बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच नियुक्तियों तथा तबादलों को लेकर मतभेदों की रिपोर्टों के बीच सेना प्रमुख की एक अघोषित समुद्री यात्रा सामने आई है। इस खबर ने जियोपॉलिटकल एक्सपर्ट और खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं।
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के अपने हाई-प्रोफाइल दौरों से लौटने के ठीक दो दिन बाद बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान एक बेहद सिक्रेट (गोपनीय) मिशन पर सेंट मार्टिन द्वीप (St Martin’s Island) पहुंच और फिर वहां से गहरे समुद्र (Deep Sea) की ओर निकल गए। उनके साथ देश के शीर्ष सैन्य परिचालन (Military Operations) और खुफिया कमान (Intelligence Chiefs) के प्रमुख भी मौजूद थे।
इस औचक और रहस्यमयी यात्रा ने बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार और सैन्य नेतृत्व के भीतर एक परोक्ष तनाव पैदा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बंगाल की खाड़ी के उस सुदूर कोने में, अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के इतने करीब, सैन्य नेतृत्व क्या योजना बना रहा है? और इस पूरी हलचल को नागरिक सरकार की नजरों से इतना गुप्त क्यों रखा गया?
म्यांमार के नजदीक संवेदनशील समुद्री क्षेत्र को चुनने का उद्देश्य भी सार्वजनिक जानकारी में स्पष्ट नहीं है
क्या था वकार-उज-जमान का वह पूरा ‘द सीक्रेट मिशन’ ?
नॉर्थईस्ट न्यूज के मुताबिक इस घटनाक्रम की शुरुआत 19 अक्टूबर 2026 को हुई। जब जनरल वकार-उज-जमान ढाका से कॉक्स बाजार पहुंचे। यहां आने के लिए किसी विशेष सैन्य विमान या वीवीआईपी चॉपर का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि वे बेहद सामान्य तरीके से ‘यूएस-बांग्ला’ (US-Bangla) की वाणिज्यिक उड़ान (फ्लाइट नंबर SB-157) से रवाना हुए। एक्सपर्ट का मानना है कि ऐसा जानबूझकर किया गया ताकि ढाका में नागरिक प्रशासन, विदेशी दूतावासों और ‘निगरानी’ को इसकी भनक न लगे।
- उनके साथ करीबी स्टाफ अधिकारियों का एक छोटा दल था।
- इनमें मिलिट्री इंटेलिजेंस निदेशक ब्रिगेडियर हसन मुहम्मद और मिलिट्री ऑपरेशंस निदेशक ब्रिगेडियर मोहम्मद मंजूर हुसैन शामिल थे।
- खुफिया और सैन्य परिचालन से जुड़े इन वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी इस यात्रा का अहम पहलू है।
कॉक्स बाजार में रात बिताने के बाद सेना प्रमुख और साथ गए अधिकारी अगली सुबह, यानी 20 अक्टूबर को स्पीडबोट से सेंट मार्टिन पहुंचे। वहां उतरने के बाद वे गहरे समुद्र में मछली पकड़ने (Deep-sea-fishing) के लिए निकल गए। बाद में सेना प्रमुख कॉक्स बाजार लौटे और उसी शाम ढाका रवाना हो गए।
इस अघोषित समुद्री यात्रा पर सरकार या रक्षा प्रतिष्ठान ने मीडिया ब्रीफिंग नहीं की। यात्रा के वास्तविक उद्देश्य पर पूरी तरह से पर्दा गिरा हुआ है।
ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका का दौरा कब किया था ?
इससे पहले सेना प्रमुख के ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जाने की जानकारी बांग्लादेश के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस यानी ISPR ने सार्वजनिक की थी। जिसके मुताबिक जनरल वकार तीन अक्टूबर को नौ दिन की सरकारी यात्रा पर रवाना हुए थे। कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में सैन्य सम्मेलन और रक्षा प्रदर्शनी में भागीदारी तथा मेलबर्न की डीकिन यूनिवर्सिटी का दौरा शामिल था। इसके बाद उन्हें वाशिंगटन में Association of the US Army—AUSA की वार्षिक बैठक और प्रदर्शनी में शामिल होना था।
हालांकि वास्तविक यात्रा नौ दिनों से अधिक लंबी रही और वह 17 अक्टूबर को बांग्लादेश लौटे। इसके बाद 19 अक्टूबर से आगे की कहानी सवालों के घेरे में है।
मिलिट्री इंटेलिजेंस और मिलिट्री ऑपरेशंस अफसर साथ क्यों— उद्देश्य सिर्फ मछली पकड़ना या कुछ और?
