युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब किसी बड़े सैन्य ठिकाने या सैनिकों को नुकसान पहुंचाने के लिए महंगी मिसाइल या लड़ाकू विमान ही जरूरी नहीं हैं। छोटे ड्रोन और Loitering Munitions बड़ी संख्या में एक साथ हमला करके किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के सामने नई चुनौती खड़ी कर सकते हैं।
बेंगलुरु स्थित रक्षा कंपनी Zulu Defence Systems इसी बदलती जरूरत को ध्यान में रखते हुए अपना CLAD (Canister Launcher Air Defence System ) विकसित कर रहा है। IDRW के मुताबिक कंपनी ने CLAD- काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) का एक वीडियो जारी किया है। वीडियो के मुताबिक CLAD एक फील्ड डेप्लॉयड लॉन्चर से पांच DRAP (Directed Reconnaissance and Attack Platform) Loitering Munitions लांच करने की क्षमता दिखाता है।
यानी यह दुश्मन ड्रोन झुंड के खिलाफ कई लोइटरिंग म्यूनिशन तैनात कर सकता है।
Zulu Defence ने CLAD को ‘फ्यूचर ऑफ डिस्ट्रीब्यूटेड एयर डिफेंस’ कहा है। जैसा कि यह सिस्टम हवाई खतरों के खिलाफ मोबाइल और डेप्लॉयएबल रिस्पांस देता है।
इसका नया वीडियो बताता है कि बैटलफील्ड में लांचर क्या कर सकता है।
CLAD क्या है और इसकी जरूरत क्यों ?
CLAD को Zulu Defence ने अपनी tactical air-defence और unmanned systems की बड़ी रणनीति के हिस्से के रूप में पेश किया है। कंपनी के अनुसार उसका लक्ष्य सिर्फ ड्रोन बनाना नहीं, बल्कि purpose-built air-defence solutions तैयार करना है। कंपनी इसे swarm-capable, multi-domain और mission-scalable सिस्टम बताती है।
CLAD की खासियत इसका multi-barrel launcher architecture है। इसमें कई unmanned/loitering systems को लॉन्च करने की व्यवस्था बनाई गई है। यानी CLAD एक लांचर है। यह launcher कंपनी के HOVERBEE और DRAP जैसे systems के साथ integrate करने के लिए बनाया गया है।
इसका मूल आइडिया है:–
- कई loitering munitions को एक launcher से लांच करना।
- जरूरत के अनुसार उन्हें एक साथ या क्रमवार लॉन्च करना।
- swarm-type missions में कई airborne platforms का इस्तेमाल करना।
- बड़े और भारी launch infrastructure पर निर्भरता कम करना।
- tactical battlefield में तेजी से strike assets उपलब्ध कराना।
यानी CLAD का जोर केवल एक drone लॉन्च करने पर नहीं, बल्कि एक साथ कई unmanned assets को battlefield में उतारने पर है।
DRAP का टारगेट क्या होगा ?
DRAP एक AI और onboard computer-vision बेस्ड loitering munition है, जो GPS बाधित होने की स्थिति में भी navigation और target engagement करने के लिए डिजाइन किया गया है और 1.5 किलोग्राम तक warhead ले जा सकता है। यह कामिकेज ड्रोन और MALE UAVs को काउंटर करने में महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। इसकी महत्वपूर्ण क्षमताएं इस प्रकार हैं–
| क्षमता | विवरण |
| पूरा नाम | Directed Reconnaissance and Attack Platform (DRAP) |
| भूमिका | Loitering munition; निगरानी और precision strike दोनों के लिए डिजाइन किया गया। |
| Edge Computer Vision | लक्ष्य और navigation से जुड़ी processing को onboard करने की क्षमता। |
| Autonomous Targeting | कंपनी/रिपोर्ट के अनुसार लक्ष्य पहचान और engagement में स्वायत्तता। |
| Automatic Target Recognition (ATR) | IDRW के अनुसार battlefield targets को पहचानने और classify करने की क्षमता। |
| GPS-independent Navigation | GPS signal के बिना/बाधित होने पर visual-odometry आधारित navigation की क्षमता बताई गई है। |
| Terminal Autonomous Guidance | अंतिम attack phase में onboard vision के आधार पर लक्ष्य की ओर guidance करने की क्षमता। |
| Warhead | Zulu Defence की आधिकारिक वेबसाइट 1.5 kg तक warhead बताती है। |
| Multiple Fuse Types | कंपनी के अनुसार अलग-अलग mission के लिए कई fuse configurations उपलब्ध हैं। |
| Swarm Capability | DRAP को swarm operations के लिए compatible बताया गया है। |
| Electronic-Warfare Resilience | GPS, radio और communication links के jam होने वाले battlefield को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। |
| Low Signature | Business Today ने low radar और thermal signature का उल्लेख किया है; IDRW भी compact/electric platform के कारण कम acoustic/thermal/radar signature का दावा रिपोर्ट करता है। |
| VTOL | Vertical Take-Off and Landing architecture, यानी runway के बिना तैनाती की क्षमता। |
| CLAD से integration | Business Today के अनुसार DRAP को Zulu Defence के CLAD multi-barrel canister launcher के साथ integrate किया जा सकता है। |
HOVERBEE क्या है ?
