रिश्तों में तनाव के बीच फिर भारत की चौखट पर आया बांग्लादेश, क्यों हुआ मजबूर ?

By Defence Detective

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Bangladesh turns to India for wheat imports after four years amid geopolitical tensions

भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में पिछले कुछ सालों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। शेख हसीना सरकार के पतन, उनके भारत में रहने, मोहम्मद यूनुस के दौर की बयानबाजी और उसके बाद सत्ता परिवर्तन तक दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। लेकिन अब भोजन की जरूरत ने एक अलग पहलू सामने रखा है।

बांग्लादेश ने 2022 के बाद पहली बार बड़े पैमाने पर भारतीय गेहूं खरीदना शुरू किया है।  भारत द्वारा अगस्त के आखिर में एक्सपोर्ट पाबंदियों में ढील दिए जाने के बाद बांग्लादेशी इंपोर्टरों ने 2 लाख टन से ज्यादा भारतीय गेहूं बुक कर लिया है। ज्यादातर गेहूं रेल के रास्ते बांग्लादेश पहुंचेगा।

यानी राजनीतिक दूरी के बावजूद पेट भरने की जरूरत ने ढाका को फिर उसी पड़ोसी के बाजार में पहुंचा दिया है, जिस पर 2022 तक उसके गेहूं इंपोर्ट का करीब 70 प्रतिशत निर्भर था।

यह सिर्फ अनाज की खरीद नहीं है। यह ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश अपनी विदेश नीति में भारत के साथ रिश्तों को फिर से व्यवस्थित करने की बात कर रहा है।

2022 के बाद भारत से गेहूं क्यों बंद हुआ था?

भारत बांग्लादेश की गेहूं की ज़्यादातर मांग पूरी करता था, लेकिन 2022 में हालात बदल गए। उस साल रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया, जिससे दुनिया के दो सबसे बड़े गेहूं एक्सपोर्टर्स से सप्लाई बाधित हो गई। वहीं भारत में  2021-22 फसल वर्ष में गेहूं की पैदावार 2.5% घटकर 106.84 मिलियन टन रह गई, जो पिछले साल 109.59 मिलियन टन थी। ऐसा उस साल पड़ी भीषण गर्मी (हीटवेव) के कारण हुआ था।

उम्मीद से कम पैदावार और बढ़ती ग्लोबल डिमांड के कारण घरेलू कीमतें 15% से 20% तक बढ़ गईं, जिसके बाद नई दिल्ली ने 2022 से गेहूं के एक्सपोर्ट पर पाबंदियां लगा दीं। इसके बाद बांग्लादेश को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए दूसरे देशों की तरफ देखना पड़ा।

2022 के बाद ढाका ने अर्जेंटीना, कनाडा, रूस और यूक्रेन जैसे देशों से गेहूं लेना शुरू किया। इनमें Black Sea क्षेत्र की हिस्सेदारी भी काफी बढ़ी। Bloomberg के अनुसार, बांग्लादेश के गेहूं इंपोर्ट का करीब 40 प्रतिशत Black Sea क्षेत्र से आता रहा। लेकिन जब युद्ध से Black Sea में लगातार संकट है, तो बांग्लादेश के लिए वहां से गेहूं इंपोर्ट की रणनीति महंगी पड़ रही है।

भारत के पास फिर कैसे आया बांग्लादेश ?

बांग्लादेश दो मोर्चों पर गेहूं को लेकर समस्याओं से जूझ रहा है। पहला विदेशी सप्लाई और दूसरी घरेलू बाजार में अनाज की कीमतें।

रूस-यूक्रेन युद्ध ने ग्लोबल अनाज ट्रेड की तस्वीर बदल दी है। Black Sea के बंदरगाहों और अनाज टर्मिनलों पर हमलों से वहां से होने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ता है, जो इस क्षेत्र से गेहूं खरीदते हैं। बांग्लादेश भी इसमें शामिल है।

चावल, बांग्लादेश का मुख्य भोजन है, इसकी कीमतें “अब तक के सबसे ऊंचे स्तर” पर पहुंच गई हैं, जिससे ज़्यादा बांग्लादेशी लोग गेहूं की ओर रुख कर रहे हैं और गेहूं की मांग बढ़ गई है। यानी चावल की कीमतों में इजाफे के कारण गेहूं और आटे की मांग पर भी असर पड़ रहा है।  ढाका में गेहूं के आटे की कीमत एक महीने में करीब 17 प्रतिशत बढ़ी।

इसलिए ढाका के सामने दोहरी चुनौती है:-

  • लोगों के लिए अनाज कीमतें सस्ती रखना।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे हो चुके गेहूं की खरीद करना।

अब भारत इस समीकरण में इसलिए महत्वपूर्ण बनता है क्योंकि वह दोनों मोर्चों पर एक साथ राहत दे सकता है।

बांग्लादेश को भारत से राहत कैसे ?