इस यात्रा पर सवाल उसकी टाइमिंग, साथ गए वरिष्ठ अधिकारियों और उद्देश्य पर चुप्पी को लेकर उठ रहे हैं। अमेरिका–ऑस्ट्रेलिया दौरे से लौटने के तुरंत बाद सेना प्रमुख का मिलिट्री इंटेलिजेंस और मिलिट्री ऑपरेशंस के निदेशकों के साथ समुद्र में जाना सवाल उठाता है।
क्या कार्यक्रम सिर्फ मछली पकड़ने का था या सैन्य मामलों पर चर्चा भी हुई? यात्रा पहले घोषित क्यों नहीं की गई और बाद में ब्रीफिंग क्यों नहीं हुई? इन सवालों को तारिक रहमान सरकार से तनाव की रिपोर्ट से भी संदर्भ मिलता है।
नॉर्थईस्ट न्यूज की 13 अक्टूबर की रिपोर्ट में सैन्य नियुक्तियों और तबादलों को लेकर सेना प्रमुख तथा तारिक रहमान सरकार के रक्षा सलाहकार के बीच मतभेदों का दावा किया गया था। इसी संदर्भ में प्रश्न उठता है कि क्या नागरिक नेतृत्व को समुद्री कार्यक्रम की जानकारी थी और क्या इसका उस तनाव से कोई संबंध था?
सेंट मार्टिन इतना संवेदनशील क्यों है?
सेंट मार्टिन आइलैंड बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्व में, बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले के अंतर्गत स्थित प्रवाल द्वीप ( Coral Island) है। यह टेकनाफ प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर से लगभग 9 किलोमीटर दक्षिण और म्यांमार के उत्तर-पश्चिमी तट से करीब 8 किलोमीटर पश्चिम में है। नाफ नदी के मुहाने के नजदीक होने के कारण यहां की सुरक्षा पर बांग्लादेश–म्यांमार सीमा के घटनाक्रम का सीधा असर पड़ता है।
- भारत से यह द्वीप सीधे सटा हुआ नहीं है। लेकिन भारत के लिए इसकी अहमियत बंगाल की खाड़ी की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन से जुड़ी है।
- बांग्लादेश के लिए यह उसकी दक्षिणी समुद्री सीमा की निगरानी, मछुआरों की सुरक्षा और पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र है।
- आसपास नौसैनिक जहाजों की तैनाती और लगातार रडार निगरानी होती है।
म्यांमार की लड़ाई का इस द्वीप पर पहले कब पड़ा है असर ?
सेंट मार्टिन की समुद्र में स्थिति इस यात्रा को संवेदनशील बनाती है। म्यांमार के नजदीक इस द्वीप के आसपास बांग्लादेश की नौसेना लगातार निगरानी रखती है। ऐसे में यह सवाल भी बनता है कि क्या यात्रा का संबंध सीमा या समुद्री सुरक्षा से था?
सेंट मार्टिन के आसपास सुरक्षा की चिंता का वास्तविक उदाहरण जून 2024 में सामने आया था। उस समय म्यांमार की ओर से गोलीबारी के कारण बांग्लादेश के टेकनाफ और सेंट मार्टिन द्वीप के बीच नावों का आना-जाना बाधित हो गया था।
यह पुराना घटनाक्रम बताता है कि आसपास का संघर्ष बांग्लादेश के समुद्री संपर्क को सीधे प्रभावित कर सकता है। इसीलिए द्वीप के आसपास निगरानी और सुरक्षित आवागमन का मुद्दा महत्वपूर्ण बना रहता है।
द्वीप को लेकर अमेरिका से जुड़ा पुराना विवाद क्या है ?
इस आइलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण को लेकर पुराने राजनीतिक आरोप रहे हैं, जिनका अमेरिका तब खंडन कर चुका है। हालांकि अमेरिका दौरे के बाद वकार का यहां पहुंचना इसी पुराने विवाद को संदर्भ देता है। इसलिए इस स्थान को चुनने और दोनों वरिष्ठ निदेशकों के साथ जाने का उद्देश्य महत्वपूर्ण सवाल है।
- जून 2023 में अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा था कि अमेरिका ने द्वीप पर नियंत्रण लेने के संबंध में कोई बातचीत नहीं की है और वह बांग्लादेश की संप्रभुता का सम्मान करता है।
- इसके बाद नवंबर 2024 में द्वीप अमेरिका को सौंपे जाने का दावा प्रसारित हुआ। AFP की रिपोर्ट में बांग्लादेश सरकार और ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास, दोनों ने इसे खारिज किया था।