Zulu Defence का हल्का, palm-launched VTOL (Vertical Take-Off and Landing platform) micro-drone है, जिसे मुख्य रूप से reconnaissance/ISR के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और इसके airframe को loitering munition configuration में भी बदला जा सकता है। इसकी क्षमताओं को इन जानकारियों से समझा जा सकता है-
| क्षमता | विवरण |
| प्रकार | हल्का VTOL micro-drone |
| लॉन्च | Palm-launched, यानी हाथ से लॉन्च किया जा सकता है |
| मुख्य भूमिका | ISR — Intelligence, Surveillance & Reconnaissance और rapid situational awareness |
| Loitering Munition | कैमरा/सर्विलांस payload हटाकर इसे हथियारबंद loitering munition में बदला जा सकता है |
| Warhead | Strike configuration में 400 ग्राम explosive warhead का उल्लेख है |
| Acoustic Signature | कम acoustic signature के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे इसकी मौजूदगी का पता लगाना कठिन हो सकता है |
| Deployment | छोटे infantry squad और special-forces units के लिए तेजी से field deployment |
| Launch Infrastructure | अलग लॉन्च infrastructure की जरूरत के बिना हाथ से deployment की अवधारणा |
| दोहरी भूमिका | एक ही platform reconnaissance drone और loitering munition दोनों भूमिकाओं में इस्तेमाल हो सकता है |
| CLAD Integration | Zulu के multi-barrel launcher को HOVERBEE जैसे existing platforms के साथ integrate करने के लिए बनाया गया है |
एक launcher से कई ड्रोन क्यों अहम हैं?
इसका महत्व तब समझ आता है जब सामने एक नहीं, बल्कि कई हवाई लक्ष्य हों।
मान लीजिए किसी सैन्य ठिकाने पर एक साथ कई drones आते हैं। ऐसी स्थिति में defender को अलग-अलग targets को लगातार detect, track और engage करना पड़ता है। अगर हमलावर कम लागत वाले drones की बड़ी संख्या इस्तेमाल करे तो यह एक saturation problem बन सकती है।
CLAD जैसे सिस्टम का विचार इसी चुनौती से जुड़ा है।
एक launcher से कई loitering munitions को तेजी से हवा में भेजकर अलग-अलग targets के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे एक छोटे tactical unit को भी एक साथ कई airborne assets उपलब्ध कराने की क्षमता मिल सकती है।
DRAP से CLAD की क्षमता कैसे बढ़ती है?
यहां Zulu Defence का पूरा unmanned ecosystem महत्वपूर्ण हो जाता है।
एक तरफ DRAP जैसा loitering munition है, जो reconnaissance और precision strike दोनों भूमिकाओं के लिए बनाया गया है। दूसरी तरफ CLAD जैसा launcher है, जो कई ऐसे systems को तेजी से battlefield में भेजने की कोशिश करता है।
इसका मतलब यह हुआ कि launcher और munition को अलग-अलग उत्पाद मानने के बजाय एक integrated tactical system के रूप में देखा जा सकता है।
कंपनी की तरफ से CLAD को swarm-capable बताया गया है। इसका अर्थ यह है कि भविष्य में ऐसे कई unmanned platforms को coordinated mission में इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
भारत के लिए कितनी महत्वपूर्ण Zulu Defence की यह कामयाबी?
भारत के लिए इसका महत्व सिर्फ एक नए launcher तक सीमित नहीं है। डीआरडीओ जैसे सरकारी संस्थान जहां भारतीय सैन्य क्षमता को मजबूत कर रहे हैं, वहीं देश की निजी रक्षा कंपनियां भी अब इस दिशा में मजबूती से पैर जमा रही हैं। देश की निजी रक्षा कंपनियां अब ऐसे systems पर काम कर रही हैं जिनमें drones, loitering munitions, artificial intelligence और electronic-warfare resilience एक साथ दिखाई देते हैं। यह भारतीय सैन्य बलों की डिफेंस और अटैक क्षमताओं को विभिन्न तरह से विकल्प उपलब्ध कराता है।
Netherlands Special Forces को DRAP का ऑर्डर भी क्यों अहम है?
Zulu Defence के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय milestone मई 2026 में सामने आया, जब Netherlands Special Forces ने DRAP के लिए procurement order दिया। Business Today ने इसे भारतीय private defence sector के लिए एक महत्वपूर्ण export milestone बताया।
यह विकास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि कंपनी का unmanned combat technology portfolio केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है।