फिलहाल समस्या यह नहीं है कि दुनिया में गेहूं खत्म हो गया है। समस्या यह है कि सस्ता और आसानी से पहुंचने वाला गेहूं मिलना मुश्किल हो रहा है। यहीं भारत की भौगोलिक स्थिति बांग्लादेश के लिए राहतकारी हो जाती है। पहली कि कम दूरी और दूसरी कम कीमत।

बांग्लादेश के लिए भारत से गेहूं मंगाने का मतलब है कम दूरी, कम ट्रांजिट समय और कम माल ढुलाई लागत। इस समय भारतीय गेहूं की बांग्लादेश में पहुंच कीमत लगभग 305 से 326 डॉलर प्रति टन बताई गई है। अधिकांश खेप रेल के रास्ते जाएगी। इसे इस तरह समझिए:-

बिंदुभारतदूर के सप्लायर
दूरीबहुत कमकाफी ज्यादा
परिवहनरेल से संभवसमुद्री मार्ग पर ज्यादा निर्भरता
पहुंच कीमतकरीब $305–326/टनऑस्ट्रेलियाई गेहूं करीब $480/टन
सप्लाई जोखिमअपेक्षाकृत कमBlack Sea/समुद्री व्यवधान का असर
रणनीतिक फायदापड़ोसी बाजारDistant Market

यही वह जगह है जहां भारत की भौगोलिक स्थिति उसकी ताकत में बदल जाती है।

बांग्लादेश को कितने गेहूं की जरूरत  ?

चावल के बाद गेहूं बांग्लादेश में दूसरा सबसे ज़्यादा खाया जाने वाला अनाज है। यह देश हर साल लगभग दस लाख टन गेहूं का उत्पादन करता है, लेकिन घरेलू मांग को पूरा करने के लिए उसे अतिरिक्त सत्तर लाख टन गेहूं आयात करना पड़ता है। ऐतिहासिक रूप से भारत बांग्लादेश को गेहूं की सप्लाई करने वाला एक प्रमुख देश रहा है।

2020-21 में भारत ने बांग्लादेश को 299.4 मिलियन डॉलर मूल्य का 11,57,399.35 टन गेहूं एक्सपोर्ट  किया था। लेकिन 2022 में भारत द्वारा गेहूं के एक्सपोर्ट पर पाबंदियां लगाने के बाद यह ट्रेड बाधित हो गया था।

शेख हसीना के बाद भारत-बांग्लादेश रिश्तों में कितना उतार-चढ़ाव?

5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में कई स्तरों पर तनाव आया। हसीना का भारत में रहना, उनके प्रत्यर्पण की ढाका की मांग, अल्पसंख्यक सुरक्षा, सीमा और व्यापार जैसे मुद्दों के बीच 2026 में तारिक रहमान सरकार ने रिश्ते सुधारने की इच्छा तो जताई, लेकिन नई दिल्ली को लेकर उसका रुख अब भी सावधानी भरा है। इसका एक बड़ा संकेत यह है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद रहमान अभी तक भारत नहीं आए हैं, जबकि जून में वे चीन की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा कर चुके हैं।

