े हुए हैं।
कौन है आरोपी और कब हुई गिरफ्तारी ?
पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों के लोगों के लिए फर्जी ईमेल आईडी बनाने और बेचने के आरोप में गिरफ्तार युवक की पहचान 24 साल के अंकित शंखवार के तौर पर हुई है। वह कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र के अनोइया गांव का निवासी है।
अंकित को 28 अक्टूबर, 2026 को गिरफ्तार किया गया। उसने बताया कि 2021 से फर्जी पहचान वाले ईमेल अकाउंट बनाकर बेच रहा था। ATS यह पता लगाने में जुटी है कि अकाउंट खरीदने वालों के पीछे कौन लोग थे और उनकी गतिविधियों का दायरा कितना बड़ा था।
उसके पास से एक मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किया गया। शुरुआती जांच के बाद लखनऊ स्थित ATS थाने में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
कैसे अंकित तक पहुंची एटीएस, क्या मिला सुराग ?
ATS ने बताया कि जांच तब शुरू हुई जब गौतम बुद्ध नगर, दिल्ली और गुरुग्राम के कई स्कूलों को एक खास ID: “simenbriones9265@gmail.com” से धमकी भरे ईमेल मिलने की सूचना मिली। धमकी भरे संदेशों में ‘खालिस्तान नेशनल आर्मी’ और ‘बब्बर खालसा’ के नाम इस्तेमाल किए गए थे।
ATS के मुताबिक, इस अकाउंट के तकनीकी विश्लेषण में उसे कानपुर से एक्सेस किए जाने का सुराग मिला। इसी आधार पर जांच आगे बढ़ी और एजेंसी अंकित शंखवार तक पहुंची।
आरोप है कि उसने फर्जी पहचान का इस्तेमाल करके वाई-फाई और प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए नकली ईमेल अकाउंट बनाए थे।
किन-किन प्रमुख धमकियों से जुड़े मिले अकाउंट?
ATS की जांच में अंकित द्वारा उपलब्ध कराए गए कुछ ईमेल अकाउंट का संबंध बम धमकियों से सामने आया है। इनके जरिए स्कूलों के अलावा एक सरकारी कार्यालय, संगीत कार्यक्रम और अभिनेता के आवास को निशाना बनाने की धमकियां दी गई थीं। एजेंसी ने संबंधित अकाउंट की जानकारी और विदेशी खरीदार से हुई बातचीत के डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात कही है। प्रमुख मामले इस प्रकार हैं:
- नोएडा के स्कूलों को धमकी: 12 अक्टूबर 2026 को स्कूलों और अन्य स्थानों को धमकियां भेजने में इस्तेमाल अकाउंट अंकित ने बांग्लादेशी नागरिक अलामीन इस्लाम को उपलब्ध कराया था।
- मुंबई मेयर कार्यालय को धमकी: 23 अक्टूबर को कार्यालय को बम धमाके की धमकी भेजने वाला दूसरा अकाउंट भी जांच में मिला। इस अकाउंट के लॉगिन विवरण भी बांग्लादेशी संपर्क को भेजे गए थे।
- दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रम में धमाके की धमकी: धमकी भरे ईमेल में पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के दिल्ली-NCR में प्रस्तावित शो के दौरान बम धमाका करने की बात कही गई थी।
- बॉलीवुड अभिनेता के घर को धमकी: एक चर्चित बॉलीवुड अभिनेता के आवास पर भी बम धमाका करने की धमकी दी गई थी। रिपोर्टों में अभिनेता का नाम नहीं बताया गया है।
क्या है पाकिस्तान-बांग्लादेश और मिडिल-ईस्ट कनेक्शन?
ATS के मुताबिक, अंकित शंखवार फेसबुक पर ऑनलाइन अकाउंट की खरीद-बिक्री करने वाले ग्रुपों के जरिए विदेशी खरीदारों के संपर्क में आया। उसके संबंध पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्की और मिस्र समेत कई देशों के व्यक्तियों और समूहों से होने की जानकारी मिली है।
मोबाइल की जांच में इन देशों के अलावा अमेरिका के नंबरों से व्हाट्सएप संपर्क और क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन के साक्ष्य भी मिलने की बात कही गई है।
बांग्लादेशी खरीदार से मिला कितना भुगतान, कौन और कहां से देता था धमकी ?
जांच में बांग्लादेशी नागरिक अलामीन इस्लाम (Alamin Islam) का नाम सामने आया है। ATS के अनुसार, अंकित की उससे पहचान फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए हुई थी। आरोप है कि अलामीन ने फर्जी ईमेल अकाउंट उपलब्ध कराने के बदले उसे 6,000 USDT का भुगतान किया। USDT अमेरिकी डॉलर के मूल्य से जुड़ा क्रिप्टो टोकन है।
एजेंसी का कहना है कि 12 अक्टूबर 2026 को नोएडा के स्कूलों और अन्य स्थानों को धमकियां भेजने में इस्तेमाल अकाउंट अंकित ने अलामीन को उपलब्ध कराया था।
अभी सामने आई जानकारी में उसकी मुख्य भूमिका अकाउंट बनाने और सप्लाई करने की बताई गई है। धमकियां किसने भेजीं और इसमें अंकित की कितनी जानकारी या भागीदारी थी—यह व्यापक जांच का हिस्सा है। वास्तविक धमकी भेजने वाले व्यक्ति, उसकी लोकेशन और अन्य खरीदारों की भूमिका की जांच जारी है।
कब शुरू किया ईमेल बिक्री कारोबार, कैसे सौंपता था अकाउंट और लेता था भुगतान?
ATS के मुताबिक, अंकित वर्ष 2021 से फर्जी पहचान वाले ईमेल अकाउंट बनाकर बेच रहा था। वह वाईफाई और प्रॉक्सी नेटवर्क का इस्तेमाल कर अकाउंट तैयार करता और फेसबुक पर ऑनलाइन अकाउंट की खरीद-बिक्री वाले ग्रुपों के जरिए ग्राहक तलाशता था।
- खरीदार को ईमेल आइडी, पासवर्ड, रिकवरी ईमेल और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन संबंधी विवरण एक्सेल शीट में दर्ज करके व्हाट्सएप पर भेजता था।
- इससे खरीदार को अकाउंट एक्सेस करने के लिए जरूरी जानकारी मिल जाती थी। यानी खरीदार को अकाउंट चलाने का पूरा एक्सेस मिलता था।
- बदले में वह बिनांस क्रिप्टो वॉलेट के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान लेता था।
- जांच एजेंसी को उसके उपकरणों में USDT लेनदेन और क्रिप्टो वॉलेट से जुड़े साक्ष्य मिलने की बात भी सामने आई है।