समयप्रमुख घटनाक्रमभारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर
5 अगस्त 2024शेख हसीना सत्ता छोड़कर भारत आईंहसीना का भारत में रहना नई सरकार और नई दिल्ली के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दा बना।
अगस्त 2024 सेढाका ने हसीना के प्रत्यर्पण की मांग शुरू कीभारत ने अनुरोध को कानूनी प्रक्रिया के तहत विचाराधीन बताया। मुद्दा लगातार द्विपक्षीय रिश्तों में बना रहा।
अगस्त–दिसंबर 2024बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाभारत ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जताई। ढाका ने भी सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही।
नवंबर 2024हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारीभारत में तीखी प्रतिक्रिया हुई और अल्पसंख्यक सुरक्षा का मुद्दा और संवेदनशील हुआ।
2 दिसंबर 2024अगरतला स्थित बांग्लादेशी मिशन में प्रदर्शनकारियों के घुसने की घटनाढाका ने कड़ा विरोध जताया। भारत ने भी घटना पर कार्रवाई की।
2025व्यापार, सीमा और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर मतभेद जारीरिश्ते सामान्य करने की कोशिशों के बावजूद कई मुद्दे अटके रहे।
फरवरी 2026तारिक रहमान सरकार सत्ता में आईनई सरकार ने भारत के साथ संबंध सुधारने की इच्छा जताई, लेकिन हसीना प्रत्यर्पण का मुद्दा बना रहा।
22–26 जून 2026तारिक रहमान की चीन की आधिकारिक यात्रारहमान ने शी जिनपिंग और ली च्यांग से मुलाकात की। चीन-बांग्लादेश संबंधों को व्यापक रणनीतिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। रक्षा सहयोग भी बातचीत का हिस्सा रहा।
10 अगस्त 2026रहमान ने भारत के राजदूत से कहा कि रिश्ते सुधारने के लिए “conducive environment” जरूरी हैयह दिखाता है कि ढाका भारत के साथ संबंध सुधारना चाहता है, लेकिन इसके लिए कुछ लंबित मुद्दों पर प्रगति चाहता है।
अगस्त 2026रहमान की संभावित दिल्ली यात्रा पर चर्चा, लेकिन यात्रा नहीं हुईReuters ने 21 अगस्त को बताया कि यात्रा पर तब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ था और ढाका हसीना के प्रत्यर्पण पर भारत के जवाब का इंतजार कर रहा था।
11–14 सितंबर 2026BRICS शिखर सम्मेलन, नई दिल्ली में रहमान नहीं आएढाका ने कहा कि निमंत्रण उन्हें BIMSTEC अध्यक्ष के रूप में था, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में नहीं; विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि अभी उनकी यात्रा का सवाल नहीं है और पहली यात्रा सकारात्मक माहौल में द्विपक्षीय होनी चाहिए।
सितंबर 2026 तकतारिक रहमान भारत नहीं आएप्रधानमंत्री बनने के बाद अब तक उनकी दिल्ली यात्रा नहीं हुई है। इसके उलट वे चीन की यात्रा कर चुके हैं और सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए अमेरिका गए।
18 सितंबर 2026नवंबर में संभावित दिल्ली यात्रा को लेकर अधिकारियों के बीच संपर्क की खबरइसका मतलब यह नहीं कि यात्रा तय हो चुकी है; रिपोर्ट में केवल संभावित नवंबर यात्रा के लिए बातचीत जारी होने की बात कही गई।

भारत की चौखट पर आना कितने मायनेपूर्ण?

भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव के माहौल में भारतीय गेहूं की वापसी को केवल व्यापारिक घटना मानना अधूरा होगा। यह बताता है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन फूड सिक्योरिटी, एनर्जी, ट्रेड और ज्योग्राफिकल संपर्क जैसी जरूरतें बांग्लादेश को भारत से जोड़ती रहती हैं।

बांग्लादेश भारत से राजनीतिक दूरी बनाने की कोशिश कर सकता है, अपनी सप्लाई के दूसरे स्रोत तलाश सकता है और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस या अन्य देशों से व्यापार बढ़ा सकता है। लेकिन जब वैश्विक सप्लाई चेन पर संकट आता है, तब भारत की सीमा से सटा होना खुद एक रणनीतिक लाभ बन जाता है।

भारत का गेहूं किन बाजारों में पहुंच रहा है?

पड़ोसी देशों से लेकर खाड़ी तक

गेहूं एक्सपोर्ट पर पाबंदियां हटने के बाद अब भारतीय गेहूं एक बार फिर विदेशी बाजारों में अपनी जगह बना रहा है। बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों से लेकर UAE, नेपाल और अन्य बाजारों तक इसकी मांग सामने आ रही है। इससे साफ है कि भारत की गेहूं सप्लाई सिर्फ घरेलू जरूरत तक सीमित नहीं है।

बांग्लादेशकरीब 2 लाख टन की हालिया खरीद/डील
श्रीलंकाकरीब 60,000 टन की हालिया खरीद
UAE2026 में भारतीय गेहूं की खेप/खरीद
नेपालभारत का पारंपरिक और प्रमुख गेहूं बाजार
भूटानभारत के प्रमुख Export Destinations में
इराकभारतीय गेहूं का प्रमुख Export Destinations
सऊदी अरबभारतीय कृषि/अनाज व्यापार का बाजार; गेहूं के संदर्भ में अलग से वर्तमान शिपमेंट की पुष्टि जरूरी
मालदीवभारतीय गेहूं पहुंचता रहा है

United States Department of Agriculture का आंकलन लॉजिस्टिक फायदे के कारण southeast Asia को भारतीय गेहूं के संभावित बाजारों में बताता है।

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